Friday, 31 March 2023

मनुष्य में होने वाले बीमारियों छत्तीसगढ़ी में नाम

रोगराई के छत्तीसगढ़ी नाम

बदरीओरमे-मोटापा। 
जंगलोरघाव-जँघे का घाव। 
छैलारोग-त्वचा के छिल्का निकलने का रोग।छईरोग-क्षयरोग। 
मुँहफोरा -मुँह का छाला। 
खजरी - खुजली खाज। 
खस्सू खजरी- खुजली, एक्जिमा।
अगिया- दहकने वाला फोड़ा। 
केशटूटी, कसटूटी-बालतोड़।
घमुर्री-घमौरी।
सीतला-शरीर में सफेद रंग के छीटे जैसा दिखने वाला चिन्ह जिसमें दर्द नहीं होता। 
कोथापीरा-पेड़ू का दर्द
माथपीरा-सिरदर्द
अमचुकीडकार-अम्लीयता एसिडिटी। 
भैरापन-बहरापन
कोलवापन-हाथ की अपंगता। 
खोरवापन-लंगड़ापन
अंधरौटी-अंधत्व अंधापन। 
तोतरापन-हकलापन
लिबरापन-बार बार पलक झपकने की बिमारी 
थोथवापन-शून्यता। 
झुनझुनी/झिनझिनी-
खरई-अतिमूत्रलता
पोकर्री-दस्त, डिसेन्ट्री।
जूड़ सर्दी-जर -ज्वर। 
जूड़जर-शीत ज्वर। 
पोकर्रीदाना-पूरे शरीर में छोटे छोटे दाना होकर पक जाने का रोग। 
पिंउरीबिमारी- पिलिया
मोतीजीरा-टाईफाइड। 
बेंव ई फटई - पैरों का फटना। 
मल पित्त छरियई - पित्त का भड़काना। 
नस धरई - नसों का दब जाना। 
नखसूटी - नाखून के आसपास के माँस का छिलना। 
नखसुतरी - नाखून के आसपास के माँस का छिलना। 
रतौंधी-शाम के बाद दिखाई नहीं देना। 
घिनही घाव-उँगली के अग्रभाग में होने वाला घाव। 
सलौनी-आँखों के पलकों में होने वाला घाव
लोहाझारघाव-उँगली और अंगूठे में अनायास होने वाला पानी भरा हुआ घाव। 
कोढ़-कुष्टरोग।
खखौरीघाव-काँख का फोड़ा। 
डोमटा-फोड़ा। 
फोसका-मच्छर कीड़ा काटने से त्वचा में आया उभार।
गोही-गिल्ठी या गठान। 
गुठली -गठान हो जाना। 
घिनही घाव-हाथों की उँगलियों में होने वाला घाव। 
बादीघाव-काँख का फोड़ा। 
फोसका-कीड़ा काटने के कारण सूजन। 
अपरस-स्पर्श से फैलने वाला हाथों के छिल्का निकलने का रोग। 
कुबरापा - कुबड़ापन।
लोकवा - पक्षाघात, पैरालिसिस।
लुझुंगचोला- शिथिलकाया। 
थोथवा-शून्यता, झुन्नता।
बइहापन - पागलपन, विक्षिप्तता। 
कनटेटरा-भैंगा । 
फुलाफरे() पूरे आँख के सफेद होने और दिखाई नहीं देने की बीमारी। 
टेटरा निकलई-आँख का खराब होकर सफेद पड़ जाना। 
जूड़पिकरी-एलर्जी
खोंखी-खाँसी। 
बाफुर-मिर्गी हिस्टीरिया। 
सनपात बाई-सन्निपात, निमोनिया। 
चेन्दवापन-गंजापन
अघौनाघाव नासूर, पुराना घाव। 
मुँहबस्सौना-पायरिया। 
झाँझझोला धरई-लू लगना। 
घावगोंदर - घाव आदि। 
उसुवाय - सूजा हुआ।
गलसुवा-गालों का सूजन।।
मस्कुड़ाफूले- मसूड़े की सूजन।
बफाड़ा- गर्मी के कारण नाक मुँह में घाव होना। 
लस्सीघाव-आमचोपर के सम्पर्क में आने से होने वाला घाव। 
झोलाय - लू लगा हुआ।
कोखठाढ़-एक बच्चे  के बाद बाँझपन।आलसमाई-माता का प्रकार। 
झाँवा खवई - मुर्छित होना। 
सुखड़ी बिमारी-सूखारोग। 
भदहई रोग- मोटापा
बकठीपन-बाँझपन, बंध्यता। 
हड़फोर घाव-हड्डी में होने वाला फोड़ा। 
केन्दवा-अत्यधिक पानी में रहने से त्वचा में होने वाली सड़न की बिमारी। 
खोरवा - लंगड़ापन।
खंडूल - नाक और होंठ कटे हुए होना। 
चिंगराजपानी-सफेद दाग। 
कबरी बीमारी-सफेददाग। 
अंधरौटी बीमारी-अंधत्व
कोठी भैरापन - पूर्ण रूप से बहरापन। 
कोंदापन- गूंगापन
तोतरी बीमारी - तोतलापन।
अटकापन - हकलापन।
लिबरी बीमारी - बार बार पलकें झपकने की बीमारी। 
चुकचुकीबिमारी-बार बार पलकें झपकने की बीमारी।
कब्जियतबिमारी-कब्ज, पेट साफ ना होने की बीमारी।
झझकौनी बीमारी - भयाक्रांत होने की बीमारी। 
मुँह-मुहूर्त कि छाला। 

Wednesday, 29 March 2023

संस्मरण साध अधूरा रहिगे

संस्मरण 
साध अधूरा रहिगे

सन् दू हजार आठ म मैं स्नातकोत्तर अंतिम के परीक्षा रविशंकर विश्वविद्यालय ले देवत रहेंव तब पूरा समय सारणी बना के रखे रहेंव अउ उही हिसाब ले तियारी चलत रहिस दू पेपर होगे रहिस मोर छोटे भाई के उही घरी बर - बिहाव बर छोकरी देखे के तियारी घलोक जोर सोर ले चलत रहिस । शनिच्चर के दिन बिहनिया सात बजे ले मोर बड़ा के बेटा अउ मोर भाई दूनो झन दुर्ग गइन अपन कुछ आने बूताकाम करे के बाद छोकरी देखे बर जाबो कहे रहिन। 

