Sunday, 4 August 2019

शुभकामना "उल्लाला छंद" (छत्तीसगढ़ी)

आज हमर पूज्य छंद गुरु अरुण कुमार निगम जी के जन्मदिन के परम पावन बेरा में अन्तसतल ले बधाई अउ 
गुरु के महिमा गाय हे, गीता बेद पुराण हा , 
अउ गुरु ला बडका कहे, अपनों ले भगवन हा ,
सोना ठुक ठुक मर के, गहना गढत सुनार हा ,
लोहा ला घन पीट के , गडहन देत लुहार हा ,
सब झन गुन ला जान के , रचना रच सुख पात हे ,
देखव आने हे अपन , आने सिरज मडात हे
गुरु समर्थ अपने असन , करथे देके ज्ञान ला ,
तेकर सेती नइ मिलय, गुरु के दरजा आन ला ,
शोभामोहन श्रीवास्तव

Friday, 2 August 2019

ताटंक छंद (वेद वचन ) (छत्तीसगढ़ी)

ताटंक छंद (वेद वचन )
(छत्तीसगढ़ी)

सब मनखे मन जानो घर हा ,सब बेरा सुख कारी हो |
अन धन के भंडार भरे अउ,रूख फरे फुलवारी हो ||
पिए बर हो निर्मल पानी ,सुग्घर शुद्ध बयारी हो |
धरम करम के जानन हारा ,धनवंता संगवारी हो ||
घर बनाव तुम सब झन अइसन ,जेमा ए गुन सारी हो |
अइसन घर हो सदा निरोगी ,सुख बढ़ती बडभारी हो ||

शोभामोहन श्रीवास्तव  

विधाता छंद (वेद वचन ) छत्तीसगढ़ी

विधाता छंद (वेद वचन )
( छत्तीसगढ़ी)

रहे बांधे लंगोटी ला ,सबो शिक्षा बने जाने |
जवानी में जनाए जे ,भले तेला बिहा लाने ||
करे आगू बिहा पूछे पचारे ,जान बा पाए |
बिहाये बाद मा वोही ,सुखी सोहाग ला पाए ||

शोभामोहन श्रीवास्तव 

द्रुतविलम्बित छंद (वेद वचन )छत्तीसगढ़ी

द्रुतविलम्बित छंद
 (वेद वचन )छत्तीसगढ़ी

मनुख चाल चले जब नीक हो ,
उठय गुनी ह अगीन सरीख हो |
करय नाश सबो अगीयान के ,
सुजस पाय उहि गुन जान के ||

शोभामोहन श्रीवास्तव 




ऋग्वेद उतरनी (मंगलाचरण )

ऋग्वेद उतरनी (मंगलाचरण )
मनहरण घनाक्षरी 
(छत्तीसगढ़ी)

 अमर अंजोर रूप ,निरदोष  जग भूप 
जीव अंतस पुर  बसइया जोहार हे |
सब जग रखवार ,जीव राखे फूल भार 
शुभ सत् देशना देवइया जोहार हे ||
सवांगे सता  मे रम ,सुख पावत परम 
अनंत भूषित निरखइया जोहार हे |
तेकर होके उपासी ,सिरजे आनन्दराशी 
सुख धाम आनंद बढ़इया जोहार हे ||

     

शोभामोहन श्रीवास्तव 


( शिखरिणी छंद ) (छत्तीसगढ़ी ) "कहाँ जाबे हंसा"

( शिखरिणी छंद )
(छत्तीसगढ़ी ) 
 "कहाँ जाबे हंसा"

फरे फूले डारा , चलत सब मारे लपक के | 
झरे हो ते बारी , चुरगुन न देखे हिरक के || 
बडा बैरी बेरा  समझ झन संगी गदक के | 
सबो पीरा पाथे , धर मनुख चोला भटक के ||


कहाँ जाबे हंसा ,सब डहर बांधे तन धरे | 
कहूं कोती जाबे ,भटक भरमाबे भय भरे ||

भरोसा ले जीबे ,जपत रहि रामा धुन धरे | 
बताये रद्दा ला ,बस जगत में वो गुरु हरे ||



         शोभामोहन श्रीवास्तव  

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...