Wednesday, 24 May 2023

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत (पारंपरिक)

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत (पारंपरिक)

डंगडंग ले बेदी रचवाये मोर राजा ददा।
झेंझरहा मड़वा छवाये अमुवा के डरिया,
मोर बदन कुम्हलात गो।
कहिबे तौ बेटी मैं हर छत्तर तनाई दौं।
कहि तो सुरुज करौं लोप ओ।
काबर ददा तैं कहि तो छत्तर तनइबे।
कोरा में रख ले ना तोप गो।।

हरदी के रंग मोर अंग ला रंगत अउ,
मउर गड़त मोर माथ गो।
अँचरा देथस दाई छँइहा करन फेर।
अगन बरत तन मोर ओ।

रंगबिरंगी करसा साजे हे सुवासिन।
दियना जलाये भर तेल ओ।
माँग भरागे रगरग ले फुफू मोर सेंदुर सुधार ओ।

रचनाकार- शोभामोहन श्रीवास्तव

Tuesday, 23 May 2023

बिन सोचे समझे मत बोल

शब्द महिमा

बिन सोचे समझे मत बोल

शब्द रत्न सबसे अनमोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

जहाँ नहीं रवि शशि जा पाय।
शब्द  गुफा मन के छू आय।।
भाव पढ़े बिन पीटे ढोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

टिके शब्द पर  मन के भाव।
दंभ क्षुद्रता और प्रभाव।।
शब्द रसिक ले भाव टटोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

शब्दों से दीपित हो अर्थ।
शब्द बाण नहीं जाते व्यर्थ।।
पहले शब्द तनिक ले तोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

शब्द छोड़ता मन में छाप।
पहले चख ले वक्ता ताप।।
तभी बोल कुछ मुख को खोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

शब्द कराये सृजन विनाश।
अलंकार रस प्रणय विकास।।
शब्दाश्रित विज्ञान खगोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

शब्द हृदयतल करे प्रवेश।
मधु भर दे उपजाये क्लेश।।
शब्द स्निग्ध मृदु बोल अडोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

पकड़ चेतना का यह हाथ।
गहरे अवचेतन तक साथ।।
अंतसतल दे भाव विडोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।

शोभामोहन
२१/०२/२०२२

Wednesday, 17 May 2023

तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखे ( मनहरण घनाक्षरी)

तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखे ( मनहरण घनाक्षरी)

1/
तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखैं नहीं,
तिरियाच बर सब नेम ला बनाय ओ ।
बपरी बना के फेर पुतरी असन नाच,
चारोजुग हावय परमान नचाय ओ ।
घर ला रपोटे अउ एब ला तोपे तहीं,
जब जेन मवका पाय तब लतियाय ओ ।
जब-जब देखहीं लहूट केे मनखे मन,
पग-पग कर तही जग ला रेंगाय ओ ।
2/
जब ले जनम धरे, तब ले करम करे,
बाॅंचे खोंचे खाय जांगर टूटत कमाय ओ ।
गरूआ असन दाई-ददा जेन खूंटाबाॅंधे,
देखबे सदा उहीच खूंटा में बंधाय ओ ।
सपना सरोय सब, तपना सहत जग,
आँखी के किनारी मेंर पीरा बटियाय ओ।
घर के न घाट के, पथरा कस बाट के,
लोटियागोबरी कर जिनगी पहाय ओ ।
3/
रतनारानी ला देख माया परे तुलसी ला,
राम में रमाय मन डहर देखाय ओ ।
फेर गुनहगार ल कहाॅं गुनजस लागे,
ढोर अडहा संग साॅंहूत जोरे हाय ओ ।
कहाॅं उतीस बूडतीस जात मानूख के,
बिधाता हा तिरिया ला धारनी बनाय रे ।
भल-अनभल संग होये कभू गिने नहीं,
करमईतीन हा करम करे जाय रे ।
4/
घपटे हावय अंधियारी जिनगी में फेर,
स्ंाझा डेरउठी बन दीवा बर जाय रे ।
दुख ला लुका अपन अंतस के कुंदरा में,
पानी डार-डार सब सुख ला जगाय रे ।
मार अउ गारी खात, अपन गति गनात,
सब ला संॅवास बस आॅंसू चूचवाय रे ।
उरकत सब आस, भसकत बिसवाॅंस,
मया के एकक ठन ठीहा खोधियाय रे ।
5/
नर-गर पहिरे जेवर बेली कस लागे,
अहमईती ला जेन ठेंगवा देखाय रे ।
रूप रंग गुन के बखान नीक लागे नहीं,
रखवारी बर जब भाई-बाप आय रे ।
मनखे ला रकसा बनत नहीं बेरा लागे,
झीमझाम में कहॅंू अकेल्ला सपडाय रे ।
तेखर ले बने अबियाय रहि जातेंव गोई,
मोर बर चारोमूडा बड बकवाय रे ।
6/
अनभल मोर संग जग हा करत फेर,
सबके मूॅंह ला देखेंव तोबरा ठेंसाय रे ।
मोर कोनो दोस नहीं तभो दोसदारी मोला,
घर-बन मिलके हेरवठा बनाय रे ।
चारोखूंट देख अनियाव जीव डरगे हे,
जीव भर छूटय नहीं साॅंसा आय जाय रे ।
मन के कलपना ला मोर कोनो सूने नहीं,
ना तो ये जगत मोर गोठ पतियाय रे ।
7/
मन तन के रहूॅं नहीं सुनव बोलीठोली,
पढ गुनके अब तो नहीं सही जाय रे ।
देखईया देखय हमरो गुनकोठी भरे,
देखे नहीं सके तेकर आॅंखी फूटी जाय रे ।
पढ लिख लव गोई, लाहो लेव हव गोई,
पढे गुन हर कभू बिरथा न जाय रे ।
एक दिन रही भूंईया भर तुंहरेच,
गुन देखके तुंहर मोला ममहाय रे ।
8/
थरहा असन बेटी जात बड फूरमानू,
पर घर रहि रोप फर फूल जाय रे ।
माॅंग भर एडी भर माहूर लगाई कर,
दूई कूल डीह डोगरिया हरियाय रे ।
बेटी कस जसही खोजे ले कहॅंू मिले नहीं
बीजा कस सर रूख बन लहराय रे ।
कहाॅं जाही रूख कहाॅ जाही फूलपान हर,
बीजहा सरंॅव नहीं कहॅंू अडियाय रे ।
9/
बुध ला अपन चूल्हा में डार रीत बर,
चरझनिया के बीच मूडी ढंकवाय रे ।
सातगोड रेग सतभंउरी गींजर फेर,
सातो किरिया पुरोये जिनगी बसाय रे ।
एक अनचिन्ह अनगंईहा अंगुरी धर,
गाॅंठजोरे सोहगीन बन चले जाय रे ।
बेटी कस कोन हे तजथे अउ भूंईया में,
अपन ला छांड पर ला जे अपनाय रे ।
10/
अनवट बिछिया पाजेब पहिरे चलय,
नीक लागय रेंगना हा घूंघरू बजाय रे ।
करधन पॅंहूची छाहित लछमी असन,
गर कारीपोत में सोहाग सिरजाय रे ।
ककनी बनूरिया कारीचूरी पटा पहिर,
नकफूल चन्दा व सूरूज चमकाय रे ।
बेटी कस करथे सिंगार एक भूंईया हा,
एकरे सेती दूनो के रासमेल खाय रे ।
11/
डोला चढ देखय लहूट के मयारू सब,
डोलहा थिराय न अॅंसूवन थिराय रे ।
रेंगें के धरम ससुरार कोती चल कहे,
मया के मरम भींजे भींजे रहि जाय रे ।
परछन कर ससुरारी नता फेरी देवें,
अंगरी धर के नवा डहर देखाय रे ।
बेटी कस कोन जयजोहार अउ करे गोई,
भाग के डेरउठी धूर मस्तक लगाय रे ।
12/
गमकत गजरा पहिर के सोहाग बर,
सुखरतिहा पिया के सेजरी सजाय रे ।
पग पग रेंगय गोसंईया के अनुकूल,
पानी कस मिल जिनगानी बन जाय रे ।
पिया के मूरतिया बसा हियमंदिरवा में,
पथरा ला टोर के मया ला पझराय रे ।
तोर कस पिरीत खोजे ले कहॅू मिले नहीं,
तोर मया पाके सब जग बईहाय रे ।
13/
तोर एक मुचकी मे मर जाथे बने-बने,
सून्ना जग ओकर जे तोला बिसराय रे ।
गढे हे गढईया मोहनकारी तोर चोला,
जोेग भूल जोगिया तोर बर सधाय रे ।
बीन तोर ककरो पहाय नहीं जिनगानी,
मया के सरूप सब तोरे में समाय रे ।
तोर कस मोहनी खोजे ले कहॅंू मिले नहीं,
सब अरझे तोर में बिन अरझाय रे ।
14/
तंही मयाखेत अउ तंहीच करथस खेती,
तोर बिन धनहा परिया पर जार रे ।
तोर बिन दीखे अदियावन मनखे हर,
सुख के सेवाद सब तोरे ले जनाय रे ।
मरथस तंय हर तभो नहीं मरय मया,
सुख के मडवना सबो तोरेच मडाय रे ।
खोजे न मिलय तोर कस बनिहार कहॅंू,
बिन बनी पाये घलो हाॅंसे मुस्काय रे ।
15/
भाखा में उराठी घोर जब जब रीस करे,
बडे-बडे राजपाठ गिस छरियाय रे ।
घूटकेस बीख गम कोनो ला होईस नहीं,
बडे बडे झगरा ला तंही घरियाय रे ।
मया के मतवना बल, पग पग चल चल,
बडे बडे टेडगा ला तहीं सोझियाय रे ।
तोर कस ताप के नवईया नहीं जग मे हे,
बडे बडे गरबी ला तंहीच नवाय रे ।
16/
तोर नीकता के सोर उडत हावय गोई,
अपन ला छाॅड सबो तोर सूती खाय रे ।
बाराबानी गोठ जग कतकोन गोठियावय,
एकबोलनीन तोला सबो पतियाय रे ।
लंदीफंदी चारोखूंट हावय चलन चाल,
सतबोली के तहींच चलन चलाय रे ।
सतबाठ धरके सहत दुख लाख तंय,
सत में जानस हावय संकर समाय रे ।
17/
हिरदे के उघरा कपाट झन करे कर,
चारोखूंट दानो अउ रक्सा ढिलाय रे ।
कतको ला लील डारे हावय एक रकरकी,
बाठ अउ दूबट्टा अलहन भरे ताय रे ।
मया में मयाच नहीं मिले बने जान लेबे,
मया आड जन आने साध सिपचाय रे ।
सोच के समझ के मडाबे तंय एकक पग,
मीतवा बलाय चाहे हितवा चलाय रे ।
18/