वोती ले दस बजे फोन आथे कि उँकर भयंकर दुर्घटना होगे हे अउ मोर भाई के गोड़ कई कुटका म टूटगे हे कहिके, घर में सियान नइ रहै डोकरीदाई भर रहै अब सबो भार मोर अउ मोर छोटे बहिनी ऊपर आगे रहिस सुध-बुध हरागे अउ तुरते दुर्ग गेन भाई के ईलाज कराके रातोरात घर लानेन अर्थविज्ञान के पेपर छूटगे तेकर मोला होश नहीं रहिस अउ सोमवार के पेपर हे कहिके  परीक्षा देये बर रविशंकर विश्वविद्यालय पहुँचेंव अउ जाके परीक्षा कमरा म अपन ठउर ला खोजत रहेंव तौं परीक्षक महोदय हर पूछथे तोर आज का के पेपर हे? 
मैं कहेंव अर्थ विज्ञान। 
वो कहिथे कोन से साल? 
मैं कहेंव स्नातकोत्तर अंतिम। 
परीक्षक कहिस आज तो इहाँ भूगोल पूर्व के परीक्षा चलत हे कार्यालय में जाके पता कर ले। मोला अब कुछ समझ में नइ आवत रहिस कान साँय साँय करत रहै अउ गोड़ लदलद लदलद काँपता रहै। कार्यालय में जाके पता लगायेंव मोर स्थिति ला देख के मैड़म अउ सर मन मोला अब्बड़ समझाइन अउ बताइन कि शनिवार के तोर पेपर रहिस हे। आँखी अंधियार परगे पानी लान के पियाइन अउ समझावत कहिन एक पेपर छूटे हे ना कुछु नइ होय अगला पेपर के बने तियारी करबे कहिके मोला कहिन मैं एकघंटा उहें बइठे रहेंव मोला अब आगू का करना चाही तेन समझ म नइ आवत रहै । कार्यालय ले निकल के एकठन पेड़ के छाँव म फेर एक घंटा बइठे रहेंव, मोर बुद्धि छरियागे रहै अउ आँसू सरलग बोहावत रहै। मैं मन म सोचत रहौं ये मोर जिनगी के सबले बड़का गल्ती कहौं कि परिस्थिति के मार कहौं जेकर कभू भरपाई नइ हो सकै अउ घर जाके का बताहूँ कहिके रंग रंग के बिचार मन म आवत रहै। घर म मोर भाई के हालत खराब रहै वोकर गोड़ के सर्जरी करवाये बर उहीच सोमवार के दिन साँझ के रायपुर नवकार नर्सिग होम लेगेंव जेन चार महिना म रेंगना चलना शूरू करिस । कुछ अंक के सेती भाषाविज्ञान म पीएचडी करे के मोर साध अधूरा रहिगे।  
कभू कभू विपरीत परिस्थिति अउ भुलाये के हर्जाना ला जीयत भर भुगते बर लागथे खासकर विद्यार्थी जीवन के एक भूल हर जिनगी के दिशा अउ दशा तय करथे। 

शोभामोहन श्रीवास्तव

Tuesday, 28 March 2023

अलकरहा अँजोर

अलकरहा अँजोर 

घटना आज ले बीस बछर पहिली के आय चरबज्जी पहाती बेरा हमर शरद भइया दरवाजा ला खटखटाथे आँखी रमजत सँकरी खोलेंव तौ भइया हर दुखद समाचार सुनाथे कि सुधा भउजी के महतारी हर परलोक चल दिस अउ वोकर संग रहे बर अउ संभाले बर तोला संग म जाय बर लागही, मैं उँकर बात कभू नइ काटेंव हौ भइया कहिके झटपट तियार होगेंव भउजी के अउ दू झन लराजरा नत्ता सैना घलोक रहिन संग म चिर्रबोर रोवत गावत भउजी के आँसू ला फेर पोंछौं फेर जोर जोर से रोवै। अपन महतारी बाप के एकौंझी बेटी वोकर दुख हर पहाड़ असन रहिस हमन राजिम ले डेढ़ दू घंटा म गंधरी पँहुचगेन । उहाँ जाय के बाद भइया अउ भतीजा मन काठी माटी के तियारी म लगगे अउ भउजी के तो रोवई के मारे सुध बुध नइ रहिस। उँकर गाँव के दगदेवा हर निच्चट लकठा रहिस अउ जब मुखाग्नि होइस तहाँ ले घर तक मास जरे के गंध आय लगिस। पता नहीं का प्रेरणा होइस मोला वो जगह जाय के मन होगे अउ मैं रेगें धरेंव सौ फलांग म सरगी रहिस अउ भरभर भरभर चिता जलत रहिस जइसे ही आगी ला लपट झपट के बरत देखेंव उही पाँव लहुटगेंव । पूरा दिन बीतगे रहै बेरा उतरत रहै अउ सब झन भूख म कलबलागे रहैं तहाँ सब जलपान करेन अउ उहाँ साँझ के घर आय बर निकलेन ।  मर्रा म एकझन सगा नोनी ला छोड़ने चहा पानी पियेन अउ नौ बजे रतिहा राजिम बर निकलगेन
कोनजनी कोन मुहुर्त म निकले रहेन के भुलनजड़ी खुँद डरे रहेन वो गाड़ी चलैया रद्दा भुलागे गंधरी ले अंडा फुंडा अउ का का गाँव रद्दा म परिस हमर गाड़ी म पूरा टंकी भर पेट्रोल भराय रहै दू झन अउ हुसियार जानकार मनखे 
बइठे रहैं ककरो बुद्धि काम नइ करत रहै धाँय दस किलोमीटर ऐती गाड़ी लेगै धाँय बीस किलोमीटर वोती लेगै। सब गाँव गाँव म होली तिहार के पहिली के ढोल नगाड़ा फागगीत चलत रहै । पाटन जाय के रद्दा पूछन वोमन बताय फेर हमन कहूँ नहीं पहुँचत रहन फुंडा गाँव म तो सड़क म बड़का ठुड़गा रुख ला लामीलामा  होलेछेंकैंया मन मड़ा दे रहैं वोला टारना ककरो बस के बूता नइ रहिस असली कहिनी इही मेर ले शूरू होथे तौ डाक्टर कका हर कहिथे चल अरकट्टा गाड़ा रावन म गाड़ी ला लेग मैं रद्दा बताहूँ अब ड्राइवर मसक दिस उही कोती  हदकहिदिक के मारे हम सबके पोंटा छरियावत हे तइसे कस लागत रहै अउ एकठन ऊँच मेंड़ म जाके गाड़ी धपोर दिस तहाँ ले डाक्टर कका मैं अउ मोर बहिनदमांद उतरेन तहाँ ले खार म रंगबिरंगी के जीव जिनावर मन के आवाज गूँजत रहै अउ अब्बड़ डर लागत रहै गाड़ी ला ढ़केलिन तहाँ गाड़ी गरगर ले नाहकगे कका अउ बहिनदमांद बड़े बड़े डंका मारत रेंग दिन मैं पछुवागे रहौं खार म अतका ऊँच अतका बड़का अँजोर जेकर ओर छोर नइ दिखत रहै तेन हर मैं रेंगौं त रेंगै अउ रूकौं तौ रूक जाय मैं जोर जोर से चिल्लावौं कका रूकौ कहिके फेर मोर मुँह ले निकले आवाज उँकर तक नइ जाय दस फलांग दुरिहा कतका होथे फेर मोर चिचियाना बिरथा होगे तहाँ ले भगवत प्रेरणा ले गायत्री मंत्र के जाप करे बर धर लेंव अउ पल्लाछाँड़ के भागेंव वहू मोर संगेसंग दँउड़त रहै मोर चप्पल फेंकागे चुनरी फेंकाके अउ मैं सड़क म पहुँचगेंव तब मोर जीव म शिव आइस। डेढ़ घंटा के रद्दा ला हमन पूरा रात भर भटके के बाद पहाती पाँच बजे असन राजिम अभरेन। 
कोनो ला बतावौं तौ कहैं नइ तोर मन के भरम आय नइ तोर डर आय अइसे आय वइसे आय फेर कोनो पतियाय नहीं फेर वो घटना हर शशि बहिनी के संस्मरण ले फेर मोला बीस बछर पाछू लेगगे। 
वो अलकरहा अँजोर का रहिस ये वैज्ञानिक शोध के विषय हे अउ येला जब तक मनखे भोगाही नहीं तब तक पतियाय नहीं। महूँ अदृश्य शक्ति ऊपर विश्वास कभू नइ करत रहेंव काबर कि थोरिक तार्किक सुभाव के हौं फेर वो अलकरहा अँजोर आज तक मोर  
समझ म नइ आइस। 

