Wednesday, 30 July 2025

तहीं पसर के नभ बन जाथस

*तहीं पसर के नभ बन जाथस
************************
तहीं पसर के नभ बन जाथस
तहीं सिकुड़ के कन।
मयाजग्य के अगनकुंड में,
अउ बन जथस हवन ।।

साध सकौं नइ सकों भगवन ,
रहिथौं करत भजन।
तहीं मोर सब नता गोता अउ,
हिरदे बसे सजन ।

एक तोर ले लगा आसरा,
तोरे धरौं चरन ।
सबो शब्द लठरत झुमरत हे,
तभो करौं बरनन ।

छाती तोरे मड़ाय धुकधुकी,
करत तोर सुमरन।
अँगरी धर अँगिया ले अब तैं,
बंद करा घुमरन।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट (आल्हा छंद)

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट (आल्हा छंद)



नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।

मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।। 

चुन्दी में छटके जलबुँदियन,

मोती चटके असन जनात।

पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।

नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय। 

मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।

गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात। 

चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।

पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल। 

बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,

लाली पिंउरी लटकन झूल।। 

मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात। 

काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।

लुगरा-पटुका लटकत फुँदना, 

रगरग ले मन चैन चुरात।

हवय तिहार मनावत आँखी, 

दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।

फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात। 

रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन, 

भुनन भुनन भौंरा मन गात।।

डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।

कन्हिया लटकत करधनिया में, 

जड़े जवाहर हीरा लाल।।

नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।

ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।

खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।

मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।। 

झनक झनक झन पैजन बाजत, 

खनन खनन चूरी खनकात। 

धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया, 

फरर फरर अँचरा फहरात।।

मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।

चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।। 

रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात। 

फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।। 

आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।

पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।। 

रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट। 

रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।। 

शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार। 

मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।। 


शोभामोहन 

राधा राधा मेट सबो भव बाधा।

राधा राधा मेट सबो भव बाधा।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।

रसिकबिहारी जब बलिहारी, 
रसिकबिहारी जब बलिहारी, 
कृपाशिरोमणि राधा।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

धारअजस्र दयाबरसैया,
धारअजस्र दयाबरसैया,
सोगही परमअगाधा।।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

तापसमुकुटमणि हरिसजनी, 
तापसमुकुटमणि हरिसजनी, 
मैं मूरख बड़जादा।
राध राधा मेट सबो भव बाधा।।

कविताकानन के गमकैया, 
कविताकानन के गमकैया, 
भावटोभ मन माँदा।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

मणिपोंसैया तन ब्याकुल जग, 
मणिपोंसैया तन ब्याकुल जग, 
काम-कोह पर फाँदा।।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

धरम-करम मग इच्छल बिच्छल, 
धरम-करम मग इच्छल बिच्छल, 
सरभर गजरा गादा।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

शोभामोहन गोड़गिरे लली, 
शोभामोहन गोड़गिरे लली, 
अंतस कर दे सादा।
राधा राधा मेट सबो भव बाधा।।

शोभामोहन
१०/१०/२०२२

Sunday, 27 July 2025

उड़त मन जल जगघेरापार

उड़त मन चल जगघेरापार
उड़त मन चल जगघेरापार
पवन अगन भुँइया जल नभतल,घेरा ले चल पार।
पवन अगन भुँइया जल नभतल,घेरा ले चल पार।
उड़त मन चल जगघेरापार
उड़त मन चल जगघेरापार
चंद्रचंदैनी रबि नछत्तर, नहक जगतबिस्तार।।
चंद्रचंदैनी रबि नछत्तर, नहक जगतबिस्तार।।
उड़त मन चल जगघेरापार।।
उड़त मन चल जगघेरापार।।
नरकसरग सुख ठगजग भाँवर,जीव खा जाही हार।
नरक-सरग सुख ठगजग भाँवर,जीव खा जाही हार।
असल-नकल के बिपत सकल ले, उबरे भज सरकार।।
असल-नकल के बिपत सकल ले, उबरे भज सरकार।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

Saturday, 26 July 2025

बस्तर मोर पुराना हे।गजब कठिन धोवाना हे।

लालालाला लालाला

बस्तर मोर पुराना हे।
गजब कठिन धोवाना हे।
मतलाये तरिया पानी।
अउ काई के रजधानी।।
कामबूता अउ तेलघानी।
मतलाये तरिया पानी।