जीये बर परही जबर बनके रे तोला,
डरछोड लाज तज अईसे दिन आय रे ।
डर डर रहिबे जीयन नहीं देही गोई,
लाज के मरईया इहाॅं लाज ला गंवाय रे ।
मूडी गडियाये ले जबरवाली होही गडी,
मान ले सिखोना रेंग मूडी ला उठाय रे ।
अंगबोली ले अपन अईसे संदेस दे तंय,
अपन अस मूॅंह कर बईरी रहि जाय रे ।
20/
ठग-जग गिंजरत भसकोले चारोमूडा,
बने ताड लेबे झन आॅंखी भरमाय रे ।
सावचेत रहिबे उघार आॅंखी कान बने,
अलकरहा धरे हे मनखे ला बाय रे ।
बडका बडवना सून बा तमे तंय झन आबे,
सीरजम मनखे बडोना न बताय रे ।
मनखे चिन्हें में कहॅू चूक झन होय कभ,
आगू पाछू गुन लेबे बात फोरियाय रे ।
21/
गुनिया असन ताड लेथे तोर आॅंखी हर,
सुख-दुख सिलना उधेड तंही पाय रे ।
आरूगहाॅसी के रंग घोर के तंय मनखे के,
परिया जिनगी सतरंग लहराय रे ।
मरहा मरे परे परेटहा सुख के साध,
उम्हिया के जिनगी के लहर लगाय रे ।
भले झन माने गुन, फेर तंही तुन-तुन,
लाग-नता लाज-बात सब गंठियाय रे ।
22/
करू-कसा टोर्रठ नता के हितवारी कर,
आगू पाछू गुन के तंहीच गुर नाय रे ।
अजम सकय न कोनो रीत ला मया के तोर,
अदिरीस फेर तोर उदीम जनाय रे ।
बिनछोर सपना उडात मूडाछाड नर,
बाॅंहधर लान तंहीच भूंईया मडाय रे ।
ताप मे बेरा के हंें झंवाय तोर अंतस हा,
रोज बिहाने सुरूज ला जल चढाय रे ।
23/
गाॅंव के पता न तोर ठाॅंव के ठिकाना कहॅू,

