Thursday, 30 November 2023

दूरदर्शन से प्रसारित रचनाएँ दीपावली ( माहिया छन्द)

दूरदर्शन से प्रसारित रचनाएँ ( माहिया छन्द) 

यह भारत मेरा है,

जिसमें त्यौहारों का
पग पग पर डेरा है।।

वनवासी घर आये,
जगमग दीप चले,
आनंद उत्सव छाये।।

सिय राम लखन भ्राता,
अवधपुरी आये,
हर्षित तीनों माता।।

घर घर रंगोली है,
अनगिन व्यंजन हैं,
और हँसी ठिठोली है।।

राउत नाचा नाचें,
सजधज सड़कों में,
झूमें दोहा बाँचें।।

शुभ दीप जलाते हैं,
हम सब मिलजुलकर,
त्यौहार मनाते हैं।।

सब सजधजकर आये,
फोड फटाकों को,
बच्चे बड़े इतराये।।

छूटी फूलझड़ियाँ हैं,
खुशी मनाने की,
आई शुभ घड़ियाँ हैं।।

त्यौहार निराला है,
लिपे पुते घर हैं,
सर्वत्र उजाला है।।

जय जय लक्ष्मी माता,
तुम ही सुख समृद्धि,
धन वैभव की दाता।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

दीप अनगिन जल रहे हैं।
और तम को छल रहे हैं।।
महल झोपड़ी आज जगमग,
दुख निराशा गल रहे है।।


आया दीपोत्सव त्यौहार
दीपो से जगमग संसार।

धरती झिलमिल प्रकाश।
रंगों से रंगा आकाश।।
खुशियों में डूबा परिवार।।
आया दीपोत्सव त्यौहार।

बच्चे आनंद में डूब।
चलायें फटाके खूब।।
खुशियों की लगी है कतार।
आया दीपोत्सव त्यौहार।।

सजी दीपों की कतार।
लगे द्वारे बंदनवार।।
लक्ष्मीपूजन शुभदिन वार।
आया दीपोत्सव त्यौहार।।


शोभामोहन श्रीवास्तव

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट( आल्हा छन्द)

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट 



नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।

मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।। 

चुन्दी में छटके जलबुँदियन,मोती चटके असन जनात।

पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।

नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय। 

मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।

गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात। 

चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।

पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल। 

बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,लाली पिंउरी लटकन झूल।। 

मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात। 

काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।

लुगरा-पटुका लटकत फुँदना, रगरग ले मन चैन चुरात।

हवय तिहार मनावत आँखी, दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।

फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात। 

रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन, भुनन भुनन भौंरा मन गात।।

डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।

कन्हिया लटकत करधनिया में, जड़े जवाहर हीरा लाल।।

नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।

ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।

खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।

मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।। 

झनक झनक झन पैजन बाजत, खनन खनन चूरी खनकात। 

धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया, फरर फरर अँचरा फहरात।।

मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।

चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।। 

रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात। 

फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।। 

आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।

पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।। 

रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट। 

रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।। 

शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार। 

मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।। 


शोभामोहन 

रूप बचै न बचै सुघराई मत्तगयंद सवैया

देह खिरै जग घूमत-घामत, रूप बचै न बचै सुघराई।
मान बचै न गुमान बचै सुन,  ज्ञान बचै न बचै चतुराई।
बाप बचै न धिया सुत साजन, मातु बचै न बचै सग भाई।
तेन घड़ी बस एक सहायक, छाहित रूप बचै रघुराई।