शोभामोहन श्रीवास्तव

Wednesday, 22 March 2023

शोभामोहन के छत्तीसगढ़ी बिहावगीत


३/बिहावगीत

जुगुर बुगुर बरै मड़वा मा कलशा,
धुकुर पुकुर जीव होय।।
आँखी पुतरी दुलारी रानी बिटिया,
झरझर झरझर रोय।।

एके कोख जनमाये भाई अउ मोला ददा,
आज फेर कर देस भेद।।
भइया ल दिये घर खेत खार बखरी,
मोला दिये परदेस।।

शोभामोहन
०१/०१२/२०२१


४/बिहाव गीत

ऊँच ऊँच महल टेकाये तैं राजा ददा।
बींच बीच खिरखी लगाय हो।
तेकरे बरेंडी बइठे बोलत हावै सुवना,
मगन प्रभु के गुन गात हो।।

हरदी छिटका देके भेजे पतिया बड़ दूर।
लिख तोर समधी के नाम हो।
चिठिया ला पढ़ ओ तो आहीं बिहाये बर,
बेटवा के धरके बरात हो।।

नइ लेगैं सोना चाँदी धन धोगानी समधी,
सुवना ला माँगे मन ठान हो।
हाँसत आही ददा धरके बरतिया ला,
सुआ जाही आँसू चुचवात हो।।

शोभामोहन
०१/१२/२०२१
पाटन

५/बिहाव गीत
---------------------
बने पहाबे हाँसत गावत दिन, हाँसत गावत दिन।
जाना हे तोला ससुरार।
मइके के डेहरी पहुना बन जाबे, पहुना बन जाबे।
छूट जाही मया परिवार।।

ससुरे में सब संग हिल मिल रहिबे, संग हिल मिल रहिबे।
ससुरारी घर बोहे भार।
कभू उराठिल भाखा झन कहिबे,भाखा झन कहिबे।
मया मान देबे अउ दुलार।।

गोठ सिखौना गँठिया के धर ले, गँठिया के धर ले।
होय भोरहा झन कर बिचार।
संग पिया के छँइहा बन चलबे,छँइहा बन चलबे।
घर के बन जाबे तैं अधार।।

शोभामोहन
३०/११/२०२१
पाटन
६/बिहाव गीत

गाँव गाँव गिजरेंव बेटी तोर बर खोजे,
नइ जानेंव का लिखे तोर भाग ओ।।
पहिली पहिली ससुरारे ले आये,
कइसन हे तोर ससुरे के लाग ओ।।

का सुख पाये तैं बेटी दुलरु के डेहरी,
काकर हे कइसन बेवहार ओ।
सब सुख हावै दाई ससुरे में हमर तो,
मया दया भरे हे परिवार ओ ।

जेठानी देवरानी तोर कइसन कइसन,
देवर ननदिया के हाल ओ।
कइसन हावै तोर सँइया गोसँइया,
क इसन काकर खियाल ओ।

आये ससुरार ले तैं पहिली पहिली बेटी।
कइसन हे तोर ससुरे के लाग ओ ।।

शोभामोहन
२९/११/२०२१
पाटन
७/बिहावगीत

मोर दुलौरिन बेटी खेलै अउ कूदै,
सीखे नहीं करे घर काज।
जाये ससुरे बइठत हस डोला,
लेगे खड़े दुलरू समाज।।

कोने तोला बड़े बिहिना जगाही,
कोने गाँथही चूँदी तोर।
कोन हा देही दतुवन ला कुचर के।२
कोन नहवा के करही सिंगार।।

सास जगाही मोला बड़े बिहिनिया,
जेठानी कोरही मूँड़ मोर ।
ननदी देही दतुवन ला कुचर के।
नवाइन करही मोर सिंगार।।

शोभामोहन
३०/११/२१
पाटन

८/बिदाई गीत छत्तीसगढ़ी
( बेटी के कलकुत)

लालाला लालालाला लालाला लालालाला
लालाला लालालाला लाल हो।

मइके के मया दया कइसे भुलाहूँ दाई।
भेजत हौ मोला ससुरार हो।
सोनहा हिंडोलना मा कतको झुलाही तभो।
दुख पाही जिवरा हमार हो।
सोना के सीत्था भले जेंवन कराही जोंही।
सुरता आही तोर दुलार हो।
अक्ती मड़वा चुकिया पोरा खेले संगी।
छूटे घर अँगना दुवार हो।
घेरी बेरी सुरता के बदरी छवाही घन।
बोहाही अँसुवन के धार हो।।
तिरिया के जन्म बिधाता काबर दिये होही।
सहे बर दुख ला अपार हो।।
शोभामोहन
१८/११/२०२१

९/बेटी बिदा गीत

का तोला देवौं बेटी मइके के चिन्हारी।
ओली धर ले असीद  राजदुलारी।।
पाँव झन काँटा गड़े मिलै सुख सारी।
सोन के पुतरी मोर घर उजियारी।
ओली धर ले असीद  राजदुलारी।।

चूरी चूरा देहूँ बेटी, टूटी फूटी जाही ओ।
सतरंग लूगा देहूँ रंग छूट जाही ओ।।
मरत जीयत संगदेवा संगवारी।
ओली धर ले असीद राजदुलारी।।

लोहा मुरचाही बेटी काठ घुना खाही ओ।
सोन चाँदी देहूँ तेनो टुटही खियाही ओ।
काटे नइ सकै जेला बेरा कटारी।
ओली धर ले असीद राजदुलारी।।

शोभामोहन

१०/१ /(बिहतरा सोहाग गीत)

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
अँगरी धरे सुवासिन ठाढ़े बिलरी ओरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
आवौ कुम्हारिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

आवौ मरारिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह  सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

आवौ बरेठिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह  सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
अँगरी धरे सुवासिन ठाढ़े बिलरी ओरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

शोभामोहन श्रीवास्तव
१३/१०/२०२१
पाटन

सोहागगीत

बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
फूफू के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजा झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
मामी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
भउजी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी , बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

शोभामोहन




Tuesday, 21 March 2023

चाम दाम के बन व्यापारी

गीत

चाम दाम के बन व्यापारी

एक सूर्य अंतस के नभ पर।
जन्मों से अस्ताचलगामी ।
इदमवृत्ति और ममवृत्ति में,
माया छाया के बन स्वामी।।
रोप रहे हैं पागलपन में,
कुम्हलाने वाली फुलवारी ।।
अँधियारे ने खूब निभायी,
जनम-जनम की रिश्तेदारी ।।

धन की परिभाषा जाने बिन,
खूब बटोरें कागज पत्थर।
धातु कीमती करके संचित
बैठे खुद चौंकीदारी पर।।
सिर के पत्थर पाँव पटककर
रोते बिलख बिलखकर भारी।
अँधियारे ने खूब निभायी,
जनम-जनम की रिश्तेदारी ।।

व्यर्थ बिताये इस जीवन पर,
खेद जताये ना नाराजी।
बार-बार दुख -सुख झेला पर,
पार गमन को हुए न राजी।।
सुख का सौदा करना चाहें
चाम दाम के बन व्यापारी ।।
अँधियारे ने खूब निभायी,
जनम-जनम की रिश्तेदारी ।।

एक मुहाना फिर भी ऐसा,
सौदा सच्चा खरा माल को।
जग दर्शन तटस्थ हो निज लख,
छिन्न-भिन्न कर इन्द्रजाल को।।
यह उपकार स्वयं पर करके,
छोड़ गिनाना अब लाचारी ।।
अँधियारे ने खूब निभायी,
जनम-जनम की रिश्तेदारी ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
अमलेश्वर रायपुर छ.ग.

