Tuesday, 16 May 2023

तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे(कलाधर छंद)

तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे
(कलाधर छंद)

लोभ हे मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाये रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रोग हे न शोक हे न जेवनी न बाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
कोहे न द्रोह हे न छोह हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
गेह के न मेह के न देह के गुलाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे।।
रंग चंग संग लोभ हे न
तामझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाम रूप में बुड़े गुनान झीमझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाव गाँव भेव हे न जेब में छदाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ना जनास हे झड़ी झकोर जाड़ घाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
विश्व बियाप्त दुःख सुःख में लगे बिराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शांत चित्तवृत्ति हे जिहाँ रमे अराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।

शोभामोहन
13/05/2023

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