शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Saturday, 24 August 2024
चंडी वर्णिक छन्द ( 13वर्ण का छन्द)लललल लललल लालल लालाझकमक झकमक रूप सजाये।सहस सुरुज छबि देख लजाये।।
लललल लललल लालल लाला
झकमक झकमक रूप सजाये।
सहस सुरुज छबि देख लजाये।।
निधिबन मधुबन कुंजबिहारी।
गिंजरत निधड़क श्याम मुरारी।।
झलमल झलमल सोहत पागी।
दरसन करत सबो बड़भागी।।
कटत हवय दिन आस लगा के।
दरसन प्रभु कब देहव आके ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१ सावन महीना अंधियारी पाख अकादशी तद्नुसार ३१/०७/२०२४
Friday, 16 August 2024
दृढ़पद छंद)12, 10 मात्रा में यतिलललल लललल ललला, लालल लालाला।
(दृढ़पद छंद)
12, 10 मात्रा में यति
लललल लललल ललला, लालल लालाला।
बनन बनन गिंजरिस हे, तज महल अटारी।
मीरा बाई बनके, मनमोहन प्यारी।।
छोड़छाड़ धन वैभव, सुख के फुलवारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
झींक फूदक के सजवन, फेक सब सिंगारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
मोहन ले नता जोर, पहिर भगवा सारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
मइके ससुरे सबके, सुनिस गल्ला गारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
राजपाठ सुख ले बढ़, पाइस सुख भारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
हरिनाम के धुन में, माते मतवारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
हरि ले बिमुख मन सन, पटिस नहीं तारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
विवेक छन्द (सममात्रिक)12122ललाल लाला, ललाल लाला।।
विवेक छन्द (सममात्रिक)12122
ललाल लाला, ललाल लाला।।
जगत बनाकर, तुम्ही विधाता।
सम्हालते बन, पिता व माता।।
अपार स्वामी, उदार दाता।
निभा रहे हो, पवित्र नाता।
पवन,अगन,जल, पवित्रकारी।
अधर नगर नभ, समस्तधारी।।
प्रकाश रवि शशि, लुटा अधारे।।
घुमा रहे नित, नक्षत्र तारे।
हृदय हमारे, भुवन तुम्हारा।
सदैव देते, हमे सहारा।।
सदैव छाया, कृपाल पाऊँ।
विनीत होकर, तुम्हे मनाऊँ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८०
भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी
संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
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गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
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सैनिक के गोसइन के बिरहा पिंउरी धोवाये गवन कराये चलदेस तभो हें हस लगथे, निकले होबे छोड़त मन। पिंउरी धोवाये गवन कराये, रूप झुलत उही नैन सजन...
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बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...