Wednesday, 10 June 2026

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः"
`

लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः।
अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥
रात्रिंदिवं प्राणेनासौ,जपेन्नित्यं गुणान् रामे
यत्र रामस्तत्र न रोगो, न शोको, न कामः।
क्रोधो द्रोहो मोहो न सन्ति, चित्तं निष्कामम्॥
देहात् गेहात् विरक्तोऽयं, न च बद्धो हि वामया॥
रङ्गसङ्गाद् विरक्तोऽयं, चित्ते हि सः उपरमः॥
ग्रीष्मवृष्टिशरत्काले अविचलो गुणग्रामः॥
नामग्रामे न भेदोऽस्य, त्यजति पोटलिकाम्॥
दुःखसुखे विश्वगते, चित्तं याति विरामम्॥
रङ्गसङ्गाद् विरक्तोऽयं, चित्ते हि सः उपरमः॥
शान्तचित्तवृत्तौ सततं, लभते स विश्रामम्॥
मनुते जानाति च सः, सर्वत्र पश्यति रामम्॥
सम्माने नास्ति तृष्णा, न भयं चापमानतः॥
भेदबुद्धिर्विनष्टा, निर्मलां धियम् लब्धवान् ॥
सोऽहं ब्रह्मेति जानाति, लभते मुक्तिधाम च॥
शुभचन्द्रार्कसुशोभे, हृदि वसति मोहन रामः॥

