शब्द महिमा
बिन सोचे समझे मत बोल
शब्द रत्न सबसे अनमोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
जहाँ नहीं रवि शशि जा पाय।
शब्द गुफा मन के छू आय।।
भाव पढ़े बिन पीटे ढोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
टिके शब्द पर मन के भाव।
दंभ क्षुद्रता और प्रभाव।।
शब्द रसिक ले भाव टटोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
शब्दों से दीपित हो अर्थ।
शब्द बाण नहीं जाते व्यर्थ।।
पहले शब्द तनिक ले तोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
शब्द छोड़ता मन में छाप।
पहले चख ले वक्ता ताप।।
तभी बोल कुछ मुख को खोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
शब्द कराये सृजन विनाश।
अलंकार रस प्रणय विकास।।
शब्दाश्रित विज्ञान खगोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
शब्द हृदयतल करे प्रवेश।
मधु भर दे उपजाये क्लेश।।
शब्द स्निग्ध मृदु बोल अडोल।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
पकड़ चेतना का यह हाथ।
गहरे अवचेतन तक साथ।।
अंतसतल दे भाव विडोल।।
बिन सोचे समझे मत बोल।।
शोभामोहन
२१/०२/२०२२
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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