शोभामोहन

५१ से ६१ छत्तीसगढ़ी लोकगीत


5१/मन ला घलोक मांज गड़ी 


मन ला घलो मांज गड़ी 

पईरी बीछीया धोवत धोवत 


मया मीले ते लान लेबे 

मया मीले ते लान लेबे 

मया मीले ते लान लेबे हंटरी हाट होवत होवत 

मन ला घलो मांॅज गड़ी पईरी बीछीया धोवत धोवत 


झन जा गड़ी पयडगरी 

झन जा गडी पयडगरी 

झन जा गड़ी पयडगरी , काॅंटा खूॅंटी बोंवत बोंवत 

मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत 


कहाॅं जाबे सांझ बेरा 

कहाॅ जाबे सांझ बेरा 

कहाॅं जाबे साझ बेरा कही तो भला रोवत रोवत 

मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत 


अपनो बर कर ले कूछू 

अपनो बर कर ले कूछू 

अपनो बर कर ले कूछू , बाठ कखरो जोहत जोहत 

मन ला घलो माॅंज गडी , पईरी बीछीया धोवत धोवत 


लहरा ले जीनगी संग 

लहरा ले जीनगी संग 

लहरा ले जीनगी संग , ड़ोगी ला खोवत खोवत 

मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत 


५२/बरसाती गीत 


गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा 

धान पान बोंये के हड़बड़ी होगे गा 


बईठे के सूस्ताय के , थीराये के नही हे 

ओखी घेरी बेरी घर जाय के नहीं हे 

दसना हमर गोल खटीया खड़ी होगे गा 

गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा


अता तता उवत बूड़त होगे नांगर बईला 

तन मन ओग्गर होगे , माटी में मईला 

हाथ गोड़ हमर गड़गड़ी होगे गा 

गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा 


५३//सोन चीरईया 


मय रहवासी नीक ममहाती भूंईया के 

सूघ्घर सोन चीरईया के 


मय बहीनी अंव गूनी धूनी मूनी भईया के 

सूघ्घर सोन चीरईया के 


फरे फूले लहसे डारा अंव 

सबके घर सबके पारा अंव 

मय कोईली बासन अंव रूख अमरईया के 

सूघ्घर सोन चीरईया के 


परभू के पाॅंव पखारल पानी 

दया मया के मय रजधानी 

मय संगवारी गोकूल कीसन कन्हईया के 

सूघ्घर सोन चीरईया के 


रास मही रस सरबस मय रे 

संगी बईरी बरकस मय रे 

सरग बरोबर कोरा हे मोर भूंईया के 

सूघ्घर सोन चीरईया के 


५४//बादर बरदानी 


झीमीर झीमीर गीरे रे पानी

झीमीर झीमीर रे झीमीर झीमीर , 

बादर हावय रे बड़दानी 

सूमीर सूमीर रे सूमीर सूमीर 

झीमीर झीमीर गीरे रे पानी 

झीमीर झीमीर रे झीमीर झीमीर 


कूटकी कोदो धान बोंआगें 

धरती के कोरा हरीयागे 

सूते कीसान के भाग हा जागे 

भंूईया हा दूलही कस लागे 

मन के अंगना आस दीया बरे 

टीमीर टीमीर रे टीमीर टीमीर 


खेत बीयारा कोठी भराही 

मेला मड़ई तीहार सूहाही 

बर बीहाव घलोक मताही 

सूख हा चारो कोती ले आही 

टूरा नाचही टूरी करही

गीजीर गीजीर रे गीजीर गीजीर 


५५/कहाॅं बिलम गे रें 


हाॅं बिलम गे रे कहाॅं बिलम गे ना 

कहाॅं बिलम गे करिया बादर 

कहाॅं बिलम गे नदियाॅं

कहाॅं बिलम गे सीता माई 

कहाॅं बिलम गे रधिया 

कहाॅं बिलम गे राम रमऊवा 

कहाॅं बिलम गे कन्हईया 

कहाॅं बिलम गे मया मतवना 

कहाॅ बिलम गे मनईया 

कहाॅं बिलम गें रे कहाॅं बिलम गे ना 

कहाॅ बिलम गे सगा सोदर सब 

कहाॅं बिलम गे बलईया 

कहाॅ बिलम गे दया मया अऊ 

कहाॅं बिलम गे बनईया 

कहाॅ बिलम गे रे कहाॅ बिलम गे ना 

कहाॅं बिलम गे बहीनी जाके 

कहाॅं बिलम गे भईया 

कहाॅ बिलम गे मया के सूतरी 

कहाॅ बिलम गे चिन्हईया 

कहाॅ बिलम गे कहाॅं बिलम गे ना 

कहाॅ बिलम गे रूख राई मन 

कहाॅ बिलम गे छंॅंईहा 

कहाॅं बिलम गे गाॅंव गॅंवई अऊ 


कहाॅं बिलम गे गॅंवईहा 

कहाॅं बिलम गे रे कहाॅ बिलम गे ना 


५६//कुछू करले रे सूवना 

अभी कस डेरा अभी कस बेरा 

कहाॅ पाबे 

कूछू कर ले रे सूवना 

ये गली मूॅंहाटी , धरे चोला माटी 

कहाॅं आबे 

कूछू कर ले रे सूवना 

अईसन अनपानी , दीये जेला दानी 

कहाॅं खाबे 

कूछू कर ले रे सूवना 

गूरू गीयानी , अमरीत बानी 

कहाॅ पाबें 

कूछू कर ले रे सूवना 

अभी कस डेरा , अभी कस बेरा 

कहाॅं पाबे 

५७//सतरंगीया मन पाल तनागे 


बईठ बरंेंडी कॅंऊवा बोलीस 

तोर आय के सगून जनागे 


पींवरी धोवाये आवत हांेबे 

सतरंगीया मन पाल तनागे


मऊर गे हे सपना चरचर ले 

अंतस अतेक हूलास अमागे 


तोर सूध बही बनाथे सीरतोन 

बूध सीरागे , चेत हरागे 


ओधत तोर तीर ये परीया 

भूंईया कस जीनगी हरीयागे 


जम्मो साध धूरूवा में फटके 

मयापरस पाये उम्हींयागे 


सूखदेवा तोर सूरता संवरीया 

आजा आॅंखी में बादर छागे 


५८//कईसे रेंगे रे रंेगईया


कोन बाठ रेंगे करे हावस करार तंय 

अऊ कईसन पयडगरी रेंगे रे रेंगईया 


रेंगथस चीन्हार छोंड़ , देख के चीन्हा गोड़ 

कतको अन्जान पाछू रेंगे रे रेंगईया 


बीखहर तोर गोड़ रे , अगोड़ रे पीछोड़ रे 

बाठ न घर जाय कईसे रेेंगे रे रेंगईया 





५९//चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरीया 

चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया 

चलो चलो नदियाॅं , चलो चलो तरिया 

चलो चलो सतरंग , बादर करिया 

दाई मोर भरही तुंहर गगरिया 

चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरिया

चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया 


चलो चलो दुखीया चलो चलो सुखिया 

चलो रे सहज जमो , चलो चलो मुखिया 

सबो बर दाई के अॅंचरा के छंईहा 

चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरिया 

चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया 


५९//जोगीया जागे हे नवरात हो दाई मोर 

जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं 


जोगीया जागे रात रात भर 

जोगनी जागे दिन रात हो माया मोर 

जोगीया जागे हे नवरात हो माया मोर 

जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं 


जोगीया लाने तेल अऊ बाती 

जोगनी जलाये तोर जोत हो माया मोर 

जोगीया जागे नवरात हो दाई मोर 

जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं 


जोगीया चूपरे तो भभूती 

जेागनी धरे तोर हाथ हो माया मोर 

जेागीया जागे नवरात हो दाई मोर 

जेागनी जागे हे नवरात हो माॅं 


जोगीया साधय जप तप करके 

जोगनी चरन धर रोत दाई मोर 

जोगीया जागे नवरात हो दाई मोर 

जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं 
६०/

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी रे ना।।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डँगाली गड़ी सुगना के बासा रे तरी नारी ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
गुरभेला कस गड़ी सुगना के बोली रे तरी नारी ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहनिया मंँझनिया के संगी उही, तरी नारी रे ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
अँगना में चारा चरै परछी फुदकै ना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
सोने के पिंजड़ा में जीव छटपटावै ना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।