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

Saturday, 23 May 2026

वेद सुमरनी जोहार ३

टीका-जेन दूसर के जिनगी में आय बिपत देख के हाँसथे अउ अपन व्यंग्य ले बिपतपरे मनखे के दुःख ला दुनपट करथे, अइसन सतमारग ले पतित मनखे जेन परमात्मा के मेर जाय बर निकले हे, फेर वोहर यात्रा करत-करत प्रकृति के संपर्क ले व्याप्त गुन मन के कारन चेतना मइलागे हे, अउ अपन परम धाम के पावन पबरित जात्रा ला भुलाके सांसारिक जंजाल में फंस के अपन मूल उद्देश्य ला भुलागे हे, अइसन रद्दा ले बिमुख आं गाव ले आय जीव ला जोहार हे, जेन परसुख ले इरखा भाव रखथे, अउ दूसर के सुख देख के जेकर भीतर इरखा डाह के आगी भरभर-भरभर बरे लगथे, अइसन कलुषित होय हुतात्मा जेन अइसे निम्न बेवहार करके अपन बर बिपत मन ला नेवता देथे, वोला जोहार हे] जेला पार निंदा चारीमें महारथ हे, अउ जेला असत बचन ही सुहाथे, ये प्रकार कुकृत्य करके अपन पापभण्डार ला समृद्धकरैया ला जोहार हे] जइसे करा हर फसल ला चौपट करे के पाछू सवाँगे भी नष्ट हो जाथे, वइसने दूसर ले इरखा द्वेष अउ दुर्भावना रखत हुए सवाँगे के नाशकरैया ला जोहार हे / वेद लक्ष्य बिन जाने, वेद पढ़े अउ ताने, वेद पढ़ मुरुख रहैया ला जोहार हे / जनमो के उवे पुन, तब मिले ज्ञान गुन, बिरला गुणधर होवैया ला जोहार हे / जगत कारन जान, पावै जेन मनुसान, ईश दरश जोग जागैया ला जोहार हे / धर बने शुभ रीत, ईश ला समरपित, नर तन के गति बनैया ला जोहार हे / टीका-जेन मनखे वेद के परम लक्ष्य ला जाने बिगन वेद ला पढ़थे, वोहर वेद पढ़ैया होके भी मुरुख के मुरुख ही रहिथे, अइसन हतभागी मनखे ला जोहार हे, जनम-जनम के पुन्य उदय होय में जेला विशेष ज्ञान अउ परमात्मा के परमअनुग्रह ले आत्मज्ञान पाय हुए हे, अइसन बिरला ज्ञानी ध्यानी संत ला जोहार हे, जेन ये चराचर जगत के परम कारन ला परमात्मा ला जानके परमात्मा ले साक्षात्कार करे के योग्यता पाय हे, वोला जोहार हे]जेन मनखे अपन आप ला समर्पित करके परमात्मा के उठाये उठथे, बइठाय बइठथे, चलाय चलथे, अइसन मनखे चोला के गति बनैया परमात्मा ला अपन जिनगी समर्पित सफल बनैया ला जोहार हे / करत सबो करम, फल तज रहे सम, प्रभु निज अंतस रमैया ला जोहार हे / परमात्मा में टेक, विषय ले मन छेंक, पबरित अंतस करैया ला जोहार हे / दिब्य सुख इन्द्री पार] करे बर बढ़वार, नाम गुन दल सुमिरैया ला जोहार हे / आरूग भगति कर, जेन उठथे ऊपर, भिन्ना जगबंधन कटैया ला जोहार हे / टीका-जेन मनखे सबो करम ला करत हुए करम फल त्यागी होथे, अउ परमात्मा ला अपन अंतस के कन-कन में रमैया वोला जोहार हे]जेन एकमात्र परमात्मा में अपन मन ला टेका के रखथे, अउ आने सांसारिक विषय मन ले अपन मन रोक के नित्य-सरलग ईश्वर तत्व में रमण करत हुए अपन आत्मा ला अधोगति ले उबार के उर्ध्वगति करावत हुए उद्धार करथे, वोला जोहार हे]जेन मनखे परम दिब्य दैवीय संपदाके परभाव क्षेत्र में जाके दिब्यसुख मन के बढ़वार करथे, अउ इन्द्रिय पार सुख मन ला पाके परमात्मा के नाम समूह अउ गुनसमूह सुरता करत-करत संसार के पार चले जाथे, वोला जोहार हे] जेन पबरित भक्ति करके अपन आत्मा ला ऊपर उठाथे, अउ भौतिकजगत के बंधन मन ला सहजता ले काटे में सफल होथे, वोला जोहार हे / परम प्रभु ला भर, सब कोती देख कर, सद्चिदानंद के पवैया ला जोहार हे / वेद ज्ञान हे बतात, सबो जग हित बात, वेद पढ़े सब ला कहैया ला जोहार हे / जेकर हे बुध हरे, अउ आने पूजा करे, परम बरं बिसरैया ला जोहार हे A प्रभु महिमा अं जान, मांगे भिन्ना जिनिसान,उथली बुध में भंवरैया ला जोहार हेA टीका-जेन मनखे परमात्मा के सुंदर छबि ला सबो ठाँव कन-कन में देखथे, अउ सबमें उहीपरमपावन प्रभु दर्शन करथे, अउ अपन आत्मा के परम आरूग अवस्था के कारन सद्चिदानंद पाथे, वोला जोहार हे, वेद ज्ञान बताथे, कि मनखे मात्र के कल्यान के भावना सबो ठाँव समय हे, अइसन पबरितकरैया अउ हितकर वेद के पठनपाठन बर प्रेरित करथे, वोला जोहार हे]जगत छाय माया द्वारा जेकर बुद्धिहरन कर लिये हे, अउ जेन लोगन वेदोक्त मार्ग ला छोड़ के दूसर के पूजा करथे, अइसन परम ब्रह्म के परमपावन संसर्ग वंचित प्रभु रद्दा ला भूले ला जोहार हे] जेन मनखे परमात्मा के उदारता बडप्पन अउ दानशीलता जानके भी सांसारिक सुख के भौतिक वस्तु मन ला परमात्मा ले माँगथे, जबकि परमात्मा मोछगति देवैया हे, अइसन मंदमति अउ उथलीबुद्धि वाले भटकन के वरणकरैया ला जोहार हे / देवे जे परम पद, जीव तै मितानी बद, जिनगी के डोंगिया खोवैया ला जोहार हे / भजे जेन पल-पल, उही होवै निरमल, इंद्रीदल सुघर हाँकैया ला जोहार हे / तन कस मन रस, जान प्रभु सरबस, आनंद दहरा डूबकैया ला जोहार हे / मन राखे मुरकेट, प्रभु ले करन भेट]मन तन अपन कसैया ला जोहार हे / टीका-जेन परमात्मा सबो वेद बाटजवैया मन ला परम पद देथे, ये संसार में केवल उही संगवारी हे, aकेवल वोकर ले ही मितानी के चाह रखो, अउ आशा रखो, ये मनखे देहरूपी डोंगा ला खोय बर उही परमात्मा नाम ओम ही पतवार हे, अइसन ओम रूपी पतवार में रमणकरैया परमदेव ला जोहार हे]जेन परम पबरित करैया परमात्मा के ये परमपावन ओम नाम जप-जपअपन चित्त ला निर्मल करथे, अउ अपन इन्द्रिय मन के समूह ला संयम ले हाँकथे, वोला जोहार हे]जेन छुद्र मनोकामना के प्रति अपन मन ला संयम ले कसथे, अउ अपन आत्मा में रमण करत सब कारन के कारन परमात्मा ला जानथे, अउ परमानंद रूपी समुन्दर में अचल रहत हुए परमात्मसत्ता माने सवाँगेसत्ता के गोता लगैया ला जोहार हे, जेकर परमात्मा ले मिलन के प्यास बढ़गे हे, अउ अपन मन ला विषय मन के भयंकर प्रभाव ले बचा के संयम के आगी में इन्द्रिय मन के उपद्रव ले उपजे बेवधान ला स्वाहा करथे, अउ मन-तन ला सरलग परमात्मा के धियान में लगा के देह के साध सधौरा मन डहर ले मन ला मोडथे, वोला जोहार हे / जेकर सीमित फल, छिनभंगु अमंगल, तेला पूजे बर बरजैया ला जोहार हे / नाशवान दैव तन] नही हे अमरपन, सरग ले तरी खसलैया ला जोहार हे / बरम देवता पद, उतरे बेरा पूरत, पद के देवैया उतरैया ला जोहार हे / क्षमा देवे क्षमावान, मोला मंदमति जान, कण-कण जगत बसैया ला जोहार हे / टीका-जेन करम के फल सीमित, छिनभंगुर अउ अमंगलकरैया हे, अइसन पूजन पद्धति बर सचेत करैया प्रबुद्ध जन ला जोहार हे] भिन्नजगत में सव्र्गीय देव देहधारी जेन पुन्य क्षीण होय में देवत्व ले खसल के मरनलोक में फेर आथे, वोला जोहार हे, ब्रह्म देव पदवी के पुन्य काल तक भोग पाछू समयकाल पूरा होय में ब्रह्म पद ला छोड़ा के पदमुक्तकरैया सर्वशक्तिमान परमात्मा ला जोहार हे, जोहार वंदना में जेन कोनो के वंदना अउ जोहार चूक होगिस होही तौ मोला मंदमति जानके क्षमादान देही, ये चराचर जगत में बसने वाले जीव-अजीव ला जगत के कन-कन ला मोर असन अकिंचन के बारम्बार जोहार हे / सब रखवार जेन, जग भरतार जेन,वोकर ले मया ला बढ़ाथे वेद बचना / भटकन जिनगानी, बरसे ओरछा पानी, जीव के मरम ला भंजाथे वेद बचना / दुःख गोती-पोथी छोरे, सुख संग होती जोरे, सवांगे जनास ला जनाथे वेद बचना / माटी मटियाय झन, धूर में सनाय झन, जगमग होये ला सिखाथे वेद बचना / टीका-जेन परमात्मा सबके रखवार हे, अउ सबो संसार के एकमात्र गोसैया हे, ये वेद बचन उही परमात्मा ले मया बढ़ाय वाला ग्रन्थ हे] जिनगी ला भटकन ले बाहिर निकाल बिगन सकेल के करिस बरसा में ओइरछा ले बोहावत पानी जइसे ये मनखे जिनगी के मरम ला गुनान करे बर प्रेरित करैया ग्रन्थ वेद ही हे]जीव भिन्नाजगत में आके नाना प्रकार के दुःख ताप मन ले झंवावत रहिथे, ये दुःख अभिन्न गोतियार नोहे, दुखदल के संवाहक हे, भलुक दुःख ग्रंथी ला समूल उखान के सबो उत्तम मौलिक सुख ले सम्बन्ध जोड़ने वाले परमात्मा के साम्हू हे, सुख के संग अपन अस्तित्व ले जुड़े बर आत्मज्ञान के विशुद्ध अनुभव ला बतैया वेद ही एकमात्र ग्रन्थ हे, पंचमिंझरा बने पुतरी जेन माटी ले बने हे, उही माटी में धूर में सना जाय वोकर पहिली अपन आत्मबल प्रकाश ले अपन अस्तित्व ला जगमग करे के विधि बतैया ग्रन्थ वेद हे /