मयापाती सबो तोर नाव के भेजाय रे ।

ब्यारा बारी भर्री खार, खेत न तो घर-द्वार,

सबो तोर फेर नइ नाव हे लिखाय रे ।

सब नता सब लाग, बंधावय तोरे पाग,

जग झिनभंगुरा बनत भर ताय रे ।

कोनो सुनत हे तोर मया घोरे कलकूत,

कोनो आसरा धरे अधर ओधियाय रे ।

24/

बिपतघरी तंय बीरता के बीजबोनी करे,

हार खाये मनखे ला तंहीच जियाय रे ।

जीत के सवांगे होती बना डारे डंडा तयं,

मनखे गरब तहीं धजा फहराय रे ।

तन के अपन तॅंय सरोय सब गीत गारी,

जग-भल करत उदीम ओरियाय रे ।

पर के करत किरवार मारे मन तंही,

कोनो पतियाय चाहे झन पतियाय रे ।

25/

हिरदे मरमठाॅंव छू के मया बरसईया ।

दुख में झंवाय ला मया में नहवाय रे ।

भावपिया ला तउल , होती अपन पउल,

जेन रंग पिया भाय उही रंग जाय रे ।

गोठ में अपनपन घोर के चिभोर डरे,

एकमई करे सब तंही अगुवाय रे ।

सरग के साध धरे आॅंखी ला अंताज डरे,

असक के ठेंगा बन तहीं पछूवाय रे ।

26/

जावत पिया ला परदेस देख बिरहीन,

बरसत आॅंसू जीव तोर दहकाय रे ।

मन के बियाकूल गुनान गंठरी में बाॅंध,

मन न बोधाय फेर घर चिकनाय रे ।

सेजरी में फूल के बोवाय काॅंटा गड-गड,

मति-गति चेत-बुध सब ला हराय रे ।

दुनिया के गनित गुनान कर घुना खात,

जीभिया पिया के नाव अहोरात गाय रे ।

27/

छेंक राखे आॅंखीरूॅंधना में मनबसिया ला,

मूहरन झूल-झूल आसरा बंधाय रे ।

तिरिया के मोल हा तिरिन में कहाॅं हे गडी,

सुख तो पिया के संग गाॅंठ हे जोराय रे ।

तन ला चरावै नता-गोतादल रॅंउदत ,

मन के हन्सा ला कोन चारा चरवाय रे ।

जगबंधना के ढंग, मनबोधना के संग,

छईहा बन रेंगें दुख हर न जनाय रे ।

28/

रेंगत-रेंगत कोन मूडा जात जिनगानी,

जाने नहीं खूटाॅं बाॅंधे दंउरी फंदाय रे ।

रेंगत हे दिनरात, पीरा दुख सिहरात,

कहॅंू अभरै न वह बाठ रेंगे हाय रे ।

ढेला कस घुर जाय, मनेमन चुर जाय,

अगम के गोठ कोन जाने जनवाय रे ।

आसजोरे लागनता, बउरे अपन सता,

संग धरे सब सुख सुभीता सधाय रे ।

29/

दाई-ददा फूलभार, पाल-पोंस के तियार,

करके पथरा छाती लगन धराय रे ।

एक-एक भांवर ले, जुग जोडीजांवर ले,

छूट जाय माय मइके बिधना लिखाय रे ।

फाटे बाप-दाई छाती, चलो कहय बराती,

मुरदा निकाले कस रोदना रोवय रे ।

मया व दुलार धरे, होती ला निसार करे,

पग डारै ससुरे जगत सिरजाय रे ।

30/

पीरा के उपर हाॅंस, हेरत बेरा के फाॅंस,

रासगुनमेली कर सुख सोरियाय रे ।

सास-ननदी के गारी, बनाये कान केे बारी,

आॅसू भर आॅंखीओरिया ले टपकाय रे ।

मईके के उटका ला, जहर के घुटका ला,

पीयत पीरा ला मुॅंह सीले रहि जाय रे ।

31/

मनूस बनाके ओडहर दे बरमदेव,

भेजिस भूईया नर ला बूता बताय रे ।

सीरजे पोंसे के संग, रंग जाबे जगरंग,

करबे जा मनखे जेन तोला सुहाय रे ।

सुन्ना बाठ रेंगे बर, तिरिया ला संग कर,

बात कही गगरी में सगरी समाय रे ।

संग-संग रेंगही ये, चाह तिहां लेगही ये,

बिलमे ले बिलमही बेरिया पहाय रे ।

32/

कहे लकछरहा बरमदेव के कर गोठ,

मनखे भूतल आगे बिगन भंजाये रे ।

बनबाठ रेंगत रेंगत कहे तिरिया ला,

फरफूल चिख के गुनतवा बताय रे ।

नीक-खीख जिनीस सेवाद लेत तिरियन,

नाव धर गुन जान मीठ ला खवाय रे ।

सबो नाव ओकरे धरे चलत हे जग में,

देखे इतिहास जेन नहीं पतियाय रे ।

33/

कमबुध पेटपोंसू डरेलहा डरईया,

बनमानूस रकरकी भर बुताय रे ।

तिरिया के मति हा सुभउनी के गति देख,

सृस्टिसीरजन जाने धुन पिकियाय रे ।

एकठन बिजहा एकक रूख होथे जान,

अपन सोधे ला जन-जन ला जनाय रे ।

परभल अंवतर, पर बर फूल फर,

परभल संभर उझर के देखाय रे ।

34/

मनुसान बढती के ओरी ला लहूट देख

सबमें तिया के करमईती हे समाय रे ।

देबी कस पूजत रहिस एकजुग हर,

अपने असन जीव ला जब बियाय रे ।

मनखे के जात गढ, बिमता के संग लड,

मनुखईती के तिय धजा फहराय रे ।

मनखे के मन में तिरिया मया पीका फोरे,

मनखे ला तिरिया हा जिये ला सिखाय रे ।

35/

कोड-खन भूंईया ला, गुन बाॅंट गुंईया ला,

गिंजरन्ता मनखे किसानी थिरवाय रे ।

बीजा के चिन्हार कर, माटी मरकी में भर,

चिन्हा दे आने आने, बीजहा बंचाय रे ।

गिंजरत मनखे ला बिलमें के थेभा दिये,

तिरिया धारनी तब ले बूता जिहाय रे ।

बीजा बोंय पानी करे, सिखोये किसानी करे,

अपन छंईहा बचाय रूॅंधना रूॅंधाय रे ।

36/

तिरिया गरन्थ गढे, ना धरमपंथ गढे,

मनूस के अहमईती के सब बाय रे ।

तिरिया हा गढतिस धरम गरन्थ एक्को,

धरम जम्मो देतिस एक में समाय रे ।

अलग-बिलग बाठ, गढथे मनूस पाठ,

तभे तो कोरी-कोरी धरम उफलाय रे ।

दसकोरी जीयत धरम हावय भूंईया में,

झींकातानी में सबके जीव भर जाय रे ।

37/

गढ के घर दुआर, चारोमूडा भांडी मार,

छेंके बर होती तोर रूधंना बंधाय रे ।

घर राख छेना थाप, सेवा कर भाई-बाप,

घरबूता में पेराय लईका खेलाय रे ।

घरघूंदिया में छंेक, पूरोवय अपन टेक,

तिया मन जाने बिन अपन चलाय रे ।

कतको सौ साल चारकोठ छेक राख कर,

बूधबल धार ला देईन भोथवाय रे ।

38/

कोन गढे हावय सीख, कभू छुआ कभू नीक,

तोर नीकता अगीनपरछो देवाय रे ।

नर संग चले बर, आधा बल आधा डर,

कतका तंय अपन अंतस ला पोठाय रे ।

(१)कृष्ण भजन पुस्तक पांडुलिपि१-२५ तक

(१)कृष्ण भजन पुस्तक पांडुलिपि
१-२५ तक
१/
हे गोकुल के ग्वाला (सारछंद दसपदी)
गोपी-ग्वाला गउरखवाला, नटवर नैनउजाला।
धेनुचरैया दूधदुहैया, लउठी-खुमरी वाला।।
कहूँ बँधैया कहूँ धँधैया,गगरीफोर भगैया।
उधममचैया खेलरचैया, सुकुवाउवत जगैया।।
तालाबेली सखीसहेली, संगमचुलुक बढ़ैया।।
चीरचुरैया कदमचढ़ैया, ग्वालिन पाठपढ़ैया ।
उखलबंँधैया लाहोलेवैया, सुंदरकिशन दँवैया।।
इन्द्रहरैया गरबमिटैया, गोवर्धन उपकैया।।
कृष्णकन्हैया रधियासैंया, परमानंदसिरजैया।
भक्तिजगैया मोहमिटैया,
बंधनजगतकटैया।
मदनगुपाला रूपनिराला, प्रियतम नवलकिशोरी।
रसबरसैया मनहरसैया, गोकुल ग्वालिनगोरी।।
बेनुबजैया नींदउड़ैया, कुंजलता बनमाली।
नाचनचैया रासरचैया, पबरितपरम ओदाली।।
दाऊभैया नागनथैया, कालीदाह कुदैया।।
माथासाजू भुजबंदबाजू, पैजन पाँवभँदैया।।
मुकुटसजैया तिलकलगैया, गर बैजंतीमाला।
पापभरे हौं सरनपरे हौं, हे गोकुल के ग्वाला।।
बड़ेलड़ैया चक्रचलैया, अर्जुन रथहाँकैया।
शोभामोहन अउ भटकै झन, भवदहराबुलकैया।
शोभामोहन



२/
मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट


नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।
मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।।
चुन्दी में छटके जलबुँदियन,
मोती चटके असन जनात।
पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।
नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय।
मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।
गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात।
चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।
पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल।
बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,
लाली पिंउरी लटकन झूल।।
मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात।
काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।
लुगरा-पटुका लटकत फुँदना,
रगरग ले मन चैन चुरात।
हवय तिहार मनावत आँखी,
दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।
फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात।
रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन,
भुनन भुनन भौंरा मन गात।।
डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।
कन्हिया लटकत करधनिया में,
जड़े जवाहर हीरा लाल।।
नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।
ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।
खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।
मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।।
झनक झनक झन पैजन बाजत,
खनन खनन चूरी खनकात।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया,
फरर फरर अँचरा फहरात।।
मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।
चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।।
रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात।
फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।।
आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।
पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।।
रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट।
रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।।
शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार।
मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।।

शोभामोहन




३/कृष्ण नाम गुन करनी सुमिरन

(चौपाई छंद)

जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
तीनो तिलिक गुसैया जयजय।।

गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

इन्दर तापनवैया जयजय।।
माखन लूटखवैया जयजय।
अंँगुरी छत्रछवैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

चंदनतिलक लगैया जयजय।
पाग पिरितपगैया जयजय।।
अंतस भावजगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदय सहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय।
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

कालीनागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

कृष्णा लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
जय सारथी बनैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

सुंदर सृष्टिसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

जयजय चक्रचलैया जयजय।
छाती दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगतपलैया जयजय।।

रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़ेलड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

कृष्ण लीला घनाक्षरी 

घनश्याम रूपधाम कोटिकाम धर नाम,
अनगिन खेल ब्रजभूमि में दिखात है ।
इतरात छिप जातमुसकात मुच मुच,
नंद जसुदा अँगना सुख बरसात है।।
दँउरत हँफरत भँवरत ब्रज भर,
नखरा देखात गोप ग्वाल ला रिझात है।
तनसूखा मनसूखा धर के दही चोरात,
चोरहा ले घलो महाचोरहा कहात हे,
रतजाग अनुराग धनभाग बिरिज के,
देख देख सरग देवता ललचात है॥
नहवात खोरवात फूल हरि ला चढ़ात,
बिंजन बनात हे कुलक के जेंवात हे।।
प्रीत घोर हाथ जोर रेंगत जे थोर थोर,
तेने जीव जग ले सहज दुरिहात हे।
वो चरण वो शरण रहि के शोभामोहन,
सतलोक के सुख ला धरती में पात हे।। 

शोभामोहन
०५/०५/२०२२

४/ताल खेमटा रामजन्म उत्सव

अंबर से फूल बरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

प्रसूति पीर जब आये।
वसुदेवा घबराये।
कंपित दंपति डर से।।
अंबर से फूल बरसे।।

टूटा बंदीगृह ताला।
छा गया उजाला।।
मूर्छित प्रहरी प्रहर से।
अंबर से फूल बरसे।।

पिता ले तभी लाला।
सोलहों कला वाला।।
निकले बंदीघर से।।
अंबर से फूल बरसे।।

ऐसी प्रभु की माया।
शेषनाग की छाया।।
रिमझिम जलधर बरसे।।
अंबर से फूल बरसे।।

चरण चूमने यमुना।
बढ़ गई कई गुना।।
पाँव बढ़ा तब हरि परसे।।
अंबर से फूल बरसे।।

विपदा में मित्र आये।
देख गले से लगाये।।
नंदरायजी अति हरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

जन्मे हैं नंदलाला,
यदुकुल उजाला।।
जिसके लिए मन तरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

दर्शन को देव आये,
मंगल तिय गाये।।
धन्य हुऐ दर्शन भर से।
अंबर से फूल बरसे।।

यशुमति अति मुदित माई,
जब बजत बधाई।।
नैन बहा के निर्झर से।
अंबर से फूल बरसे।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०९/२०२२
शुभस्थान-वृंदावन




५/
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के

भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

ये जगत में लाग नत्ता कोन हे।
बड़ अकेल्ला ये परेवना सोन हे।।
चाकरी अब छोड़ धन अउ धाम के।।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

डार रटहा बने कुँदरा तोर हे।
साँवरे के हाथ जिनगी डोर हे।।
झन बहाना कर तैं बूता काम के।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

शोभामोहन 


६/
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे

हरि के बनाय देह,
हरि के जगत गेह।
हरि के पदारथ ला हरि ला चढ़ाय रे।
हरि जगसुख सोती,
हरिच के जीव जोती।
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे।
हरि ले मिलन बर,
भज सुमिरन कर।
हरिच के अंश जीव हरि में समाय रे।
एको छिन गॅँवा झन,
मया गढ़ा मने मन।
जग जनमे मनुख चोला जब पाय रे। 

शोभामोहन


७/
हरि नाम हस बिसराये रे 


तोर हाड़ा हपट के जोरे सब चीज बस,
नाशवान तभो ले हवस बइहाय रे।
गजब डउल कर फुनगी मा पहुँचेस,
खसले के डर फेर जीव में समाय रे।
रचेस सजन संग मिलन जुलन खेल,
मिलन के संग फेर बिरहा लिखाय रे।
चटक-मटक चरदिनिया जिनिस बर,
ओंड़ा दिये हरि नाम हस बिसराये रे। 

शोभामोहन

८/

छुतहा चेत रामधन पाय रे

दशरथ कस नहीं कभू प्रभु प्रीत करे,
कौशिल्या असन नहीं संजम जगाय रे।।
कैकई कस कलंक लिये ना अपन मूड़,
सीता कस नहीं पति धरम निभाय रे।
बंधवा भरत कस राजा नहीं बन सके,
लखन असन नहीं सेवा मन लाय रे।
भजन करे ना कभू सजन मनाये बर,
कइसे छुतहा चेत रामधन पाय रे।।

शोभामोहन

९/

मोहना तोर मुरली जादू भरे 

मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।
मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।। 

धुन सुन मुरली बछरु गैया चरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।। 

सुन रुखराई मगन फहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

मुरली के धुन बिन कल नइ परे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

सुन जमुनाजल लहर लहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

ग्वालिन के मुरली करेजा कतरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

शोभामोहन

१०/

बिरिज अंजोर बिन

सुन्ना गली अउ गाँव, सुन्ना हे कदम छाँव,
सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन।
सुन्ना जमुना के घाट, सुन्ना हे बजार हाट,
सुन्ना-सुन्ना नैन रैन नंद के किशोर बिन।
सुन्ना अमरइया हे, सुन्ना सेज शय्या हे।
सुन्ना हे बिरिज बन नंदलाला सोर बिन।
सुन्ना कोठा चुप धेनु, ब्रज बिन ध्वनि बेनु,
सुन्ना संझा मँझनिया सुन्ना अउ भोर हे।। 

शोभामोहन

११/
हरि बोल रसना

माया के नगरिया फोकट झन फँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

मोह ममता के गरी नरी झन कस ना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

अँगरी उँचा कहूँ न कहूँ झन हँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

मन मा सुरुज उवा घरिया के दसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

जतका दिन लिखाये इहाँ तोर बसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

शोभामोहन भेड़ी धसान झन धसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

शोभामोहन


१२/
राग हिंडोल वसंत

उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।
नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंगत नंगत सब गोरी।।

बचत बचत दँउड़त हे गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।
गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।

बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग रंजक बोरी।
बुढ़ुवा बाल जवान जमोझन, लानत हे रंग घोरी।।

धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।
शोभामोहन के गोसैया, करत जबर बरजोरी।।

शोभामोहन
१५/०२/२०२२

१३/

*सिंगार फगुनवा हे*

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*

मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,
कदकाछनी रंगचटक फगुनवा,
बैन-नैन के मटक फगुनवा,
मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

माथा खउरा चंदन फगुनवा,
पागा पागी बदन फगुनवा,
नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,
मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।
गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।
झुमका झूल मलंग फगुनवा।।
रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।
भुँइया देत अलाप फगुनवा।।
पिया पिया के जाप फगुनवा।।
रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।
शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