शोभामोहन श्रीवास्तव
०८/०९/२०२३


६१/बिहावगीत
दाई तोर अँगना में, गोमची के नार घन,
छछले घोलारे गहदाय।
कोन सहर ले दुलरू अउ बरतिया आये  ।
गोमची ला बरे अउ बिहाय।।

४१ - ५० छत्तीसगढ़ी लोकगीत

४१/
दुखहरनी दुर्गा रूपधर,भुँइया करत निहाल हे।
नवरात्रि परब के धूम हे, गाँव गली उजियार हे।। 

मणिमोती मउर मुकुट सजे, चमचम चमक सुहात हे।
रबिसरीख रूपबखान बर, भाखा नइ मुख आत हे।।

ककनी चूरी पटली पटा, सोने सोन सिंगार हे।
मुँदरी सुंदर चुंदर चटख, दुलरी तिलरी हार हे।। 

झुमका झमाझम झूल झक, बेनीफूल गुँथाय हे।।
रगरग ले नथिया ओंठ अउ, माँगपटिया लगाय हे।।

मनमोहत सोहत करधनी, लर लटक लक झूल हे।
गर पुतरी सूर्रा ले सजे, माला दसमत फूल हे।। 

कर में त्रिशूल तलवार धर, बघवा में चढ़ आत हें। 
सब देव छेंव ले फूल ला, गाके गुन बरसात हें। 

 शोभामोहन

४२
नवरात्रि आये दाई (ददरिया) 


नवरात्रि आये दाई, क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


जाबो महमाई सतबहिनिया के ठाँव ।
तरियापार मातादेवाला के पर लेबो पाँव।।
नवरात्रि आये दाई क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


माईघर खोली सत्ती के चँवरा ओ ओ ओ। 
कुलदेवी ला चढ़ाबो अठवई बबरा।। 
नवरात्रि आये दाई क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

१४/०६/२०२२ 

४३/ बिहावगीत

कोन बारी फूलै फूल हरदी, कोन बारी फूलै फूल हरदी।
कि कोन बारी फूले दूबी घास।
कोन बारी फुलै फूल सुपारी। कोन बारी फुलै फूल सुपारी।
कि कोन बारी भिरहा के बाँस।।

ददा बारी फूलै फूल हरदी, ददा बारी फूलै फूल हरदी।
कि कका बारी फूल दूबी घास।
भइया बारी फुलै फूल सुपारी।
कि बड़ा बारी भिरहा के बाँस।।

कोन लाने खन कोड़ हरदी, कोन लाने  खन कोड़ हरदी।
कि कोन लानै फूल दूबी घास।
कोन लाने टोर के  सुपारी। कोन लाने टोर के  सुपारी।
कि कोन काटे भिरहा ले बाँस।।

ददा लाने कोड़ खन हरदी, ददा लाने कोड़  खन हरदी।
कि दाई टोरे फूल दूबी घास।
कका लाने टोर के  सुपारी। कका लाने टोर के सुपारी।
कि भाई काटे भिरहा ले बाँस।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

४४/करमागीत छत्तीसगढ़ी

आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
ढमकढमकढम्म माँदर बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
करधन लटकन साजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
छुनुरछुनुर घुँघरूसाँटी बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
खनरखनर चूरी चूरा बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
चंदासुरुज रूप देख लाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
झललमलल अँचरा उड़े आजे,
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
रास राधागोपी नाचे।
माँझ पिया मोहना बिराजे।
रास राधागोपी नाचे।
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
शोभामोहन धन्य होगे आजे।
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।

शोभामोहन
महुदा

४५/करमागीत

गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
धिड़कधिड़क माँदर बाजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
पिंयर पिंयर लुगरा हे साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
नथली झूलझुमका हे साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
माँगपटिया माथ में बिराजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे
बाँह में पँहुची सुघर साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे


४६/छत्तीसगढ़ी फाग लोकगीत

रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
बरसाना बृसभानु दुलारी, रंग जाबे।
बरसाना बृसभानु दुलारी, रंग जाबे।।
होरियारा टोली बीच कोन ढंग जाबे।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।
चोली रँगही चुनर रँगही रँगही लँहगा गोरी।
फागुन में फगुनाये टोली
गिंजरत कोरी कोरी।।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।

ग्वाला करिया रंग धरे हें,
कृष्ण धरे पिचकारी।
रंग गुलाल उड़ावत सरभर,
डउका डउकी सारी।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।


४७/
आमा डुमर डारी, कटवाये बन बारी।
हरियर हरियर बाँस।
बिहतरा मड़वा बेदी छवाये रुनझुन,
नेग करत ढेड़हिन हाँस।।

बेटी अउ बेटा दाई ऐके पीरा जन्माये,
बेटा ला दिये घर दुवार ।
भँवरा के धियरी ला पहिरा के पिंयरी ला,
परघर भेजत हौं हँकार।।

डोला चढ़ दुलहिन,
सुख दुख झन गिन।
जाये बर सजन दुवार।
जाये बर सजन दुवार।
बिटिया तो परधन, रीत चले चलागन,
आनेकुल करै बढ़वार।।
शोभामोहन
४८/कब सूख आथे गा भईया 


कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 


जब करीया गरूवाये बादर 

छान्ही  बनके  छाथे 

जब भड़के चेर्राये भूंईया 

चोरोबोरो  नहाथे 


तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 


जबर जेठ के बूॅंदाबाॅंदी 

अऊ सावन के रेला 

भादो तीजा कूॅंवरहा संेवा 

दीन देवारी मेला 




कांेईली कस गाथे गवईया 

कोईली कस गाथे गवईया 

कोईली कस गाथे गवईया 

तब सूख आथे गा भईया 


जब कोठी में धान धराथे 

आथे मूॅंह में पानी 

राजा कस जब दीखथे बेटवा 

अऊ बहूरीया रानी 


सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

तब सूख आथे गा भईया 


४९// 

ढ़ेहहीन हाथ रंगाये बईठे 

ढ़ेड़हा गींजरत अंईठे अंईठे 

कीसम कीसम के मया सकेले 

नता जोरईया हरीयर मड़वा 


मया में माते सब ममहावत 

रंगरेली कर कर इंतरावत 

जून्ना जून्ना गंठरी छोरत 

नवा गढ़ईया हरीयर मड़वा 


एक बीरान ला अपन बनावत 

एक खून के नता तनावत 

रंगचढ़ईया हरीयर मड़वा 

नता जोरईया हरीयर मड़वा 


५०/
बना लेतेन संगी 

घर ला सपना के बना लेतेन 

थीरा लेतेन संगी 

चारपहर जऊन मेंर थीरा लेतेन 


अईसन घर जे हमर आॅंखी में झूलत हे 

आॅंखी में झूलत हे आॅंखी में झूलत हंे 

अईसन फूूल जऊन मनेमन फूलत हे 

मनेमन फूलत हे मनेमन फूलत हे 

लगा लेतेन संगी 

ऊही फूलवारी ला लगा लेतेन 

बना लेतेन संगी घर ला सपना के बना लेतेन 


रेंगरेंग धरसा में देंह जीव हा चूरत हे 

देंह जीव हा चूरत हे देंह जीव हा चूरत हे 


सपना के कूरीया ढ़ेलवानी कस घूरत हे 

ढ़ेलवानी कस घूरत ढेलवानी कस घूरत हे 

पहा लेतेन संगी 

जीनगी ला थीरथार पहा लेतेन 

बना लेतेन संगी घर ला सपना के बना लेतेन

२३ से ४०छत्तीसगढ़ी लोकगीत

२३/चेतौना भजन

सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।

बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
तबले सबके करत कबाड़ा।। 
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
मो. 91710 96 309

२४/ जीव उड़ात पिया सोरियाथे

जाय पिया कर साध उवे मन, लाग नता मन नाच नचाथे। 
सास हवै मुँहटा कर जावँव मैं कइसे बड़ जीव डराथे।
हाथ धरे ननदी बिलमा जँतली कुरिया बड़ दार दराथे। 
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओखर तो नहीं छाँव खुँदाथे।। 


बीत जथे रतिहा बिरथा दिनमान , सगा मन सीगबिगाथे। 
बाज जथे जब पैजनिया सब लोग सुने बर कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मन के तब चार मंँझार बने सहराथें। 
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा अँगरी ल उँचाथें।

जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे। 

मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर खाय ल दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी त जेठानिन पानी भराथे।। 
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२५/ गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे

कलश सजा फूलहार बनावौं।
कलश सजा फूलहार बनावौं।  
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 

गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 


पंचडंडा पुर चउँक बनावौं।। 
पंचडंडा पुर चउँक बनावौं।। 
रोरीटीका माथ लगावौं।। 
रोरीटीका माथ लगावौं।। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

दीप जलावौ मंगल गावौं। 
दीप जलावौ मंगल गावौं। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


२६/ मैं न मरौं मरही ये चोला


पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 


मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला। 

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२७/ छत्तीसगढ़ी दोहा


पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।। 


दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।। 

सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप। 
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।। 


उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, थकै जीव हरि छोड़ ।। 


मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घाँस। 
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२८/  कोनो न सकिन गुन गाये हो

कोनो न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

बीना बजा सरसतिया गाइन।
लिख लिख के गनपति थर्राइन।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

ध्यान लगा शिव शंकर गाइन। 
परबतिया ला कथा सुनाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

क्षीरसिंधु सुत श्रीहरि गाइन। 
नारद गा नइ मुँह सुखाइन, फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर,

वेद लिखैया ऋखिया गाइन। 
तोर गुन गावत देह तपाइन।। 
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२९/  छत्तीसगढ़ी सुआगीत

तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डंगाली मा सुगना तोर बासा रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहिनिया मंझनिया के संगी तहीं तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
गुर के भेला जइसे सुगना तोर बोली रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
अँगना परछी खोली बाहिर दुनिया सुवना तरी ना रे ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
सोना के पिंजरा मा जीव छटपटाथे सुआ रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

 

३०/सुआगीत (गौरी गौरा) 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 
गौरी ला जावत बिहाये इसरदेव बम भोले।
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले।
गौरी गौरा ल जगाबो माटी के सुआ बोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

भूतवा परेतवा के संगी गोसैया, 
इसरदेव बम भोले। 
चंदा उजाला मुड़ बिखहर माला, 
छबि ला देख मन डोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़