वेद सुमरनी जोहार २

सुखदेवैया वो ईश्वर, दिव्य गुन जोड़कर, जग सेती आगी सिपचैया ला जोहार हे / शिल्प के सोधैया नर, धरमप्रान गुनधर,आगी जान शिल्प उपकैया ला जोहार हे / चराचर जगधार, सरबज्ञ सरकार, अबिनासी सब सिरजैया ला जोहार हे / अनंत सक संभार, सबलोक उजियार,आगी भाखा जिनिस बनैया ला जोहार हे / टीका-सबसुख देवैया परमात्मा हर दिब्य गुन मन ले भरे अग्नि ला जगत हित बर उत्पन्न करे हे, वो अग्नि उत्पन्न करैया ईश्वर ला जोहार हे, शिल्पबिद्या के साधक शोधक मनखे जेन धरम परान अउ सर्वगुनसंपन्न हे, वो अग्निशोध करैया मन ला जोहार हे, जेन सबो चराचरजगत के अधार हे, अउ जेन सर्वज्ञ के सब लोक मन में सर्वकालिक अखंड सत्ता हे, वो सरकार मन के घलोक सरकार अजर-अमर अविनाशी जगत अउ जीव मन के आदिकर्ता सबके उपजैया परमशक्ति परमात्मा ला जोहार हे, जेन परमात्मा के शक्ति अनंत हे, अउ जेन सबलोक मन के एकमात्र प्रकाशक हे, अग्नि अउ भाषा उवा-उवा पदारथ मन के रचना करैया हे, वो असीम परमतत्व ला जोहार हेA गुन भरे हे भौतिक, अगन धरके ठीक, गुनसाँट तमसहरैया ला जोहार हे / सबो पदारथ गुन, सहित गुने जउन, दयालु अगन के सोधैया ला जोहार हे / बिग्यानी दयालु भल, सबमीती भाव चल, एक ईश मोछ के देवैया ला जोहार हे / सुख बाटे के सुभाव, जेकर बिन लगाव, अदूसर अइसे गोसैया ला जोहार हे / टीका-भौतिक अगन जेन अबड़ मात्रा में गुन भरे हे, वो भौतिक अगन ला ठउका धरके वोमा गुन जोड़ के भिन्नजगत या भौतिक जगत के अंधियारहरैया विज्ञ पदारथ बिद्या के गुन शोध करैया मन ला जोहार हे] जेन परमात्मा परम दयालु अउ न्यायकरैया हे, अउ जेन सबो जीव मन के प्रति मितानी भाव रखथे, वो एकमात्र मोछ देवैया परमात्मा ला जोहार हे]लगाव-दुराव रहित जम्मो सुखदेवैया सुभाव युक्त वो परमात्मा ला जोहार हे, जेन अद्वितीय हे, जेकर जइसे तीनो बेरा में कोनो भी नइ अइसन सम्पूर्ण लोक-लोकान्तर के एकमात्र गोसैया सबो जगत के अधार परमात्मा ला जोहार हे / जीवधर देह धारे, तस ईश जग सारे, रख जगवारी के करैया ला जोहार हे / सब कोती देखे पाय, सम सबो रहे छाय, अमर अगोचर अथैया ला जोहार हे / जीवदल सब काज, निहारत महाराज, एको छिन जीव नइ भुलैया ला जोहार हे / तभे अधरम बर, जी नइ धँसे हमर, हाथ धर बाट रेंगवैया ला जोहार हे / टीका-जइसे सबो जीवधर अपन-अपन काया ला धरथे, वइसे ही परमात्मा ये संसार ला धरथे, वो सब जीव रखवार परब्रह्म ला जोहार हे, जेन परमात्मा अतका विराट हे, कि एक संग सबो ठाँव देख सकथे, अउ सबो ठउर मन में समरूप समभाव ले व्याप्त रहत हुए अविनाशी अजर अउ अमर हे, अउ सर्वव्याप्त होय में भी सामान्य आँखी ले दिखे नइ जेन अथाह माने अतका सूक्ष्म अउ अतका बड़का हे, कि वोकर कोनो थाह नइ लगा पाय, वो परमात्मा ला जोहार हे, जेन सबो जीव मन के सबो करम ला पल-पल देखत हे, अउ कोनो भी प्रानी ला एक पल बर भी नइ भुलाय, अइसन परमात्मा ला जोहार हे, परमात्मा हमन ला हर पल देखत हे, अइसे जाने के कारन हमर चित्त कभू भी अधरम के अउ प्रवृत्त नइ होथे, अइसन सारथी बनके अपन अनुरागी जन मन ला हाथ धर के चलाय वाले वो परम परमात्मा ला जोहार हे A सब जीव छिन छिन, लेखथे करम गिन, खत्ता चारो खूंट के देखैया ला जोहार हे / अधरम तजे बर,जीव ला देखा डहर, सबो जान सुनके जनैया ला जोहार हे / सब बर भाव साखी,राखे समभाव आँखी, समरथ सकल गोसैया ला जोहार हे / जेला गावे गुनी जन, गावत शोभामोहन, परमेश सत्ता में रमैया ला जोहार हे / टीका-जेन परमात्मा सबो जीव मन के सब करम ला हर पल देखत हे, अउ जीव मन के करम लेख ला सबो ठाँव निश्चित रूप ले अउ समभाव ले दृष्टिपात करथे, अइसन परब्रह्म परमात्मा ला जोहार हे] जेन परम सत्ताधीश परमात्मा के सत्ता में मन-करम-बचन ले रमथे, वो सबो ऋषि-मुनि महात्मा मन ला जोहार हे]जेन परमात्मा अधरम त्याग करवा कर अपन अनुरागी मन के बाट देखाथे,वोला जोहार हे]जेन सबो जीव मन के प्रति साक्षीभाव रखत हुए वोकर गुन मन अउ अवगुण मन के अवलोकन करथे, वो सकल सामर्थ्य युक्त परम परमात्मा ला जोहार हे, जेन परमात्मा के ऋषि-मुनि अउ महात्मा जन गुनान कर गुन गायन करथे, उही परम परमात्मा ला शोभामोहन गावत हे / अविनाशी सूर्य रूप, निरदोस जगभूप, अन्तसपुर जीव बसैया ला जोहार हे / सब जग रखवार, जीव राखे फूलभार, शुभ सतदेशना देवैया ला जोहार हे / सवांगे सत्ता में रम, सुख पावत परम, अनंतभूषित निरखैया ला जोहार हे / तेकरे होके उपासी, सिरजे आनंदरासी, सुखधाम आनंद बढ़ैया ला जोहार हे / टीका-जेन परमात्मा तीनो बेरा में अविनाशी हे,जेन परम प्रकाश रूप सबदिन दोषरहित अउ सम्पूर्ण चराचरजगत के सबो लोक के एकमात्र गोसैया हे, जेन सबो जीव मन के अंत:पुर में नित्य-सरलग निवास करथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन सबो चराचर जगत के रखवार हे, जेन सबो जीव मन ला फूलभार माने बिगन भार अपन शरण में रखथे, जेन अपन आश्रित जन ला शुभ अउ सत्य के उपदेश देके मार्ग प्रशस्त करथे, वो परमब्रह्म ला जोहार हे] जेन परमात्मा अपन रचे सत्ता में परम सुख पाके नित्य प्रति रमण करत अनंत भूषित दृष्टिगोचर होथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जइसे परमात्मा अपन सत्ता में रमैया हे, वइसे ही अपन सत्ता में रमणकरैया ज्ञानीजन आनंद समूह ला पाथे, वो सबो सुखधाम अउ आनंद बढ़वार करैया महानुभाव मन ला जोहार हेA बिगियान के बिहारी, होवे जेन नर-नारी, फल परमानंद पवैया ला जोहार हे / उत्तम डउल करे, परमेश ले अभर, अंतस के खोली उजरैया ला जोहार हे / दाई-ददा कस पोस, देखे सबो गुन