Sunday, 19 October 2025

दँगर दंँगर रेंगत बटचल्ला।

दँगर दंँगर रेंगत बटचल्ला।

जग पैडगरी में अँखमुन्दा, 
दँगर दंँगर रेंगत बटचल्ला।
सतहा के सत परछो लेवत,  
देत रात दिन गारीगल्ला।।

झूठ नाम में मन बहलावत, 
सगे ददा ला अपन भुलावत।
नित नवा नवा ददा बनावत,
झूठ लबारी के धर पल्ला। 

झूठे राँधत झूठे खावत,
अँगरी डार झूठ ओकियावत,
झूठ लुहावत लोभ सुहावत, 
धन पनकावत अंटी गल्ला। 

झूठ धरम धर झूठ करम कर, 
मन मस्तक में भूत भरम धर,
बैरी हितवा बना मुरुख नर,
झूठ सिखोवत लल्ली लल्ला।
मुसुवा कस घर नेव धँसावत,
महिसासुर बंसज बन आवत,
माड़ीबुध अगन कुदवावत, 
खाली हे मूड़ ऊपरतल्ला।। 


शोभामोहन 




झुलना बँधाये बिन डोर हो

नत्ता के झुलना में धीरे-धीरे झुलबे,
झुलना बँधाये बिन डोर हो।
सुरता पैडगरी में धीरे धीरे बुलबे, 
हपटे झन पावै गोड़ तोर हो ।। 
जगअड़गसनीफाँसी अरोये जिउ, 
नइ हे भलाई इहाँ तोर हो। 
दसे फूलपौंदर सब खुँद नाहकत, 
पथरा कस जग कठोर हो ।। 
दँगर-दँगर तोर रेंगे के टकर परे,
रेंग देख-ताक के निटोर हो ।
निकल-निकल अब झन चिटको बिलम,
रुँधना बँधना सब छोर हो।
जगरस करु कसा चुरचुर नुनछुर, हरिनाम रस मन बोर हो।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 

Monday, 6 October 2025

मनहरण घनाक्षरी छन्द (हिन्दू जागरण छन्द)

मनहरण घनाक्षरी छन्द 
(हिन्दू जागरण छन्द) 

१.
निज धर्मग्रंथ यदि जानने की चाह है तो, 
सत्य सतातन धर्मसभा नित्य  जाइए। 
नकली बाबाओं से रहिए सदा सावधान, 
धननाश हो जायेगा झाँसे में ना आइए। 
क्रिकेट सिनेमा में गँवायें ना धन समय, 
धर्म संस्कृति नवनिहालों को सिखाइए। 
छोड़े सरकारों को कोसना हर बात पर, 
अपने कर्तव्यों को तो ठीक से निभाइए। 
२.
जात-पात ऊँच-नीच विष के बेलों को सींच, 
नेताओं ने पाल-पोस दिया पानी खाद है। 
भाषा-बोली के पुल को तोड़ देशद्रोहियों ने, 
एकता अखंडता को किया बरबाद है। 
कौन तोड़ सकता है लकड़ी के गट्ठर को , 
छूटने से टूटने की होती शूरुआत   है। 
सर्वप्रथम राष्ट्रीय एकता के भाव रखें, 
एकता में भिन्न श्रेणियांँ तो आती बाद हैं। 
३.
सरल जीवनपथ करेंगे अनुभव से, 
अपने बड़े बूढ़ों से ज्ञान लाभ लें कभी ।
सुख-सुविधा घेरे से बाहर निकल और, 
दीन दुखियों के हाल पूछें कुछ दें कभी । 
पैसा पुत्र-पुत्री पत्नी-पति चिंता से उबर, 
सेवा सत्कार माता पिता का करें कभी। 
सरकार के भरोसे बैठें नहीं हाथ बाँध, 
मुख नहीं मोड़ें निज कर्तव्यों के कभी। 
४.
मत से ही बड़े-बड़े काज सधते कठिन, 
मत के महत्व जान मतदान दीजिए। 
मत को खरीदना जो चाहते हैं धनबल, 
मत मत दीजिए पुकार सुन लीजिए । 
मत बेचकर पछतायेंगे बहुत आप, 
जान बूझ के जहर को तो नहीं पीजिए। 
क्षण भर की भूल से भुगतेंगे पाँच साल, 
मत के प्रयोग को विवेकपूर्ण कीजिए।। 
५.
मत यदि बेंचेगे तो पायेंगे बहुत दुख, 
वोट जो खरीदेगा वसूलेगा तो रोयेंगे  । 
अस्तित्व मिटा देंगे तिलक शिखा छीन लेगे, 
धर्म सभ्यता संस्कृति सब कुछ खोयेंगे । 
वह दिन आयेगा बदलेंगी जीवनशैली , 
कच्छ मच्छ खायेंगे कबर लेट सोयेंगे। 
शोभामोहन विनती कर रही बार बार 
सुधरेंगे तभी तो कलंक सब धोयेंगे। 
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव

