Thursday, 29 May 2025

देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट देश ला बदलत हे,
देख तोर वोट बल राष्ट्रवाद छात हे ।
देख तोर एक वोट राज खुसियाली भर,
नक्सलवादी मन के नाव ला बुतात हे।
देख तोर एक वोट गाँव ला सजोर कर,
सँगसी गली घर दुवार चमकात हे।
देख तोर एक वोट गढ़त भारत भाग,
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट संस्कृति बचाय बर,
अंगद असन पाँव जबर जमात हे।
देख तोर एक वोट भाखा के सरेखा कर,
तोर पुरखा ले तोर मया ला गढ़ात हे ।
देख तोर एक वोट धोवत कलंक देश,
देख तोर एक वोट सुते ला जगात हे ।
देख तोर एक वोट कइसे जोड़त देश,
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट पाक ला पियात पानी,
उधेन उधेन पोनी कस धुनियात हे ।
देख तोर एक वोट चीन ला देखात आँखी,
घुसपैठिया ला चिन्ह चिन्ह के भगात हे।
देख तोर वोट बल अमेरिका होत थर,
ईटा के जवाब पथरि असन पात हे।
देख तोर एक वोट बिला में खुसरे साँप,
बाहिर निकाल चार झन ला दिखात हे।
देख तोर वोट बल ब्रह्मोस तेजस टेके,
आकाश मिसाइल बैरी ला लतियात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट राष्ट्र निर्माण करे,
भारत भुँइया नवा नेव ला मढ़ात हे ।
देख तोर एक वोट अवध में रामलला,
मंदिर बनाके पूरा विश्व ला चौंकात हे ।
देख तोर एक वोट काशी के उदासी काट,
शिवपुर दिब्यता के गौरव बहुरात हे।
देख तोर एक वोट खोटहा सिक्का मन के,
रतिहा नींद दिन के चैन ला चोरात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे।

देख तोर एक वोट धरमबिमुख बैरी,
मुड़मुत्ता रउँदे हे गोड़तरी लात हे ।
देख तोर एक वोट दुबके रहस तेला,
मुड़ उठा छाती तान जिये ला सिखात हे ।
देख तोर एक वोट वंशवाद बरगद,
जर खन मही धार डार उपकात हे ।
देख तोर एक वोट दिंयार बाँबी उझार,

देख तोर एक वोट धमक देखात हे। ।

देख तोर एक वोट सूरा मन ला सपेट,
टूरा मन ला लपेट संग जुरियात हे।
देख तोर एक वोट पाक के टोंटा मुसेट,
धराके कटोरा रोज भीख मँगवात हे ।
अरिदल छोट-मोट गिंगियात गोड़ लोट,
सोंट सोंट सोंटा में घमंडी सोझियात हे।
देख तोर एक वोट सुधारत मसमोट,
भ्रष्टाचारी के ऊपर हंटर चलात हे।
देख तोर एक वोट धमक देखात हे। ।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

Wednesday, 28 May 2025

बसे भारत में पाकिस्तान

बसे भारत में पाकिस्तान

बँटवारा में मुस्लिम मन ला, मिलगे पाकिस्तान। अउ हिन्दू मन अपने घर में, होगे कुकुर समान।।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।
कोरी खरिखा पीला फोरत, बोझ बढ़ावत देश।
ठाँव ठाँव में कब्जा करके, बइठे बने विशेष।।
वक्फ करत सरकारी भुँइया, लूटत हिन्दू स्थान ।।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।
बांग्लादेशी अउ रोहिग्या, इहाँ छावनी छाय।
राशन कार्ड अधार बनाके, वोट बैंक बन हाय।।
वोट लेवैया भौं नइ देवत, अउ नइ देवत कान।।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।
घरघर ले अफजल निकलत हे,घरघर ले लादेन ।
आँखी रहिके वो हे अँधरा, देखत नइ हे जेन ।।
खेत बगइचा घर दुवार में, माते हे उदियान।।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।
गंधासुर मन गंध मचा दिन, गंदा पानी छेंक।
राजनीति अउ घाव खोधरिन, स्वारथ रोटी सेंक।।
माड़ी मोड़े विवश कर डरिन, भारत देश महान।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।
कोट कछेरी करत दलाली, अपराधी ला छोड़।
अपने घर में अब हिन्दू के, उसलत हावय गोड़।।
कोन सिरजही कोन बचाही, पाछू परे सब प्रान।।
वाह रे भारत के संविधान।
बसे भारत में पाकिस्तान।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