३१/जोगनी बरत बन जोत, दाई मोर।

जोगनी बरत बन जोत। 


सुरुज उतारत तोर आरती, 

बड़े बिहिनिया होत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत। 


चंदा चंदैनी लुगरा ढ़ींक में,

अपन अंजोर कुढ़ोत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत।


तोर दरस अतका पबरित हे, 

मन के केरवछ धोत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत।


शोभामोहन श्रीवास्तव 



३२/भवानी भजन


आये ओ दाई अँगना में मोर


नौ दिन बर भेज के तोला। 

किरपा करे हे भोला।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


भोले शंकर के प्यारी। 

हे गनपति के महतारी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर।


कैलाश के हे महारानी। 

हे दुर्गा आदि भवानी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर। 


हे शक्ति के अवतारी। 

महिमा हे तोर बड़ भारी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर।


शोभामोहन के दाई। 

सबदिन तैं हवस सहाई।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


नौ दिन बर भेज के तोला। 

किरपा करे हे भोला।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


शोभामोहन श्रीवास्तव शुभचन्द्रसूर्या 

३३/जगमग दियना जलाये 


नौ दिन अउ नौ रात भगत मन, 

जगमग दियना जलाये हो, 

माई मोरे


तोर मया के अँचरा लहरिया, 

लहर लहर लहराये हो, 

माई मोरे। 


तोर कर्म गुनगान करत जन,

ऊँचहर सुख सब पाये हो, 

माई मोरे। 


रूप अनेक धरे जगतारन, 

गुन बरने नहीं जाये हो, 

माई मोरे।


तैं भगतन के आस पुरैया, 

सरनागत के सहाई हो, 

माई मोरे ।


३४/तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार


तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।

बीच में हावय तोर रचे अउ, माया के संसार।।

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


तोर लइका तोला सँउरत हावय।

तन झुमरत मन मउरत हावय।। 

पाके मया दुलार।।२

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


दुख देथे जब कर्म के भँउरी। 

गिरथे मनखे तोरेच पँउरी।।

पार के तोला गोहार।। 

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३५/चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


धरो फीता चुरिया सेंदुर टिकुलिया।। 

भेट बर झलमल लाल चुनरिया। 

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


चलो चलो दुखिया, चलो चलो सुखिया।। 

छाँव थिराये दाई अँचरा लहरिया। 

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३६/उतारै तोरे आरती 


ब्रम्हा जगसृजनकारी।उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


विष्णु जगपालनहारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


त्रिपुरारि शिव संहारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


ब्रम्हाणी रूद्राणी उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


बैकुंठ के महारानी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


चंदा चाँदी के साज थारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती। 


सुरुज करके उजियारी।उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३७/महाकली सुमरनी(ताटंक छंद)


कलकल-कलकल कलकलात हे, कालरूप कंकाली हा । 

रखमख-रखमख जावत हावै, बिकटरूप बिकराली हा ।।


खरखर-खरखर रक्सा तीरत, भंडारे बर आये हे। 

मूठा भर चुंदी ला धरके, आँखी ला छटकाये हे।।


लपलप-लपलप जीभ निकाले, भड़के भँव ल चढ़ाये हे। 

बेनी छोरे छरियाये हे, मुंडमाल गर नाये हे ।


३८/भगवती सेवाभजन 


लाला लाला लाला लाला लाला, लालालालालाल 


गढ़े कुम्हारे जब माटी के करसा, जब माटी के करसा। 

तेली हर पेरे हे तेल। 

वैश्या घर के माँझा अँगना माटी, माँझा अँगना माटी।  

कोड़े खन के लाने सकेल।। 


कोष्टा काते हे जब सूत कुँवारी, मैया सूत कुँवारी।

माली बगैचा लाने फूल। 

पटवा घर के चूरी सेंदुर दाई, चूरी सेंदुर दाई।

बैगा झूपै झूल झूल।। 


बनिया घर के दाई हरदी सुपारी, दाई हरदी सुपारी। 

दर्जी सिले धज लाल। 

बारी मरारिन टोरि लिमुवा लाने, जब बोंये हे लिमुवा।। 

गढ़े कसेर काँस थाल।। 


गढ़े तमेरा जब तामी के लोटा, जब तामी के लोटा। 

गढ़े सोनार सोन हार। 

बढ़ई बनाये हे जब आसन पाटा, मैया आसनी पाटा। 

बाना ला बनाये लोहार। 


नाउन लाने जब सील के पतरी, हो मैया सील के पतरी। 

गुनपोथी पढ़े महराज। 

सब मिलके जब नेवरात जगाये, हाँ नवरात जगाये।

जरियाये हे समाज।। 


कोन बिगाड़े तोर लइका के सुनता, दाई लइका के सुनता।

कोने आपस झगरात। 

वामपंथ के फन बिखहर दाई, हे फन बिखहर दाई। 

फूलवरिया अगन लगात।। 


जात धरम के बड़ झगरा हे माते, मैया झगरा माते। 

मनखे हे लहू बोहात।। 

बाट देखा दे दाई शुभ अउ सत के, दाई शुग अउ सत के। 

मनखे जीये ल भुलात।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

११/१०/२०२१

३९/जयजय शैलकुमारी जयजय


जयजय शैलकुमारी जयजय।
जयजय जगहितकारी जयजय।

जयजय परमउदारी जयजय। 
सकलभुवनउजियारी जयजय। 


संत सुजन सुखकारी जयजय
दुष्टदलन करतारी जयजय।।

शंकरसदन सुआरी जयजय।
जय गणपतिमहतारी जयजय। 

आँखी छटकत कारी जयजय।
जयजय खप्परधारी जयजय।। 

जयजय शेरसवारी जयजय।
अजगुतछवि मनोहारी जयजय।। 


शोभामोहन

४०/तोला मनाये बर जँवारा जागेंव(ददरिया) 


मैं जँवारा जागेंव आदि भवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।


सोने के कलसा आमा के पाना ओ ओ ओ।

सुमिरत हौं भवानी मोर घर  आना।।

मैं जँवारा जागेंव आदिभवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।


दीया अउ बाती करत हे अंजोर ओ ओ ओ ।

महमाया शीतला सुन अरजी ला मोर ओ। 


मैं जँवारा जागेंव आदिभवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

१४/०६ /२०२२ महुदा 

१-२२तक छत्तीसगढ़ी लोकगीत

मेल होगे हे


छत्तीसगढ़ी लोकगीत पांडुलिपि

१/सिंगार लोकगीत (दादरा)
 २/सोहर गीत बाहीं झुलना झूल दुलरुवा।
३/सोहर गीत बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।
४/सोहरगीत पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
५/ बिहावगीत कोन बारी फूलै फूल हरदी



१/सिंगार लोकगीत (दादरा) 


साज डरेंव सोलहो सिंगरिया
सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 

लाली के पहिरेंव लुगरिया
पहिन चल किजरन जाबो हो। 

चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 

पाँवे में लिखेंव महुरिया, 
सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 

सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 

कनिहा कसेंव करधनिया, 
सजन चल गिंजरन जाबो हो । 


बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 

झुमका झकास झूल नथनिया, 
पहिनतेंव चल गिंजरन जाबो हो।

शोभामोहन श्रीवास्तव 




२/सोहरगीत बधाई गीत
बाहीं झुलना झूल दुलरुवा।
मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।। 

न्योछावर कर अन धन वारौं। 
कोरा लेवौं अउ पुचकारौं।।

पबरित होगे कुल दुलरुवा । 
मोर अँगना के फूल दुलरुवा।

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।।

बाँह पोटारौं डींठ उतारौं।
रूप सँवारौं काजर डारौं।।
कंतर तैं मोरे मूल दुलरुवा।। 

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।। 


कुल के मोर अँजोरकरैया। 

डीह में मोर दीया बरैया।। 

छाती हमर गै फूल दुलरुवा।।

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
११/०२/२३
३/सोहर गीत बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।

बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।
अवध में जनमे हवै रघुरैया।
अउ संग जनमें तीनझन भैया।।
कौशिल्या माई उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।

अवध में जनमे जाँवर जिंयर भैया।
जिनकर हे सुमित्राजी  मैया।।
दूनो के संगे उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।

अवध में जनमें भरत
कस भैया।
कैकयी रानी जेकर मैया।।
कैकेयी रानी उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।।

गोकुल जनमें किसन कन्हैया।।
जेन चरावै गोकुल में गैया।।
महतारी जसुदा उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।।

शोभामोहन

४/सोहरगीत पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
धुन(एक लखन एक राम हो)

पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।

संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

राजपाठ करत जिनगी कटत हे।
खरकत हमर जवानी हो।
तीनझन रानी हे सबगुनखानी हे।
फेर नइ हे बाल गोपाल हो।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

सुरुज अरग देवैं, गंगा नहावै सुघर।
दानपुन करैं मनमानी हो।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

अजोध्या रघुकुल डीह अउ डोंगर में।
कोने बारही दीया मोर हो।
कोन राज चलाही, कोन काज चलाही।
कब होही महल अंजोर हो।।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

शोभामोहन

५/ बिहावगीत कोन बारी फूलै फूल हरदी

कोन बारी फूलै फूल हरदी, कोन बारी फूलै फूल हरदी।
कि कोन बारी फूले दूबी घास।
कोन बारी फुलै फूल सुपारी। कोन बारी फुलै फूल सुपारी।
कि कोन बारी भिरहा के बाँस।।

ददा बारी फूलै फूल हरदी, ददा बारी फूलै फूल हरदी।
कि कका बारी फूल दूबी घास।
भइया बारी फुलै फूल सुपारी।
कि बड़ा बारी भिरहा के बाँस।।

कोन लाने हरदी ला खन के, कोन लाने  हरदी ला खन के।
कि कोन लाने फूल दूबी घास।
कोन लाने टोर के  सुपारी। कोन लाने टोर के  सुपारी।
कि कोन लाने भिरहा ले बाँस।।

ददा लाने हरदी ला खन के, ददा लाने  हरदी ला खन के।
कि दाई लाने फूल दूबी घास।
कका लाने टोर के  सुपारी। कका लाने टोर के सुपारी।
कि भाई लाने भिरहा ले बाँस।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

६/ बिहतरागीत

कोन चुलमाटी तेलमाटी खने, कोन चुलमाटी तेलमाटी खने।
कि कोन हर बाजा ला बजाय।
कोन चँउक पूरै मड़वा, कोन चँउक पूरै मड़वा।
कि कोन मँगरोहन लाय।

भाँटो चुलमाटी तेलमाटी खने, भाँटो चुलमाटी तेलमाटी खने।
बजनिया बाजा ला बजाय।
सुवासिन चँउक पूरै मड़वा, सुवासिन चँउक पूरै मड़वा।
सगा सोदर मँगरोहन  लाय।

कोन आये मड़वा गड़ाये बर। कोन आये मड़वा गड़ाये बर।
कोन आये मड़वा ला छाय।।
कोन आये हरदी ला पीसे कूटे। कोन आये हरदी ला पीसे कूटे।
कोन तेल हरदी चढ़ाय।

भाँटो आये मड़वा गड़ाये बर। भाँटो आये मड़वा गड़ाये बर।
फूफा आये मड़वा ला छाय।।
दीदी आये हरदी ला पीसे कूटे। दीदी आये हरदी ला पीसे कूटे।
फूफू तेल हरदी चढ़ाय।

कोन सजाये हथँवा नरियर, कोन सजाये हथँवा नरियर।
कोन डुमर पिढ़ुली बनाय।
कोन गढ़े हे कंकन मउरी। कोन बनाये कंकन मउरी।
कि कोन माथ मकुट बनाय।।

छोटे बहिन साजे हथँवा नरियर, छोटे बहिन साजे हथँवा नरियर। बहिन साजे हथँवा नरियर।।
कि बढ़ई डुमर पिढ़ुली बनाय।
सोनार गढ़े हे कंकन मउरी। सोनार गढ़े हे कंकन मउरी।
कि मनिहार मकुट बनाय।।

कोन आये अँचरा देवन बर, कोन आये अँचरा देवन बर।
अउ कोन माँदर बजाय।
कोन आये मंगलगीत गाये बर। कोन आये मंगलगीत गाये।
कि कोन आये पूजा करवाय।

दाई आये अँचरा देवन बर, दाई आये अँचरा देवन बर।
कि काकी बड़ी माँदर बजाय।
गवैया आये बिहावगीत गाये। गवैया आये बिहावगीत गाये।
पंडित जी पूजा करवाय।

७/ सोहर

जनमें घर सुघर लाल।
डीह डोंगर उजियाल हो।
बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो। बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