दोस, शुभ तनसदनभरैया ला जोहार हे / सिरजम करमन, करे जोग करे मन, तस शुभ करे जोजियैया ला जोहार हे / टीका-विज्ञान मार्ग में बिहार करैया आविष्कार करैया नर-नारी जेन परमानंद ला पाथे वोला जोहार हे] जेन उत्तम उदिम करके परमात्मा सत्ता परमात्मा साक्षात्कार कर पाथे, अइसन अपन आत्मा ला प्रकाशित करैया ला जोहार हे, जेन परमात्मा दाई-ददा अउ गुरु के जइसे हमर गुन-अपगुण ला देखत हे, अउ अपगुण उबार करके कायारूपी घर में शुभता भरथे, वोला जोहार हे, जेन हमर चेतना ला उत्तम करम के प्रति प्रेरित कर शुभ करम बर बिनय करथे, अउ हमन ला सबदिन शुभ करम ला करे बर संस्कारित करथे, वोला जोहार हेA मनखे वोलाजोहार, गोड धर होय पार, परमेश सत्ता के सधैया ला जोहार हे / जग रच जीव बर, नदियां समुंदभर, जीव सुख सेती ओरियैया ला जोहार हे / जस रबि झींक-झींक, भूगोल धरथे ठीक, तस सरबस के धरैया ला जोहार हे / सबो जीवदल पाप, अउ पुन परताप, फल देये सबमें समैया ला जोहार हे / टीका-हे मनखे उही के बेर बेर वंदना करौ जेन ये संसार में जनम-मरन के बंधन ले पार होय बर परमात्मा के सत्ता में सरलग रमनधर्मा हे, वो सबो महानुभाव ला जोहार हे] जेन परमात्मा हर सबो जीव मन के सुख में जिनगी पहाय के निमित ये आनीबानी के जिनिस ले परिपूरन सुंदर संसार के रचना करे हे, समुन्दर उवा-उवा जल ठाँव के रचना करके वोमा जल भरे हे, ताकि सबो जीव सुख में जिनगी पहाय कर सके, अइसन परम उदार अउ ओरीओर रचनाकरैया परमात्मा ला जोहार हे] जइसे सुरुज सबो भूगोलीय पिंड मन ला अपन आकर्षण बल ले धरथे, वइसे ही सबो पिंड मन अंतरिक्ष में स्थित नभ गंगा मन सहित सबो लोक मनके धरैया परमात्मा ला जोहार हे] जेन सबो जीवदल के सबो पाप अउ सबो पुन्य प्रताप के फल देवैया सबो ठाँव समभाव ले बिचरन करैया अउ सकल चराचर जगत के रमन करैया सबके भीतर समाय परमात्मा ला जोहार हे / लख सहस सुरुज, जेमा उवे बुड़े पूज, वो जग अलगे रहैया ला जोहार हे / जेमा जाके लोक बुड़े, जुगल अजुग जुड़े, एक उही जगत गोसैया ला जोहार हे / द्वीप अउ अगास गंगा,सबो पिंडा संग-संगा, समाय अगम अउ अथैया ला जोहार हे / साधू उपदेशे जेन, मोछगति पाय तेन,सबो गोतियारी के निभैया ला जोहार हे / टीका-जेकर भीतर लाखो सहस्त्र सुरुज उदित होके अस्त हो जाथे, एकमात्र उही परमात्मा ये संसार में अलगे हे, वो संसार अलगे रहैया ला जोहार हे, जेमा जाके लोक-लोकान्तर उदित अउ अस्त होथे, जेमा जग्गा-अजुग्गा दुनो ही जाके समाय होय जाथे aकेवल उही संसार के भरण पोषण करैया ला जोहार हे]जेन परमात्मा के भीतर सबो द्वीप-द्वीपंतर अउ लोक-लोकान्तर अगासगंगा अउ अंतरिक्ष में स्थित सबो पिंड एक संग समा जाथे, इही कारन ले जेन परमात्मा अपार हे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन साधू संत सवाँगे मोछ-गति ला पाके दूसर मन ला सत्य उपदेश देथे, अउ अपन सत्य गोतियार ला जान गये हें, अउ जेन सबके सच्चा गोतियार हे, वो परमात्मा ला पा चुके जन मन ला जोहार हे A उरथी अनंतकाल, जग उवे बुड़े ताल, घेरी-बेरी जनम धरैया ला जोहार हे / जस-जस करमन ]तस-तस भरमन, जग जीव नियाव करैया ला जोहार हे / करम अउ जीवदल, नता-नित्य लोकतल, देव के अनुकूल रहैया ला जोहार हे / गुन-करम-सुभाव, माने नइ जीवभाव, अइसन दुःख के भोगैया ला जोहार हे / टीका-जेन सृष्टि के आदि काल ले ही अनंत हे, अउ जीव जगत रूपी ताल में उदित-अस्त होवत रहिथे, माने बेर-बेर ये भिन्ना जगत या भौतिक जगत में जनमथे, मरत रहिथे, वोला जोहार हे] जेकर जइसे करम होथे, वोला परमात्मा वइसने जोनी मन में भ्रमण कराथे, माने करम-जीव के भीतरी समाय वासना ही वोकर बेर बेर जन्म-मरन के कारन हे, जेन जीव के जइसे करम हे, वोला वोकर संकल्प के अनुसार वोला उही जोनी मन में भेजने वाले जनम देवैया]पक्षपातरहित] सम्यक न्यायकरैया परमात्मा ला जोहार हे]करम अउ जीवसमूह के सम्बन्ध नित्य सरलग अउ सबदिन सत्य सनातन हे, अउ सबलोक मन में एक जइसे प्रभाव करैया परमात्मा के अनुकूल आचरन करथे वोला जोहार हे]जेन सम्राट मन के सम्राट परमात्मा ला अहोभाव ले नइ माने, अउ जीव के गुन-करम-सुभाव ला मानथे, जानथे, अइसन हतभागी दुःखभोगैया ला जोहार हे A जग के परम भल, जेन करे पल-पल, सतगुरु ज्ञान के देवैया ला जोहार हे / तजवा के दुःख रोग, जेन हर कर सोग,अंतस के तमसहरैया ला जोहार हे / शुभ सत बाचा बोल, अंतस नयन खोल, देवी सम्पद सब सवैया ला जोहार हे / तपसी अउ रिखि-मुनि] सिद्ध जन अउ गुनि, अनुरागी के डोंगाखोवैया ला जोहार हे / टीका-जेन हर पल प्रतिक्षण जगत के परहित करथे, अइसन ज्ञान देवैया सतगुरु ला जोहार हे] जेन दुःखरोग के कारण ला त्याग कराके परमअनुग्रह करथे, अइसन अंतरात्मा के अंधियार हनन करैया परम दयालु गुरुवर ला जोहार हे]जेन सबदिन सत्य अउ शुभ बचन बोल के अंधियार में भटके हुए मनखे मन के आत्मा ला परम प्रकाशपुंज परमात्मा के साक्षात्कार करवैया दैवीय संपदा मन के बढ़वार रखवारी करथे, वो गुरु मन ला जोहार हे] परम तपसी ऋषि-मुनि स्तर के सिद्ध-योगी अउ गुणधर मनखे जेन परमात्मा के प्रति अनुरागभाव रखथे, अइसन परमात्मा के अनुरागी मनखे के जिनगी रूपी डोंगा चलाके वो परम प्रभु तक पहुंचैया विद्वान अउ गुरुजन मन ला जोहार हे A अंतस के मल मूल, जेन उखाने समूल, दोख दुःख बाधा उपकैया ला जोहार हे / गुरु गोड धोय पानी ]पीके जेन होय ज्ञानी, गोड धूलि चन्दन लगैया ला जोहार हे / मन के मइल हरे, अंतस आरूग करे, हाथ धर बाटके रेंगैया ला जोहार हे/ जेन गुरु संग चल, अडचन करे हल, कुबाट ले चेत के छेकैया ला जोहार