Tuesday, 27 May 2025

अँखमुन्दा सबझन दँउरत हें"

"अँखमुन्दा सबझन दँउरत हें"

जगदहरा में सब तँउरत हें।
अलकरहा दँउरी भँउरत हें। 

सब्बो रुखवा एक अकेलियन, 
तब्भो फरत फुलत मउरत हें। 

सब्बो झन बउरात रगड़ के, 
सब्बो झन सब ला बउरत हें। 

मिरगाजल में प्यास बुताये, 
अँखमुन्दा सबझन दँउरत हें। 

शोभामोहन चेत चढ़िस तब, 
मायागढ़ में हरि सँउरत हें। 

शोभामोहन

स्वर तिरोहित मुग्ध है मन

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              स्वर तिरोहित मुग्ध है मन
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स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।
कामनाएंँ ऊष्ण बन ठन ।।

पाँव घुँघरू छनन छन छन ,
ओंठ छाया मदिर कंपन।
स्वाँस झरते फूल बन-बन,
उँगलियाँ पकड़े लड़कपन ।। 
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन ।।

कर रही है खनन खन खन,
चुलबुली चूड़ी व कंगन ।
मनमहल उत्सव विलय प्रण,
वासनाओ का अमरपन ।। 
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।

घन करे घन घनन घन घन
बिजुरी करती गगन नर्तन 
करे कंपित जब मृदुल मन 
घिसते हम उमर चंदन ।। 
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।

पवन चलता  सनन सन-सन,
सुगंधित पाकर निमंत्रण । 
स्वप्न पालित पाये यौवन ,
नाम गाये सजन धड़कन ।। 
स्वर तिरोहित मुग्ध है मन।

शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर (छ.ग.)

Sunday, 25 May 2025

शक्तिमान हमारे मोदी

अरिदल पिंडा पारे मोदी ।
घर में घुसकर मारे मोदी।।
जन गण मन के प्यारे मोदी।।
शक्तिमान हमारे मोदी।। 

पाकिस्तानी क्रूर आतंकवादी घटना से उपजे रचना

पाकिस्तानी क्रूर आतंकवादी घटना से उपजे रचना

धरम पूछके गोली मारे, कश्मीर घाटी झिमझाम।
अभी करोड़ो मारे हिन्दू, में  जुड़गे अट्ठाइस नाम।

कतका सैनिक रक्षा करही, अउ रखही कतका रखवार ।
जतका बैरी घर के भीतर, ततके बैरी सीमा पार।।

कोन बचाही कोन राखही, लिखे हवै मरना तोर भाग।
भाग सकस तौ भाग निकल जा, नइ तो जाग सकस तौ जाग ।।

तोरे घर में तोला मारत, तोला अल्लर लिज्झड़ जान।
तोरो तो दू हाथ गोड़ हे, तहूँ तमंचा फरसा तान ।।

मनखे के संग मनखे रहिथे, रक्सा संग नइ होय निभाव।
रक्सा के रक्सापन देखत, बदल तहूँ हर अपन सुभाव। ।

सभ्य संग में फबे सभ्यता, अउ असभ्य संग घूँसा लात।
जेन जेन भाषा में समझै, करौ उँकर सँग वइसे बात।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