शोभामोहन


१४/
सेम्हर दसना दसे तेमा सुते ललना

सोनहा महलिया के सोनहा अटरिया मा,
सोनहा मियार मा बँधाये हावै पलना।
सोनहा थाम्हन खंभा सोनहा जबर दासा,
सोनहा ड़ाँड़ी पटनी पाटे सोन बल ना।
सोनहा सँकरी कड़ी दिये हे झुलाये बर,
सोनहा बेलबूटा किनारी छेंका छलना।
सोनजड़ी फुँदना के दसे छतरँगिया हे,
सेम्हर दसना दसे तेमा सुते ललना।
सोनहा बेरा घड़ी हे सोनहा हे अवसर,
सोनहा चँवर दाई झालत हे झलना।
सोनहा सुअवसर पाये तै शोभामोहन,
नाम गुन ध्यान धरे मन झन हल ना।।

शोभामोहन


१५/

फूल झेला नंदलाल,
ब्रज नैन उजियाल,
फूल के हिंडोलना दाई सुतात ललना ।
दुलरुवा गोप ग्वाल,
देख होत हें निहाल,
खेलत पटक गोड़ झुलना उझलना।
फूल के चँवर झाल,
जसुदा छूवत भाल,
गम नइ पात सुख दिन रात ढ़लना।
लीला करे बर बाल,
दुष्टन के बन काल,
शोभामोहन के स्वामी आये हे भूतल ना ।

शोभामोहन

१६/

अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी, मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना, निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती, तोर जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

आनी बानी, बाट बेंझानी,
गोड़ अड़ानी, झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

साध जगा मन, शोभामोहन, अधम उधारन,अरज लगाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

शोभामोहन


१७/जनमे बनवारी
प्रभावती चर्चरीछंद
मणि जड़ाय सोन थार,दियना रिगबिग मँझार।
मंगल करसा सँवार, धर धर नर नारी।
मन हुलास बहत धार, बोलत जय बार बार,
रंग रंग के कर सिंगार, खड़े हें दुवारी।।
घंटा घन घनन घोर, झालर झन झन झकोर,
सुन भीजत पोर पोर, गदगद हिय भारी।।
दमउ दफड़ा दमोर, छन्न छन्न छन्न शोर,
भँवरत माते विभोर, कुलक जात वारी।।
चूमत निच्चट निहार, गिंधिया गिंधिया दुलार,
शोभामोहन अधार, जनमे बनवारी।

शोभामोहन श्रीवास्तव
२७/०६/२०२१

१८/
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला

अठतल्लागढ़ महल अटारी,
ईश चलात अटाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

पहिलीतल्ला रूप विषय के,
मोती अउ मणिमाला।
दूसर तल्ला धन दौलत के,
छाये मेकरजाला।।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

तीसरतल्ला पद गरिमा दे,
गोभत गरब के भाला।।
चौथातल्ला सुखप्रद अन्नो,
सुख बगराने वाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

पंचमतल्ला निर्मल हिरदे,
हे बरसात सुधा ला।
छट्टमतल्ला राखे रिधिसिधि,
जोग भठाये चाला।
बइठे ऊपर तल्ला माया रचत निराला ।

सप्तमतल्ला दिव्यज्योति के,
चारोखुँट उजियाला।
शोभामोहन आठवाँतल्ला,
जाये कर जोरा ला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

शोभामोहन

१९/
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ

गर बनमाल सजैया खोजौं ।
चंदन तिलक लगैया खोजौं।।

दसमत फूल खोचैया खोजौं ।
महर महर ममहैया खोजौं ।

बन बन धेनु चरैया खोजौं।
मधुबन रास रचैया खोजौं ।।

गगरी फोर लुकैया खोजौं ।
गोपी नाच नचैया खोजौं ।।

ग्वालिन चीर चुरैया खोजौं ।
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ।।

बंशी मधुर बजैया खोजौं ।
पाँख मँजूर लगैया खोजौं।

२०/
करत हवय चुलकाय असन

हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन ।

तोर बिगन ए कंचन काया
रहय पिया अइलाय असन ।

सब पीरा के मान होत हे ,
लागत नही पिराय असन ।

हाथ धरे हस जब्बर तँय हा ,
दुनिया करय गिराय असन ।।

हाँसे थूँके चाल चलन ला
होवत जमो थिराय असन ।

मन के भाव मा पाला परगे ।
होगे चेत हराय असन ।

कोंवर भाव मा करा गिरत हे,
छाती लगत चिराय असन ।

चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुँचत बताय असन।

सेंदुर लगे बिहिनिया सँझा,
करत हवँय चुलकाय असन।

नरी रुँधागे अब का बोलँव,
सुध करत हुरियाय असन।

मन में संसो सँचरत सरभर
जिनगी सासँ हराय असन ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

२१
तोर बिन करिया।
(जयकारी छंद)


अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया।

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे।
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।।
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया।

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया।

शोभामोहन

२२/
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।।
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

रहि रहि बादर बिजली चमके।
मन डर्राये बिगन सजन के।।
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

मन चुलहा मा धधकत आगी ।
आके जीव कर दे बड़भागी।।
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

शोभामोहन
२२/०२/१७
झीट पाटन
२३/
कइसे तोर बिन रहौं बतादे रसिया

कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पिया सुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।।
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।।
काला करलई कहौं मनबसिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना।
उड़त अगास देख पंछी परेवना।।
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

शोभामोहन

२४/


होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।।
जानथस का बता मोर तो बाली उमर,
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे।

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं।
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया।
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

कइसे काला कहौं रात के बात ला,
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन,
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै,
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन,
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर,
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले,
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

शोभामोहन

२५/
आँखी खोजत माखनचोर (जयकारी छंद)

गुड़ी करत हे चारी मोर।
पूछत हे महतारी मोर।।
घेरीबेरी ओखी जोर,
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।।
दिखत नइ हे ओकर छाँव।
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।।
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन


दोहा भजन

दोहा भजन

पाँच जिनिस के पुतरी, झन ले ककरो हाय।
बइगा गुनिया बइद मन, समझ न पाहीं बाय। 

पानी भर चूल्हा चढ़ा, माटी हरिया ताँव।
बउर समझ के रे सगा, नहीं ठेंसरा सहि पाँव।

पानी उपके फोटका, ये मनखे के जात। 
मालिक रचत उझार के, तभो न मरम जनात।। 

चोला गिंजरत हाट में, अउ सुन्ना मनबाट।
पीरा सब के भाग में, बाँट सकस तौ बांँट।। 

माटी में मिलथे सबो, माटीउपजे जात।
मूड़ी हाँड़ी बांँट के, फेर करत सौ बात।।

बाहिर ले ले गुज गुज अउ, भीतर कोती टाँठ। 
टाँठ जनावत भीतरी, भइगे जीव उचाट।। 
 ७
दुख सुख मन में उदगरै, न इ हे घटे उपाय। 
राम भजन के गाय ले, दुख नही चिटिक जनाय।। 

