Friday, 2 August 2019

( शिखरिणी छंद ) (छत्तीसगढ़ी ) "कहाँ जाबे हंसा"

( शिखरिणी छंद )
(छत्तीसगढ़ी ) 
 "कहाँ जाबे हंसा"

फरे फूले डारा , चलत सब मारे लपक के | 
झरे हो ते बारी , चुरगुन न देखे हिरक के || 
बडा बैरी बेरा  समझ झन संगी गदक के | 
सबो पीरा पाथे , धर मनुख चोला भटक के ||


कहाँ जाबे हंसा ,सब डहर बांधे तन धरे | 
कहूं कोती जाबे ,भटक भरमाबे भय भरे ||

भरोसा ले जीबे ,जपत रहि रामा धुन धरे | 
बताये रद्दा ला ,बस जगत में वो गुरु हरे ||



         शोभामोहन श्रीवास्तव  

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