हे A टीका-जेन प्रकृति के प्रभाव में आके मइलाय आत्मा के मइल ला मूल समेत उखान के नाश करथे, अउ संसार रूपी सागर के दैहिक-दैविक-भौतिक तीनो ताप मन ले रखवारी करथे, अइसन सदगुरु ला जोहार हे]जेन गुरु के चरण धोय पानी पीथे, अइसन गुणीजन ला परम लाभ के अधिकार मिलथे] गुरु के गोड के धुर्रा ला माथ में चन्दन के जइसे धरके मन निर्मल करैया शुद्धआत्मा मन ला जोहार हे, जेन ज्ञानी गुरुजन आत्म ज्ञान के मार्ग के बाधा मन के बने ठउका जान थे, वो अपन शिष्य मन के संग चलत हुए वोकर आत्मलब्धि के बाधा मन ला दुरिहा करके आत्मतत्व ला जानना सुगम बनाथे, अउ जब कभू चेतना बिचलित होथे, तौ संभाल लेथे कुमार्ग ले मनखे ला छेकैया परम ज्ञानी गुरु ला जोहार हे A जगत के दुःख भूले, अंतस नयन खुले, गोठ-बात में मनिझरैया ला जोहार हे / आचरन करे देख, आँखी भूले मीन-मेक, परहित परनकरैया ला जोहार हे / जेन पाये सतगुरु, हो जाए उठान शुरू, दोख-दुःख हरे उरथैया ला जोहार हे / मुरुख पन बियाय, दुःख पंडित मिटाय, डर घुस्घुस के हरैया ला जोहार हे / टीका-जेकर अंतरात्मा के आँखी खुले हे, अउ जेन संसार के दुखदल ला भुला के परमात्मा के परमपावन क्षेत्र में निवास करथे, अउ जम्मो जन हित बर अपन अर्जित ज्ञान रूपी मणि लुटाथे, वोमन ला जोहार हे]जेकर परमपवित्र आचरन ला देख के अउ वोकर वाणी-करम के प्रभाव ले दूसर लोगन भी अपन क्षुद्रता तजथें] अइसन सबके हित साधे परहित बर संकल्प करे महानुभाव ला जोहार हे] जेमन ला सद्गगुरु मिलगे अउ जेकर उठान होगे हे, जेकर दोष-दुःख के शमनउरथी होगे हे, वोमन ला जोहार हे] जेन आत्म ज्ञान पाके परम प्रभु में ही निवास करथे, अउ मूर्खता बियाय सबो दुःख नाश करके मन के सबो भय कुशंका मन के नाश कर डरे हे वोला जोहार हे A सब शुभ गुन धर, गिंजरत नारी- नर, निज गुन ज्ञान के लुटैया ला जोहार हे / दुःख सहिथे अपन, जगसुख लेथे प्रण, तेन जगभूषण होवैया ला जोहार हे / देखे न इ पार दोस, धरे शुभज्ञान कोस, संत मया बाँटत घुमैया ला जोहार हे / संतन बचन गंगा, उठत शुभ तरंगा, जगहित साज के सजैया ला जोहार हे / टीका-सब्बो शुभगुन मन के धरैया सबदिन भ्रमणशील गुणधर विदुषी नर-नारी जेन अपन अर्जित गुन भण्डार ला जम्मो जन हित बर लुटाथे, वोमन ला जोहार हे, जेन संत सवाँगे दुःख सहन करत सब जगत ला सुखी करे के प्रण लेथे, अइसन जगतभूषण ला जोहार हे, जेन दूसर मन के दोष दर्शन अउ पक्षपात के बिगन सबके प्रति अपन मया अउ ज्ञानकोष ला जइसे भाव ले लुटाथे, अइसन ज्ञान-बिद्या के परम प्रचारक संत मन महात्मा मन अउ विज्ञ जन ला जोहार हे, संत अउ महात्मा मन के आप्तज्ञान रूपी बचन गंगा में उठत शुभ लहरा में जेन लहरावत ज्ञान लाभ लेथे, संसार ला सुंदर बनाय बर सुन्दर मनखे सुंदर वातावरण अउ सुंदर आचरन ले सजाय बर सबदिन प्रयत्नशील रहिथे, वोला sas जोहार हे / पाप के हरन बर, जीव के तरन बर, मनखे ला शुभ में चलैया ला जोहार हे / धरम में खम गाड़, पाप के जर उखाड]बरकस अचल रहैया ला जोहार हे / संतन के कल्परुख, देये सब जगसुख]जगहित बचन कहैया ला जोहार हे / सुनके संतन गोठ, अंतस ला करे पोठ, सत्संग धार में बोहैया ला जोहार हे / टीका-भौतिक जगत में प्रकृति के संपर्क में आय के कारन होवैया सबो पाप मन ले मुक्त होय अउ जीवात्मा के उद्धार बर जेन शुभता में विचरथे, वोला जोहार हे]जेन धरम रद्दा में अडिग अचल खंभा असन अड़े रहिथे, अउ पापाचार अधर्म बाटला सबदिन छेंकथे, अइसन बलवंता शक्तिशाली अउ अचल धर्माचारी ला जोहार हे] संत रूपी कल्पवृक्ष सबदिन सबो सांसारिक महानुभाव के सुख देवैया होथे, अइसन सांसारिक मनखे के जिनगी ला सुगम बनाय वाले आप्तबचन गोठकार ला जोहार हे, जेन लोगन संत मन महात्मा मन के ज्ञान भरे आप्त बचन ला सुनके अपन आत्मा ला समृद्ध अउ सुदृढ़ बनाथे, अउ सतसंग के प्रवाह में बोहाथे, अइसन श्रद्धालु ला जोहार हे / संतन मिलन गुन, अड़बड़होथे सुन, संत गुन सुभाव अथैया ला जोहार हे / जड़ अउ चेतनजग, जीव छाय सब मग, जान परम प्रभु के भार रहैया ला जोहार हे / सतसंग करे जाय,उही गुनिक कहाय, संतन के छाँव में रहैया ला जोहार हे / कहूँ नइ बैरी-मीत, चाहे सब जग हित, समभाव जगत रहैया ला जोहार हे / टीका-संत संगति के गुन अब्बड़ हे, येकर सेती सतसंग करके संत मन के आप्तवाणी ला सुने] संत के अथाह गुन-करम-सुभाव ला सामान्य मनखे कभू नइ जान सके, अइसन अथाह गुननिधि गुनी ज्ञानी संत मन ला जोहार हे] जड़ अउ चेतन जिहाँ तक संसार हे,सब में सबो ठाँव समभाव ले जीव व्याप्त हे, तिल भर ठउर भी जीव मन ले खाली नइ हे, जेन संसार ला ये प्रकार जानके परमात्मा में अपन सम्पूर्ण भार छोड़के ये संसार में बिगन कोनो प्रकार के लगाव-दुराव के लोकहित निमित सबो कारज ला करत जिनगी पहाथे वो संत ला जोहार हे]जेन मनखे सतसंगी होके सम्पूर्ण मुरुखपन त्याग के गुणधर होथे अउअबिद्या बियाय दुखदल के पार होके संत के छत्रछाया में सवाँगे ला समर्पित करथे a वोला जोहार हे]जेकर बर ये संसार में ना तो कोनो बैरी हे, ना तो कोनो संगवारी हे, जेकर आंखी समदर्शी होगे हे, जेन सबो संसार बर हितकामना करथे, अउ परहित कारज करत परमात्मा के नाम सुरता करत हुए सम अउ सहज भाव ले परमात्मा सत्ता में रमथे वोला जोहार हे / पर बिपत में हँसे, बोली-ठोली ताना कसे, घर बाट भूले अनगैंहा ला जोहार हे / परसुख देख जरे, अंतस बम्बर बरे, बिपत ला नेवता देवैया ला जोहार हे / निंदा रस महारथ, सुहाय लबारी कथ, पाप कोठी अपन भरैया ला जोहार हे / चौपट कर फसल, करा कस जावे गल, डाह इरखा जरमरैया ला जोहार हे /

