Thursday, 29 June 2023

बइठे गुनत चिरैया जोंही

बइठे गुनत चिरैया जोंही

१/
काटत रुखवा बेंचत डोली
ठउर नहीं हे मूँड़ लुकाय ।
बइठे गुनत चिरैया जोंही,
कोन डहर अब जाये जाय।।
2/
जेन डहर मनखे जावत हे,
मुड़ियामेट करत हे हाय।
अपन टेकावत महल अटारी,
लेबत हावय सबके हाय ।।
3/
गाँव डहर के पैडगरी मे,
शहर डहर के पुरवा आय।
रोग काय हे जानत नइ अउ,
अंते-तंते दवा बताय।
4/
आये हवय गरेरा अइसन,
दुबकत जम्मो जीव डर्राय।
बर पीपर के जर उसलत हे,
नानमून के गिनती काय।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

*वक्तामंच द्वारा त्रिवेणी नाग को पंखादान पर प्रेस विज्ञप्ति *

*वक्तामंच द्वारा त्रिवेणी नाग को पंखादान पर प्रेस विज्ञप्ति *

विगत दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वृंदावन सभागार में कवयित्री त्रिवेणी नाग जी के द्वारा विरचित पुस्तक बादर उठे रहिथे करिया का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसे शिक्षादूत प्रकाशन संस्थान के मुखिया आदरणीय सत्यप्रकाश सिंह जी ने निःशुल्क प्रकाशित किया था और कवि श्री मोहन श्रीवास्तव जी एवं शोभामोहन श्रीवास्तव जी ने रचनाओं का संकलन और भव्य विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें विशिष्ट अतिथि की आसंदी पर विराजमान  पद्मा दुबे जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि त्रिवेणी नाग जी के घर में पंखे की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह बात जानकर देश और प्रदेश की प्रतिष्ठित सामाजिक सांस्कृतिक संस्था वक्तामंच के मुखिया आदरणीय राजेश पराते जी ने पद्मा दुबे जी के उद्बोधन के तुरंत बाद मंच पर आकर अपने परदुख कातरता और करूणा का परिचय देते हुए वक्तामंच के माध्यम से उन्हें पंखा प्रदान करने की घोषणा किये थे। जिसे आज राजिम क्षेत्र की लब्ध प्रतिष्ठित नेत्री, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष, सर्वब्राह्मण समाज की प्रदेश सचिव, स्मरण पंडित सुंदरलाल शर्मा वेल्फेयर सोसाइटी की अध्यक्षा श्रीमति पद्मा दुबे जी के कर कमलों से छत्तीसगढ़ी बोलीभाखा की प्रसिद्ध आशु कवयित्री त्रिवेणी नाग जी को उनके घर में जाकर प्रदान किया गया।

आज समाज में जहाँ एक ओर आत्ममुग्धता और स्वार्थभावना चरम पर है ऎसे समय में वक्तामंच का यह सराहनीय प्रयास समाज में एक सकारात्मक और परोपकार की विचारधारा को संचारित करने के लिए प्रेरक का कार्य कर रहा है।

वक्तामंच एक ऐसी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था है जो सदैव अपने सामाजिक सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यों से समाज को नयी दिशा देने का कार्य करती है।

वक्तामंच मंच के मुखिया श्री राजेश पराते जी शुभम साहू जी और उनकी पूरी टीम को इस पवित्र कार्य के लिए साधुवाद है।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के संबंध में विचार

डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के संबंध में विचार


डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी मन छत्तीसगढ़ राज्य के हिन्दी साहित्य जगत के  एक अइसन जगमगावत नक्षत्र आय, जिंकर नाम ला सुधि साहित्यकार समाज म बड़ आदर अउ सम्मान ले लिये जाथे। इँकर प्रतिभा के गजब अकन आयाम हे। एक डहर येमन हर नामी गिरामी शिक्षावद् के रूप मा नवा पीढ़ी ला सँवारे बर अपन बुद्धि अउ कौशल ला बउरत हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारागाँव धरसींवा के प्राचार्य के रूप में सत्यनिष्ठा अउ कर्तव्य परायणता ले सेवा देवत हें, तौ दूसर डहर धारदार व्यंग्यकार अउ प्रभावी मंच संचालिका के रूप म घलोक छत्तीसगढ़ प्रदेश म प्रतिष्ठित हें।