कोटकोट ले हे चिटियाये।
भकर भकर ये बस्साये।।
सबो लाभ होगे हानी।
मतलाये तरिया पानी।

खीसा में नइ पाई हे।
माटीराख न भाई हे।।
लाग-नता बदले बानी।
मतलाये तरिया पानी।।
जे पथरा मूँड़ धारे हौं।
तेला गोड़ कचारे हौं।।
देखत जग आनीबानी।
मतलाये तरिया पानी।।

जेकर संग हे गुरलाटा।
साने उही लुगरा पाटा।।
सीखा देवत नादानी।
मतलाये तरिया पानी।।

शोभामोहन
11/05/2023

Monday, 21 July 2025

बइठे तरिया पार भवानी

बइठे तरिया पार भवानी 

२/कर सजवन सिंगार भवानी । 

१/
कर सजवन सिंगार भवानी ।
बइठे तरिया पार भवानी ।।
मुण्ड माल गर डार भवानी।
सजे तोर दरबार भवानी।।
२/
अखिल जगत तोर राज भवानी।
सुमरत सकल समाज भवानी।।
बइठे सजवन साज भवानी।
देथस तैं धन बाज भवानी।।
३/
तोर हाथ सब भार भवानी।
कर दे बेड़ा पार भवानी।।
अरझौं झन संसार भवानी।
अरजी बारम्बार भवानी।।
४/
अलबेली सरकार भवानी।
करुणा के अवतार भवानी।।
तोर लमाये नार भवानी ।
तहीं करस किरवार भवानी।।
५/
जम्मो जग दुख भाँज भवानी।
मइल मोर मन माँज भवानी।।
सुन ले मोर अवाज भवानी।।
खुश हो जा शिवराज भवानी।
६/
सुनही कोन हमार भवानी।
करही कोन बिचार भवानी।।
तहीं एक आधार भवानी।
खड़े हवन तोर द्वार भवानी।।
७/
चरन कमल में राख भवानी।
हवन अपगुनी लाख भवानी।।
अंधक आयेंव चाख भवानी।
तहीं उगोना पाख भवानी।।
८/
सब जग तोर बिस्तार भवानी।
तहीं अंत अगवार भवानी।।
बोहे तैं जग भार भवानी।
बइठे तरिया पार भवानी।।
९/
सब दुख अलहन टार भवानी ।
सुन के मोर गोहार भवानी।।
परे हवौं तोर द्वार भवानी ।
बारम्बार जोहार भवानी ।।
१०/
एक हाथ तलवार भवानी।
दूसर हाथ कटार भवानी।।
अष्टभुजा अवतार भवानी।।
करथस जबर प्रहार भवानी।।
११/
शक्ति तोर अपार भवानी।
कहूँ नइ पावै पार भवानी।।
देवन सँउरत हार भवानी।
तैं सबके सरकार भवानी।।
१२
सुघ्घर पाटी पार भवानी।
आँखी काजर डार भवानी।।
कर सजवन सिंगार भवानी ।
बइठे तरिया पार भवानी ।।
१३/
सेवा देवत ठाँव भवानी ।
लंगुरे दाबत पाँव भवानी।।
झुमरत सुमरत नाव भवानी।
रहै तोर बन छाँव भवानी।।
१४/
तोर हाथ मोर लाज भवानी।
सुमरौं तोला आज भवानी।।
सिध कर दे सब काज भवानी।
हिरदे मोर बिराज भवानी ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८०
मास माघ तिथि साते दिन सनिच्चर

Saturday, 19 July 2025

माँ के सच्चे लाल जगो"

"माँ के सच्चे लाल जगो"


जागो जागो भारतवासी
पढ़ गीता संदेश जगो।
वेद शास्त्र उपनिषद आदि पढ़,
चलो बचाने देश जगो।।

अरे करोड़ हिन्दू में से,
माँ के सच्चे लाल जगो।
बलिदानों से ही भारत का, 
होगा ऊँचा भाल जगो।।

सदियों में अवसर आया है,
चलो मिटाने रोग जगो ।
जगो बगल में छुरा छुपाये,
खड़े कसाई लोग जगो।।

सर्वनाश से पहले पसरे, 
सन्नाटे को भाँप जगो।।
आतंकी के देख इरादे,
शत्रुनाश को आप जगो ।।