सबो बिसाये ज्ञान हर, पैसा फकत कमाय।
फेर सवाँगे ज्ञान तो, भव ले पार लगाय।। 

आँखी वाले देखथे, सुघ्घर सब संसार।
अउ अंधरा पावै नहीं, सुघ्घरपन के पार। 
१०
बद्दी दै ओखी लगा, बोलतसाठ रिसाय। 
वो हेरौठा बन जियै, जगसुख चिटिक न पाय।। 
११
बड़भागी वो जेन ला, गलती अपन जनाय। 
दोस टरै ओकर सबो, मन परछिन हो जाय।। 
१२
चुमचुम ले जग ला भुला, रामभजन मन लान। 
माटी के चोला हरै, हो जाही कल्यान। 
१३
धन धोगानी कतिक हे, तेकर ले नइ काम। 
जेन रामगुन गात हे, उही जात प्रभुधाम।। 
१४
धन-धन होगे जीव हर, जपत राम के नाँव। 
सुख बरसात चारो डहर, जिहाँ मढ़ाथौं पाँव।।
१५
दुखिया वो संसार में, जेन जपै नहीं नाम। 
जेकर अंतस राम वो, चोला श्रीहरि धाम।।
१६
जेन जिनिस ला हाट ले, लाने हवस बिसाय।
जिनिस बजरहा हर कभू, सुख नइ देये पाय।। 
१७
गुनै फेर उरथी करें, ओला जान सुजान। 
उरथी कर मन में तुनै, मूरख उही महान।। 
१८
जीत बिचारे छोड़ के, सक समरथ ला जान। 
घर जाए के साध मर, सुमिरन कर भगवान ।। 
१९
थिरा पहा रेंगत पहा, जिनगी आखिर तोर। 
रेंगत हे आठों पहर, भँवरी ओकर गोड़।।
२०
गोठ बात निसगी रहे, निसगी  रहे गुनान।
जिये खाय अतके जिनिस, निसगी हावे जान
२१
बउरे हस जे चीज ला, बिगन चुकाये मोल। 
कर्जा चढ़गे जान ले, मुफत मिलिस झन बोल।। 
२२
जे दिन होही तोर बर, डर ले बड़का टेक। 
कोनो विपदा गोड़ ला, फेर न पाही छेंक।। 
२३
होय भोरहा मान ले, माफी मिलही माँग।
फेर भोरहा ला अपन, खूँटी में जन टांँग।। 
२४
अधकचरा गोठकार के, खीख लगै सब बात।
गोठसाज के गोठ सुन, अनचिन्हार लपटात।।
२५
आरुग हाँसी हर हरै, मनखे के सिंगार।
मुखमंडल आनंद झरै, नसनस टरै बिकार।। 
२६
राम रचे सब जीव रे, मीनमेक झन हेर। 
चौरासी घुमरन करत, भुगते परही फेर।। 
२७
माटी के चोला बने, माटी मिलही जान।
चारी सीताराम के, कर ले रे मनुसान।। 
२८
हार मान के बइठ झन, अउ कर उदिम सजोर। 
देउत खड़े दुवार में, मुँहरन करे अंँजोर।। 
२९
बेरा रूप बिगाड़ दै, तेकर पहिली जाग। 
रामबाट में चलत जा, पल्टी खाही भाग।।
३०
बलकर मनखे गढ़ डरै, अगम गाँव बर बाट।
घुसघुसहा डरडर चलै, चातर चिन्हवा छाँट।। 
३१
मनखे के होती कतिक, कागद हवय बतात।
बिन कागद परमान के, कहूँ नहीं पतियात।। 
३२
चोला माटी गिरत ले, कोन हरस तैं खोज। 
रेंगे कर दूचार पग, भीतर कोती रोज।। 
३३
बज्र बिपत के बेरिया, ये जीव बिगन अधार।
सुख आथे तब मिल जथे, कतको झन लगवार।। 
३४
बने बने में बन जथें, कतको झन लगवार।
ठाढ़ बिपत में जेन हो, उही असल संगवार।। 
३५
बघवा जइसे उदिम कर, तन मन सक बढ़वार।
शुभबेरा बरकस उदिम, लाही जीत दुवार।। 
३६
पाँच जिनिस के देह हे, पाँच जिनिस के खेल। 
पाँच जिनिस में मिल जही, करत करत रंगरेल।। 
३७
दँतनिपोर मन ठाढ़ हो, ताकै नदिया पार।
पार लगे साधू सुजन, कुदै बीच मंँझधार।। 
३८
हहो हहो सब बात में, करथे वो नइ मीत।
गिनहा ला गिनहा कहै, उही जोग परतीत।। 
३९
कुछु अइसे लिख दे कलम, पढ़ के जग रस पाय।
रामरमा नसनस बसै, जीव बिसुद्ध हो जाय।। 
४०
आलस छोड़ गुनान कर, कर परभल पुनदान। 
रामरमा के भजन कर, छुटही जगत गठान।। 
४१
अइसे कृपाकटाक्ष हो, हृदय बसै रघुबीर।
आस फाँस फाटा टरै, जब जीव छुटै शरीर।। 
४२
बने कहस गिनहा कहस, बेरा मिले पहान।
काकर खर्चा करत हन, सब देखत भगवान ।।
४३
हाँसी निंदा लाज डर, ये चारो ठन रोग। 
हाय सवाँगे संग नहीं, होवन दै संजोग।। 
४४
ए मुँह ले वो मुँह करत, चरबत्ता के गाँव।
बोलन दे ये गाँव ला, तैं चल प्रभुवर ठाँव।। 
४५
जाने ले बुधबल बढ़ै, सुख उपजै मन खेत।
सब असार ला छोड़ दे, राम नाम बस लेत।। 
४६
गिर के फेर उठत जबे, अउ हो जाबे ठाढ़। 
राम रूप मन में बसा, करबे मया प्रगाढ़।। 
४७
माँग कुछु देवत कुछु, ये निर्दयी संसार। 
सब तज मन भरतार भज, लगही डोंगा पार।। 
४८
मंगन माँगत मर जथे, कोनो नहीं छकाय।
जेन माँगे हरि दिहै, ये जग हे निरुपाय।। 
४९
पाई पाई जोड़थस, फेर लगथस कंगाल। 
हरि सुमिरन में मन लगा, होबे मालामाल।। 
५०
झूठ लबारी ये जगत, झूठ नता परिवार।
जगत हेरौठा मोर मन, रहत राम के भार।। 
५१
मन कहिथे हरि भजन कर, जग छुतही कहै हाय।
कइसे छोड़ौ सात दिन, तिरिया जनम धराय।। 
५२
लबरा ये संसार हे, राजा प्रजा लबार।
सत ड़ोंगी बइठार के, प्रभु लगा दे पार।। 
५३
तोर मोर अब माँझ में, कुछु झन आवै आड़। 
अइसे अब मोर भीतरी, तोर मया हो गाढ़।। 
५४
आँखीओलम हो झने, मैं हो जहूँ अनाथ। 
जन्म मरन बोचकाय झन, अइसे बँधना बाँध।। 
५५
तोरे सक ले सक हवय, मोर मन में तोर राज। 
तोर मर्जी ले होत हे, अब तो जम्मो काज।। 
५६
तीनलोक चौदह भुवन, सबमें तोरे राज। 
सबला नाच नचास तैं, अंतस ठाँव बिराज।। 
५७
का मोहनी डारे हवस, जब्बर हवँव तिरात। 
हाथ थकत नइ गुन लिखत, अउ मस नहीं सिरात।। 
५८
तोर हाथ जीव सुँतरी, तोरे हाथ परान।
एक तहीं सिरतो पिया, तोर करौ गुनगान।। 
५९
मन हर ठानै ठान जब, देह करै संजोग। 
मन के मइल मँजाय तब, मिटै जनम के रोग।। 
६०
मैं मूरख भटकन परौं, तहूँ मोला भटकाय।
अब ये घुनहा काठ ला, झन धरवाबे बाय।। 
६१
झन भुलाँव हरि नाम ला, झन भुलाँव धुन ध्यान। 
झन भुलाँव घर गाँव ला, कर किरपा भगवान।।
६२
नानमून माँगौं नहीं, जबर हवय मोर आस।
तैं दानी सबले बड़े, देबे हे विश्वास।। 
६३
तोर चरन के धरन हर, मन में भरत हुलास।
जनम जनम करबे पिया, ये हिरदे रहिवास।। 
६४
अब कोनो गरियाय ते, कोनो हर सहराय। 
नइ देखौं जग डहर ला, नाम जपत दिन जाय।। 
६५
मोरे बर उल्टा बहै, सबदिन जगत बयार।
अब रेंगे नइ जात हे, अँगरी धर भरतार।। 
६६
गाँव गली डीह डोंगरी, नाम मोर बदनाम।
पापपुन्न ये जीव के, तैं जानत हस राम।। 
६७
सरपटहा जग रेंगथे, धीरलगहा मोर चाल।
टुटगे हे सब आसरा, रखबे पिया खियाल।। 
६८
करत लोटिया गोबरी, जिनगी दियेंव पहाय।
थके बिराजे साँझकन, तोर डेहरी आय।।
६९
रोनहूत होये कंठ के, भरभरात सब गीत।
जग ले हारेंव का भइस, पायेंव तोर पिरीत।। 
७०
गिरेंव उठेंव रेंगेव थकेंव, नइ समझेंव जगचाल। 
अब टोरे बर आ प्रभु, तहीं मेकराजाल।।
७१
हँसबे तौ जग हाँसही, रोबे तब नइ रोय।
झन छूटे हरिलगन अब, कतको जगत धिरोय।। 
७२
घुसघुसहा सब रेंगथें, देखे सूने हाट।
नाव अँजोरी रेंगथौं, अँखमुंदा हरिबाट।। 
७३
समरथ नइ रहिगे पिया, अउ झेले के झेल। 
जीव परेवा हेर तन, पाँच जिनिस कर मेल।। 
७४
फूटत कंठ ले गीत अउ, पाय उठत मन साध।
घटघट बसिया तोर बर, उमड़त मया अगाध।। 
७५
हाँसी में हाँसौं नहीं, रोवौं नहीं रोवाय।
साँस साँस में जब पिया, मोला तहीं जनाय।। 
७६
चौरासी के फेर मे, अनगिन चलत उजोग। 
तोर सिवा कोनो नहीं, करै जीव बर सोग। 
७७
जेती जब रेंगौं पिया, भितिया जगत उठाय।
हपट गिर मड़ियात हौ, कोरा तोर लुकाय।। 
७८
भितिया माया मोह के, तैं रहिथस ओ पार। 
सबो छाँड़ के आत हौं, होत देख मुंधियार।। 
७९
तोर दया ले सतडहर, बहकिस अंतस धार।
नाम दियना जले हे, टरगे सब अंँधियार।। 






Tuesday, 16 May 2023

(मत्तगयंद छंद)

जे गुनिया जन तीर बसे अउमाँगय दान सबो हितकारी ।

प्रश्न करै सब उत्तर पावय,जीवन लाभ बनै अधिकारी

पाय उहीच बताय सबो झन,जान बने बड़ होय सुखारी ।

हे मनखे उपदेसु गुरूजन,सिल्प सुजान बनाय सवारी ।

जे बिध रात बिहान करे ,व्यवहार वही बिध हो मनुसाना ।

ओर धरे करि जेवन आवन,जावन के व्यवहार सुजाना।

देंह ल राख बने शुभ में सुख ,पावन हेत सदा सुख नाना ।

बेद बतात सबो झन के हित,जीव रखे बर जान खजाना ।

शोभामोहन श्रीवास्तव

बूँद बचाय उदीम हजारी

1/

जान तहूँ जनवा अउ लोगन,  हे धरनी जल सोत करारी ।

बूँद बना न सकै बिगियानिक, ईश रचे जल जान अनारी ।।

फोकटिहा उरका न रितो अब,बात बिगाड़न खातिर भारी ।

देख अँटावत भूजल सोंचन, बूँद बचाय उदीम हजारी ।।

2/

सोच बिना जल के जग जीवन,प्रान बचावन कोन अधारी ।

पेड़ बिना फर फूल लता बन,औसध अन्न बिना सुखकारी ।।

ताल तलाब सरोवर के बिन,सिन्धु बिना सुख के उजियारी ।

देख अँटावत भूजल सोंचन, बूँद बचाय उदीम हजारी ।।

शब्दार्थ

करारी-सीमित, अनारी-मूर्ख,फोकटिहा-व्यर्थ

रितो-उड़ेलना या उलीचना गिराना बहाना, उरका-समाप्त,अँटावत-जलस्तर कम होना,

उदीम-उद्यम,

शोभामोहन श्रीवास्तव

१८/०३/२०२०

 सवैया

 

