Tuesday, 14 April 2026

घनाक्षरी रचना –

घनाक्षरी रचना –

कोनो धरे भंग रंग, कोनो धरे संगी संग।
कोनो धरे पिचकारी छिंचत गुलाल ला ।
कोनो रंगै बिसाखा ला कोनो रंगे ललिता ला,
कोनो रंगै चन्द्रावली चुनरिया लाल ला।
कोनो रंगै पिंयर तौ कोनो रंगै नीला रंग,
कोनो रंगै श्याम रंग नाक मुँह भाल ला।
कोनो हर रंगै तन कोनो हर रंगै मन,
रधिया हा रंगै बर खोजै नंदलाल ला।। 

Monday, 13 April 2026

138/शेषा अथवा शेषराज वा विद्युल्लेखा छन्द(६।१पिङ्गल)

शेषा अथवा शेषराज वा विद्युल्लेखा छन्द
(६।१पिङ्गल)
सूत्र - लालाला लालाला

आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

आनंदा छाये हे!!
गोविन्दा आये हे!!
देखे लल्ला जावौ या !!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

साजौ दीया बाती !
लानौ संगी साथी !!
लोकागीता गावौ!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

घूमौ पारा पारा !
न्योता दे दौ झारा !!
माला लावौ या!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

जाये के ! बेरा हे !
जी ला बोधाये के!!
पोटारौ पावौ या !!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन

बैसाख अंधियारी पाख द्वादशी 
तद्नुसार 14/04/2026

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...