छल प्रपंच मद मत्सरता भर,
जागा है उन्माद जगो।
क्या मतलब जगने का यदि तुम, 
बर्बादी के बाद जगो ।।

भांति-भांति के भेस बनाकर,
घूम रहे जल्लाद जगो।
काला साया देश न निगले, 
बनकर तुम फौलाद जगो।।

मनोरोगियों के विनाश बिन, 
नहीं बचेगा देश जगो।
बिना तुम्हारे सज्य हुए अब, 
नहीं मिटेगा क्लेश जगो।।

ठौर ठिकाना एक यही है, 
मन में भरकर रोष जगो ।
नहीं जगे तो नहीं बचोगे,
जागो सब बेहोश जगो ।।

गला कट रहा है चुन चुनकर, 
अब तो होकर क्रुद्ध जगो। 
बिना बिगुल आरंभ चुका, 
यह अदृश्य सा युद्ध जगो।।

शत्रु तुम्हे डरपोक मानकर, 
लगा चुका है घात जगो। 
धर्म बचाने ऊँच नीच और, 
भूल जात और पात जगो।। 

मंडी में ना बिके नारियाँ
कटे ना बाल गोपाल जगो।
आस्तीन में छुपे साँप ये, 
डस ना लें तत्काल जगो।।

शांत भिक्षुओं की प्रतिहिंसक,
देख पराक्रम वार जगो।
देश बनी है समरभूमि तब,
थूके ना संसार जगो ।

जगह जगह पर छुपे देश में,
दुश्मन रंगें सियार जगो ।
देश फूँकने वालों के संग,
पाक प्रेमी गद्दार जगो।।

कालखंड ने थोप दिया है,
यदि अब तुमपर युद्ध जगो।
शुतुरमुर्ग बन सिर न छुपाओ,
विस्फोटक हो क्रुद्ध जगो।।

कैंडल मार्च निकालो मत अब,
लहराने हथियार जगो।
दुष्टों को यमपुर पहुँचाने,
करने वंश उद्धार जगो।।

खुल्लमखुल्ला अब ललकारो,
शौर्य दिखाने श्रेष्ठ जगो ।
गलाकाट संस्कृति से लड़ने,
सुस्त न रहो सचेष्ट जगो ।।

जिनको डर लगता भारत में,
उन सबको ललकार जगो ।
बालीवुड के सर्वनाश को, 
अब होकर तैयार जगो।।

लाश भरी रेलें आयी थी,
खुद पर कर धिक्कार जगो।
बप्पू चच्चू देश बाँटकर,
बन बैठे सरदार जगो।।

जात पात में तुम्हे बाँटकर,
बहुत बनी सरकार जगो।
हिन्दू अस्मिता रक्षा करने, 
करते शस्त्र टंकार जगो ।। 

जय श्रीराम लगा जयकारा,
अब करने प्रतिकार जगो।
नहीं जगे तो मिट जाओगे,
मृत्यु उपस्थित द्वार जगो ।।

शोभामोहन काम जगाना
पढ़कर तुम इतिहास जगो ।
भारत माता का तुम पर से,
टूटे मत विश्वास जगो ।।

Monday, 14 July 2025

देशभक्ति गीत छत्तीसगढ़ीसेना में भेजेंव तोला ।अजम हे मन में मोला ।।आबे रे बेटा बैरी ला मार।।

देशभक्ति गीत छत्तीसगढ़ी

सेना में भेजेंव तोला ।
अजम हे मन में मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।

तैं हर धरती महतारी।
के करबे सेवादारी ।।
दाई के देबे करजा उतार।।
सेना में भेजेंव तोला ।
अजम हे मन में मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।

तैं राखबे जंगल झाड़ी ।
समुन्दर ऊँच पहाड़ी।।
चटकन के झन राखबे उधार।।
सेना में भेजेंव तोला ।
अजम हे मन में मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।

धरके ध्वजा तिरंगा ।
लहराबे संगी संगा।।
करबे भुँइया के जय जयकार।।
सेना में भेजेंव तोला ।
अजम हे मन में मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।

Friday, 11 July 2025

1.मनहरण घनाक्षरी(नक्सली चरित्र)पुलिस जवान बलिदान के मनाथे खुशी,

1.मनहरण घनाक्षरी
(नक्सली चरित्र)

