शिव स्तुति शिखरिणीछन्दः
ललालालालाला ललललल लाला लालला
महादानी भोले, जगतसुखदाता आप हैं।
कृपा चाहें शंभो, निबल जन त्राता आप हैं।।
भवानी के स्वामी, जगतपति दीनानाथ हो।
भजूँ मैं श्रद्धा से, पकड़ तुम लेना हाथ हो।।
जटा गंगा धारा, गरलधर कंठीमाल हैं।
सदा ही भक्तों के, दुखभँवर काटे जाल हैं।।
सजाये माथा में, धवल धुति चन्दा दूज हैं ।।
हिमाद्री की चोटी, डमक डमडम्मा गूँज हैं।
महामाया गौरी, सजनि बन बैठी वाम में।
करे स्वामी पूजा, मुदित मन सेवा धाम में।
खड़ा नंदी द्वारे, बदन मणिधारी सर्प हैं।
सभी ज्ञानी ध्यानी, चरण धर भूले दर्प हैं।।
महाखामी खोये, जगत मनहारी रूप हूँ।
महापापी आत्मा, जलधि भव माया कूप हूँ।।
छुड़ा के माया से, सुगति वर दे दो भक्ति दो।
सदा काशीवासी, अभय कर माया मुक्ति दो।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२२/०८/२०२२
शुभस्थान-महुदा
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