मनहरण घनाक्षरी छन्द
(हिन्दू जागरण छन्द)
१.
निज धर्मग्रंथ यदि जानने की चाह है तो,
सत्य सतातन धर्मसभा नित्य जाइए।
नकली बाबाओं से रहिए सदा सावधान,
धननाश हो जायेगा झाँसे में ना आइए।
क्रिकेट सिनेमा में गँवायें ना धन समय,
धर्म संस्कृति नवनिहालों को सिखाइए।
छोड़े सरकारों को कोसना हर बात पर,
अपने कर्तव्यों को तो ठीक से निभाइए।
२.
जात-पात ऊँच-नीच विष के बेलों को सींच,
नेताओं ने पाल-पोस दिया पानी खाद है।
भाषा-बोली के पुल को तोड़ देशद्रोहियों ने,
एकता अखंडता को किया बरबाद है।
कौन तोड़ सकता है लकड़ी के गट्ठर को ,
छूटने से टूटने की होती शूरुआत है।
सर्वप्रथम राष्ट्रीय एकता के भाव रखें,
एकता में भिन्न श्रेणियांँ तो आती बाद हैं।
३.
सरल जीवनपथ करेंगे अनुभव से,
अपने बड़े बूढ़ों से ज्ञान लाभ लें कभी ।
सुख-सुविधा घेरे से बाहर निकल और,
दीन दुखियों के हाल पूछें कुछ दें कभी ।
पैसा पुत्र-पुत्री पत्नी-पति चिंता से उबर,
सेवा सत्कार माता पिता का करें कभी।
सरकार के भरोसे बैठें नहीं हाथ बाँध,
मुख नहीं मोड़ें निज कर्तव्यों के कभी।
४.
मत से ही बड़े-बड़े काज सधते कठिन,
मत के महत्व जान मतदान दीजिए।
मत को खरीदना जो चाहते हैं धनबल,
मत मत दीजिए पुकार सुन लीजिए ।
मत बेचकर पछतायेंगे बहुत आप,
जान बूझ के जहर को तो नहीं पीजिए।
क्षण भर की भूल से भुगतेंगे पाँच साल,
मत के प्रयोग को विवेकपूर्ण कीजिए।।
५.
मत यदि बेंचेगे तो पायेंगे बहुत दुख,
वोट जो खरीदेगा वसूलेगा तो रोयेंगे ।
अस्तित्व मिटा देंगे तिलक शिखा छीन लेगे,
धर्म सभ्यता संस्कृति सब कुछ खोयेंगे ।
वह दिन आयेगा बदलेंगी जीवनशैली ,
कच्छ मच्छ खायेंगे कबर लेट सोयेंगे।
शोभामोहन विनती कर रही बार बार
सुधरेंगे तभी तो कलंक सब धोयेंगे।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
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