.मनहरण घनाक्षरीशहरी नक्सली गुन बखान

1.मनहरण घनाक्षरी
शहरी नक्सली गुन बखान

पुलिस जवान बलिदान के मनाथे खुशी,
नक्सली मरथे तौ रोथे घोक पार के।
टूटहा पनही फटहा कुरता ला पहिन,
मुड़ी चुन्दी कोरैं नहीं रखथें  उझार के।
झोला ओरमाय करथें समाज सेवा ढोंग,
देशद्रोह करैं लपर-लपर मार के।
चीनी चमगेदरा के कहे कहे चलैं अउ,
हाथ धोके पाछू परे चुने सरकार के।।

2.मनहरण घनाक्षरी
शहरी नक्सली गुन बखान

ऊपरछावा दलित पिछड़ा के गोठ बात,
भीतरे भीतर उन देशघात करथें।
मानवाधिकार के बजाथें फुटहा ढपली।
स्वारथ के रोटी सेंक-सेंक पेट भरथें।
अल्पसंख्यक बर राँडी असन  रोथें गाथें,
जुटहा लंगटा नीच नाक कान भरथें।
देशहित ताक में मढ़ा के नाचथें नंगरा,
ना तो कोनो ला घेपथें ना कहूँ ले डरथें।।

Thursday, 8 May 2025

बादर ला परघाही कोन ?

बादर ला परघाही कोन ? 

रुखराई जंगल काटत हौ, बादर ला परघाही कोन।
झड़ी लड़ी रझरझ जलबुँदिया, नेवता पार बलाही कोन।।

आगी उगलत सुरुजदेव के, तांडव ताप नवाही कोन।
सागर नदिया नरवा ढ़ोड़गी, अउ जीव प्यास बुताही कोन।।

ममहाती एहंँवाती करके, भुँइया ला सुघराही कोन।
बिजबोनी टुकनी ला धरके, धान छिंचे बर जाही कोन।।

भुँइया के पटपटहा पागी, हरियर रंग रंगाही कोन।
घानीमूनी खेले कूदे, लइकन ला उकसाही कोन।

चुरुवा भर पानी बर तरसत, चुरगुन जीव जुड़ाही कोन।
दाना पानी जीव जगत बर, बादर के बिन लाही कोन। ।

शोभामोहन श्रीवास्तव

Tuesday, 6 May 2025

हर मुहरन में तहीं लुकाये ।

सबो दिरिस तोरे जस गाये

हर मुहरन में तहीं लुकाये । 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

भिनसरहा रक्तालाली मा ।

मंँझन छन बुलकत जाली मा।।

झूलफुलहा के खुशियाली मा।

आज परनदिन अउ काली मा।।

तोर होय के ढंग जनाये ।

हर मुहरन में तहीं लुकाये। 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

चंदा तारा जुड़वासा मा ।

चित अउ पट दूनो पासा मा।।

सुनता बिमता के बासा मा ।

अनचिन्हार रहिके साँसा मा।। 

निचट कलेचुप तँही समाये ।। 

हर मुहरन मा तहीं लुकाये।। 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

गमकत भुँइया फूलवारी मा ।

बेरा के पहरादारी मा ।।

अटलसोहागी सिंगारी मा।

रेफ सोनहा उजियारी मा।।

सरभर सुघरइ तहीं बसाये। 

हर मुहरन मा तँही लुकाये ।।

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव

फेंक दिहौं जमुना मा बंशी

फेंक दिहौं जमुना मा बंशी

फेंक दिहौं जमुना मा बंशी कन्हैया ।
लोक्खन के अतलंगहा
दाऊ के भैया।। 

बाँसे के बंशी बर अतका मया हे। 
मोरे बर चिटको नइ उले दया हे।। 
बनन बनन मधुबन 
निधिबन के बिहरैया।
फेंक दिहौं जमुना मा बंशी कन्हैया । 

झुलना झूलत बइठस कदम के डारी। 
पुरवा मतवारी अलबेला गिरधारी।। 
सउत जइसे बंशीधुन जीव के जरैया। 
फेंक दिहौं जमुना मा बंशी कन्हैया ।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव 
०५/०५/२०२३

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...