Wednesday, 17 May 2023

तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखे ( मनहरण घनाक्षरी)

तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखे ( मनहरण घनाक्षरी)

1/
तिरिया ला तिरिन बरोबर सरेखैं नहीं,
तिरियाच बर सब नेम ला बनाय ओ ।
बपरी बना के फेर पुतरी असन नाच,
चारोजुग हावय परमान नचाय ओ ।
घर ला रपोटे अउ एब ला तोपे तहीं,
जब जेन मवका पाय तब लतियाय ओ ।
जब-जब देखहीं लहूट केे मनखे मन,
पग-पग कर तही जग ला रेंगाय ओ ।
2/
जब ले जनम धरे, तब ले करम करे,
बाॅंचे खोंचे खाय जांगर टूटत कमाय ओ ।
गरूआ असन दाई-ददा जेन खूंटाबाॅंधे,
देखबे सदा उहीच खूंटा में बंधाय ओ ।
सपना सरोय सब, तपना सहत जग,
आँखी के किनारी मेंर पीरा बटियाय ओ।
घर के न घाट के, पथरा कस बाट के,
लोटियागोबरी कर जिनगी पहाय ओ ।
3/
रतनारानी ला देख माया परे तुलसी ला,
राम में रमाय मन डहर देखाय ओ ।
फेर गुनहगार ल कहाॅं गुनजस लागे,
ढोर अडहा संग साॅंहूत जोरे हाय ओ ।
कहाॅं उतीस बूडतीस जात मानूख के,
बिधाता हा तिरिया ला धारनी बनाय रे ।
भल-अनभल संग होये कभू गिने नहीं,
करमईतीन हा करम करे जाय रे ।
4/
घपटे हावय अंधियारी जिनगी में फेर,
स्ंाझा डेरउठी बन दीवा बर जाय रे ।
दुख ला लुका अपन अंतस के कुंदरा में,
पानी डार-डार सब सुख ला जगाय रे ।
मार अउ गारी खात, अपन गति गनात,
सब ला संॅवास बस आॅंसू चूचवाय रे ।
उरकत सब आस, भसकत बिसवाॅंस,
मया के एकक ठन ठीहा खोधियाय रे ।
5/
नर-गर पहिरे जेवर बेली कस लागे,
अहमईती ला जेन ठेंगवा देखाय रे ।
रूप रंग गुन के बखान नीक लागे नहीं,
रखवारी बर जब भाई-बाप आय रे ।
मनखे ला रकसा बनत नहीं बेरा लागे,
झीमझाम में कहॅंू अकेल्ला सपडाय रे ।
तेखर ले बने अबियाय रहि जातेंव गोई,
मोर बर चारोमूडा बड बकवाय रे ।
6/
अनभल मोर संग जग हा करत फेर,
सबके मूॅंह ला देखेंव तोबरा ठेंसाय रे ।
मोर कोनो दोस नहीं तभो दोसदारी मोला,
घर-बन मिलके हेरवठा बनाय रे ।
चारोखूंट देख अनियाव जीव डरगे हे,
जीव भर छूटय नहीं साॅंसा आय जाय रे ।
मन के कलपना ला मोर कोनो सूने नहीं,
ना तो ये जगत मोर गोठ पतियाय रे ।
7/
मन तन के रहूॅं नहीं सुनव बोलीठोली,
पढ गुनके अब तो नहीं सही जाय रे ।
देखईया देखय हमरो गुनकोठी भरे,
देखे नहीं सके तेकर आॅंखी फूटी जाय रे ।
पढ लिख लव गोई, लाहो लेव हव गोई,
पढे गुन हर कभू बिरथा न जाय रे ।
एक दिन रही भूंईया भर तुंहरेच,
गुन देखके तुंहर मोला ममहाय रे ।
8/
थरहा असन बेटी जात बड फूरमानू,
पर घर रहि रोप फर फूल जाय रे ।
माॅंग भर एडी भर माहूर लगाई कर,
दूई कूल डीह डोगरिया हरियाय रे ।
बेटी कस जसही खोजे ले कहॅंू मिले नहीं
बीजा कस सर रूख बन लहराय रे ।
कहाॅं जाही रूख कहाॅ जाही फूलपान हर,
बीजहा सरंॅव नहीं कहॅंू अडियाय रे ।
9/
बुध ला अपन चूल्हा में डार रीत बर,