पुलिस जवान बलिदान के मनाथे खुशी,
नक्सली मरथे तौ रोथे घोक पार के।
टूटहा पनही फटहा कुरता ला पहिन,
मुड़ी चुन्दी कोरैं नहीं रखथें  उझार के।
झोला ओरमाय करथें समाज सेवा ढोंग,
देशद्रोह करैं लपर-लपर मार के।
चीनी चमगेदरा के कहे कहे चलैं अउ,
हाथ धोके पाछू परे चुने सरकार के।।
2.मनहरण घनाक्षरी
ऊपरछावा दलित पिछड़ा के गोठ बात,
भीतरे भीतर उन देशघात करथें।
मानवाधिकार के बजाथें फुटहा ढपली।
स्वारथ के रोटी सेंक-सेंक पेट भरथें।
अल्पसंख्यक बर राँडी असन  रोथें गाथें,
जुटहा लंगटा नीच नाक कान भरथें।
देशहित ताक में मढ़ा के नाचथें नंगरा,
ना तो कोनो ला घेपथें ना कहूँ ले डरथें।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

आकृति बिखर गई, प्राण लीन हो गया।

आकृति बिखर गई, प्राण लीन हो गया।
देह गेह में बसा, प्राण लीन हो गया।।
पंचतत्व में मिला, फिर नवीन हो गया।
फिर विषयविकास से, मन मलीन हो गया।
मोहजाल में फँसा, फिर अधीन हो गया।
देह रुग्ण हो गया, जीव क्षीण हो गया।
झूठ द्रोह दुष्टता, अतिप्रवीण हो गया।
रत्न को गुमा दिया, और दीन हो गया

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

भीखमंगे दंगे पंगे करते नंगे लफंगे,

भीखमंगे दंगे पंगे करते नंगे लफंगे,
जल नहीं देंगें जल जलजला लायेंगे।
कभी कर निर्जल सिंधु बिन्दु भी ना देंगे,
दमखम जल बम सबक सिखायेंगे।
झूठ का बजार जो सजाये हुए बैठे सब 

नकल नकल हथियार बेअकल पास, 

कागज नहीं दिखायेंगे।वो सब बाहर जायेंगे।। (सखी छन्द)

कागज नहीं दिखायेंगे।
वो सब बाहर जायेंगे।।
कर देंवे हिन्दूस्थानी।
मौज करे पाकिस्तानी।।
ये सब चल ना पायेगा।
जो आया वो जायेगा।।
खून में जिनके गद्दारी।
उनसे है जिनकी यारी।।
उनको मजा चखायेंगे।
कागज नहीं दिखायेंगे।
वो सब बाहर जायेंगे।।
जिसने इनको पाला है।
वोटों का घोटाला है।।
बच्चे पन्द्रह सोला हैं।
और जो बम हैं गोला हैं।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

मोदी जी आप भारत में एक काम कर दो।

मोदी जी आप भारत में एक काम कर दो।
सब पाकप्रेमियों का जीना हराम कर दो।।
जो जाना चाहते हैं उनकी करो बिदाई,
जो यहाँ उधममचाये तो सतरामनाम कर दो।
आतंकवादियों को जो घर में छुपा के रखते।
उनके लिए बुलडोजर का इंतजाम कर दो।
भारत के अन्न जल से जो पल रहे सपोले,
उन सबके फन कुचल के बेदम तमाम कर दो।
शोभामोहन 

(आल्हा छन्द) धरम पूछके गोली मारे, कश्मीर घाटी झिमझाम।

पहलगांव में पाकिस्तानी क्रूर आतंकवादी घटना से उपजे रचना
आल्हा छन्द
धरम पूछके गोली मारे, कश्मीर घाटी झिमझाम।
अभी करोड़ो मारे हिन्दू, में  जुड़गे अट्ठाइस नाम।

कतका सैनिक रक्षा करही, अउ रखही कतका रखवार ।
जतका बैरी घर के भीतर, ततके बैरी सीमा पार।।

कोन बचाही कोन राखही, लिखे हवै मरना तोर भाग।
भाग सकस तौ भाग निकल जा, नइ तो जाग सकस तौ जाग ।।

तोरे घर में तोला मारत, तोला अल्लर लिज्झड़ जान।
तोरो तो दू हाथ गोड़ हे, तहूँ तमंचा फरसा तान ।।