वेद सुमरनी जोहार १

जोहार वंदना वेद के उतरनी बाप कस परमेश, जगसुख उपदेश, वेद हितसाधे सिरजैया ला जोहार हे A वेद सर्वशक्तिमान, बिधाता बचन जान,वेद पढ़ गुन के पढ़ैया ला जोहार हे A मंतर ला अरथाय, ठउकहा समझाय, तर्क कारन प्रान जनैया ला जोहार हे A दइ सुमिरन कर] परहित ब्रत धर,सबके अंतस अँजोरैया ला जोहार हे A टीका-जनमदेवैया ददा के जइसे परम पिता परमात्मा सब बर वेद में जगत सुख के संदेशदेवैया हे, वो सबके हित रखवार सिरजैया परमात्मा ला जोहार हे, परमात्मा जेन संसार के सर्वशक्तिमान बिधाता हे, वोकर परतछ बचन हे, वेद के पठन-पाठन कर वेद ज्ञान देवैया गुरुजन मन] उपदेश देवैया ला जोहार हे]वेद मंतर मन के व्याख्याकार मन अउ वेद ज्ञान के जस के तस माने वेद में जइसे बताय गये हे, वइसने जस-के-तस अर्थाय समझैया तर्क-कारन अउ प्राण के जनैया विद्वान मन ला जोहार हे] सबदिन परमात्मा के सुमिरनकरैया परोपकार ब्रतधरे अउ सर्वात्मा ला आत्मज्ञान के प्रकाश ले प्रकाशित करैया सबो प्रकाश खम्भा गुरु-संत]ऋषि मुनि अउ महात्मा मन ला जोहार हे A बियैया ला जे बियाय, अँजोर ला उजराय, कण-कण भीतर छ्वैया ला जोहार हे / जेन जन जोग घोखे,अंतस के बन रोखे, पबरित होये उरथैया ला जोहार हे / गुन ज्ञान दल जोर, करके बिद्या अँजोर, दूसर के गति सुधरैया ला जोहार हे / धारन के धरतार, करता के करतार, दानी मन ला दान देवैया ला जोहार हे / टीका-जेन परमात्मा जनम देवैया के भी जनम देवैया हे जेन ब्रह्मा ले लेके चराचर जगत ला उत्पन्न करथे, जेन अनंत दैदीप्यमान सुरुज ला अपन बल ले प्रकाशित करथे, अइसन कन-कन व्यापी असीम शक्तिगोसइया ईश्वर ला जोहार हे] जेन योगाभ्यास द्वारा मन के भीतर उपजने वाले बिचार रूपी बन-बदउर या खरपतवार मन ला छोलथे aउखानथे, अउ अंतस ला पबरित करे के उरथी करथे,वोला जोहार हे] ज्ञान गुन समूह कमा के अपन कमाय ज्ञान प्रकाश ला प्रकाशित कर जेन सवाँगे के संगे संग दूसर मन के भी गति सुधारथे, वोला जोहार हे] जेन धारणकरैया माने अंतरिक्ष अउ सबो पिंड ला धारण करथे, जइसे भुइया चराचर-जीव-जगत ला धारण करथे, वायु सबो भूतात्मा अउ गंध अउ सूक्ष्म पदार्थ मन ला धारण करथे, अइसन सब धारणकरैया धरैया ला धारणकरैया परम-अधार धारन करैया परमात्मा हे, जेन सबो प्रकृति ब्रह्म ले लेके चराचर जगत के सबो कारज करैया मन के भी कारज करैया हे, अउ सबो राजा उवा-उवा धनस्वामी मन ला घलोक धनश्री देवैया परमात्मा ला जोहार हे A बड़हर ले बड़ेर, प्रकृति नयन प्रेर, सब लोक रचके मड़ैया ला जोहार हे / चराचर के गोसान, चारो खूंट परमान, कारन के कारन जनैया ला जोहार हे / भरता के भरतार, पोसक पालनहार, जग रच सवांगे लुकैया ला जोहार हे / अजगुत ले अजब, जेकर हे गुन सब, धंवरा ले धवल गोसैया ला जोहार हे / टीका-जेन परमात्मा संसार के सबो बलवान मन ले भी अधिक बलवान हे, जेन प्रकृति ला अपन आँखी के इशारा ले संचालित कर सबो लोकरचना करे हे, वो असीम शक्ति-भण्डार परमात्मा ला जोहार हे] एकमात्र उही परमात्मा सबो चराचर जगतगोसैया हे, वोकर गोसानी के तीर-तखार वातावरण में चारोखूंट प्रमाण हे, जेन कारन के कारन जनाथे अइसन परमात्मा ला जोहार हे]परमात्मा के शक्ति-स्वरूप विष्णु घलोक परमात्मा ले पोषित होथे, सबो चराचर-जगत-पालक-पोषक अउ सर्व पालनहार बनथे, सबो संसार रचना करे के पाछू सवांगे जेन लुका के रहिथे, अइसन महामहिमय परमात्मा ला जोहार हे]जेन परमात्मा के सब गुन बिचित्र मन ले भी अति-बिचित्र हे] जेन संसार में स्थित उज्जर ले घलोक आगर उज्जर हे, अइसन अनुभव में अवैया परमात्मा ला जोहार हे A लइका बाला ला दे बल, चले सक जीवदल, अंग भार बिन जीव पोसैया ला जोहार हे / पार के घलोक पार, नदिया के उही धार, सरवर समुंद भरैया ला जोहार हे / खंभा के हे उही खंभा, जगत के अवलंबा, अधार के अधार थमैया ला जोहार हे / आरूग ले हे आरूग, सब दिन जुग-जुग, गियान पियास के बुतैया ला जोहार हे / टीका-संसार में जतका भी पदारथ बलवंता दृष्टिगोचर होथे, वोकर बलदेवैया परमात्मा ही हे, परमात्मा के बल ले ही कोनो बली जनाथे] जेन परमात्मा सबो जीव-समूह ला चले फिरे केशक्तिदेवैया हे, अउ बिगन अंगभार सवाँगे उपजाय लइका-बाला जइसे भाव ले पोषण करैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे]जेन परमात्मा सबो सीमा मन ला सीमित करैया सीमा हे, अउ प्रवाह ला प्रवाहित करैया हे, अउ नदी] समुन्दर ला चराचरजगत जीव सुख बर भरैया परमात्मा ला जोहार हे]जेन संसार के अदृश्य अधार खंभा मन के घलोक खंभा माने अधार हे] जेन अधार में सबो संसार टेके हे, अइसन अधार के घलोक अधार परमात्मा ला जोहार हे] जेन परमात्मा आदि काल ले संसार में दृश्यमान परम पबरित मन ले घलोक आगर पबरित हे, अउ सबो ज्ञान पियासे मन ला बिद्या दान देके ज्ञान पियास बुतैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे तन के घलोक तन, मन के घलोक मन, परान के परान अथैया ला जोहार हे / आत्मा के आत्मा हे, उही परमात्मा हे, भिन्ना जगबंधन कटैया ला जोहार हे / घट-घट उही बसे, कन-कन उही रसे,रोम-रोम रमनकरैया ला जोहार हे / राउर के उही राव, साव