Thursday, 2 October 2025

जय जय लट्ठबजैया योगी ।नाम सुनत कंपित मनोरोगी ।।

योगी बाबा चौपाई


जय जय लट्ठबजैया योगी ।
नाम सुनत कंपित मनोरोगी ।।
अंग-वस्त्र शुभ-भगवाधारी।
जय जय हे लक्ष्मण अवतारी।
बुलडोजर हैं शस्त्र तुम्हारे ।।
दंडित कर सब दुष्ट संहारे।।
सत्य न्याय के अडिग पुजारी।
दुष्टों पर तुम पड़ते भारी।।
जय सुभाषचंद के अनुगामी।
जय गोरखपुर मठ के स्वामी।।
जय जय वेद शास्त्र के ज्ञाता।
धन्य पुत्र तुम भारतमाता।।
मेघ सदृश जब जब हुँकारे।
जागे लोग उनींदे सारे।।
तुमको आती है सब भाषा।
समझाते भी अच्छा खासा।।
हे महान सद्गुण शुभ राशी।
कर दिये भव्य अयोध्या काशी।।
व्रती तपस्वी तन सुखत्यागी।
पुण्यभूमि सेवक बड़भागी।।
लट्ठ बजाकर भुजा उखाड़े।
जो विधान के आये आड़े।।
लाल बाल और पाल पुजारी।
अरिदलगंजन जगसुखकारी ।।
तुम नवभारत युग निर्माता।
हिन्दू जन जीवन धन त्राता।।
बिन सुख संपति के तुम राजा।
बजा रहे दुष्टों का बाजा।।
अखिल विश्व में बाजे डंका।
सतत जलाते अरिदल लंका।।
कीर्तिमान रच खंभे गाड़े।
बड़े-बड़े भूतों को झाड़े।।
बाहुबली की किये ठुकाई।
और वसूले पाई पाई।।
जब करते उद्दंड धुनाई।।
जनता देती तुम्हें बधाई।।
जो छेड़े पर पुत्री नारी ।
सबक सिखाये सब व्यभिचारी।।
जय सद्गुणी सदा सुखकारी।
हे नव रुचिकर सत्ताधारी।।
जो करते गड़बड़ घोटाला।
तुम करते उनका मुँह काला।।
धरती छुपने कम पड़ जाती।
बुलडोजर चढ़ जाती छाती।।
चलता नहीं कोई हथकंडा ।
पुलिस पीटती लेकर डंडा।।
जो हड़पे भूमि सरकारी ।
तुम निकालते हेकड़ी सारी।।
देशद्रोही की नींद उड़ाते।
निर्मल जन पर स्नेह लुटाते।।
जय जय कृष्णचन्द्र अनुगामी।
सभी कलाओं के तुम स्वामी।।
करे देश से जो गद्दारी।
देते हो उनको दुख भारी।।
दुष्ट क्रूर संत्रास निवारक।।
सत्य न्याय निष्ठा ध्वजधारक।।
राष्ट्र-धर्म के तुम रखवारे ।
जनता सबदिन संग तुम्हारे ।।
जय सशक्त जय सक्षम बाबा ।
हर हर काशी बम बम बाबा।।
शोभामोहन नित गुण गाये।
रक्षा करना आँच ना आये।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/१०/२०२५

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...