Friday, 29 November 2024

बिजली चमकिस चिकमिक चिकमिक,छितका कुरिया बग ले बरगे।

बिजली चमकिस चिकमिक चिकमिक,
छितका कुरिया बग ले बरगे।
छितका छबि देख छनछन ले,
गरबिन महल अँइठुल जरगे ।
का राजमहल का रंगमहल,
का छितका जोतलहर बर हे ।
परमातम के बेवहार कला,
समझन बुध नइ नारी नर हे ।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

हरिभजनधड़कत यह देह हिया भर हे।वो हरि छबि उपर निछावर हे।।

हरिभजन

धड़कत यह देह हिया भर हे।
वो हरि छबि उपर निछावर हे।।
लिखथौं तौ बस स्तुति वोकर,
जेकर ब्रह्मांड चराचर हे।
रँग के संसार नसाँव नहीं।
फाँसी गर मोर कसाँव नहीं।।
सपना में उही जागत में उही,
चारी गुनगान बराबर हे।।
वोकर धुन छेड़ै सुर गुरतुर।
मनभाव बोहा तुरतुर तुरतुर।।
वोकर दहरा वोकर लहरा,
वो जिहाँ रखै समझौ घर हे।।

रद्दा में सोझ चलौ दनदन।
बस नाम सरूप लखौं छन-छन।।
जब छाँटत छोल गठान सबो,
तब कोन अपन हे अउ पर हे।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१ अगहन 

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...