गौरी गौरा गीत
जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा,गली चलत तुँहरे बात हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा,माथ में मकुट खपाव हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, कंकनमउर बँधाव हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, पानीगरहन कराव हो।।
जागौ जागौ गौरी गौरा,जागत जागत गाँव हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा,दरसन के तुँहरे आस हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा,जनमजनम के प्यास हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, लइका तुँहर जुरियात हो।
जागौ जागौ गौरी गौरा, गाँव गोहर लगात हो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Sunday, 8 June 2025
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शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
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गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
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