मनखे के संग मनखे रहिथे, रक्सा संग नइ होय निभाव।
रक्सा के रक्सापन देखत, बदल तहूँ हर अपन सुभाव। ।

सभ्य संग में फबे सभ्यता, अउ असभ्य संग घूँसा लात।
जेन जेन भाषा में समझै, करौ उँकर सँग वइसे बात।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

Wednesday, 9 July 2025

पज्ज्झटिका छंद(मात्रिक १६ मात्रा के एक चरण)सुघ्घर सुम्मत, आय बसंती।

पज्ज्झटिका छंद
(मात्रिक १६ मात्रा के एक चरण)

सुघ्घर सुम्मत, आय बसंती।
लाने धरके, सुख अनगनती।।
तितलीदलबल, सुघ्घरपाँखी।
चँउधावत हे, जनजन आँखी।।
बेरपहाती, बादरलाली।
बरसातव हे, जग खुसहाली।।
बेला फूले, लहसे डारा।
भौंरा न्योता, पाके झारा।।
नभ भर रिगबिग, झलमल तारा।
फूल लदाये, नदी किनारा।।
चंदा चकमक, नभ के माथा।
सीत देत फूल, पतियन हाथा।। 
@@@@@@@@@@@@@@@@

@@@@@@@@@@@@@@
जलरंग दहरा तँउरत नहकै,
अइसन हे तँउरैया कोन।
तरिया जल में घुरे महाउर,
रंग मिले ओरखैया कोन।।
@@@@@@@@@@@@@@
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
दुख भरे लय-ताल-सरगम धुन इहाँ नाचत सबो।
सुख-सधौरा-साध अउ दुखग्रंथ ला बाँचत सबो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
सब नर्तक हैं सब गायक है।
परमपुरुष सबका नायक है।।
@@@@@@@@@@@@@@@@
सिरजनधरम जग आनंदसोती आय रे।
जेन कुछु नइ सिरजै नंगत दुख पाय रे।।
कोनो हे कँझाय रे कोनो हे बगियाय रे।
जेने सिरजे बर सीखै वो मजा उड़ाय रे।।

@@@@@@@@@@@@@@@@@
बँटहू तौ खच्चित कट जाहू

आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
गाँव गाँव में रक्सा पइधे, ठाँव-ठाँव में खड़े कसइया।।
बँटहू तौ खच्चित कट जाहू, कोनो नइ हे तुँहर बचइया ।।
आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
@@@@@@@@@@@@@@@@@@

मुक्तक

@@@@@@@@@@@@@@@@@@
दुख भरे लय-ताल-सरगम धुन इहाँ नाचत सबो।
सुख-सधौरा-साध अउ दुखग्रंथ ला बाँचत सबो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
सब नर्तक हैं सब गायक है।
परमपुरुष सबका नायक है।।
@@@@@@@@@@@@@@@@
सिरजनधरम जग आनंदसोती आय रे।
जेन कुछु नइ सिरजै नंगत दुख पाय रे।।
कोनो हे कँझाय रे कोनो हे बगियाय रे।
जेने सिरजे बर सीखै वो मजा उड़ाय रे।।

@@@@@@@@@@@@@@@@@
बँटहू तौ खच्चित कट जाहू

आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
गाँव गाँव में रक्सा पइधे, ठाँव-ठाँव में खड़े कसइया।।
बँटहू तौ खच्चित कट जाहू, कोनो नइ हे तुँहर बचइया ।।
आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
@@@@@@@@@@@@@@@@@@

Tuesday, 8 July 2025

अस्सी बीस कथा

अस्सी बीस कथा
1/
अस्सी के काटे मुड़ी, टँगली टेंवत बीस।
अपन भगत के अब तहीं, रक्षा कर जगदीश।।
2/
कभू बनत बिद्यारथी, कभू बनत
सरदार।
कोहा पथरा मार इन, हक खवात सरकार।।
3/
बपरी खानम आरफा, बपरा रबीश कुमार।
बोझा बोहे देश के, दूनो पत्तरकार ।।
5/
अस्सी डोमी साँप ला, बीस ढ़ोड़िहा डरुवात।
कतका अजगुत बात हे, 

