शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Thursday, 30 November 2023
५१ से ६१ छत्तीसगढ़ी लोकगीत
5१/मन ला घलोक मांज गड़ी
मन ला घलो मांज गड़ी
पईरी बीछीया धोवत धोवत
मया मीले ते लान लेबे
मया मीले ते लान लेबे
मया मीले ते लान लेबे हंटरी हाट होवत होवत
मन ला घलो मांॅज गड़ी पईरी बीछीया धोवत धोवत
झन जा गड़ी पयडगरी
झन जा गडी पयडगरी
झन जा गड़ी पयडगरी , काॅंटा खूॅंटी बोंवत बोंवत
मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत
कहाॅं जाबे सांझ बेरा
कहाॅ जाबे सांझ बेरा
कहाॅं जाबे साझ बेरा कही तो भला रोवत रोवत
मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत
अपनो बर कर ले कूछू
अपनो बर कर ले कूछू
अपनो बर कर ले कूछू , बाठ कखरो जोहत जोहत
मन ला घलो माॅंज गडी , पईरी बीछीया धोवत धोवत
लहरा ले जीनगी संग
लहरा ले जीनगी संग
लहरा ले जीनगी संग , ड़ोगी ला खोवत खोवत
मन ला घलो माॅंज गड़ी , पईरी बीछीया धोवत धोवत
५२/बरसाती गीत
गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा
धान पान बोंये के हड़बड़ी होगे गा
बईठे के सूस्ताय के , थीराये के नही हे
ओखी घेरी बेरी घर जाय के नहीं हे
दसना हमर गोल खटीया खड़ी होगे गा
गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा
अता तता उवत बूड़त होगे नांगर बईला
तन मन ओग्गर होगे , माटी में मईला
हाथ गोड़ हमर गड़गड़ी होगे गा
गजब जोरदार भईया झड़ी होगे गा
५३//सोन चीरईया
मय रहवासी नीक ममहाती भूंईया के
सूघ्घर सोन चीरईया के
मय बहीनी अंव गूनी धूनी मूनी भईया के
सूघ्घर सोन चीरईया के
फरे फूले लहसे डारा अंव
सबके घर सबके पारा अंव
मय कोईली बासन अंव रूख अमरईया के
सूघ्घर सोन चीरईया के
परभू के पाॅंव पखारल पानी
दया मया के मय रजधानी
मय संगवारी गोकूल कीसन कन्हईया के
सूघ्घर सोन चीरईया के
रास मही रस सरबस मय रे
संगी बईरी बरकस मय रे
सरग बरोबर कोरा हे मोर भूंईया के
सूघ्घर सोन चीरईया के
५४//बादर बरदानी
झीमीर झीमीर गीरे रे पानी
झीमीर झीमीर रे झीमीर झीमीर ,
बादर हावय रे बड़दानी
सूमीर सूमीर रे सूमीर सूमीर
झीमीर झीमीर गीरे रे पानी
झीमीर झीमीर रे झीमीर झीमीर
कूटकी कोदो धान बोंआगें
धरती के कोरा हरीयागे
सूते कीसान के भाग हा जागे
भंूईया हा दूलही कस लागे
मन के अंगना आस दीया बरे
टीमीर टीमीर रे टीमीर टीमीर
खेत बीयारा कोठी भराही
मेला मड़ई तीहार सूहाही
बर बीहाव घलोक मताही
सूख हा चारो कोती ले आही
टूरा नाचही टूरी करही
गीजीर गीजीर रे गीजीर गीजीर
५५/कहाॅं बिलम गे रें
हाॅं बिलम गे रे कहाॅं बिलम गे ना
कहाॅं बिलम गे करिया बादर
कहाॅं बिलम गे नदियाॅं
कहाॅं बिलम गे सीता माई
कहाॅं बिलम गे रधिया
कहाॅं बिलम गे राम रमऊवा
कहाॅं बिलम गे कन्हईया
कहाॅं बिलम गे मया मतवना
कहाॅ बिलम गे मनईया
कहाॅं बिलम गें रे कहाॅं बिलम गे ना
कहाॅ बिलम गे सगा सोदर सब
कहाॅं बिलम गे बलईया
कहाॅ बिलम गे दया मया अऊ
कहाॅं बिलम गे बनईया
कहाॅ बिलम गे रे कहाॅ बिलम गे ना
कहाॅं बिलम गे बहीनी जाके
कहाॅं बिलम गे भईया
कहाॅ बिलम गे मया के सूतरी
कहाॅ बिलम गे चिन्हईया
कहाॅ बिलम गे कहाॅं बिलम गे ना
कहाॅ बिलम गे रूख राई मन
कहाॅ बिलम गे छंॅंईहा
कहाॅं बिलम गे गाॅंव गॅंवई अऊ
कहाॅं बिलम गे गॅंवईहा
कहाॅं बिलम गे रे कहाॅ बिलम गे ना
५६//कुछू करले रे सूवना
अभी कस डेरा अभी कस बेरा
कहाॅ पाबे
कूछू कर ले रे सूवना
ये गली मूॅंहाटी , धरे चोला माटी
कहाॅं आबे
कूछू कर ले रे सूवना
अईसन अनपानी , दीये जेला दानी