चरझनिया के बीच मूडी ढंकवाय रे ।
सातगोड रेग सतभंउरी गींजर फेर,
सातो किरिया पुरोये जिनगी बसाय रे ।
एक अनचिन्ह अनगंईहा अंगुरी धर,
गाॅंठजोरे सोहगीन बन चले जाय रे ।
बेटी कस कोन हे तजथे अउ भूंईया में,
अपन ला छांड पर ला जे अपनाय रे ।
10/
अनवट बिछिया पाजेब पहिरे चलय,
नीक लागय रेंगना हा घूंघरू बजाय रे ।
करधन पॅंहूची छाहित लछमी असन,
गर कारीपोत में सोहाग सिरजाय रे ।
ककनी बनूरिया कारीचूरी पटा पहिर,
नकफूल चन्दा व सूरूज चमकाय रे ।
बेटी कस करथे सिंगार एक भूंईया हा,
एकरे सेती दूनो के रासमेल खाय रे ।
11/
डोला चढ देखय लहूट के मयारू सब,
डोलहा थिराय न अॅंसूवन थिराय रे ।
रेंगें के धरम ससुरार कोती चल कहे,
मया के मरम भींजे भींजे रहि जाय रे ।
परछन कर ससुरारी नता फेरी देवें,
अंगरी धर के नवा डहर देखाय रे ।
बेटी कस कोन जयजोहार अउ करे गोई,
भाग के डेरउठी धूर मस्तक लगाय रे ।
12/
गमकत गजरा पहिर के सोहाग बर,
सुखरतिहा पिया के सेजरी सजाय रे ।
पग पग रेंगय गोसंईया के अनुकूल,
पानी कस मिल जिनगानी बन जाय रे ।
पिया के मूरतिया बसा हियमंदिरवा में,
पथरा ला टोर के मया ला पझराय रे ।
तोर कस पिरीत खोजे ले कहॅू मिले नहीं,
तोर मया पाके सब जग बईहाय रे ।
13/
तोर एक मुचकी मे मर जाथे बने-बने,
सून्ना जग ओकर जे तोला बिसराय रे ।
गढे हे गढईया मोहनकारी तोर चोला,
जोेग भूल जोगिया तोर बर सधाय रे ।
बीन तोर ककरो पहाय नहीं जिनगानी,
मया के सरूप सब तोरे में समाय रे ।
तोर कस मोहनी खोजे ले कहॅंू मिले नहीं,
सब अरझे तोर में बिन अरझाय रे ।
14/
तंही मयाखेत अउ तंहीच करथस खेती,
तोर बिन धनहा परिया पर जार रे ।
तोर बिन दीखे अदियावन मनखे हर,
सुख के सेवाद सब तोरे ले जनाय रे ।
मरथस तंय हर तभो नहीं मरय मया,
सुख के मडवना सबो तोरेच मडाय रे ।
खोजे न मिलय तोर कस बनिहार कहॅंू,
बिन बनी पाये घलो हाॅंसे मुस्काय रे ।
15/
भाखा में उराठी घोर जब जब रीस करे,
बडे-बडे राजपाठ गिस छरियाय रे ।
घूटकेस बीख गम कोनो ला होईस नहीं,
बडे बडे झगरा ला तंही घरियाय रे ।
मया के मतवना बल, पग पग चल चल,
बडे बडे टेडगा ला तहीं सोझियाय रे ।
तोर कस ताप के नवईया नहीं जग मे हे,
बडे बडे गरबी ला तंहीच नवाय रे ।
16/
तोर नीकता के सोर उडत हावय गोई,
अपन ला छाॅड सबो तोर सूती खाय रे ।
बाराबानी गोठ जग कतकोन गोठियावय,
एकबोलनीन तोला सबो पतियाय रे ।
लंदीफंदी चारोखूंट हावय चलन चाल,
सतबोली के तहींच चलन चलाय रे ।
सतबाठ धरके सहत दुख लाख तंय,
सत में जानस हावय संकर समाय रे ।
17/
हिरदे के उघरा कपाट झन करे कर,
चारोखूंट दानो अउ रक्सा ढिलाय रे ।
कतको ला लील डारे हावय एक रकरकी,
बाठ अउ दूबट्टा अलहन भरे ताय रे ।
मया में मयाच नहीं मिले बने जान लेबे,
मया आड जन आने साध सिपचाय रे ।
सोच के समझ के मडाबे तंय एकक पग,
मीतवा बलाय चाहे हितवा चलाय रे ।
18/

