जय जय लट्ठबजैया योगी ।
नाम सुनत कंपित मनोरोगी ।।
अंग-वस्त्र शुभ-भगवाधारी।
जय जय हे लक्ष्मण अवतारी।
बुलडोजर हैं शस्त्र तुम्हारे ।।
दंडित कर सब दुष्ट संहारे।।
सत्य न्याय के अडिग पुजारी।
दुष्टों पर तुम पड़ते भारी।।
जय सुभाषचंद के अनुगामी।
जय गोरखपुर मठ के स्वामी।।
जय जय वेद शास्त्र के ज्ञाता।
धन्य पुत्र तुम भारतमाता।।
मेघ सदृश जब जब हुँकारे।
जागे लोग उनींदे सारे।।
तुमको आती है सब भाषा।
समझाते भी अच्छा खासा।।
हे महान सद्गुण शुभ राशी।
कर दिये भव्य अयोध्या काशी।।
व्रती तपस्वी तन सुखत्यागी।
पुण्यभूमि सेवक बड़भागी।।
लट्ठ बजाकर भुजा उखाड़े।
जो विधान के आये आड़े।।
लाल बाल और पाल पुजारी।
अरिदलगंजन जगसुखकारी ।।
तुम नवभारत युग निर्माता।
हिन्दू जन जीवन धन त्राता।।
बिन सुख संपति के तुम राजा।
बजा रहे दुष्टों का बाजा।।
अखिल विश्व में बाजे डंका।
सतत जलाते अरिदल लंका।।
कीर्तिमान रच खंभे गाड़े।
बड़े-बड़े भूतों को झाड़े।।
बाहुबली की किये ठुकाई।
और वसूले पाई पाई।।
जब करते उद्दंड धुनाई।।
जनता देती तुम्हें बधाई।।
जो छेड़े पर पुत्री नारी ।
सबक सिखाये सब व्यभिचारी।।
जय सद्गुणी सदा सुखकारी।
हे नव रुचिकर सत्ताधारी।।
जो करते गड़बड़ घोटाला।
तुम करते उनका मुँह काला।।
धरती छुपने कम पड़ जाती।
बुलडोजर चढ़ जाती छाती।।
चलता नहीं कोई हथकंडा ।
पुलिस पीटती लेकर डंडा।।
जो हड़पे भूमि सरकारी ।
तुम निकालते हेकड़ी सारी।।
देशद्रोही की नींद उड़ाते।
निर्मल जन पर स्नेह लुटाते।।
जय जय कृष्णचन्द्र अनुगामी।
सभी कलाओं के तुम स्वामी।।
करे देश से जो गद्दारी।
देते हो उनको दुख भारी।।
दुष्ट क्रूर संत्रास निवारक।।
सत्य न्याय निष्ठा ध्वजधारक।।
राष्ट्र-धर्म के तुम रखवारे ।
जनता सबदिन संग तुम्हारे ।।
जय सशक्त जय सक्षम बाबा ।
हर हर काशी बम बम बाबा।।
शोभामोहन नित गुण गाये।
रक्षा करना आँच ना आये।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/१०/२०२५
राष्ट्र-धर्म के तुम रखवारे ।
जनता सबदिन संग तुम्हारे ।।
जय सशक्त जय सक्षम बाबा ।
हर हर काशी बम बम बाबा।।
शोभामोहन नित गुण गाये।
रक्षा करना आँच ना आये।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/१०/२०२५
No comments:
Post a Comment