चुनावी दोहा

चुनावी दोहा 

बोट मँगत हे जेन हर, तोर गोड़ में लोट।

पाछू झन भसकोल दै, सोंच समझ दे बोट।।

बोट लिये बर नोट ला, बाँटै नेता लोग ।
फेर वसूलैं जीत के, बिगन दया अउ सोग।।

दारू कुकरी बाँट के, जीतै जेन चुनाव।
देशराज लूटै नँगत, राखे रहू हियाव।।

अन्ना ला गन्ना असन, चगलिस जे बईमान।
पै पाखा अब उघरगे, भुँइया परे उतान।।

अन्ना गन्ना कस चगल, रचदिस झूठ पहाड़ ।
पन्ना पन्ना खुल गइस, बेंडा गइस तिहाड़।।

पोंकत पाकिस्तान अउ, चिरकत घूँचत चीन।
फोसनत मोदी साँप कस, रोवावत गउकीन।।

पाक कटोरा धर फिरत, पाछू घूँचत चीन।
भारत मोदी शाह अउ, योगी तिकड़ी तीन।।

कुटहा पाकिस्तान ला, मोदी सबक सिखात।
भूख मरत जनता उँकर, अल्लर पर लरघात।। 

चुनावी दोहा

चुनावी दोहा

बड़हर भारत देश के, ऊँचा होवै नाम।

सत्ता दौ वोला जउन, करै देस बर काम।।

सत्ता के महिमा अबड़, कुरसी जब मिल जाय।
मरहा मुसुवा मन घलो, घुसघुस ले मोटाय।

सत्ता के महिमा अबड़, जेन पाय चिकनाय।
देश लूट जनता धिरो, माल डकारत जाय।।

सत्ता के महिमा अबड़, भीड़ लगे दरबार।
भाड़ा के बनिहार मन, करथे जय जयकार।।

मुफतखोर जनता जिहाँ, होय राजधन नास।
मंत्री भ्रष्टाचार के, उहाँ रचै इतिहास ।।

मुफतखोर जनता जिहाँ, चाहै फोकटमाल।
उहाँ भ्रष्ट नेता उवै, खउहा नटवरलाल। ।

मुफतखोर जनता जिहाँ, भ्रष्ट उहाँ सरकार ।
देश राज कल्यान नइ, जावै धारे धार।।

चगल डरिन कुसियार कस, जुठलंगरा मन देस।
खीसा गरू अपन करिन, बूता करिन भदेस।।

जेन देश ला बाँट के, करना चाहत राज।
चुन्दी उँकर हपाट के, जँउहर कर दौ आज।।

ईडी के सोंटा परत, बफलत जम्मो पाप।
जेल धंधावत ठग सबो, नवत सबो के ताप।।

कुण्डलिया छन्द जेन देश ला बाँट के, चाहै करना राज।

कुण्डलिया छन्द 

जेन देश ला बाँट के, चाहै करना राज।

चुन्दी उँकर हपाट के, जँउहर कर दौ आज।।
जँउहर कर दौ आज, तान के चटकन मारौ।
आँखी हर बर जाय, जेल में धरके डारौ।।
भले आदमी असन, बना के जेन भेस ला।
बाजा असन बजाव, बिगाड़त जेन देश ला।। 

लटर पटर कर, मटर मटर कर,मया में पर चटपटात आँखी।।

लटर पटर कर, मटर मटर कर,
मया में पर चटपटात आँखी।।

पटा पटा जन सँटा सँटा तन,
सबो ले फेर असकटात आँखी।
लुहुर लुहुर कर, पुचुर पुचुर कर,
झपा झपा लटपटात आँखी।
घुचुर पुचुर कर, मुचुर मुचुर कर,
मया में पर मटमटात आँखी ।।

कहूँ बँटागे कहूँ छँटागे,
कहूँ झपा लरबटात आँखी ।।
बँटा बँटा के छँटा छँटा के
खँटा खँटा बटबटात आँखी।।

किसानी दोहा

1/
किसानी दोहा

हम उपजान गँहू चना, हम उपजावन धान।।
छत्तीसगढ़ के बेटवा,
हलधर हमन किसान।।
2/
फकत नहीं उपजान हम, गहूँ चना अउ धान।
हम उपजान बीर ला, रखे देश के आन।।