हिन्दी अउ छत्तीसगढ़ी दूनो भाषा में डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी मन समान अधिकार ले सरलग कलम चलावत हें ऊँकर व्यंग्य में जतके सरलता अउ तरलता हे ततके धार घलोक हे । व्यंग्य लिखई बूता हर सहज नोहय, कविता ला तुक मिला के कोनो भी लिख देथे, फेर व्यंग्य हर बिगन करुणा अउ मारकता के ककरो मन मस्तक ला नइ झनझना सकै। ये पुस्तक हर बदलत सामाजिक परिदृश्य मन के एकठन सुघ्घर झरोखा हे, मनखे के भीतर उरकत मनुखई ला थपरा मरत असन व्यंग्य रचना अब्बड़ गरुगंभीर हे, जेन मनखे मन ला गुनान करे बर विवश करथे । अमोलहा चिंतन अउ गुनान मथान के पाछू निकले सार लेवना रूप ये व्यंग्य संग्रह हर पढ़े गुने अउ प्रेरणा लिये जोग हे।

मोला ये बात ला कहत हुए गजब सुख लगत हे, कि प्रस्तुत पुस्तक के एकक ठन व्यंग्य म व्यंग्यकार हर अपन व्यंग्य कौशल के उत्कृष्ट नमूना ला परोसे हे। मैं हर पठनशील सुभाव के हौं सरलग पढ़त गुनत रहिथौं  फेर डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी जइसन माईलोगिन व्यंग्यकार पूरा भारत के परिदृश्य म अभी तक ले एकोझन नइ भेंटे हौं, या हो सकथे कोनो होही घलोक तौ मोर जानबा मे नइ आय हे।

डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के व्यंग्य में सामाजिक विसंगति, सामाजिक बदलाव, अउ सामाजिक सरोकार मन के ठउका सरेखा होय हे । हर एक व्यंग्य रचना म एक गंभीर दृष्टिकोण हे अउ सुघ्घर सिखौना संदेश हे, जेन हर उँकर व्यंग्य ला सबले अलगे अउ प्रासंगिक बनाथे।

छत्तीसगढ़ी साहित्य संसार में अभी दुरिहा दुरिहा के जावत ले एकोझन व्यंग्यकार माईलोगिन मोर आँखी में नइ दिखै हे, जेन डाॅ सीमा जी जइसन व्यंग्य लिखत हो। एकदिन उदुपहा होय भेट में मोर मुँह ले निकलगे कि आप जइसन धारदार अउ चुटीला व्यंग्य हिन्दी में लिखथौ, वइसने कहूँ छत्तीसगढ़ी में लिखहू तौ छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत में माईलोगिन व्यंग्यकार के रीता ठउर ला भरे के दक्षता रखथौ, तब वोमन बताइन कि मैं कुछ रचना छत्तीसगढ़ी में लिखे हौं। ये बात ला जान के मोला बड़ खुशी होइस अउ मैं वोमन ला अउ छत्तीसगढ़ी व्यंग्य लिखे बर हुरिया दियेंव। अब येला ईश्वर के इच्छा ही कहे जाही कि वोकर बाद वोमन एकठन किताब के पुरतिन छत्तीसगढ़ी व्यंग्य लिख डारिन । मैं उँकर कर्मठता अउ जुझारूपन ला नमन जोहार करथौं, छत्तीसगढ़ी साहित्य में डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के लिखे व्यंग्य मन हर खच्चित सम्मान पाहीं ये बात के मोला पूरा विश्वास हे। डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के प्रकाशित होय ले छत्तीसगढ़ी साहित्य के इतिहास में एकठन जगजग ले नवा सोनहा अध्याय जुड़त हे। छत्तीसगढ़ी व्यंग्यकार माईलोगिन के पाँत में आगू चलके भले अउ कतको झन के नाव लिखैया के नाव जुड़ही फेर अभी जिहाँ तक देख सकत हन तिंहा तक एक नाम डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के दिखत हे।

अइसन रोठ अउ पोठ उदिमकरैया करमैतिन व्यंग्यकार बड़े बहिनी ला मोर डहर ले छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के प्रकाशन बर अगुवा के गाड़ा गाड़ा बधाई हे।



शुभेच्छुक

शोभामोहन श्रीवास्तव
आसाढ़ शुक्लपक्ष एकादशी
विक्रम संवत २०८०

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...