नव दिन बर भेज के तोला

*जगत जननी मइया के जसगीत*

नव दिन बर भेज के तोला
किरपा करिस हे भोला
आये ओ दाई अँगना मा मोर।
आये ओ दाई अँगना मा मोर।।

भोले शंकर के प्यारी।
हे गनपति के महतारी।।
आये ओ दाई अँगना मा मोर।
नव दिन बर भेज के तोला
किरपा करिस हे भोला
आये ओ दाई अँगना मा मोर।
आये ओ दाई अँगना मा मोर।।


हे पर्वती बरदानी।
हे दुर्गा आदि भवानी।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
नव दिन बर भेज के तोला
किरपा करिस हे भोला
आये ओ दाई अँगना मा मोर।
आये ओ दाई अँगना मा मोर।।

हे शक्ति के अवतारी।
हे सब जग के हितकारी।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।।
नव दिन बर भेज के तोला
किरपा करिस हे भोला
आये ओ दाई अँगना मा मोर।
आये ओ दाई अँगना मा मोर।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

सतगुरु वंदना

सतगुरु वंदना 


सबके हाल बिहाल इहाँ हे, देखत हौं सरकार। 

सतगुरु जीव लगा दे पार 

सरग नरक धरती सबमें हे, माया के बिस्तार। 

सतगुरु भवदहरा पतवार । 

इन्दर ब्रह्मा बनना चाहत, बल के करन प्रसार ।।

सतगुरु भव दहरा कर पार। 

माया ठगिया तीन लोक में, राज करत जब झार।। 

सतगुरु भव दहरा पतवार। 

तोर शरन बिन मोर तरन नहीं, अब कर सोग उदार। 

सतगुरु भव दहरा पतवार । 

जब तक मन तोर भाँवर देथे, चल देथौं दिख पार। 

मन धनहा मा साध सधौरा, जामत खरपतवार। 

बनन बनन गिंजरत दुख पावत, जुग जुग जीव हमार।

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

लोभ मोह अउ रईस राँड़ मन, तपथें डेरा डार।

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

बिसय मिलत बलकर होवत हे, दुर्गुण देह हमार।। 

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

पय पाखा मन घात लगाये, बिख उगले तैयार। 

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

तोर दया बिन साध मिटै नहीं, कर लौं उदिम हजार। 

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

शोभामोहन सँउपत हावय, तोर उपर सब भार।। 

सतगुरु भव दहरा कर पार।। 

  

शोभामोहन 

२६/०५/२०२२


चरन सतगुरु के, चित्त रख रे(राग भूपाली) 


चरन सतगुरु के, चित्त रख रे।

परमअलौकिक सबसुख चख रे।

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 


सतगुरु समरथ अलखलखैया,

सतगुरु समरथ अलखलखैया,

गुरुपगचिनहा चल हरि लख रे।।

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 


बाती तेल बिन दीपजलैया। 

बाती तेल बिन दीपजलैया।।

लकलक होये सिख नख रे।

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 


शोभामोहन 

१८/०२/२०२२

महुदा
गुरु वंदना


सतगुरु मोर बने डोंगहार।


भवदहरा गहरा तन बेड़ा। 

उठत गरेरा खात थपेड़ा।।

अनुकुल करत बयार। 

सतगुरु मोर बने डोंगहार।


दुलमजनम पाके मानुखतन।

भँउरी झेलै बनन बनन झन।। 

देख बिगन पतवार ।

सतगुरु मोर बने डोंगहार।


घुपअँधियार उवाटत खतरा। 

गुरुबर बनके चकमक पथरा।।

लानत झक उजियार।

सतगुरु मोर बने डोंगहार।


बाट न जानौं घाट न जानौं। 

जग नहकैया हाट न जानौं।। 

रहिथौं गुरु के भार। 

सतगुरु मोर बने डोंगहार।


शोभामोहन 

०७/०९/२०१९

तोर शरण हौं शंकरभोला (राग धनाश्री)

तोर शरण हौं शंकरभोला (राग धनाश्री)  

तोर शरण हौं शंकर भोला 
राम भगति दे मोला।।
तैं जीते प्रभु तीनो पुर ला, 
बइठे मगन अबोला।।
तोर शरण हौं शंकरभोला

रतिपति के हे भसम करैया, 
आरुग बुध दे मोला।
लहर लगा दे भक्ति जगा दे, 
ये जग आगी गोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला, 

काशी वासी जगत उदासी, 
पार लगा दे चोला।
कोन परम पद पाथे जोगी, 
मैं नइ जानौ ओला।
तोर शरण हौं शंकरभोला, 

हे कैलाशी भवदुखनाशी
सुमित हावौं तोला।  
भाग उविस तब जनम मिले हे, 
मनखे देह अमोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला 

अउ झन भटकै शोभामोहन, 
बदलत बदलत चोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला 
राम भगति दे मोला।।
तोर शरण हौं शंकरभोला 

शोभामोहन 

सोरठा छंद

सोरठा छंद

छंद सिखावनहार, अरुण निगम गुरुवर हमर।
डंडासरन जोहार, घेरीबेरी करन तुँहर।।
छंद के छ परिवार, रिगबिग लगत जगर मगर।।
भाखा के किरवार, जुरमिल करत रहन सुघर।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

मत्तगयंद सवैया. कोन करा कवने सुख पाथे

मत्तगयंद सवैया

कोन करा कवने सुख पाथे
१/
श्वान ह श्वान गधा ह गधा अउ काग ह काग करा सुख पाथे।
हंस ल हंस बिलाव बिलाव ल गाय ल गाय खड़े खजुवाथे।
बाघ ल बाघ सियार सियार ल गिद्ध ल गिद्ध शिकार सिखाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरुखे हर भाथे।
२/
शुद्ध ल शुद्ध अशुद्ध अशुद्ध ल बुद्ध कती अउ बुद्ध तिराथे।
चोर ह चोर सजोर सजोर व ढ़ोर ह ढ़ोर कती ढ़कलाथे।
दुष्ट ह दुष्ट अपुष्ट अपुष्ट व रुष्ट ह रुष्ट मिलै  सम जाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।
३/
लिप्त ल लिप्त अलिप्त अलिप्त ल, दिप्त ल दिप्त चिन्हे सक पाथे।
रिक्त ल रिक्त अरिक्त अरिक्त ल सिक्त ल सिक्त
समोखन जाथे।
भक्त ह भक्त अभक्त अभक्त विभक्त विभक्त मिलै हरसाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।
४/
बैद ह बैद सुजान सुजानिक ज्ञान बढ़ावन खोजत धाथे।
हाँ कवि खोज करै कवि के बुधरंजक आखर ला चबुलाथे।
राग भरे मनखे रंँग बूड़न खातिर सौ परपंच लगाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।