के उहीच साव, गोसैया के घलोक गोसैया ला जोहार हे A टीका-जेन परमात्मा सबो काया के काया हे, सबो चित्तवृत्ति के संचालन करैया मन हे] अउ जेन काया ला जीयत-जागत रखैया प्राण के घलोक परान हे, वो परमतत्व ला जोहार हे, सबो आत्मा मन के आत्मा स्वरूप परमात्मा जेन सबो भौतिक जगतबंधन के कटैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन हर एक कायाघट में रहिथे बसथे, अउ हर एक कन-कन में करथे, अउ हर एक जीव के हर एकक रूँआ-कुँवा में रमथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन परमात्मा राजा मन के राजा अ उ समरात मन के सम्राट हे, सब साहूकार मन के घलोक साहूकार हे, अउ सबो दृश्यमान संसार के गोसैया के घलोक गोसैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे A उमंग ला उमंगाय, लहरा ला लहराय, दहरा के पियास बुतैया ला जोहार हे / अगन पवन रच, नभ मग घन खच, भुइयाँ में जल बरसैया ला जोहार हे / देव के उहीच देव, लुकाय रहिथे छेंव, नवा ले नित नवा रहैया ला जोहार हे / आँखी के उहीच आँखी, सबके उहीच साखी, जीव ला जगत के देखैया ला जोहार हे A टीका-जेन परमात्मा उमंग मन ला घलोक उमंग ले भरथे, जेन समुन्दर नदिया मन अउ जम्मो जल ठाँव के तरंगमाला ला तरंगित करथे, अउ भिन्नाजगत या भौतिक जगत के सबो जलठाँव के प्यासबुतैया तृप्ति के परम अधार हे, जेन समुन्दर के प्यास बताथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन परम ब्रह्म हर परम परम करैया अग्नि अउ वायु के रचना करे हे, अउ अंतरिक्ष मार्ग में बादर के बरसा निश्चित-ओरीओर सुनिश्चित करके भुइयाँ में रिमझिम बरसा कराथे, वोला जोहार हे]जेन देवता-धामी के भी देवता हे, अउ जेन सर्वशक्तिसंपन्न होके घलोक सवाँगे ह्रदय के अंतराल में अदृश्य रहिथे, अउ सबदिन नवा ले घलोक आगर नवा-नेवदहा ही रहिथे, जेन कभू जुन्ना नइ होय, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन आँखी के भी आँखी हे, माने आँखी जेन दृश्यमान-जगत देखथे, वो दर्शनशक्ति देवैया परमात्मा हे, अउ जेन देखैया मन के घलोक देखैया हे, वो परब्रह्म ला जोहार हे, जेन सबो जीव मन केअंतराल में साक्षीभाव ले सबदिन विद्यमान रहिथे, अउ जीव ला जगत दृश्यावली देखाथे, वो परमशक्ति ला जोहार हे A गंध ला दे उही गंध, मधुरस मकरंद, नाक ला गमक के चिन्हैया ला जोहार हे A उही दे बोलन सक, उही दे दोलन सक, पग-पग अंगरी धरैया ला जोहार हे A परस ला परसाय]दिरिस ला दिखलाय,हरस ला घलो हरसैया ला जोहार हे A रगं ला दे उही रंग, फिक्का अउ चटक बंग,जग फूलवारी के गोसैया ला जोहार हे A टीका-जेन परमशक्ति हर एक भौतिक पदारथ के गंध गमक ला विशेष गंध गमक देथे, अउ जेन वो गंध मन के परम अधार हे, जेकर ले पदारथ विशेष एक विशिष्ट गंध गमक ला पाथे, अउ जेन सबो प्रकार के फूल मन के लगे मकरंद अउ पराग हे, वो पराग अउ मकरंद के देवैया अउ नाना प्रकार गंध मन ला नाक के माध्यम ले आ जा के वोकर विशेषता के संग चिन्हे के शक्ति प्रदान करैया परमशक्ति ला जोहार हे ] वोहर परमात्मा जेन सबो जीव मन ला बोले अउ हाले-डोले के शक्ति देथे, अउ जीव करम अउ चित्तवृत्ति के अनुसार अंगरी धर के चलाथे, वो परमतत्व ला जोहार हे]जीव समुदाय द्वारा अनुभूत करे जाने वाले सबो स्पर्श मन ला जेन छुवाथे, अउ जीव समुदाय ला भिन्नाजगत या भौतिक जगत के दर्शन करे जाने वाले सबो दर्शन मन ला जेन देखथे, अउ आनंद हर्ष ला भी आनंदित अउ हरसैया परमतत्व हे वोला जोहार हे] भिन्नाजगत या भौतिक जगत में दृश्यमान सबो रंग मन ला रंगैया रंगरेज हे, जेमन अपन कला -कोशल ले ये संसार ला अतका रंग-बिरंगी अउ सुंदर मन मोहक रंग दिन हे, कोनो ला कुछ हल्काफिक्का तौ कोनो ला चटख रंग दिन हे, अइसन संसार रूपी बगीचा के सनातन गोसैया परमदेव ला जोहार हे A ईश गुन जीव मान, कारन अगन प्रान, चोला देव अगन जियैया ला जोहार हे / जगतिक तक आगी ताप, सोधे जेन जन आप, अमर पदवी के पवैया ला जोहार हे / परमेश सबो कोती, छाये हे निर्दोष ज्योती, बिद्यादान सुबस्तु देवैया ला जोहार हे / सब सुख अउ संपत , गउ गज बाज रथ,नाना जग सुख सिरजैया ला जोहार हे / टीका-परमात्मा अउ जीव के गुन में अग्नि ही परान हे माने परमात्मा प्रकाश आगी रूप में सबो ठाँव विद्यमान रहिथे, अउ जीव भी मानस अग्नि प्रकाश रूप में सदा सबदिन विद्यमान रहिथे] सबो जीव मन के परम अँजोरकरैया परब्रह्म ये आगीरूप में चराचर जगत में सबो ठाँव बिराजमान हे, परम न्यायकरैया परमात्मा सबो जीवधर मन में मानस अग्नि ला जीवंत करैया हे, अइसन परम न्यायकरैया परमात्मा ला जोहार हे, जेन बिद्वान जन भौतिक अगन अउ वोकर ले उत्पन्न ताप ऊर्जा के शोध करथे, वो आविष्कारक वैज्ञानिक मन ला जेन अपन लोक हितकर कारज मन के कारन ये भौतिक जगत में अपन नाम यश रूपी काया ला अमरता देथे, वोला जोहार हे]जेन परमात्मा के निर्दोष ज्योति चारो खूंट बगरे हे, उही बिद्या अउ सबो भौतिक पदारथ मन के देवैया हे वो परम दयालु देवैया परमात्मा ला जोहार हे, सब संपदा ] गउ]बाज] जल थल अउ नभ में चलने वाले रथ] बिमान]यान उवा-उवा आनीबानी के सुख सिरजन करैया गुणीजन ला जोहार हे /

