Saturday, 28 March 2026

जनता ने की शुरू लड़ाई।

जनता ने की शुरू लड़ाई।

इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।
पानी जब सर ऊपर आया, बात तभी चौराहे आई।

बेसुध जब इरान पड़ा था, डर के साये में जकड़ा था।
तभी सुकोमल कुछ हाथों नें, इंकलाब का ध्वज पकड़ा था।।
निर्दयता को खुली चुनौती, देने जिसने प्राण गँवाई।।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

जब होगी इतिहास समीक्षा, क्रूर योजनाओं की बातें ।
मौन समर्थन कुछ बुदबुद स्वर, भुक्तभोगियों की दिन रातें ।
नर संहार मचाते पशुओं, के झुंडो मे आग लगाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

दिया उच्च बलिदान तभी तो,क्रियाशील हो चली आबादी।
मनोरोगियों के माथे मे, रक्तबिंदु से लिख आजादी ।।
कोटि कोटि जन बने बिलखते, उस चिंगारी की परछाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

जब अस्तित्व बचाना था तो, युद्ध हो गया बहुत जरुरी।
जब इतिहास पढ़े तब कोई , बची नहीं बाकी मजबूरी।
बिना युद्ध के शांति न सम्भव, सबसे बड़ी यही सच्चाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

लड़े सभ्यता के जब सैनिक, दारुण दुख भय संतापों से ।
जीवित होने लगी संस्कृति, आस्थाओं मंगल छापों से ।
जन जन एक हुए जब रण में, दुश्मन कर ना सका चढ़ाई।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई।

उठी सभ्यता संस्कारों सँग, हथियारों सँग उठे लुटेरे ।
विश्वयुद्ध सुन नाद भयंकर, काँपे सब आतंकी डेरे।
शस्त्रगारों मे बारूदीं, फंसे मरे सब आताताई।।
इरानी इतिहास बदलने, जनता ने की शुरू लड़ाई। 

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