डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के संबंध में विचार
डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी मन छत्तीसगढ़ राज्य के हिन्दी साहित्य जगत के एक अइसन जगमगावत नक्षत्र आय, जिंकर नाम ला सुधि साहित्यकार समाज म बड़ आदर अउ सम्मान ले लिये जाथे। इँकर प्रतिभा के गजब अकन आयाम हे। एक डहर येमन हर नामी गिरामी शिक्षावद् के रूप मा नवा पीढ़ी ला सँवारे बर अपन बुद्धि अउ कौशल ला बउरत हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारागाँव धरसींवा के प्राचार्य के रूप में सत्यनिष्ठा अउ कर्तव्य परायणता ले सेवा देवत हें, तौ दूसर डहर धारदार व्यंग्यकार अउ प्रभावी मंच संचालिका के रूप म घलोक छत्तीसगढ़ प्रदेश म प्रतिष्ठित हें।
हिन्दी अउ छत्तीसगढ़ी दूनो भाषा में डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी मन समान अधिकार ले सरलग कलम चलावत हें ऊँकर व्यंग्य में जतके सरलता अउ तरलता हे ततके धार घलोक हे । व्यंग्य लिखई बूता हर सहज नोहय, कविता ला तुक मिला के कोनो भी लिख देथे, फेर व्यंग्य हर बिगन करुणा अउ मारकता के ककरो मन मस्तक ला नइ झनझना सकै। ये पुस्तक हर बदलत सामाजिक परिदृश्य मन के एकठन सुघ्घर झरोखा हे, मनखे के भीतर उरकत मनुखई ला थपरा मरत असन व्यंग्य रचना अब्बड़ गरुगंभीर हे, जेन मनखे मन ला गुनान करे बर विवश करथे । अमोलहा चिंतन अउ गुनान मथान के पाछू निकले सार लेवना रूप ये व्यंग्य संग्रह हर पढ़े गुने अउ प्रेरणा लिये जोग हे।
मोला ये बात ला कहत हुए गजब सुख लगत हे, कि प्रस्तुत पुस्तक के एकक ठन व्यंग्य म व्यंग्यकार हर अपन व्यंग्य कौशल के उत्कृष्ट नमूना ला परोसे हे। मैं हर पठनशील सुभाव के हौं सरलग पढ़त गुनत रहिथौं फेर डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी जइसन माईलोगिन व्यंग्यकार पूरा भारत के परिदृश्य म अभी तक ले एकोझन नइ भेंटे हौं, या हो सकथे कोनो होही घलोक तौ मोर जानबा मे नइ आय हे।
डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के व्यंग्य में सामाजिक विसंगति, सामाजिक बदलाव, अउ सामाजिक सरोकार मन के ठउका सरेखा होय हे । हर एक व्यंग्य रचना म एक गंभीर दृष्टिकोण हे अउ सुघ्घर सिखौना संदेश हे, जेन हर उँकर व्यंग्य ला सबले अलगे अउ प्रासंगिक बनाथे।
छत्तीसगढ़ी साहित्य संसार में अभी दुरिहा दुरिहा के जावत ले एकोझन व्यंग्यकार माईलोगिन मोर आँखी में नइ दिखै हे, जेन डाॅ सीमा जी जइसन व्यंग्य लिखत हो। एकदिन उदुपहा होय भेट में मोर मुँह ले निकलगे कि आप जइसन धारदार अउ चुटीला व्यंग्य हिन्दी में लिखथौ, वइसने कहूँ छत्तीसगढ़ी में लिखहू तौ छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत में माईलोगिन व्यंग्यकार के रीता ठउर ला भरे के दक्षता रखथौ, तब वोमन बताइन कि मैं कुछ रचना छत्तीसगढ़ी में लिखे हौं। ये बात ला जान के मोला बड़ खुशी होइस अउ मैं वोमन ला अउ छत्तीसगढ़ी व्यंग्य लिखे बर हुरिया दियेंव। अब येला ईश्वर के इच्छा ही कहे जाही कि वोकर बाद वोमन एकठन किताब के पुरतिन छत्तीसगढ़ी व्यंग्य लिख डारिन । मैं उँकर कर्मठता अउ जुझारूपन ला नमन जोहार करथौं, छत्तीसगढ़ी साहित्य में डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के लिखे व्यंग्य मन हर खच्चित सम्मान पाहीं ये बात के मोला पूरा विश्वास हे। डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के प्रकाशित होय ले छत्तीसगढ़ी साहित्य के इतिहास में एकठन जगजग ले नवा सोनहा अध्याय जुड़त हे। छत्तीसगढ़ी व्यंग्यकार माईलोगिन के पाँत में आगू चलके भले अउ कतको झन के नाव लिखैया के नाव जुड़ही फेर अभी जिहाँ तक देख सकत हन तिंहा तक एक नाम डाॅ सीमा श्रीवास्तव जी के दिखत हे।
अइसन रोठ अउ पोठ उदिमकरैया करमैतिन व्यंग्यकार बड़े बहिनी ला मोर डहर ले छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के प्रकाशन बर अगुवा के गाड़ा गाड़ा बधाई हे।
शुभेच्छुक
शोभामोहन श्रीवास्तव
आसाढ़ शुक्लपक्ष एकादशी
विक्रम संवत २०८०
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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