कहाॅं खाबे
कूछू कर ले रे सूवना
गूरू गीयानी , अमरीत बानी
कहाॅ पाबें
कूछू कर ले रे सूवना
अभी कस डेरा , अभी कस बेरा
कहाॅं पाबे
५७//सतरंगीया मन पाल तनागे
बईठ बरंेंडी कॅंऊवा बोलीस
तोर आय के सगून जनागे
पींवरी धोवाये आवत हांेबे
सतरंगीया मन पाल तनागे
मऊर गे हे सपना चरचर ले
अंतस अतेक हूलास अमागे
तोर सूध बही बनाथे सीरतोन
बूध सीरागे , चेत हरागे
ओधत तोर तीर ये परीया
भूंईया कस जीनगी हरीयागे
जम्मो साध धूरूवा में फटके
मयापरस पाये उम्हींयागे
सूखदेवा तोर सूरता संवरीया
आजा आॅंखी में बादर छागे
५८//कईसे रेंगे रे रंेगईया
कोन बाठ रेंगे करे हावस करार तंय
अऊ कईसन पयडगरी रेंगे रे रेंगईया
रेंगथस चीन्हार छोंड़ , देख के चीन्हा गोड़
कतको अन्जान पाछू रेंगे रे रेंगईया
बीखहर तोर गोड़ रे , अगोड़ रे पीछोड़ रे
बाठ न घर जाय कईसे रेेंगे रे रेंगईया
५९//चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरीया
चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया
चलो चलो नदियाॅं , चलो चलो तरिया
चलो चलो सतरंग , बादर करिया
दाई मोर भरही तुंहर गगरिया
चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरिया
चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया
चलो चलो दुखीया चलो चलो सुखिया
चलो रे सहज जमो , चलो चलो मुखिया
सबो बर दाई के अॅंचरा के छंईहा
चलो जाबो चलो जाबो दाई के दूअरिया
चलो नवरात मा चढ़बो पहड़ीया
५९//जोगीया जागे हे नवरात हो दाई मोर
जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं
जोगीया जागे रात रात भर
जोगनी जागे दिन रात हो माया मोर
जोगीया जागे हे नवरात हो माया मोर
जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं
जोगीया लाने तेल अऊ बाती
जोगनी जलाये तोर जोत हो माया मोर
जोगीया जागे नवरात हो दाई मोर
जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं
जोगीया चूपरे तो भभूती
जेागनी धरे तोर हाथ हो माया मोर
जेागीया जागे नवरात हो दाई मोर
जेागनी जागे हे नवरात हो माॅं
जोगीया साधय जप तप करके
जोगनी चरन धर रोत दाई मोर
जोगीया जागे नवरात हो दाई मोर
जोगनी जागे हे नवरात हो माॅं
६०/
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी रे ना।।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डँगाली गड़ी सुगना के बासा रे तरी नारी ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
गुरभेला कस गड़ी सुगना के बोली रे तरी नारी ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहनिया मंँझनिया के संगी उही, तरी नारी रे ना।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
अँगना में चारा चरै परछी फुदकै ना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
सोने के पिंजड़ा में जीव छटपटावै ना रे सुआ हो।
ना रे सुआ हो तरी नारी नाना रे ना।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०८/०९/२०२३
६१/बिहावगीत
दाई तोर अँगना में, गोमची के नार घन,
छछले घोलारे गहदाय।
कोन सहर ले दुलरू अउ बरतिया आये ।
गोमची ला बरे अउ बिहाय।।
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संस्कृत राम स्तुति
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गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
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बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...
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