Friday, 1 December 2023

छत्तीसगढ़ी लोकगीत नया

छत्तीसगढ़ी लोकगीत अभ्यास

दमउ मांदर बाजे,
नाचे जाहूँ कहे आवै लाजे।
चलौ धनी गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर बाजे........
रिगबिग रिगबिग पहिर के नथुनिया,
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
छुनछुन छुनछुन करत के
पैजनिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
खनर खनर चूरी करत सजन सँवरिया 
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
धड़धड़ धड़धड़ करत हे मोरे
छतिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
खेले कूदे नाचे के हे सजन
उमरिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................


रमा

टूरी टूरा हाथ कनिहा नाये,
रुखवा करम तरी आये।
मीठ बोली सजन भाये।
नाचे गाये भौं चमकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
गिजिर गिजिर मुचके रिझाये।
मीठ बोली सजन भाये।
आँखीच आँखी में गोठियाये।
मीठ बोली सजन भाये।
संगेसंग कनिहा मटकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
बतरस मया बरसाये।
मीठ बोली सजन भाये।
छनछन चूरी छनकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
झनझन पैजन झनकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
नयना मिलै झुझक लजाये।
मीठ बोली सजन भाये।
सुध बुध तन के भुलाये।
मीठ बोली सजन भाये।

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...