छत्तीसगढ़ी फागगीत
१
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
होरी खेले नंदलाल, पिचकारी रंग लाल।।
राधारानी ला रंगाये रंगाये रंगाये।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
मन मन मुसकाय, राधारानी हे सधाय।।
कान्हा के रंग मा रंगाये रंगाये रंगाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
कान्हा मलत गुलाल, राधा रनिया के गाल।।
ग्वाला मिरदंगा बजाये बजाये बजाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
सुध बुध ला भुलाय, सब होरीयारा आय।।
बिधुन नगाड़ा बजाये बजाये बजाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
राधा रानी हे लजात, बान नैन के चलात।।
कान्हा हावै हुरियाये हुरियाये हुरियाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
कोनो हावै भंग खाय, कोनो हावै रंग लाय।।
फगुवा के रंग मा मताये मताये मताये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
माते सबो मतवार, गली पारत गोहार।।
संगी साथी ला बलाये बलाये बलाये।।
फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
२ फागुन महीना रंग रझरझ बरसा
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
दाई बनाही पिड़िया अउ अरसा ।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
चुकचुक ले रंगे काया के करसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
भाँग खवैया गिरै मूड़भरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
सबके हिरदे ला सुघ्घर हरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
माते होरी भुलाये घर के धरसा।
फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
३ फागगीत (राग हिंडोल वसंत)
*उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।*
*नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंग लगा रधिया गोरी।।*
*बचत बचत सब भगत गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।*
*गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।*
*बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग जन मन बोरी।*
*बाल जवान अउ बुढ़ुवा मन, लानत हे रंग घोरी।।*
*धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।*
*शोभामोहन के रंगरसिया, करत जबर बरजोरी।।*
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
*फगुनवा हे(छत्तीसगढ़ी लोकगीत)*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,*
*कद काछनी रंग चटक फगुनवा,*
*बैन नैन के मटक फगुनवा,*
*मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*माथा खउरा चंदन फगुनवा,*
*पागा पागी बदन फगुनवा,*
*नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,*
*मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।*
*गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।*
*झुमका झुलत मलंग फगुनवा।।*
*रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।*
*भुँइया देत अलाप फगुनवा।।*
*पिया पिया के जाप फगुनवा।।*
*रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।*
*शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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