सब बेद बखान करै उँकरे,सब शास्त्र उही ल सिधोवत हे ।

सद्ग्रन्थ उही ल अधार बना,मनके करियापन धोवत हे ।

धर अंतस मा गुन गोठ धरे,गँठियाय उही चक होवत हे ।

अड़हा मनखे अनजान बने,अँधियार परे अउ रोवत हे ।

देह बनै बड़ जोर लड़ैया (मत्तगयन्द छंद)

~~~~~~~~~~~~~~~~

आफत आवत देख भिंड़े बर,देह बनै बड़ जोर लड़ैया ।

हे मन हा सकवान बड़ा सुन,रीझ बुझे व बिरोध करैया ।

अंतस हे सबले जबरा अउ,दूर हँकारन रोग बलैया ।

प्रकृति दे सबला सक साधन,रूँध अजार मुसेट मरैया ।।

 

फेर कभू कुछु कारन मारन,ले बिगड़े सुमता तन तारी ।

बात बिगाड़ बियावय रोग ल,हो तन में झगरा बड़ भारी ।

ओरझथे तन शक्ति भगाय ल,देह रसे तब रोग अजारी ।

सैनिक हे रखवार हवै तन,माँझ भँजावव होव सुखारी ।।

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

शोभामोहन श्रीवास्तव

०१/०४/२०२०
भीतर ही रहियो बन राजा (मत्तगयंद सवैया)

 

सून भईं गलियांँ सड़कें अरु,बंद सभी खिड़की दरवाजा।

माल दुकान कपाट खुलै नहि, मंदिर में नहि बाजत बाजा।।

दंड मिले जब बाहिर जावहु,छोट बड़े अटके कछु काजा।

रेख खचाय दियो सरकारहि,भीतर ही रहिये बन राजा।।

 

शोभामोहन श्रीवास्तव
मत्तगयंद छंद (वेदमंत्र )

 

जे बिध रात बिहान करे,व्यवहार वही बिध हो मनुसाना ।

ओर धरे करि आवन जावन,जेवन के व्यवहार सुजाना।

देंह ल राख बने शुभ में सुख,पावन हेत सदा सुख नाना ।

बेद बतात सबो झन के हित, जीव रखे सुख ज्ञान खजाना ।

 

शोभामोहन श्रीवास्तव

रायपुर छ.ग.

मत्तगयंद छंद

जे गुनिया जन तीर बसे अउ माँगय ज्ञान सबो हितकारी ।

प्रश्न करै अउ उत्तर पावय, जीवन लाभ बनै अधिकारी

पाय उहीच बताय सबो झन, जान बने बड़ होय सुखारी ।

हे मनखे उपदेसु गुरूजन, सिल्प सुजान बनाव सवारी ।
९/सदग्रंथ गुन बखान सवैया

सब बेद बखान करै उँकरे,

सब शास्त्र उही ल सिधोवत हे ।

सद्ग्रन्थ उहीच अधार बना,

मनके करियापन धोवत हे ।

धर अंतस मा गुन गोठ सबो,

गँठियात उही चक होवत हे ।

अड़हा मनखे अनजान बने,

अँधियार परे अउ रोवत हे ।

शोभामोहन

१०/प्रभु के विराटता सवैया

जतका जग ला परसे नयना,

भरतार लुकाय हवै सबमे ।

नइ जानन कारज हेत उँहो,

करतार समाय हवै सबमे ।

जग कारज गुन सुभाव सबो,

गुनधार अमाय हवै सबमे ।

सब रंग बसे सब रूप हँसे,

अउ सार जगाय हवै सबमे ।

शोभामोहन

 

...........................................................

तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे(कलाधर छंद)

तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे
(कलाधर छंद)

लोभ हे मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाये रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रोग हे न शोक हे न जेवनी न बाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
कोहे न द्रोह हे न छोह हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
गेह के न मेह के न देह के गुलाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे।।
रंग चंग संग लोभ हे न
तामझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाम रूप में बुड़े गुनान झीमझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाव गाँव भेव हे न जेब में छदाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ना जनास हे झड़ी झकोर जाड़ घाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
विश्व बियाप्त दुःख सुःख में लगे बिराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शांत चित्तवृत्ति हे जिहाँ रमे अराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।

शोभामोहन
13/05/2023

Friday, 12 May 2023

(लोकगीत) गँवागे मोरे पैजनिया

(लोकगीत) गँवागे मोरे पैजनिया

पानी भरत रहेंव मंँझनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।

सास कमैलिन खोजे निकलिस,
संग ननद ठड़चिकनिया।
मिलिस नइ पैजनिया।।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
पानी भरत रहेंव मंँझनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।

ससुर नँगरिहा खोजे निकलिस,
चर्चा करत चरझनिया।
मिलिस नइ पैजनिया।।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
पानी भरत रहेंव मंँझनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।

सजन सिपहिया खोजे निकलिस,
देवर गइस संग बनिया।
मिलिस नइ पैजनिया।।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
पानी भरत रहेंव मंँझनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।
गँवागे मोरे पैजनिया।

शोभामोहन
12/05/2023 

लोकगीत चार दिन बर मइके जावन दे सजन मोला।

चार दिन बर मइके जावन दे सजन मोला।

चार दिन बर मइके जावन दे सजन मोला।
मइके के सुरता बड़ आत।
बिहनिया ले गोड़ खजुवात।।

जेन दिन जाहूँ थीराहूँ जुड़ाहूँ।
भाई ददा मुहरन हिरदे बसाहूँ।।
बहिनी ले करहूँ दू बात।।
मइके के सुरता बड़ आत।
बिहनिया ले गोड़ खजुवात।।
चारे दिन बर मइके जावन दे सजन मोला।
मइके के सुरता बड़ आत।
बिहनिया ले गोड़ खजुवात।।

दूसर दिन मिलहूँ काकी बड़ी ले।
तीसर दिन मिलहूँ गिंया गड़ी ले।।
चौथे दिन आहूँ लगिहात।
मइके के सुरता बड़ आत।
बिहनिया ले गोड़ खजुवात।।
चार दिन बर मइके जावन दे सजन मोला।
मइके के सुरता बड़ आत।
बिहनिया ले गोड़ खजुवात।।


शोभामोहन
12/05/2023

Thursday, 11 May 2023

(बिहावगीत) बर रूप बखान

(बिहावगीत) बर रूप बखान

बर मूड़ी सतरंग पागा लहरिया,
माथ मउरिया खपाय, हाँ हाँ जूँ।
कद पिंउरी सुघर चटक मटक जरी,
धरहा कटारी ओरमाय, हाँ हाँ जू।
काजर अँजाये दूनो नैना बरत कस,
सरभर अतर छिचाय, हाँ हाँ जू।
मउर के कलगी पवन संग फहरत,
टकत मोती मन भाय, हाँ हाँ जू।
दाँत पाँत दरमीदाना असन दमकत,
मुचुर मुचुर मुस्काय, हाँ हाँ जू।
मउर ले झाँकत दीपदीपात मुँहरन,
दुलही बिहाये बर आय, हाँ हाँ जू।

शोभामोहन
११/०५ /२०२३

(बिहावगीत) बरदी अकन समधी लानेव बरतिया।

(बिहावगीत) बरदी अकन समधी लानेव बरतिया।


कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।

कहँवा बिठावन कहँवा सुतावन।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।
बरदी कस समधी लानेव बरतिया।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।

कइसे खवावन अउ कइसे पियावन।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।
बरदी कस समधी लानेव बरतिया।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।

कइसे मनावन अउ कइसे पथावन।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।
बरदी कस समधी लानेव बरतिया।
कइसे करन सत्कार ला हाँ जू।

शोभामोहन 

१/बरात बिहावगीत

१/बरात बिहावगीत

कन्या पक्ष समधी
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।।
वर पक्ष समधी
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।।
कन्या पक्ष समधी
के दल लरिकन के दल समधी सजन।
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।
वर पक्ष समधी
दस दल लरिकन दस दल समधी सजन।
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।
कन्या पक्ष समधी
के दल बुढ़िया के दल बुढ़वा।
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।
वर पक्ष समधी
दस दल बुढ़िया दस दल बुढ़वा।
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।
कन्या पक्ष समधी
के दल नचनिया के दल बजनिया।
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।
वर पक्ष समधी
दस दल नचनिया दस दल बजनिया।
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।
कन्या पक्ष समधी
के दल लेठवा के दल लगवारे।
के दल लाने हौ बराती ला हाँ जू।
वर पक्ष समधी
दस दल लेठवा दस दल लगवारे।
सौ दल लाने हौं बराती ला हाँ जू।

शोभामोहन
११/०५/२०२३

शोभामोहन कृष्ण भजन संग्रह के अंश

शोभामोहन कृष्ण भजन संग्रह के अंश


हम तो नइ जावन सहरिया डहरिया,
गँवई मन भाथे हो।
गँवई मन भाथे हो।

करथन गँवइहा मन खेती अउ पाती।
सोना सुररथन धरतीमाई छाती। ।
भुँइया गद हरियर लुगरिया अँचरिया,
गँवई मन भाथे हो।
गँवई मन भाथे हो।।

माटी के घर कुरिया, तुलसी के चौंरा।।
अक्ती हरेली तीजा अउ पोरा।।
भाँठा भुर्री प्रिया तरिया लहरिया,
गँवई मन भाथे हो।।
गँवई मन भाथे हो।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


नर तन राम नाम कर खेती।
नर तन राम नाम कर खेती।।

राग बने अउ पाग बने हे।
देख बने तोर भाग बने हे।।
झन कर येती तेती।
नर तन राम नाम कर खेती।

बैगुन लोपा थरहा रोपा।
ये रोपा होथे घर
तोपा। ।
सोन सिल्हो जग रेती।
नर तन राम नाम कर खेती।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम



रतनपुर हाट के टिकुलिया, लगाय चमकुलिया, चलत भरे पनिया हो।
इचनी बिचनी माला मुँदरिया, पहिर के सुंदरिया, चलत भरे पनिया हो।।

छन छन बजात पैजनिया, साँवर रंग रनिया, चलत भरे पनिया।।

पहिरे करधन पटा पुतरिया, लिखे महुरिया,
चलत भरे पनिया हो।।

पहिरे हे लुगरा लहरिया, सजा सिंगरिया, चलत पनिया हो।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

मइके के हलीभली खबर सुनाबे सुवा।
ददा भाई मेर मोर अरजी लगाबे सुवा।।
आई जावै देखे बर, बूताकाम छोड़ रे।।
हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

मोरे बूता करिबे सोन दाना चराहूँ सुवा।
जुग जुग जीबे खाबे, तोर गुन गाहूँ सुवा।
कभू नइ भूलाहूँ मैं तो गुनजस तोर रे।
हरियर सुवना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

वृंदावन के कुंज गलिन भटकौ।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।

लटलट डूमर लटालट मकोइया।
धेनुचरैया किशन कन्हैया ।।
मैं बिरिजबन के गैया चरत टोटकौं।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।

वृंदावन के एक गोसाइन।
श्री राधारानी रउताइन।।
मोर मू़ड़ी ला वोकर चरन पटकौं।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


