Wednesday, 24 May 2023

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत (पारंपरिक)

मोर बदन कुम्हलात गो छत्तीसगढ़ी बिहावगीत (पारंपरिक)

डंगडंग ले बेदी रचवाये मोर राजा ददा।
झेंझरहा मड़वा छवाये अमुवा के डरिया,
मोर बदन कुम्हलात गो।
कहिबे तौ बेटी मैं हर छत्तर तनाई दौं।
कहि तो सुरुज करौं लोप ओ।
काबर ददा तैं कहि तो छत्तर तनइबे।
कोरा में रख ले ना तोप गो।।

हरदी के रंग मोर अंग ला रंगत अउ,
मउर गड़त मोर माथ गो।
अँचरा देथस दाई छँइहा करन फेर।
अगन बरत तन मोर ओ।

रंगबिरंगी करसा साजे हे सुवासिन।
दियना जलाये भर तेल ओ।
माँग भरागे रगरग ले फुफू मोर सेंदुर सुधार ओ।

रचनाकार- शोभामोहन श्रीवास्तव

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