खुँदत डेहरी दुलहिन ससुरार।

खुँदत डेहरी दुलहिन ससुरार।

पहिन के गजमोतियन के हार।

चंदैनी चिकमिक चुंदरी डार।।
खुँदत डेहरी दुलहिन ससुरार।
करत पगरैतिन मंगलचार।।

सजा सपना के नार बिंयार।
धरे ओली में शुभ संस्कार ।।
खुँदत डेहरी दुलहिन ससुरार।
करत पगरैतिन मंगलचार।।

महाउर मया पिरित के घोर।
सुरता गठिया के अँचराछोर।।
सजावन सपना के संसार।
खुँदत डेहरी दुलहिन ससुरार।।

पद्धरि छन्द) हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

(पद्धरि छन्द) हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।
बइठे हस सबमें तैं पधार।।

सोरियावौं गावौं तोर गीत। 
सहि घाम झाँझ अउ जूड़ सीत।।
झनकत तनबीना तार तार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

नइ जानौ पूजा पाठ रीत।
हे तोर हाथ अब हार जीत।
मैं अप्पड़ अड़हा बड़ गँवार।।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

बुद्धि सुद्धि बल हे न ज्ञान।
हरहर कटकट में परे प्रान।।
मलकत डोंगा भव माँझधार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

मन में बगरा पबरित सुगंध।
छूटौं भवजल होवौं उछंद।
बोहावौं झन जग के बयार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

जग के टेके के तैं अधार।
सब जीव जंतु हे तोर भार।।
सचराचर जग के धरनधार।।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
१७/०३/२०२३

बस उही ला गीत जानौ।

शब्द ले मन बाँध पाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
जगत सुघराई दिखाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
बिन प्रयोजन जेन भाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
चित्त ला जेने भिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
लहरआनंद के उठाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रसरसिक में पचपचाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
जेन हिरदे ला रिझाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बोध सुघरई के कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव ला परघा बलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
संग में सबला बहाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बेग हिरदे उमड़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव उच्चारित कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नितनवेली भाव गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चेत ला जे उजराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चित्तपंकज ला खिलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भावसात्विक रिगबिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
परमानंद मन पधराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
प्रभु डहर पग ला बढ़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नस भीतर ला झनझनाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रोगभवभावी मिटाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
शास्र ला जे दुहराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बिरंची शिव विष्णु गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा 

फुलवारी ले भौरा उड़ाही गड़ी।

डुँहड़ू कतको भले डुँहड़ाही गड़ी।।
नेवता पार फुलवा बलाही गड़ी।।
बेरा होवत मया राग सब्बो भुला,
फुलवारी ले भौरा उड़ाही गड़ी।
कोनो कतको मया पलपलाही गड़ी।
राग धर पाग सुर-ताल गाही गड़ी।।
पान-पुरइन ठहर जल नइ पाही गड़ी।
जेन आही गड़ी तेन जाही गड़ी ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा

लावणी छन्द 16-14 मात्रा (आनंदरस झरना पझरत हे)

लावणी छन्द 16-14 मात्रा 

आनंदरस झरना पझरत हे,

जीव पिये नइ पावत हे।
उसर-पुसर के आगू आवत,
अउ पाछू घुँच जावत हे ।।
खंभा जइसे जड़मति चोला,
तब तो गति गनावत हे।
सतगुन निर्मल जल झलके बिन,
तमगुन धार बोहावत हे ।।
अनगिन भरमभूत मन खावत,
जग अंधियार झपावत हे ।
सबदिन बिसय वासना जेवत,
दुर्गुण तज नइ पावत हे ।
सुन्ना में भगवान उपकतिस,
भीड़भड़क्का धावत हे ।।
प्रकृति प्रवृत्ति बाँधत छाँदत,
नइ उछिन्द हो पावत हे ।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा 

देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट देश ला बदलत हे,
देख तोर वोट बल राष्ट्रवाद छात हे ।
देख तोर एक वोट राज खुसियाली भर,
नक्सलवादी मन के नाव ला बुतात हे।
देख तोर एक वोट गाँव ला सजोर कर,
सँगसी गली घर दुवार चमकात हे।
देख तोर एक वोट गढ़त भारत भाग,
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट संस्कृति बचाय बर,
अंगद असन पाँव जबर जमात हे।
देख तोर एक वोट भाखा के सरेखा कर,
तोर पुरखा ले तोर मया ला गढ़ात हे ।
देख तोर एक वोट धोवत कलंक देश,
देख तोर एक वोट सुते ला जगात हे ।
देख तोर एक वोट कइसे जोड़त देश,
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट पाक ला पियात पानी,
उधेन उधेन पोनी कस धुनियात हे ।
देख तोर एक वोट चीन ला देखात आँखी,
घुसपैठिया ला चिन्ह चिन्ह के भगात हे।
देख तोर वोट बल अमेरिका होत थर,
ईटा के जवाब पथरि असन पात हे।
देख तोर एक वोट बिला में खुसरे साँप,
बाहिर निकाल चार झन ला दिखात हे।
देख तोर वोट बल ब्रह्मोस तेजस टेके,
आकाश मिसाइल बैरी ला लतियात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट राष्ट्र निर्माण करे,
भारत भुँइया नवा नेव ला मढ़ात हे ।
देख तोर एक वोट अवध में रामलला,
मंदिर बनाके पूरा विश्व ला चौंकात हे ।
देख तोर एक वोट काशी के उदासी काट,
शिवपुर दिब्यता के गौरव बहुरात हे।
देख तोर एक वोट खोटहा सिक्का मन के,
रतिहा नींद दिन के चैन ला चोरात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट धरमबिमुख बैरी,
मुड़मुत्ता रउँदे हे गोड़तरी लात हे ।
देख तोर एक वोट दुबके रहस तेला,
मुड़ उठा छाती तान जिये ला सिखात हे ।
देख तोर एक वोट वंशवाद बरगद,
जर खन मही धार डार उपकात हे ।
देख तोर एक वोट दिंयार बाँबी उझार,

देख तोर एक वोट धमक देखात हे। ।

देख तोर एक वोट सूरा मन ला सपेट,
टूरा मन ला लपेट संग जुरियात हे।
देख तोर एक वोट पाक के टोंटा मुसेट,
धराके कटोरा रोज भीख मँगवात हे ।
अरिदल छोट-मोट गिंगियात गोड़ लोट,
सोंट सोंट सोंटा में घमंडी सोझियात हे।
देख तोर एक वोट सुधारत मसमोट,
भ्रष्टाचारी के ऊपर हंटर चलात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे। ।

जनम मरन के लहरा डोलत, डोंगा देहतरैया हरिगुरु।

जनम मरन के लहरा डोलत, डोंगा देहतरैया  हरिगुरु।
प्रकृति विकृति ले अलग-बिलग कर, भवदुख तापहरैया हरिगुरु ।।

जाला झार उझार बहार हिय, सब सुगुन भरैया हरिगुरु ।
करम खेत ला बोंय बराये, हरिया सुघरधरैया हरिगुरु ।

देह प्रान बस प्रान ईश बस, मुक्ति प्रानकरैया हरिगुरु।।
राज ऊपर विधि शासन रच, सुगम सुरीत चरैया हरिगुरु।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

(सुवदना वर्णिक छन्द) माटी लोन्दा ये चोला, अगन भुवन में, खेलै भकभका ।

सुवदना छन्द

लाला लाला लालाला, ललल लललला, लाला लललला ।


माटी लोन्दा ये चोला, अगन भुवन में, खेलै भकभका ।

काया माया आँखी ला, चटक-मटक में, छेंके चकचका ।।


होती गोती सोती ला, सक नइ समझे, घूमैं बकबका ।

हुद्दा-हुद्दी खाबे रे, बिगन भजन के, मेला जकजका।

अंगी रंगी संगी तो, कुछ पग चलही, संगे लकलका ।

बेरा हा ढेरा आँटे, रँग-चँग उधड़े, धागा सकसका।


ऐती वोती झाँके ले, गत नइ सुधरै, जाबे थकथका ।।

माटी हाँड़ी फूटे में, छिन भर लगही, गे हे पकपका ।

बाँचे बेरा साँसा ला, झन कर बिरथा, भौंरी जकजका।

गिल्ला-गिल्ला माटी में, हरिगुन थरहा, बों दे

छकछका ।


शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन

08/07/2025

शुभस्थान-महुदा



कोनो ज्ञानी ही जाने, रहन बसन ला, लेटा बिन लगे ।

गावै ध्यावै आत्मा ले, हरि सुमिरन के, सेती सुध  जगे ।।


संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...