जीये बर परही जबर बनके रे तोला,
डरछोड लाज तज अईसे दिन आय रे ।
डर डर रहिबे जीयन नहीं देही गोई,
लाज के मरईया इहाॅं लाज ला गंवाय रे ।
मूडी गडियाये ले जबरवाली होही गडी,
मान ले सिखोना रेंग मूडी ला उठाय रे ।
अंगबोली ले अपन अईसे संदेस दे तंय,
अपन अस मूॅंह कर बईरी रहि जाय रे ।
20/
ठग-जग गिंजरत भसकोले चारोमूडा,
बने ताड लेबे झन आॅंखी भरमाय रे ।
सावचेत रहिबे उघार आॅंखी कान बने,
अलकरहा धरे हे मनखे ला बाय रे ।
बडका बडवना सून बा तमे तंय झन आबे,
सीरजम मनखे बडोना न बताय रे ।
मनखे चिन्हें में कहॅू चूक झन होय कभ,
आगू पाछू गुन लेबे बात फोरियाय रे ।
21/
गुनिया असन ताड लेथे तोर आॅंखी हर,
सुख-दुख सिलना उधेड तंही पाय रे ।
आरूगहाॅसी के रंग घोर के तंय मनखे के,
परिया जिनगी सतरंग लहराय रे ।
मरहा मरे परे परेटहा सुख के साध,
उम्हिया के जिनगी के लहर लगाय रे ।
भले झन माने गुन, फेर तंही तुन-तुन,
लाग-नता लाज-बात सब गंठियाय रे ।
22/
करू-कसा टोर्रठ नता के हितवारी कर,
आगू पाछू गुन के तंहीच गुर नाय रे ।
अजम सकय न कोनो रीत ला मया के तोर,
अदिरीस फेर तोर उदीम जनाय रे ।
बिनछोर सपना उडात मूडाछाड नर,
बाॅंहधर लान तंहीच भूंईया मडाय रे ।
ताप मे बेरा के हंें झंवाय तोर अंतस हा,
रोज बिहाने सुरूज ला जल चढाय रे ।
23/
गाॅंव के पता न तोर ठाॅंव के ठिकाना कहॅू,