बबा वारि रूपिया लुटात।
बुढ़ीदाई अन तउलावत हो।
बबुवा सूपा भरभर धान करत पुनदाने हो।
बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।।

नाचत गावत फुफू आत।
फूफा संग फटफटावत हो। बबुवा लेये बर नेगे आँजन बर काजर हो बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

ददा सगा सोदर बलात।
बाँजारूजी बजावत हो। बबुवा गलीखोर दना दनदनी फटाका फोरवावत हो।बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

शोभामोहन
11/05/2023


८/रतनपुर हाट के टिकुलिया, लगाय चमकुलिया, चलत भरे पनिया हो।
इचनी बिचनी माला मुँदरिया, पहिर के सुंदरिया, चलत भरे पनिया हो।।

छन छन बजात पैजनिया, साँवर रंग रनिया, चलत भरे पनिया।।

पहिरे करधन पटा पुतरिया, लिखे महुरिया,
चलत भरे पनिया हो।।

पहिरे हे लुगरा लहरिया, सजा सिंगरिया, चलत पनिया हो।।

शोभामोहन

९/हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

मइके के हलीभली खबर सुनाबे सुवा।
ददा भाई मेर मोर अरजी लगाबे सुवा।।
आई जावै देखे बर, बूताकाम छोड़ रे।।
हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

मोरे बूता करिबे सोन दाना चराहूँ सुवा।
जुग जुग जीबे खाबे, तोर गुन गाहूँ सुवा।
कभू नइ भूलाहूँ मैं तो गुनजस तोर रे।
हरियर सुवना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


१०/सोहरगीत

देशभगत बनै लाल, बैरी के बनै काल हो।
बेटा देश के करै रखवारी, कुलडीह उजियारा हो ललना।

बड़ दिन धरे हन धीर,
फिरिस दिन फेरे हो।
राम किसन जइसे लाल,
पायेन बड़भागे ले हो ललना

शोभामोहन ।


११/जस चंदा सुरुज फबे अगासे। (नरेंद्र मोदी जसगीत)
घर फबे कुल उजास हो।
तइसे भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया के बेटवा हो ।।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।

मंदिर में फबे जस मुरतिया, दीया संग फबे बतिया हो।
तइसे भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

जइसे हरियर रंग फबे धरती।
अगास रंग नीलहा हो।
तइसे भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
राजगद्दी फबे  मोदी योगीराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

फबे रूनझुन फरे फूले खेती, सजन घर बेटी हो।
तइसे भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
तस फबे मोदी योगी राज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

शोभामोहन ये असीदे देवै।
कुलदेवता देबी सदा सेवै हो।।
भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
मोदी योगी जुग जुग जियो महराज, भारत के भुँइया बेटवा हो ।।
राजगद्दी फबे मोदी योगीराज, भारत भुँइया के बेटवा हो

जगसेवा में जिनगी पहावैं।
सबो जगत उँकर गुन गावै हो।
भारत लोकतांत्रिक देस फबे 
बलवाने राउर हो।
राजगद्दी फबे नरेन्दर मोदी, भारत भुँइया के बेटवा हो बहिनी।।

शोभामोहन

१२/भारत माँ के दुलरुवा लाल।
नरेन्दर मोदी यशगीत
सोहर धुन (हो ललना)


बैरी बर बने काल हो।।
मोदी तोरे गुन मानै संसारे, सुख शांति ला गढ़ावन हो।
नरेन्द्र जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

तुष्टिकरन मिटायेव रोग।
बिगन दया सोग हो।।
मोदी सबला एक बरोबर मानेव, तौ बैरी गुन मानत हो।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

धारा तीन सौ सत्तर टारेव।
देशहित ला बिचारेव हो।।
मोदी काश्मीर के करेव बिकास, रक्सा के करेव नासे हो।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

कटोरा धरायेव पाकिस्तान।
टोरेव गरब गुमाने हो।।
मोदी पाकिस्तानी कहत हें आज सनातन हमर धरम हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

बैरी के चिन्हारी करवायेव।
सिधवा हिन्दवा ला जगायेव हो।।
मोदी देस बचाये अब हिन्दुवा करत अगुवाई हो।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

देश में होगे नवा बिहान।
मंदिर बनत राम भगवाने हो।।
मोदी भगतन अगोरत बेरिया, राम के पधरावन हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

देशबिरोधी अउ गद्दार।
पावत नइ तोरे पारे हो।
नरेन्द्र आगू कोती जावत हे देस, बने बर जग अगुवा हो।।
मोदी जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।

जब ले तुँहर बनिस सरकार।
गरीबहा ला मिलिस अधिकारे हो।
नरेन्दर जनधन शौचालय, अउ उज्जवला सुख घरोघर लानिस हो।।
मोदी जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो।

शोभामोहन
१०/०५/२०२३



१३/बेटी जनम सोहरगीत

जेने कोख जनमे हे बिटिया, वो दाई बाप धन धन हो।
अउ धन धन कुल परिवार।।
आये हे घर लछमी हो।

जेने कोख जनमें हे बिटिया, वो बबा दाई धन धन हो।
अउ धन धन कुल परिवार।।
दिये सुख अपार, आये हे घर लछमी हो।

अँगना के शोभा कहलावै।
कि लछमी जइसे पाँव हे हो।।
बिटिया करे कुल डीह बढ़वार, आये हे घर लछमी हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।

आमाडारी फलै फूलै आमा।
लीमडारी फरै फूलै लीम रामा हो।।
तस देबी तिया कोरा फलै फूलै बिटिया हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।

झुलना झुलावौ मंगल गावौ।
दई देवता मनावौ हो।
बिटिया के डीठ उतारौ जीव जुड़ाव हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।



१४/नान्हे नान्हे रखौ परिवारे। सोहरधुन
देशहित ला बिचारे हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