शोभामोहन श्रीवास्तव
२८/०६/२०२१

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट

जहाँ किसन के बंसी बाजत के धुन म पढ़ना हे

परम पूजनीय गुरुदेव श्री अउ के चरन म मूड़ नवावत मंच म बइठे जम्मो पहुना

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट (आल्हा)

नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।
मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।।

चुन्दी में छटके जलबुँदियन,
मोती चटके असन जनात।
बेनीफूल पीठ म ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।

नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय।
मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।

गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात।
चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।

पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल।
बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,
लाली पिंउरी लटकन झूल।।

मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात।
काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।

लुगरा-पटुका लटकत फुँदना,
रगरग ले मन चैन चुरात।
हवय तिहार मनावत आँखी,
दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।

फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात।
रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन,
भुनन भुनन भौंरा मन गात।।

डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।
कन्हिया लटकत करधनिया में,
जड़े जवाहर हीरा लाल।।

नरगर लरलर  गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।
ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।

खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।
मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।।

झनक झनक झन पैजन बाजत,
खनन खनन चूरी खनकात।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया,
फरर फरर अँचरा फहरात।।

मनकेशर डुहरू मा डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।
चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।।

रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात।
फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।।

आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।
पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।।

रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट।
रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।।

शोभामोहन



 






शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ी लोकगीत



दंदरत बिरहिन दुखियारी
 (बिरहा गीत)  

घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
बादर गरजत बड़ भारी। 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन, 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बोंवत घनसुख के क्याँरी।। 

जल बरसत हे झरझर झरझर,
जल बरसत हे झरझर झरझर, 
छमछम ठमकत रुख डारी।
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
गड़गड़ गड़ मेघा मतवारी।।

सरसर सरसर जब पवन करत,
सरसर सरसर जब पवन करत,
फरफर फहरत हे साड़ी।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
दंदरत बिरहिन दुखियारी।।
 
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


कमल फूल तरिया फुलगे राजा

कमल फूल तरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।

आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे।
मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
रायपुर छत्तीसगढ़ मो. 91710 96 309


सिंगार लोकगीत (दादरा) 

साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
लाली के पहिरेंव लुगरिया, सजन चल किजरन जाबो हो।
लाली के पहिरेंव लुगरिया, पहिन चल किजरन जाबो हो। 

चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 

सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 

बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
मो.  91710 96 309

४ चेतौना भजन

सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।

बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
तबले सबके करत कबाड़ा।। 
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
मो. 91710 96 309

५ जीव उड़ात पिया सोरियाथे

जाय पिया कर साध उवे मन, लाग नता मन नाच नचाथे। 
सास हवै मुँहटा कर जावँव मैं कइसे बड़ जीव डराथे।
हाथ धरे ननदी बिलमा जँतली कुरिया बड़ दार दराथे। 
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओखर तो नहीं छाँव खुँदाथे।। 


बीत जथे रतिहा बिरथा दिनमान , सगा मन सीगबिगाथे। 
बाज जथे जब पैजनिया सब लोग सुने बर कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मन के तब चार मंँझार बने सहराथें। 
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा अँगरी ल उँचाथें।

जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे। 

मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर खाय ल दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी त जेठानिन पानी भराथे।। 
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

६ गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे

कलश सजा फूलहार बनावौं।
कलश सजा फूलहार बनावौं।  
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 

गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 


पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।। 
पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।। 
रोरी टीका माथ लगावौं।। 
रोरी टीका माथ लगावौं।। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

दीप जलावौ मंगल गावौं। 
दीप जलावौ मंगल गावौं। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


७ मैं न मरौं मरही ये चोला


पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 


मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला। 

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

८ छत्तीसगढ़ी दोहा


पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।। 


दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।। 

सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप। 
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।। 


उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, थकै जीव हरि छोड़ ।। 


मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घाँस। 
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

९  कोनो न सकिन गुन गाये हो

कोनो न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

बीना बजा सरसतिया गाइन।
लिख लिख के गनपति थर्राइन।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

ध्यान लगा शिव शंकर गाइन। 
परबतिया ला कथा सुनाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

क्षीरसिंधु सुत श्रीहरि गाइन। 
नारद गा नइ मुँह सुखाइन, फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर,

वेद लिखैया ऋखिया गाइन। 
तोर गुन गावत देह तपाइन।। 
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
१०  छत्तीसगढ़ी सुआगीत

तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डंगाली मा सुगना तोर बासा रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहिनिया मंझनिया के संगी तहीं तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
गुर के भेला जइसे सुगना तोर बोली रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
अँगना परछी खोली बाहिर दुनिया सुवना तरी ना रे ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
सोना के पिंजरा मा जीव छटपटाथे सुआ रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

११ सुआगीत

सुआगीत (गौरी गौरा) 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 
गौरी ला जावत बिहाये इसरदेव बम भोले।
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले।
गौरी गौरा ल जगाबो माटी के सुआ बोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

भूतवा परेतवा के संगी गोसैया, 
इसरदेव बम भोले। 
चंदा उजाला मुड़ बिखहर माला, 
छबि ला देख मन डोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

शोभामोहन के छत्तीसगढ़ी लोकगीत

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ी लोकगीत


दंदरत बिरहिन दुखियारी
 (बिरहा गीत)  

घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
बादर गरजत बड़ भारी। 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन, 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बोंवत घनसुख के क्याँरी।। 

जल बरसत हे झरझर झरझर,
जल बरसत हे झरझर झरझर, 
छमछम ठमकत रुख डारी।
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
गड़गड़ गड़ मेघा मतवारी।।

सरसर सरसर जब पवन करत,
सरसर सरसर जब पवन करत,
फरफर फहरत हे साड़ी।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
दंदरत बिरहिन दुखियारी।।
 
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


कमल फूल तरिया फुलगे राजा

कमल फूल तरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।

आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे।
मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
रायपुर छत्तीसगढ़ मो. 91710 96 309


सिंगार लोकगीत (दादरा) 

साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
लाली के पहिरेंव लुगरिया, सजन चल किजरन जाबो हो।
लाली के पहिरेंव लुगरिया, पहिन चल किजरन जाबो हो। 

चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 

सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 

बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
मो.  91710 96 309

४ चेतौना भजन

सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।

बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
तबले सबके करत कबाड़ा।। 
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
मो. 91710 96 309

५ जीव उड़ात पिया सोरियाथे

जाय पिया कर साध उवे मन, लाग नता मन नाच नचाथे। 
सास हवै मुँहटा कर जावँव मैं कइसे बड़ जीव डराथे।
हाथ धरे ननदी बिलमा जँतली कुरिया बड़ दार दराथे। 
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओखर तो नहीं छाँव खुँदाथे।। 


बीत जथे रतिहा बिरथा दिनमान , सगा मन सीगबिगाथे। 
बाज जथे जब पैजनिया सब लोग सुने बर कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मन के तब चार मंँझार बने सहराथें। 
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा अँगरी ल उँचाथें।

जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे। 

मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर खाय ल दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी त जेठानिन पानी भराथे।। 
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

६ गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे

कलश सजा फूलहार बनावौं।
कलश सजा फूलहार बनावौं।  
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 

गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 


पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।। 
पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।। 
रोरी टीका माथ लगावौं।। 
रोरी टीका माथ लगावौं।। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

दीप जलावौ मंगल गावौं। 
दीप जलावौ मंगल गावौं। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


७ मैं न मरौं मरही ये चोला


पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 


मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला। 

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

८ छत्तीसगढ़ी दोहा


पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।। 


दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।। 

सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप। 
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।। 


उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, जीव थकै मूड़ छोड़ ।। 


मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घास। 
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

९  कोनो न सकिन गुन गाये हो

कोनो न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

बीना बजा सरसतिया गाइन।
लिख लिख के गनपति थर्राइन।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

ध्यान लगा शिव शंकर गाइन। 
परबतिया ला कथा सुनाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

क्षीरसिंधु सुत श्रीहरि गाइन। 
नारद गा नइ मुँह सुखाइन, फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर,

वेद लिखैया ऋखिया गाइन। 
तोर गुन गावत देह तपाइन।। 
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
१०  छत्तीसगढ़ी सुआगीत

तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डंगाली मा सुगना तोर बासा रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहिनिया मंझनिया के संगी तहीं तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
गुर के भेला जइसे सुगना तोर बोली रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
अँगना परछी खोली बाहिर दुनिया सुवना तरी ना रे ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
सोना के पिंजरा मा जीव छटपटाथे सुआ रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

११ सुआगीत



शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

छत्तीसगढ़ी फागगीत

छत्तीसगढ़ी फागगीत

१  

 फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 
होरी खेले नंदलाल, पिचकारी रंग लाल।। 
राधारानी ला रंगाये रंगाये रंगाये। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

मन मन मुसकाय, राधारानी हे सधाय।।
कान्हा के रंग मा रंगाये रंगाये रंगाये।। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कान्हा मलत गुलाल, राधा रनिया के गाल।। 
ग्वाला मिरदंगा बजाये बजाये बजाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

सुध बुध ला भुलाय, सब होरीयारा आय।। 
बिधुन नगाड़ा बजाये बजाये बजाये।। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

राधा रानी हे लजात, बान नैन के चलात।। 
कान्हा हावै हुरियाये हुरियाये हुरियाये।। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कोनो हावै भंग खाय, कोनो हावै रंग लाय।। 
फगुवा के रंग मा मताये मताये मताये।। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

माते सबो मतवार, गली पारत गोहार।। 
संगी साथी ला बलाये बलाये बलाये।। 
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


२ फागुन महीना रंग रझरझ बरसा

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 

दाई बनाही पिड़िया अउ अरसा । 
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 

चुकचुक ले रंगे काया के करसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 

भाँग खवैया गिरै मूड़भरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 

सबके हिरदे ला सुघ्घर हरसा। 
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


माते होरी भुलाये घर  के धरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


३ फागगीत (राग हिंडोल वसंत)


*उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।*
*नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंग लगा रधिया गोरी।।* 

*बचत बचत सब भगत गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।*
*गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।*

*बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग जन मन बोरी।*
*बाल जवान अउ बुढ़ुवा मन, लानत हे रंग घोरी।।*

*धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।* 
*शोभामोहन के रंगरसिया, करत जबर बरजोरी।।* 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

*फगुनवा हे(छत्तीसगढ़ी लोकगीत)* 


*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,*

*कद काछनी रंग चटक फगुनवा,*

*बैन नैन के मटक फगुनवा,*

*मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।* 

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*माथा खउरा चंदन फगुनवा,* 

*पागा पागी बदन फगुनवा,*

*नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,*

*मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।* 

*गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।* 

*झुमका झुलत मलंग फगुनवा।।*

*रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।* 

*भुँइया देत अलाप फगुनवा।।* 

*पिया पिया के जाप फगुनवा।।* 

*रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।*

*शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।* 

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल


धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल  


परमदेव भुँइया ला करत हे निहाल।

सायर कस धुन धुन के नत्ता निकाल।।  


तरिया तोपत छछले पुरइन के पान। 

डुहड़ू चरचर ले दिखत लोभलोभान।।

घमघम ले बर पीपर ताने तिरपाल।

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।  


ड़ोंगर ले पझरत रस अमरित के धार। 

रुखराई फर फुलके पोसत संसार।। 

छलकत ढ़ोड़गी नदिया डबरी अउ ताल। 

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


कठल-कठल के हाँसत मोहाये डार।।

दे पराग मेर ओंड़ा भौंरा मतवार।

निरघट चूमत हे कुमुदिनी के  भाल। 

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


रजनीगंधा गमकत महर महर रात।

झाँय-झाँय झिगुर मन करत गोठ बात।।

तरिया में चंदा के झिलमिल भोकाल। 

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


लहसत रुखवा डहर डारा हिलोर।

भेंटत जोहारत हे चकवी चकोर।। 

दँउड़त बन हिरनी हर मारत उझाल।

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


लकरधकर बेरा सुखरतिहा पहात।

सोनहा मछरिया के सेसरा निछात।। 

धेनु चराये बर सँभरत गोपाल। 

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


मिरगापानी पीके पनकत पियास।

उसनिंदा रतिहा ला अँखरत उजास।।

सुरुज आरो लेवत जगत हालचाल ।

धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।। 


शोभामोहन 



देशभक्ति समसामयिक रचना

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।



भारत से प्यारा जिनको  पाकिस्तान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


रोना गरीबी का रोते दिन रात। 

बढ़ती जनसंख्या पर करते ना बात।। 

भारत की गरिमा का जिनको ना ध्यान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


बेरोजगारी का गाते जो गीत। 

मुफतखोरी की भाती जिनको रीत।। 

अकबर बाबर को बताते महान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


श्रद्धा के टुकड़े करता आफताब। 

हत्याओं पर चुप्पी लगती खराब।। 

ताले जड़े जिनकी जिनकी जुबान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


करते हैं लोगों को जो इस्तेमाल।

अब उनकी गलने न पायेगी दाल।। 

भूले जो अपने पुरखों की पहचान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


चूहा बन खोदें जो घर की दीवार। 

भारत के दुश्मन लगते जिनके यार।। 

भारत का खाते गाते पाकिस्तान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


कानूनों से जो हैं करते खिलवाड़। 

उनके धन दौलत को करने कबाड़।। 

बुलडोजर चलाने उनके मकान।।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


आपस में मिलजुल रहो सारे लोग। 

मिट पायेगा तब भयंकर यह रोग।। 

कट्टरता सिखलाने खोले दुकान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।




शोभामोहन श्रीवास्तव 

१५/१२/२०२२



राम भजन के पुस्तक

दसपदी राम स्तुति 


चरण कमल रघुनायक, सुखदायक है। 

नख शिख रुचिर ललाम जय जय राम लला।।१।।


सुर नर ऋषि मुनि पूजत, सुख लेवत है। 

शरण तरण भव पार, जय जय राम लला।।२।।


अटल अमल जगवंदित, विधि रंजित हे। 

प्रबल सबल अविकार जय जय राम लला।३।।

 