राम लक्ष्मण भरत शत्रुहन, अउ कौशिल्या माई के।
सुमरन करौ बड़ाई के।

दशरथ राउर प्रभु बिन बाउर,
अउ कैकेयी माई के।
सुमरन करौ बड़ाई के।

अवधनगर जन पुरजन परिजन,
अउ सुमित्रा दाई के।
सुमिरन करौं बड़ाई के।।
सुख सुनत गुनत, रिधि-सिधि सुमरत,
आनंदकंद सुखदाई के।
सुमिरन करौं बड़ाई के।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


पिया बिना जग सुन्ना।
पिया बिना।।

सुतत नयन देख सपना सजन के।
चरचर ले फुलगे डुहड़ू हर मन के।

जागत बढ़िस दुख
कई गुन्ना।।
पिया बिना जग सुन्ना,
पिया बिना।।

झनकत बैरी धुन कान में मुरलिया।
घाव लगा छाती हाय! चलदिस छलिया।।
दुख धरा सहे बर नावा जुन्ना।
पिया बिना जग सुन्ना,
पिया बिना।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम



सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
राम बिसार झन भाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।

झन बिसार सीतामाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर सुखदाई,
सुंदर तन तैं पाके।।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।

सबके मना जुईआई,
सुंदर तन तैं पाके।
छोड़ दे अपन पराई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।

काट ले भव रोगराई,
सुंदर तन तैं पाके।
छोड़ दे मान बड़ाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।

रिंगीचिंगी मुनगा हे लहसे चुचुटिया।
मोहना के नैना शिकरिया हे राम।
मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।

रुनझुन फरे फूले हे धाने के बाली।
लइकुसही उम्मर मन मतवाली।।
अतलंगहा सजन सँवरिया हे राम।
मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।


शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१०

लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।

सावन आवन लागे घाट पाट टोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।

निर्मल जर धार बहै घटा रटाटोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।

गंगा डुबकी लेवै उहि पुनफल जोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।

पाप ताप संताप के गठरी छोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

११

डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

मुड़ीच मुड़ी के माला घेंच ओरमाई हो।।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

देव देबि रूप रंग देख गें पराई।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

रक्सा के रकत में आये हे नहाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

शंकर भुँइया घोंडे छेंके महामाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

शोभामोहन बिनती करै मन लाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१२

कोन गाँव रहे बसे रतिहा तैं सुवना रे।
कोन गाँव करेस बसेरा रे।
समुन्दर जिहाज बइठे बिगन अधार सुवा।
उड़िया के जाबे कोन देश रे।

काय चारा चरथस, कती कती बिचरथस।
बोल तो का हे तोर नाव रे।।

कोन पठोये तोला, सुघर दे रंग चोला।
अजगुत तोर सुभाव रे।।

चटक मटक तोरे आँखी पाँखी सुवना रे।।
लाली गुलाली तोरे ओंठ रे।
कोने नाव जपथस, अउ जग खपथस।
अगन मगन लहलोट रे।


शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१३

फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।

रोग जिहाये रोगहा जागत गड़ी।
भोग जिहाये भोगहा जागत गड़ी।।
आखिर दोनों के कुछु आवत नइ हाथ हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।

चोरी नेतत चोरहा जागत गड़ी।
जोग जगाये जोगहा जागत गड़ी।।
नेतघात देखत हे, अटकर  लगात हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।

पहट चराय पहटिया जागत गड़ी।
बिरहा बियाकुल तिरिया जागत गड़ी।
जागत उही जेला तो गरज हर जगात हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१४
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहात दे गगरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।

बोहा दे गगरिया, बोहा दे सँवरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।

बना दे गुड़िया, मड़ा दे अधरिया ।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।

गोकुल नगरिया के छैला सँवरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।

मरुवा कोंवर मोरे पतली कमरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।

भींजै झन झिलमिल अँचरा लहरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।

१५

छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन।
घंटी घँघरा बाजत, दुरिहा ले ठनठन।।

हरियर हरियर चारा चरत हे।
भाँड़ी हुदेनत भसकाये परत हे।।
पुछी टाँग दँउड़त हे रनबन रनबन।
छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन। ।

धरे धरावत ना बाँधे बँधात हे।
भुँकरत हे हुमरत हे, सत्ती कस जात हे।।
गारीगल्ला खावत गली गली जन जन।
छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन। ।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१६

बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।

सँभर पकर चले दहिया बेचने बर,
गिंजरत गोकुल गाँव हो।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।

ककनी के खनखन, साँटी के छनछन।
जिउरा धँसावत हे बान हो।।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।


झलमल चुँदरिया, पँहुची मुँदरिया।।
साँसा रटत घनश्याम हो।।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।

कनिहा में करधन, अउ सोंटा बेनी घन।
फुँदरी गँथाये फीता डार हो।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।


शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१७
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।

जमुना के लहरा ठोठके खड़े हे।
ठोठके खड़े हे श्याम, ठोठके खड़े हे।
बंशी में का तोर जादू भरे हे।।
जादू भरे हे श्याम जादू भरे हे।।
मोरपंखी सजाना गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।।

रुखराई मन के डोलत नइ पाना।
बछरू गइया टेंड़े कान कान्हा।।
माथ मकुट खपाना, गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१८
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।

माथ मटुकिया लटक झुमरिया।
गोड़ भँदइया, मूड़ कुमरिया।।
तोर कान कुंडल बरत हे लकालक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।।

सोनहा करधन कद कोसाही।
पँहुची सजवन साजू बाँही।।
दाँत पाँत आँखी नौरंगी चकाचक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।

अंग अंग सजवन, गरभर माला।
दमकत मुँहरन करत उजाला।
परत नजरिया जीव करथे धकाधक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।


शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

१९
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।

अलहन टारे बर।
अमरित झारे बर।।
सत्संग में मन लगाये कर गुँइया।
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।

करम सुधारे बर।
भाग सिंगार बर।।
हरिनाम जिभिया सजाये कर गुँइया
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।

पिरित गढ़ाये बर।
अलख जगाये बर।।
भवाटवी जग ला बिसार कर गुँइया।
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।

तन ला भुलाये बर।
अंतस ला पाये बर।।
थोर थोर उदिम लगाये कर गुँइया।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

२०

भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

नइ मोरे मइके, नइ मोरे ससुरे।
नइ मोरे परिवार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

नइ मोर बाप बबा अउ भइया।
नइ मोरे गोतियार ।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

नइ मोरे संगी नइ मनरंगी।
निचट हवौं निरधार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

नइ मोरे आगू नइ मोरे पाछू।
नइ मोरे रखवार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

नइ मोरे काया नइ मोरे माया।
नइ मोरे संसार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम


२१

हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

तहीं मोर मइके, तहीं मोर ससुरे।
तहीं मोर परिवार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

तहीं मोर बाप बबा अउ भइया।
तहीं मोर गोतियार ।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

तहीं मोर संगी तहीं मनरंगी।
तहीं मोर भरतार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

तहीं मोर आगू तहीं मोर पाछू।
तहीं मोर रखवार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

तहीं मोरे काया तहीं मोर माया।
तहीं मोर संसार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।

शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम

कलाधर छंद

लोभ हे मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाये रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।

तामझाम
धाम
घाम
विराम
अकाम
अनाम
अराम
ताम
झीमझाम हे।
गुलाम हे।

घनाक्षरी

मोर नाम जपबे अधीन तोर हो जहूँ मैं।
जग दुख दगली ले दिहँव निकाल मैं।
मोला जिनगी बनाबे तार देहूँ चोला तोर,
मोरे नाम साधन हे जगत भुवाल मैं।।
मोर नाम लेवत अपावन पावन होबे,
भागलेख लिखे ला मिटाहूँ तोर भाल मैं।
मही तोर हिरदे बसथौं धुकधुकी बन,
पल-पल छिन-छिन राखथौं खियाल मैं।।

चारो कोती छा के
देखौं तोरे मति गति सब,
कीर्तन कर तोर करहूँ उद्धार मैं।
देह के मंगल बर साँस में बसा ले मोला,
नरकबासा ले झट दिहँव उबार मैं।
जेन जेन नता गोता के नार लमाये हस,
सबो में महीच मही हवौं एकसार मैं।
जतका भजबे मोला महूँ तोला भेजहूँ रे,
भजबे तौ बचन ला सकौं नहीं टार मैं।।

शोभामोहन