दूए तीन हो बाल गोपाले।
तो जिनगी हो खुशहाले हो।
बहिनी कोरी कोरी लइका जे बियाय, अहोनरक भोगै हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

हिन्दू हो ते हो मुसलमाने।
सबो रखौ धियाने हो।
बहिनी लइका शुभ करम सिखावौ, मनुखपन डारौ हो।।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

होगेन एक सौ चालीस करोडे़।
तभो लगे हे बियाये होड़े हो।
बहिनी खाना दाना कइसे मिल पाही, देस  आगू कोती जाही हो।
बहिनी खेत खार भुँइया करारी, अउ बाढ़त हे अबादी हो।
बेहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

देस ला करे बर सजोरे।
बैरी के मुँह टोरे हो।।
बहिनी लइकन बनावौ पहेलवान तभेच देश बाँचही हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

धरम सिखोवौ संताने।
पुरखौती गुन जाने हो।
बहिनी देश अउ धरम बचाय कन्हिया कसि लेवौ हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

देशभक्त लइकन ला बनावौ।
श्रीमद्भागवत गीता ला पढ़ावौ हो।।
बहिनी विश्व गुरु भारत ला बनाये जतन करौ निशदिन हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

१५/
मोर मइके में ददा अउ दाई नइ हे।
रीता जिनगी के कोनो भरपाई नइ हे।।

खेत खार हे नौकर चाकरी हे बंगला ।
फेर मोर मन तो जनम के हे कंगला।।
मोर मिहनत अकारथ बड़ाई नइ हे।
मोर मइके में ददा अउ दाई नइ हे।

कोनो पुछैया हे तीजा न पोरा।
मइके न कोनो करैया अगोरा। ।
मोर कोनो दरबार सुनवाई नइ हे।।
मोर मइके में ददा अउ दाई नइ हे।

ककरो नयन पुतरी न ककरो दुलारी।
फकत करत रहिथौं सबके बिगारी।।
सुख पहुना के मिले पहुनाई नइ हे।
मोर मइके में ददा अउ दाई नइ हे।

१६/

*जगन्नथिया भजन*


लाला ललल लललालला

लाला लला।


के भजन बोलो


भजन करौ भगवान हो।

जन्म पाये मनुसान हो।। 

के भजन बोलो।


संगत करि लौ साधू के, 

जेवन साग अहार हो। 

के भजन बोलो। 


भक्त के कर किरवार हो। 

डोंगा लगाही उही पार हो।। 

के भजन बोलो।


नदिया कुँआ के तो हो।

हरि हे अगम अपार हो।। 

के भजन बोलो।


जगे हवै हमर भाग हो। 

हरि बर हे अनुराग हो।। 

के भजन बोलो। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

०८/०७/२०२२

शुभस्थान-महुदा 


१७/पहुना सत्कार गीत

जोहारौं आवौ पहुना


मंगलमय शुभ बार, जोहारौं आवौ पहुना।

धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।


मंगलकरसा द्वार मढ़ावौं, मंगलटीका माथ लगावौं।।

पहिरावौं फूलहार, जोहारौं आवौ पहुना।।

धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।


आरुग जल ले पाँव पखारौं, आरती कर करके सत्कारौं।। 

ऊँच आसन बइठार, जोहारौं आवौ पहुना।

धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।


फूलकसिया लोटा अउ थारी, 

देवँव कलेवा कर सत्कारी। 

बारम्बार जोहार, जोहारौं आवौ पहुना।।

धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२६/०६/२०१९

१८/सोहरगीत बधाई गीत


बाहीं झुलना झूल दुलरुवा।

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।। 


न्योछावर कर अन धन वारौं। 

कोरा लेवौं अउ पुचकारौं।।

पबरित होगे कुल दुलरुवा । 

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।।



बाँह पोटारौं डींठ उतारौं।

रूप सँवारौं काजर डारौं।।

कंतर तैं मोरे मूल दुलरुवा।। 

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।। 


कुल के मोर अँजोरकरैया। 

डीह में मोर दीया बरैया।। 

छाती हमर गै फूल दुलरुवा।।

मोर अँगना के फूल दुलरुवा।। 

बाँही झुलना झूल दुलरुवा।।



शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 

११/०२/२३



१९/बिहाये ओ मैया कोने नगरिया हो(देबी जसगीत)

बिहाये ओ मैया कोने नगरिया हो।
बिहाये ओ मैया कोने नगरिया हो।

कोन आय तोर लगन लिखाये।
कोन तोर मड़वा सजाये ओ। माय
कोन देव तोर बने बरतिया।
कोने देव बरे बिहाये ओ।। मैया
बिहाये ओ मैया कोने नगरिया हो।








शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ी लोकगीत

२०/
दंदरत बिरहिन दुखियारी
 (बिरहा गीत)  

घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
घन घपटत घटा घनन घनन घन, 
बादर गरजत बड़ भारी। 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन, 
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बोंवत घनसुख के क्याँरी।। 

जल बरसत हे झरझर झरझर,
जल बरसत हे झरझर झरझर, 
छमछम ठमकत रुख डारी।
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
गड़गड़ गड़ मेघा मतवारी।।

सरसर सरसर जब पवन करत,
सरसर सरसर जब पवन करत,
फरफर फहरत हे साड़ी।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
दंदरत बिरहिन दुखियारी।।
 
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२१/कमल फूल तरिया फुलगे राजा

कमल फूल तरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।

आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे। 
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे।
मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
रायपुर छत्तीसगढ़ मो. 91710 96 309


२२/सिंगार लोकगीत (दादरा) 

साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
लाली के पहिरेंव लुगरिया, सजन चल किजरन जाबो हो।
लाली के पहिरेंव लुगरिया, पहिन चल किजरन जाबो हो। 

चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।। 

सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया। 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो । 

बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया। 
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
मो.  91710 96 309


संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...