Friday, 7 April 2023

शिव स्तुति शिखरिणीछन्दः

शिव स्तुति शिखरिणीछन्दः 


ललालालालाला ललललल लाला लालला 


महादानी भोले, जगतसुखदाता आप हैं।

कृपा चाहें शंभो, निबल जन त्राता आप हैं।। 

भवानी के स्वामी, जगतपति दीनानाथ हो। 

भजूँ मैं श्रद्धा से, पकड़ तुम लेना हाथ हो।। 


जटा गंगा धारा, गरलधर कंठीमाल हैं।  

सदा ही भक्तों के, दुखभँवर काटे जाल हैं।। 

सजाये माथा में, धवल धुति चन्दा दूज हैं ।। 

हिमाद्री की चोटी, डमक डमडम्मा गूँज हैं। 


महामाया गौरी, सजनि बन बैठी वाम में। 

करे स्वामी पूजा, मुदित मन सेवा धाम में।

खड़ा नंदी द्वारे, बदन मणिधारी सर्प हैं। 

सभी ज्ञानी ध्यानी, चरण धर भूले दर्प हैं।। 


महाखामी खोये, जगत मनहारी रूप हूँ। 

महापापी आत्मा, जलधि भव माया कूप हूँ।। 

छुड़ा के माया से, सुगति वर दे दो भक्ति दो। 

सदा काशीवासी, अभय कर माया मुक्ति दो।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२२/०८/२०२२

शुभस्थान-महुदा 







Wednesday, 5 April 2023

बिरहा ऋतु-छन्द वसन्ततिलका

बसंत बिरहा-छन्द वसन्ततिलका

ऽ   ऽ । ऽ ।   । ।   ऽ ।   । ऽ ।   ऽ ऽ
लाला ललाल ललला, ललला ललाला

बेरा बसंत बग ले,
जग ला रँगागे।
बेला बिंयार बखरी,
भितिया छबागे।।
डारी चुटुक्क चुक ले,
डुहँरू धरागे।
झूला झुले लठर के,
भँवरा बयागे।।

सारी उड़ात पुरवा, 
लपटा झपागे।
सुन्ना अगास मन के,
सपना गँजागे।।
छागे बसंत बइरी,
दुख ला बढ़ागे।।
गेहे बिदेस सँइया,
सजनी झँवागे।।

जाके बिदेस बनिया, 
रसिया रसे हे।
ठोली बसंत बिरही, 
करके हँसे हे।
आँखी पिया डगर में,
कब के दसे हे।
जे हे भुलाये सुध वो,
हिरदे बसे हे।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...