धरम-करम शुभ धारक, अरि घालक हे।

अखिल भुवन करतार जय जय राम लला।।४।।


भजन विरत बिसरे तन, जन संतन हे। 

नवल धवल भर भाव, जय जय राम लला।।५।।


मुकुट वसन अति सुंदर हे, मणि मंदिर हे।

करषत लटकत हार, जय जय राम लला।।६।।


झनक कनक मणि करधनी, ध्वनि मोहक हे।

जय जय अवध भुवाल जय जय राम लला।।७।।


तरुण अरुण पद कोमल,धुति उज्जवल हे। 

जय जय नयन विशाल, जय जय राम लला।।८।।


शशि सम मुखमणि उज्जवल, बाहू बल है। 

जय जय उर वनमाल जय जय राम लला।।९।।


दसन वसन रविमंड़ित, जगपंड़ित हे।

तिलक रघुकुल भाल, जय जय राम लला।।१०।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२८/०८/२०२२

शुभस्थान-महुदा 

कृष्ण भगवान के भजन पुस्तक

कृष्ण भगवान के जीवन चरित्र








१.जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
तीनो तिलिक गुसैया जयजय।। 

गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

इन्दर तापनवैया जयजय।।
माखन लूटखवैया जयजय।
अंँगुरी छत्रछवैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

चंदनतिलक लगैया जयजय।
पाग पिरितपगैया जयजय।।
अंतस भावजगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 



धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदय सहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय। 
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

कालीनागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




कृष्णा लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
जय सारथी बनैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




सुंदर सृष्टिसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

जयजय चक्रचलैया जयजय। 
छाती दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगतपलैया जयजय।। 

रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़ेलड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव







२. नंद दसोदा अँगना सुख बरसात है 

१.
घनश्याम रूपधाम कोटिकाम धर नाम,
अनगिन खेल ब्रजभूमि में दिखात है ।
इतरात छिप जातमुसकात मुच मुच,
नंद जसुदा अँगना सुख बरसात है।। 
दँउरत हँफरत भँवरत ब्रज भर, 
नखरा देखात गोप ग्वाल ला रिझात है।
तनसूखा मनसूखा धर के दही चोरात, 
चोरहा ले घलो महाचोरहा कहात हे,





२.


रतजाग अनुराग धनभाग बिरिज के,
देख देख सरग देवता ललचात है॥
नहवात खोरवात फूल हरि ला चढ़ात, 
बिंजन बनात हे कुलक के जेंवात हे।।
प्रीत घोर हाथ जोर रेंगत जे थोर थोर, 
तेने जीव जग ले सहज दुरिहात हे। 
वो चरण वो शरण रहि के शोभामोहन, 
सतलोक के सुख ला धरती में पात हे।।  


शोभामोहन 





















३. भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के

भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के। 
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।।  

ये जगत में लाग नत्ता कोन हे। 
बड़ अकेल्ला ये परेवना सोन हे।।
चाकरी अब छोड़ धन अउ धाम के।। 
भजन कर मन बिरिज पति........

डार रटहा बने कुँदरा तोर हे। 
साँवरे के हाथ जिनगी डोर हे।। 
झन बहाना कर तैं बूता काम के। 
भजन कर मन बिरिजपति....

शोभामोहन श्रीवास्तव 


४. मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे
 

हरि के बनाय देह,हरि के जगत गेह।
हरि के पदारथ ला हरि ला चढ़ाय रे।
हरि जगसुख सोती,हरि जग जीव जोती।
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे।
हरि ले मिलन बर, भज सुमिरन कर।
हरिच के अंश जीव हरि में समाय रे। 
एको छिन गँवा झन, मया गढ़ा मने मन। 
जग जब मनखे के चोला धर आय रे।  

शोभामोहन 







तोर हाड़ा हपट के जोरे सब चीज बस, 
नाशवान तभो ले हवस बइहाय रे। 
गजब डउल कर फुनगी मा पहुँचेस, 
खसले के डर फेर जीव में समाय रे। 
रचेस सजन संग मिलन जुलन खेल, 
मिलन के संग फेर बिरहा लिखाय रे।
चटक-मटक चरदिनिया जिनिस बर, 
ओंड़ा दे तैं हरिनाम रहे बिसराये रे।  

शोभामोहन 




५. मोहना तोर मुरली टोना भरे  

मोहना तोर मुरली टोना भरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
धुन सुन के बछरु गैया चरे।
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।।  

सुन रुखराई फहर फहरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
बिगन सुने धुन कल नइ परे।
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  

सुन जमुनाजल लहर लहरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
ग्वालिन के ये करेजा कतरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  

शोभामोहन


६. सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन। 

सुन्ना गली अउ गाँव, सुन्ना हे कदम छाँव, 
सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन। 
सुन्ना जमुना के घाट, सुन्ना हे बजार हाट, 
सुन्ना-सुन्ना नैन रैन नंद के किशोर बिन। 
सुन्ना अमरइया हे, सुन्ना सेज शय्या हे। 
सुन्ना हे बिरिज बन नंदलाला सोर बिन। 
सुन्ना कोठा चुप धेनु, ब्रज बिन ध्वनि बेनु, 
सुन्ना संझा मँझनिया सुन्ना अउ भोर हे।।  

शोभामोहन 





७. हरि बोल रसना 

माया के नगरिया फोकट झन फँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
मोह ममता के गरी नरी झन कस ना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
अँगरी उँचा कहूँ न कहूँ झन हँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
मन मा सुरुज उवा घरिया के दसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
जतका दिन लिखाये इहाँ तोर बसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
शोभामोहन भेड़ी धसान झन धसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 

शोभामोहन


८.नंदलाल खेलत होरी(राग हिंडोल वसंत)  

उड़त गुलाल गली गोकुल के,
नंदलाल खेलत होरी।
नंगत हे हुड़दंग मचावत,
रंगत नंगत सब गोरी।। 

बचत बचत दँउड़त हे गुवालिन,
रंग बरसत सब ओरी।
गाल गुलाल गुवाल लगावत,
दल बल टोली जोरी।। 

बाजत माँदर नाल नगाड़ा,
रस रंग रंजक बोरी।
बुढ़ुवा बाल जवान जमोझन,
लानत हे रंग घोरी।। 

धरनी में सुख परम अलौकिक,
लूटत बिरिज किशोरी।।
शोभामोहन के गोसैया,
करत जबर बरजोरी।। 

शोभामोहन












९.
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे


सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।

मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा।
कदकाछनी रंगचटक फगुनवा।
बैन-नैन के मटक फगुनवा।
मूड़ में पीक मँजूर कुंडल,
गरहार फगुनवा हे।।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।

माथा खउरा चंदन फगुनवा।
पागा पागी बदन फगुनवा।
नंदनंदन सुखसदन फगुनवा।
मोती मणि माणिकमाला,
उजियार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।। 

चोली चुंदरी रंग फगुनवा।
गाँठ बँधाये संग फगुनवा।
झुमका झूल मलंग फगुनवा।
रुनुक झुनुक पैजन चूरी,
झनकार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।। 

ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।
भुँइया देत अलाप फगुनवा।।
पिया पिया के जाप फगुनवा।।
रंगत रंग ब्रज अपन संग,
सरकार फगुनवा हे।।
शोभामोहन जिनगीधन,
करतार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।।