Tuesday, 14 April 2026

घनाक्षरी रचना –

घनाक्षरी रचना –

कोनो धरे भंग रंग, कोनो धरे संगी संग।
कोनो धरे पिचकारी छिंचत गुलाल ला ।
कोनो रंगै बिसाखा ला कोनो रंगे ललिता ला,
कोनो रंगै चन्द्रावली चुनरिया लाल ला।
कोनो रंगै पिंयर तौ कोनो रंगै नीला रंग,
कोनो रंगै श्याम रंग नाक मुँह भाल ला।
कोनो हर रंगै तन कोनो हर रंगै मन,
रधिया हा रंगै बर खोजै नंदलाल ला।। 

Monday, 13 April 2026

138/शेषा अथवा शेषराज वा विद्युल्लेखा छन्द(६।१पिङ्गल)

शेषा अथवा शेषराज वा विद्युल्लेखा छन्द
(६।१पिङ्गल)
सूत्र - लालाला लालाला

आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

आनंदा छाये हे!!
गोविन्दा आये हे!!
देखे लल्ला जावौ या !!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

साजौ दीया बाती !
लानौ संगी साथी !!
लोकागीता गावौ!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

घूमौ पारा पारा !
न्योता दे दौ झारा !!
माला लावौ या!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

जाये के ! बेरा हे !
जी ला बोधाये के!!
पोटारौ पावौ या !!
आवौ या ! आवौ या!
नाचौ या! गावौ या!!

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन

बैसाख अंधियारी पाख द्वादशी 
तद्नुसार 14/04/2026

Saturday, 28 March 2026

जनता ने की शुरू लड़ाई।

जनता ने की शुरू लड़ाई।

इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।
पानी जब सर ऊपर आया, बात तभी चौराहे आई।

बेसुध जब इरान पड़ा था, डर के साये में जकड़ा था।
तभी सुकोमल कुछ हाथों नें, इंकलाब का ध्वज पकड़ा था।।
निर्दयता को खुली चुनौती, देने जिसने प्राण गँवाई।।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

जब होगी इतिहास समीक्षा, क्रूर योजनाओं की बातें ।
मौन समर्थन कुछ बुदबुद स्वर, भुक्तभोगियों की दिन रातें ।
नर संहार मचाते पशुओं, के झुंडो मे आग लगाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

दिया उच्च बलिदान तभी तो,क्रियाशील हो चली आबादी।
मनोरोगियों के माथे मे, रक्तबिंदु से लिख आजादी ।।
कोटि कोटि जन बने बिलखते, उस चिंगारी की परछाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

जब अस्तित्व बचाना था तो, युद्ध हो गया बहुत जरुरी।
जब इतिहास पढ़े तब कोई , बची नहीं बाकी मजबूरी।
बिना युद्ध के शांति न सम्भव, सबसे बड़ी यही सच्चाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

लड़े सभ्यता के जब सैनिक, दारुण दुख भय संतापों से ।
जीवित होने लगी संस्कृति, आस्थाओं मंगल छापों से ।
जन जन एक हुए जब रण में, दुश्मन कर ना सका चढ़ाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

उठी सभ्यता संस्कारों सँग, हथियारों सँग उठे लुटेरे ।
विश्वयुद्ध सुन नाद भयंकर, काँपे सब आतंकी डेरे।
शस्त्रगारों मे बारूदीं, फंसे मरे सब आताताई।।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई। 

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...