०८/०५/२०२३
दिन रविवार
रात्रि १२:२४

छत्तीसगढ़ी सोहरगीत

छत्तीसगढ़ी सोहरगीत
१/
जइसे चंदा सुरुज फबे अगासे, जगत ला उजासे हो।
तइसे तिरिया के कोरा फबे, बाल गोपाल  ले हो ललना।

मंदिर में फबे जस मुरतिया, दीया संग फबे बतिया हो।
तइसे तिरिया के कोरा फबे, बाल गोपाल ले हो ललना।

जइसे हरियर रंग फबे धरती, अगास रंग नीलहा हो।
तइसे तिरिया के कोरा फबे, बाल गोपाल  ले हो ललना।

फबे रूनझुन फरे फूले खेती, सजन घर बेटी हो।
तइसे तिरिया के कोरा फबे, बाल गोपाल ले हो ललना।

शोभामोहन असीद देवै, कुलदेवता देबी सेवै हो ललना
सुखछँइहा जिनगी पहाय।
मंगल सोहर गावै हो
हो ललना।


शोभामोहन

२/सोहरगीत

देशभगत बनै लाल, बैरी के बनै काल हो।
बेटा देश के करै रखवारा, कुलडीह उजियारा हो ललना।

बड़ दिन धरे हन धीर,
फिरिस दिन फेरे हो।
राम किसन जइसे लाल,
पायेन बड़भागे ले हो ललना



शोभामोहन




नरेंद्र मोदी जसगीत
३/
जस चंदा सुरुज फबे अगासे।
घर फबे कुल उजास हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो ।।


मंदिर में फबे जस मुरतिया, दीया संग फबे बतिया हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

जइसे हरियर रंग फबे धरती।
अगास रंग नीलहा हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

फबे रूनझुन फरे फूले खेती, सजन घर बेटी हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।

शोभामोहन ये असीदे देवै।
कुलदेवता देबी सदा सेवै हो।।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो

जगसेवा में जिनगी पहावैं।
सबो जगत उँकर गुन गावै हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।

शोभामोहन

४/

नरेन्दर मोदी यशगीत
सोहर धुन (हो ललना)

भारत माँ के दुलरुवा लाल।
बैरी बर बने काल हो।।
नरेन्द्र जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

तुष्टिकरन मिटायेव रोग।
बिगन दया सोग हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

धारा तीन सौ सत्तर टारेव।
देशहित ला बिचारेव हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

कटोरा धरायेव पाकिस्तान।
टोरेव गरब गुमाने हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

बैरी के चिन्हारी करवायेव।
सिधवा हिन्दवा ला जगायेव हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

देश में होगे नवा बिहान।
मंदिर बनत राम भगवाने हो।।
नरेन्दर जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

देशबिरोधी अउ गद्दार।
पावत नइ तोरे पारे हो।
मोदी जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।

जब ले तुँहर बनिस सरकार।
गरीबहा ला मिलिस अधिकारे हो।
मोदी जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो मोदी।
जुग जुग जियौ महराज, भारत भुँइया रक्षक हो

शोभामोहन
१०/०५/२०२३



५/

बेटी जनम सोहरगीत

जेने कोख जनमे हे बिटिया, वो दाई बाप धन धन हो।
अउ धन धन कुल परिवार।।
आये हे घर लछमी हो।

जेने कोख जनमें हे बिटिया, वो बबा दाई धन धन हो।
अउ धन धन कुल परिवार।।
दिये सुख अपार, आये हे घर लछमी हो।


अँगना के शोभा कहलावै।
कि लछमी जइसे पाँव हे हो।।
बिटिया करे कुल डीह बढ़वार, आये हे घर लछमी हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।

आमाडारी फलै फूलै आमा।
लीमडारी फरै फूलै लीम रामा हो।।
तस देबी तिया कोरा फलै फूलै बिटिया हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।

झुलना झुलावौ मंगल गावौ।
दई देवता मनावौ हो।
बिटिया के डीठ उतारौ जीव जुड़ाव हो।
बिटिया जुग जुग जीयै होवै नाव, आये हे घर लछमी हो।

६/

नान्हे नान्हे रखौ परिवारे।
देशहित ला बिचारे हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

दूए तीन हो बाल गोपाले।
जिनगी हो खुशहाले हो।
बहिनी कोरी कोरी लइका जे बियाय, अहोनरक भोगै हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

हिन्दू हो ते हो मुसलमाने।
सबो रखौ धियाने हो।
बहिनी लइका शुभ करम सिखावौ, मनुखपन डारौ हो।।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

होगेन एक सौ चालीस करोडे़।
तभो लगे हे बियाये होड़े हो।
बहिनी खाना दाना कइसे मिल पाही, देस  आगू डहर जाही हो।
बहिनी खेत खार भुँइया करारी, अउ बाढ़त हे अबादी हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

देस ला करे बर सजोरे।
बैरी के मुँह टोरे हो।।
बहिनी लइकन बनावौ पहेलवान तभेच देश बाँचही हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

धरम सिखोवौ संताने।
पुरखौती गुन जाने हो।
बहिनी देश अउ धरम बचाय कन्हिया कसि लेवौ हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

देशभक्त लइकन ला बनावौ।
श्रीमद्भागवत गीता पढ़ावौ हो।।
बहिनी विश्व गुरु भारत ला बनाये जतन करौ निशदिन हो।
बहिनी भारत म जनसंख्या विस्फोट होवन झन देवौ हो।

7/

बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।
अवध में जनमे हवै रघुरैया।
अउ संग जनमें तीनझन भैया।।
कौशिल्या माई उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।

अवध में जनमे जाँवर जिंयर भैया।
जिनकर हे सुमित्राजी  मैया।।
दूनो के संगे उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।

अवध में जनमें भरत
कस भैया।
कैकयी रानी जेकर मैया।।
कैकेयी रानी उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।।

गोकुल जनमें किसन कन्हैया।।
जेन चरावै गोकुल में गैया।।
महतारी जसुदा उतारै नजर डीठ।
बिरबिट कारी कोइली
बोले मीठ मीठ।।

शोभामोहन


धुन(एक लखन एक राम हो)

पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।

संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

राजपाठ करत जिनगी कटत हे।
खरकत हमर जवानी हो।
तीनझन रानी हे सबगुनखानी हे।
फेर नइ हे बाल गोपाल हो।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

सुरुज अरग देवैं, गंगा नहावै सुघर।
दानपुन करैं मनमानी हो।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

अजोध्या रघुकुल डीह अउ डोंगर में।
कोने बारही दीया मोर हो।
कोन राज चलाही, कोन काज चलाही।
कब होही महल अंजोर हो।।
पंलग में राजा दशरथ हे बइठे।
मचिया में कौशिल्या रानी हो।
संसो में बुड़े हावैं मुँह हे अइलाये।
दूनो के आँखी में पानी हो।

शोभामोहन


8/ बिहावगीत

कोन बारी फूलै फूल हरदी, कोन बारी फूलै फूल हरदी।
कि कोन बारी फूले दूबी घास।
कोन बारी फुलै फूल सुपारी। कोन बारी फुलै फूल सुपारी।
कि कोन बारी भिरहा के बाँस।।

ददा बारी फूलै फूल हरदी, ददा बारी फूलै फूल हरदी।
कका बारी फूल दूबी घास।
भइया बारी फुलै फूल सुपारी।
बड़ा बारी भिरहा के बाँस।।

कोन लाने हरदी ला खन के, कोन लाने  हरदी ला खन के।
कि कोन लाने फूल दूबी घास।
कोन लाने टोर के  सुपारी। कोन लाने टोर के  सुपारी।
कि कोन लाने भिरहा ले बाँस।।

ददा लाने हरदी ला खन के, ददा लाने  हरदी ला खन के।
कि दाई लाने फूल दूबी घास।
कका लाने टोर के  सुपारी। कका लाने टोर के सुपारी।
कि भाई लाने भिरहा ले बाँस।।

9/

बिहतरागीत

कोन चुलमाटी तेलमाटी खने, कोन चुलमाटी तेलमाटी खने।
कि कोन हर बाजा ला बजाय।
कोन चँउक पूरै मड़वा, कोन चँउक पूरै मड़वा।
कि कोन मँगरोहन लाय।

भाँटो चुलमाटी तेलमाटी खने, भाँटो चुलमाटी तेलमाटी खने।
बजनिया बाजा ला बजाय।
सुवासिन चँउक पूरै मड़वा, सुवासिन चँउक पूरै मड़वा।
सगा सोदर मँगरोहन  लाय।

कोन आये मड़वा गड़ाये बर। कोन आये मड़वा गड़ाये बर।
कोन आये मड़वा ला छाय।।
कोन आये हरदी ला पीसे कूटे। कोन आये हरदी ला पीसे कूटे।
कोन तेल हरदी चढ़ाय।

भाँटो आये मड़वा गड़ाये बर। भाँटो आये मड़वा गड़ाये बर।
फूफा आये मड़वा ला छाय।।
दीदी आये हरदी ला पीसे कूटे। दीदी आये हरदी ला पीसे कूटे।
फूफू तेल हरदी चढ़ाय।

कोन सजाये हथँवा नरियर, कोन सजाये हथँवा नरियर।
कोन डुमर पिढ़ुली बनाय।
कोन गढ़े हे कंकन मउरी। कोन बनाये कंकन मउरी।
कि कोन माथ मकुट बनाय।।

छोटे बहिन साजे हथँवा नरियर, छोटे बहिन साजे हथँवा नरियर। बहिन साजे हथँवा नरियर।।
कि बढ़ई डुमर पिढ़ुली बनाय।
सोनार गढ़े हे कंकन मउरी। सोनार गढ़े हे कंकन मउरी।
कि मनिहार मकुट बनाय।।

कोन आये अँचरा देवन बर, कोन आये अँचरा देवन बर।
अउ कोन माँदर बजाय।
कोन आये मंगलगीत गाये बर। कोन आये मंगलगीत गाये।
कि कोन आये पूजा करवाय।

दाई आये अँचरा देवन बर, दाई आये अँचरा देवन बर।
कि काकी बड़ी माँदर बजाय।
गवैया आये बिहावगीत गाये। गवैया आये बिहावगीत गाये।
पंडित जी पूजा करवाय।

10/ सोहर

जनमें घर सुघर लाल।
डीह डोंगर उजियाल हो।
बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो। बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

बबा वारि रूपिया लुटात।
बुढ़ीदाई अन तउलावत हो।
बबुवा सूपा भरभर धान करत पुनदाने हो।
बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।।

नाचत गावत फुफू आत।
फूफा संग फटफटावत हो। बबुवा लेये बर नेगे आँजन बर काजर हो बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

ददा सगा सोदर बलात।
बाँजारूजी बजावत हो। बबुवा गलीखोर दना दनदनी फटाका फोरवावत हो।बबुवा जुग जुग जीयौ सुख पावौं, गावन हम सोहर हो।

शोभामोहन
11/05/2023

लालालाला लालाला

बस्तर मोर पुराना हे।
गजब कठिन धोवाना हे।
मतलाये तरिया पानी।
अउ काई के रजधानी।।
कामबूता अउ तेलघानी।
मतलाये तरिया पानी।

कोटकोट ले हे चिटियाये।
भकर भकर ये बस्साये।।
सबो लाभ होगे हानी।
मतलाये तरिया पानी।

खीसा में नइ पाई हे।
माटीराख न भाई हे।।
लाग-नता बदले बानी।
मतलाये तरिया पानी।।
जे पथरा मूँड़ धारे हौं।
तेला गोड़ कचारे हौं।।
देखत जग आनीबानी।
मतलाये तरिया पानी।।

जेकर संग हे गुरलाटा।
साने उही लुगरा पाटा।।
सीखा देवत नादानी।
मतलाये तरिया पानी।।

शोभामोहन
11/05/2023


संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...