शोभामोहन



१०. तेमा सुते ललना 

सोनहा महलिया के सोनहा अटरिया मा,
सोनहा मियार मा बँधाये हावै पलना।
सोनहा थाम्हन खंभा सोनहा जबर दासा,
सोनहा ड़ाँड़ी पटनी पाटे सोन बल ना।
सोनहा सँकरी कड़ी दिये हे झुलाये बर,
सोनहा बेलबूटा किनारी छेंका छलना।
सोनजड़ी फुँदना के दसे छतरँगिया हे,
सेम्हर गदिया दसे तेमा सुते ललना।
सोनहा बेरा घड़ी हे सोनहा हे अवसर,
सोनहा चँवर दाई झालत हे झलना।
सोनहा सुअवसर पाये तै शोभामोहन,
नाम गुन गाये बर चिटकोन हल ना।। 





फूल झेला नंदलाल, ब्रज नैन उजियाल,
फूल के हिंडोलना दाई सुतात ललना ।
दुलरुवा गोप ग्वाल, देख होत हें निहाल,
खेलत पटक गोड़ झुलना उझलना।
फूल के चँवर झाल, जसुदा छूवत गाल,
गम न मिलत बेरा दिन रात ढ़लना।
लीला करे बर बाल, दुष्टन के बन काल,
शोभामोहन के स्वामी आये हे भूतल ना । 

शोभामोहन







अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी, मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना, निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती, असन जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

आनी बानी, बाट बेंझानी, गोड़ अड़ानी, झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

साध जगा मन, शोभामोहन, अधम उधारन,अरज लगाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

शोभामोहन



मणि जड़ाय सोन थार,दियना रिगबिग मँझार।
मंगल करसा सँवार, धर धर नर नारी।
मन हुलास बहत धार, बोलत जय बार बार,
रंग रंग के कर सिंगार, खड़े हें दुवारी।।
घंटा घन घनन घोर, झालर झन झन झकोर,
सुन भीजत पोर पोर, गदगद हिय भारी।।
दमउ दफड़ा दमोर, छन्न छन्न छन्न शोर,
भँवरत माते विभोर, कुलक जात वारी।।
चूमत निच्चट निहार, गिंधिया गिंधिया दुलार, 
शोभामोहन अधार, जनमे बनवारी। 

शोभामोहन श्रीवास्तव



बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

अठतल्लागढ़ महल अटारी,
ईश चलात अटाला। 
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

पहिलीतल्ला रूप विषय के,
मोती अउ मणिमाला।
दूसर तल्ला धन दौलत के,
छाये मेकरजाला।।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

तीसरतल्ला पद गरिमा दे,
गोभत गरब के भाला।।
चौथातल्ला सुखप्रद अन्नो,
सुख बगराने वाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

पंचमतल्ला निर्मल हिरदे,
हे बरसात सुधा ला।
छट्टमतल्ला राखे रिधिसिधि,
जोग भठाये चाला।
बइठे ऊपर तल्ला माया रचत निराला । 

सप्तमतल्ला दिव्यज्योति के,
चारोखुँट उजियाला।
शोभामोहन आठवाँतल्ला,
जाये कर जोरा ला। 
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

शोभामोहन श्रीवास्तव


गर बनमाल सजैया खोजौं ।
चंदन तिलक लगैया खोजौं।। 

दसमत फूल खोचैया खोजौं ।
महर महर ममहैया खोजौं । 

बन बन धेनु चरैया खोजौं।
मधुबन रास रचैया खोजौं ।। 

गगरी फोर लुकैया खोजौं ।
गोपी नाच नचैया खोजौं ।। 

ग्वालिन चीर चुरैया खोजौं ।
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ।। 

बंशी मधुर बजैया खोजौं ।
पाँख मँजूर लगैया खोजौं।


करत हवय चुलकाय असन

हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन ।

तोर बिगन ए कंचन काया
रहय पिया अइलाय असन ।

सब पीरा के मान होत हे ,
लागत नही पिराय असन ।

हाथ धरे हस जब्बर तँय हा ,
दुनिया करय गिराय असन ।।

हाँसे थूँके चाल चलन ला
होवत जमो थिराय असन ।

मन के भाव मा पाला परगे ।
होगे चेत हराय असन ।

कोंवर भाव मा करा गिरत हे,
छाती लगत चिराय असन ।

चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुँचत बताय असन।

सेंदुर लगे बिहिनिया सँझा,
करत हवँय चुलकाय असन।

नरी रुँधागे अब का बोलँव,
सुध करत हुरियाय असन।

मन में संसो सँचरत सरभर
जिनगी सासँ हराय असन ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

जयकारी छंद 

बिरहिन राधा के गोहार

अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया। 

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे। 
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।। 
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया। 

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया। 

शोभामोहन


कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै 

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।। 
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

रहि रहि बादर बिजली चमके। 
मन डर्राये बिगन सजन के।। 
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

मन चुलहा मा धधकत आगी । 
आके जीव कर दे बड़भागी।। 
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

शोभामोहन 



बिरहिन राधा गोहार

कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।

कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।। 
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।। 
काला करलई कहौं मनबसिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना। 
उड़त अगास देख पंछी परेवना।। 
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

शोभामोहन


गिंया-गड़ी गीत

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।। 
जानथस का बता मोर तो बाली उमर, 
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे। 

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं। 
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे। 
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया। 
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

कइसे काला कहौं रात के बात ला, 
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन, 
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै, 
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन, 
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर, 
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले, 
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

शोभामोहन 


आँखी खोजत माखनचोर

गुड़ी करत हे चारी मोर। 
पूछत हे महतारी मोर।। 
घेरीबेरी ओखी जोर, 
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।। 
दिखत नइ हे ओकर छाँव। 
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।। 
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।। 
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन 

झन तो बरस अतका रे बादर

झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-डबरी मिलन करत अउ, 
नदिया समुन्द समागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

घोपेघटा मयूरा नाचत,
रुख में लता लपटागे। 
मंदबयार उड़ावत अँचरा,
बिरहिन मन दुखछागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

जइसे-तइसे बेर कटत अउ, 
रतिया फाँस धँसागे।
दसदिश ये मन जेला खोजत, 
बहुरन बाट भुलागे ।।
झन तो बरस अतका रे बादर

शोभामोहन 




तलफत मन हर, तोर दरसन बर, 
 बही भुतही असन। 

बिरहिन राधा के गोहार

अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया। 

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे। 
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।। 
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया। 

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया। 

शोभामोहन


कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै 

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।। 
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

रहि रहि बादर बिजली चमके। 
मन डर्राये बिगन सजन के।। 
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

मन चुलहा मा धधकत आगी । 
आके जीव कर दे बड़भागी।। 
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

शोभामोहन 



बिरहिन राधा गोहार २

कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।

कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।। 
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।। 
काला करलई कहौं मनबसिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना। 
उड़त अगास देख पंछी परेवना।। 
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

शोभामोहन


गिंया-गड़ी गीत

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।। 
जानथस का बता मोर तो बाली उमर, 
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे। 

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं। 
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे। 
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया। 
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

कइसे काला कहौं रात के बात ला, 
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन, 
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै, 
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन, 
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर, 
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले, 
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

शोभामोहन 


आँखी खोजत माखनचोर

गुड़ी करत हे चारी मोर। 
पूछत हे महतारी मोर।। 
घेरीबेरी ओखी जोर, 
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।। 
दिखत नइ हे ओकर छाँव। 
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।। 
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।। 
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन 

झन तो बरस अतका रे बादर

झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-ड

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...