Wednesday, 17 September 2025

जुग जुग जियो!!!!!

जुग जुग जियो!!!!! 

जुग जुग जियो अपन करम ले, हे भारत माता के लाल।
रचत हवौ इतिहास नित नवा, बैरी चित कर देश संभाल ।। 

जे दिन राजतिलक होइस हे, संसद चौखट माथ नवाय। 
जिहाॅं गये सम्मानित होये, भारत के गुन गौरव गाय।। 
अन-जल देके अउ घर देके, दुखिया के टारे संताप। 
फँदा कसे देशद्रोही बर, राखे हस टोंटा ला नाप।। 
देश बचाये धरम बचाये, सरलग चलावत हस अभियान । 
सदियों ले दुबके मनखे के, तहीं जगाये हस स्वाभिमान।। 
चारो मूड़ा डंका बाजत, अब तो जब्बर भारत देश। 
कूटनीति चाणक्य असन हे, कुटथस फेर रोन नइ देस । 
त्रस्त करे हस पस्त करे हस, ध्वस्त करेस अदिदल जंजाल। 
टूलकीट मन थर खागे हें, नहीं चलत हे उनकर चाल ।।
शास्त्री ले शास्त्रार्थ करे अउ, घेरीबेरी करे जोहार।
सठ के सब हेरसट्ठी हेरे, बज्र बरोबर करे प्रहार। 

अज्ञानी ला ज्ञान धराये, दे विज्ञानी आदर मान । 
जल थल नभ घर ध्वज फहराये, राष्ट्र प्रथम करके आह्वान।। 
भारत के निश्छल जनता ला, बने चिन्हाये हस गद्दार ।।
भारत के जनता गुन गावत, जुग जुग जियौ आप सरकार । 

शोभामोहन श्रीवास्तव 

अर्थ :-हे! भारत माता के लाल आप अपने कर्मों के माध्यम से युगों युगों तक जीवित रहेंगे, आप नित्य नवीन इतिहास रचयिता हैं, और आंतरिक बाह्य बैरियों को चित करके कुशलतापूर्वक देश को संभाल रहे हैं। 

जिस दिन राजतिलक हुआ, उस दिन आपने संसद भवन के चौखट को प्रणाम किया, आप विश्व के जिस देश में गये, वहाँ सम्मानित हुए, आपने सदैव भारत की गौरव गाथा को विश्व समुदाय को सुनाया। 

आपने अन्न जल और घर देकर दीन दुखियों के दुख संताप को मिटाया है, और देशद्रोहियों को नियमों के फँदे में कसने के लिए उनके गले का नाप ले लिया है। 

देश और धर्म की रक्षा के लिए आप सतत अभियान चला रहे हैं, और सदियों-सदियों से दबे कुचले मनुष्यों के भीतर आपने ही स्वाभिमान जागृत किया। 

अब तो इस बलवान प्रज्ञावान भारतदेश के नाम का डंका चारो दिशाओं में बज रहा है, आपके कूटनीति में चाणक्य जैसा प्रभाव है, आप कूटनीति के माध्यम से कुटाई करते हैं किंतु रोने नहीं देते हैं। 

आपने शत्रुओं को त्रस्त पस्त किया है और उनके रचे हुए मकड़जाल जंजाल को ध्वस्त किया है। अब विदेशी टूलकीट कठपुतलियाँ आपके कठोर निर्णयों से थर्रा रहे हैं, और उनकी कोई भी चाल आपके आगे चल नहीं पा रही है। 

आप शास्त्री पंडितो से पांडित्यपूर्ण विमर्श करते हैं, और उनका हृदय से अभिनंदन करते हैं, और दुष्टों की सारी दुष्टता को निकालने बज्र के समान प्रहार करते हैं। 
आपने अज्ञानियों को ज्ञान धारण कराया, विज्ञानियों को समुचित आदर सम्मान दिया, और राष्ट्र ध्वज को जल थल नभ और घर घर में फहराकर राष्ट्र प्रथम का भाव जन जन में जगाने के लिए विनीतभाव से आह्वान किया। 

भारत के निश्छल जनता को आपने  देश के विरुद्ध षडयंत्र करने वाले भारतद्रोहियों का ठीक ठीक पहचान कराया है, इसीलिए भारत की जनता आपका गुणगान और जयजयकार कर रही है, आप जुग जुग जियो भारत के सरकार ।


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Tuesday, 16 September 2025

महल सुहावन लागे नगर सुहावन लागे

महल सुहावन लागे हो, नगर सुहावन लागे ।
दुलही दुलारी के मड़वा, गजगजावन लागे।।
करसा के पानी में हरदी भिंजोये।
हरदी कुचर पीस पीस तेल मोये।।
गोबर लिपावत मड़वा, चउँक पुरावन लागे।
मोती झालर खाल्हे आमा के डारी।
अँचरा देवत काकी बड़ी महतारी।।
दाई माई मन खाल्हे मड़वा, आँसू बोहावन लागे।

Friday, 12 September 2025


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डुँहड़ू मन हर फूल बनत हे, मौसम हर पगलागे हे।
गाँव गिंजर बारा महीना में, फेर बसंती आगे हे।

साध सधौरा के डारी मन, ड़ुहड़ागे डँड़ियागे हे।

चंदा आय नहाये तरिया, संग चँदैनी भागे हे।

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डुँहड़ू मन हर फूल बनत हे, मौसम हर पगलागे हे।
गाँव गिंजर बारा महीना में, फेर बसंती आगे हे।

साध सधौरा के डारी मन, ड़ुहड़ागे डँड़ियागे हे।

चंदा आय नहाये तरिया, संग चँदैनी भागे हे।

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घर आगे हे रनबीर मोर

बैरी मुसुवा कस भूँज भूँज ।
ध्वनि ड्रोन मिसाइल गूँज गूँज।।
बैरी के छाती टोर-टोर।
घर आये हे रनबीर मोर ।।

बैरी के छाती छोल छोल।
भारतमाता जय बोल बोल।।
रनभुँइया में कर युद्ध घोर। 
घर आये हे रनबीर मोर ।।

Wednesday, 3 September 2025

विदेशी चालों से इस देश को बचाइए।

विदेशी चालों से इस देश को बचाइए।

१.
विदेशी ऐजेन्सियों विदेशी सब ऐजेन्टों से,
विदेशी चालों से इस देश को बचाइए।
विदेशी नेता विदेशी वोटर विदेशी सोच,
विदेशी टूलकीट को समझ भी जाइए।
विदेशी माल के मायाजाल से बाहर आने,
विदेशी कंपनियों से दूरियाँ बनाइए।
विदेशी पाखंड भरे मूर्खताओं से निकल,
भारतीय संस्कृति सभ्यता अपनाइए।। 

Monday, 1 September 2025

तोला देख जीव धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

मन अँगना में चँउक पुरागे । 
तोरन झालर रुनझुन झागे ।।
तैं आये तौ मन हरियागे ।
सब सुखसुम्मत संगे आगे।। 
फुरफुन्दी कस बादर कोती, मन उड़ात हे धरके पाँखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

आस हेराये मन ला मोहत ।
बोधावत हे सजवन सोहत।।
मैं पपीहा कस तोला जोहत ।
राख तहीं हर अब प्रियतम पत ।
मरत रहेंव सुरता कर करके, आके जिया दियेस गउ साखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

गुनगावैया मैं तोर चारण।
तैं हर मोर जिये के कारण।
तहीं उपास तहीं मोर पारण।
मैं हर नार तहीं रूख धारण ।।
मोला काम तोर ले हावय, आग लगै ये दुनिया बाकी।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।


शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०९/२०२५

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...