मयापाती सबो तोर नाव के भेजाय रे ।

ब्यारा बारी भर्री खार, खेत न तो घर-द्वार,

सबो तोर फेर नइ नाव हे लिखाय रे ।

सब नता सब लाग, बंधावय तोरे पाग,

जग झिनभंगुरा बनत भर ताय रे ।

कोनो सुनत हे तोर मया घोरे कलकूत,

कोनो आसरा धरे अधर ओधियाय रे ।

24/

बिपतघरी तंय बीरता के बीजबोनी करे,

हार खाये मनखे ला तंहीच जियाय रे ।

जीत के सवांगे होती बना डारे डंडा तयं,

मनखे गरब तहीं धजा फहराय रे ।

तन के अपन तॅंय सरोय सब गीत गारी,

जग-भल करत उदीम ओरियाय रे ।

पर के करत किरवार मारे मन तंही,

कोनो पतियाय चाहे झन पतियाय रे ।

25/

हिरदे मरमठाॅंव छू के मया बरसईया ।

दुख में झंवाय ला मया में नहवाय रे ।

भावपिया ला तउल , होती अपन पउल,

जेन रंग पिया भाय उही रंग जाय रे ।

गोठ में अपनपन घोर के चिभोर डरे,

एकमई करे सब तंही अगुवाय रे ।

सरग के साध धरे आॅंखी ला अंताज डरे,

असक के ठेंगा बन तहीं पछूवाय रे ।

26/

जावत पिया ला परदेस देख बिरहीन,

बरसत आॅंसू जीव तोर दहकाय रे ।

मन के बियाकूल गुनान गंठरी में बाॅंध,

मन न बोधाय फेर घर चिकनाय रे ।

सेजरी में फूल के बोवाय काॅंटा गड-गड,

मति-गति चेत-बुध सब ला हराय रे ।

दुनिया के गनित गुनान कर घुना खात,

जीभिया पिया के नाव अहोरात गाय रे ।

27/

छेंक राखे आॅंखीरूॅंधना में मनबसिया ला,

मूहरन झूल-झूल आसरा बंधाय रे ।

तिरिया के मोल हा तिरिन में कहाॅं हे गडी,

सुख तो पिया के संग गाॅंठ हे जोराय रे ।

तन ला चरावै नता-गोतादल रॅंउदत ,

मन के हन्सा ला कोन चारा चरवाय रे ।

जगबंधना के ढंग, मनबोधना के संग,

छईहा बन रेंगें दुख हर न जनाय रे ।

28/

रेंगत-रेंगत कोन मूडा जात जिनगानी,

जाने नहीं खूटाॅं बाॅंधे दंउरी फंदाय रे ।

रेंगत हे दिनरात, पीरा दुख सिहरात,

कहॅंू अभरै न वह बाठ रेंगे हाय रे ।

ढेला कस घुर जाय, मनेमन चुर जाय,

अगम के गोठ कोन जाने जनवाय रे ।

आसजोरे लागनता, बउरे अपन सता,

संग धरे सब सुख सुभीता सधाय रे ।

29/

दाई-ददा फूलभार, पाल-पोंस के तियार,

करके पथरा छाती लगन धराय रे ।

एक-एक भांवर ले, जुग जोडीजांवर ले,

छूट जाय माय मइके बिधना लिखाय रे ।

फाटे बाप-दाई छाती, चलो कहय बराती,

मुरदा निकाले कस रोदना रोवय रे ।

मया व दुलार धरे, होती ला निसार करे,

पग डारै ससुरे जगत सिरजाय रे ।

30/

पीरा के उपर हाॅंस, हेरत बेरा के फाॅंस,

रासगुनमेली कर सुख सोरियाय रे ।

सास-ननदी के गारी, बनाये कान केे बारी,

आॅसू भर आॅंखीओरिया ले टपकाय रे ।

मईके के उटका ला, जहर के घुटका ला,

पीयत पीरा ला मुॅंह सीले रहि जाय रे ।

31/

मनूस बनाके ओडहर दे बरमदेव,

भेजिस भूईया नर ला बूता बताय रे ।

सीरजे पोंसे के संग, रंग जाबे जगरंग,

करबे जा मनखे जेन तोला सुहाय रे ।

सुन्ना बाठ रेंगे बर, तिरिया ला संग कर,

बात कही गगरी में सगरी समाय रे ।

संग-संग रेंगही ये, चाह तिहां लेगही ये,

बिलमे ले बिलमही बेरिया पहाय रे ।

32/

कहे लकछरहा बरमदेव के कर गोठ,

मनखे भूतल आगे बिगन भंजाये रे ।

बनबाठ रेंगत रेंगत कहे तिरिया ला,

फरफूल चिख के गुनतवा बताय रे ।

नीक-खीख जिनीस सेवाद लेत तिरियन,

नाव धर गुन जान मीठ ला खवाय रे ।

सबो नाव ओकरे धरे चलत हे जग में,

देखे इतिहास जेन नहीं पतियाय रे ।

33/

कमबुध पेटपोंसू डरेलहा डरईया,

बनमानूस रकरकी भर बुताय रे ।

तिरिया के मति हा सुभउनी के गति देख,

सृस्टिसीरजन जाने धुन पिकियाय रे ।

एकठन बिजहा एकक रूख होथे जान,

अपन सोधे ला जन-जन ला जनाय रे ।

परभल अंवतर, पर बर फूल फर,

परभल संभर उझर के देखाय रे ।

34/

मनुसान बढती के ओरी ला लहूट देख

सबमें तिया के करमईती हे समाय रे ।

देबी कस पूजत रहिस एकजुग हर,

अपने असन जीव ला जब बियाय रे ।

मनखे के जात गढ, बिमता के संग लड,

मनुखईती के तिय धजा फहराय रे ।

मनखे के मन में तिरिया मया पीका फोरे,

मनखे ला तिरिया हा जिये ला सिखाय रे ।

35/

कोड-खन भूंईया ला, गुन बाॅंट गुंईया ला,

गिंजरन्ता मनखे किसानी थिरवाय रे ।

बीजा के चिन्हार कर, माटी मरकी में भर,

चिन्हा दे आने आने, बीजहा बंचाय रे ।

गिंजरत मनखे ला बिलमें के थेभा दिये,

तिरिया धारनी तब ले बूता जिहाय रे ।

बीजा बोंय पानी करे, सिखोये किसानी करे,

अपन छंईहा बचाय रूॅंधना रूॅंधाय रे ।

36/

तिरिया गरन्थ गढे, ना धरमपंथ गढे,

मनूस के अहमईती के सब बाय रे ।

तिरिया हा गढतिस धरम गरन्थ एक्को,

धरम जम्मो देतिस एक में समाय रे ।

अलग-बिलग बाठ, गढथे मनूस पाठ,

तभे तो कोरी-कोरी धरम उफलाय रे ।

दसकोरी जीयत धरम हावय भूंईया में,

झींकातानी में सबके जीव भर जाय रे ।

37/

गढ के घर दुआर, चारोमूडा भांडी मार,

छेंके बर होती तोर रूधंना बंधाय रे ।

घर राख छेना थाप, सेवा कर भाई-बाप,

घरबूता में पेराय लईका खेलाय रे ।

घरघूंदिया में छंेक, पूरोवय अपन टेक,

तिया मन जाने बिन अपन चलाय रे ।

कतको सौ साल चारकोठ छेक राख कर,

बूधबल धार ला देईन भोथवाय रे ।

38/

कोन गढे हावय सीख, कभू छुआ कभू नीक,

तोर नीकता अगीनपरछो देवाय रे ।

नर संग चले बर, आधा बल आधा डर,

कतका तंय अपन अंतस ला पोठाय रे ।

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