Sunday, 23 March 2025

दोहा भजन

अटल सोहागिन हर जब पकरिस, अबिनासी के गोड़।
राजपाठ घर द्वार छोड़ सब, भिन्ना सुख मुख मोड़।।


बाजै ढोलक डप्फ मंजीरा, पबरित नदिया घाट।
गंगा डुबकी पाप मोटरी, देथे छिन में काट।।


अत्तर अबीर गुलाल अउ, चंदन केसर गंध।
दरसन प्यास बढ़ात अउ, कसत मया के बंध।।


सुंदर किसन मनोहर मूरत, दरस परस सुख देत।
बिन्दाबन बसवार बर, आवत देवता नेत।।


चारा बाँटत नंदकुमार।

रुनझुन रुनझुन पैजन बाजत, चमचम चमकत हार।
ठिनन ठिनन ठन घंटा घनघन, गउवन के सिंगार।

खरर खरर मुँह चाँटत गइया, देख करत किरवार।
खजुवावत हरि गउ मनभावत, हुमरत करत दुलार।
पुछी उठावत मूड़ डोलावत, देत देह ला डार।
चारा खाये निचट भुलाये, देख बिरिज सरकार ।।

गोड़ जोहारत रेरी पारत, होवन भवजल पार।।
शोभामोहन लीलाधर हरि, गुन गावत जगसार। 

शोभामोहन

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...