Sunday, 25 May 2025

.मनहरण घनाक्षरीशहरी नक्सली गुन बखान

1.मनहरण घनाक्षरी
शहरी नक्सली गुन बखान

पुलिस जवान बलिदान के मनाथे खुशी,
नक्सली मरथे तौ रोथे घोक पार के।
टूटहा पनही फटहा कुरता ला पहिन,
मुड़ी चुन्दी कोरैं नहीं रखथें  उझार के।
झोला ओरमाय करथें समाज सेवा ढोंग,
देशद्रोह करैं लपर-लपर मार के।
चीनी चमगेदरा के कहे कहे चलैं अउ,
हाथ धोके पाछू परे चुने सरकार के।।

2.मनहरण घनाक्षरी
शहरी नक्सली गुन बखान

ऊपरछावा दलित पिछड़ा के गोठ बात,
भीतरे भीतर उन देशघात करथें।
मानवाधिकार के बजाथें फुटहा ढपली।
स्वारथ के रोटी सेंक-सेंक पेट भरथें।
अल्पसंख्यक बर राँडी असन  रोथें गाथें,
जुटहा लंगटा नीच नाक कान भरथें।
देशहित ताक में मढ़ा के नाचथें नंगरा,
ना तो कोनो ला घेपथें ना कहूँ ले डरथें।।

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