Wednesday, 17 May 2023

(१)कृष्ण भजन पुस्तक पांडुलिपि१-२५ तक

(१)कृष्ण भजन पुस्तक पांडुलिपि
१-२५ तक
१/
हे गोकुल के ग्वाला (सारछंद दसपदी)
गोपी-ग्वाला गउरखवाला, नटवर नैनउजाला।
धेनुचरैया दूधदुहैया, लउठी-खुमरी वाला।।
कहूँ बँधैया कहूँ धँधैया,गगरीफोर भगैया।
उधममचैया खेलरचैया, सुकुवाउवत जगैया।।
तालाबेली सखीसहेली, संगमचुलुक बढ़ैया।।
चीरचुरैया कदमचढ़ैया, ग्वालिन पाठपढ़ैया ।
उखलबंँधैया लाहोलेवैया, सुंदरकिशन दँवैया।।
इन्द्रहरैया गरबमिटैया, गोवर्धन उपकैया।।
कृष्णकन्हैया रधियासैंया, परमानंदसिरजैया।
भक्तिजगैया मोहमिटैया,
बंधनजगतकटैया।
मदनगुपाला रूपनिराला, प्रियतम नवलकिशोरी।
रसबरसैया मनहरसैया, गोकुल ग्वालिनगोरी।।
बेनुबजैया नींदउड़ैया, कुंजलता बनमाली।
नाचनचैया रासरचैया, पबरितपरम ओदाली।।
दाऊभैया नागनथैया, कालीदाह कुदैया।।
माथासाजू भुजबंदबाजू, पैजन पाँवभँदैया।।
मुकुटसजैया तिलकलगैया, गर बैजंतीमाला।
पापभरे हौं सरनपरे हौं, हे गोकुल के ग्वाला।।
बड़ेलड़ैया चक्रचलैया, अर्जुन रथहाँकैया।
शोभामोहन अउ भटकै झन, भवदहराबुलकैया।
शोभामोहन



२/
मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट


नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।
मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।।
चुन्दी में छटके जलबुँदियन,
मोती चटके असन जनात।
पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।
नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय।
मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।
गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात।
चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।
पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल।
बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,
लाली पिंउरी लटकन झूल।।
मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात।
काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।
लुगरा-पटुका लटकत फुँदना,
रगरग ले मन चैन चुरात।
हवय तिहार मनावत आँखी,
दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।
फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात।
रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन,
भुनन भुनन भौंरा मन गात।।
डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।
कन्हिया लटकत करधनिया में,
जड़े जवाहर हीरा लाल।।
नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।
ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।
खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।
मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।।
झनक झनक झन पैजन बाजत,
खनन खनन चूरी खनकात।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया,
फरर फरर अँचरा फहरात।।
मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।
चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।।
रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात।
फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।।
आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।
पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।।
रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट।
रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।।
शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार।
मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।।

शोभामोहन




३/कृष्ण नाम गुन करनी सुमिरन

(चौपाई छंद)

जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
तीनो तिलिक गुसैया जयजय।।

गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

इन्दर तापनवैया जयजय।।
माखन लूटखवैया जयजय।
अंँगुरी छत्रछवैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

चंदनतिलक लगैया जयजय।
पाग पिरितपगैया जयजय।।
अंतस भावजगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदय सहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय।
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

कालीनागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

कृष्णा लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
जय सारथी बनैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

सुंदर सृष्टिसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

जयजय चक्रचलैया जयजय।
छाती दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगतपलैया जयजय।।

रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़ेलड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

कृष्ण लीला घनाक्षरी 

घनश्याम रूपधाम कोटिकाम धर नाम,
अनगिन खेल ब्रजभूमि में दिखात है ।
इतरात छिप जातमुसकात मुच मुच,
नंद जसुदा अँगना सुख बरसात है।।
दँउरत हँफरत भँवरत ब्रज भर,
नखरा देखात गोप ग्वाल ला रिझात है।
तनसूखा मनसूखा धर के दही चोरात,
चोरहा ले घलो महाचोरहा कहात हे,
रतजाग अनुराग धनभाग बिरिज के,
देख देख सरग देवता ललचात है॥
नहवात खोरवात फूल हरि ला चढ़ात,
बिंजन बनात हे कुलक के जेंवात हे।।
प्रीत घोर हाथ जोर रेंगत जे थोर थोर,
तेने जीव जग ले सहज दुरिहात हे।
वो चरण वो शरण रहि के शोभामोहन,
सतलोक के सुख ला धरती में पात हे।। 

शोभामोहन
०५/०५/२०२२

४/ताल खेमटा रामजन्म उत्सव

अंबर से फूल बरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

प्रसूति पीर जब आये।
वसुदेवा घबराये।
कंपित दंपति डर से।।
अंबर से फूल बरसे।।

टूटा बंदीगृह ताला।
छा गया उजाला।।
मूर्छित प्रहरी प्रहर से।
अंबर से फूल बरसे।।

पिता ले तभी लाला।
सोलहों कला वाला।।
निकले बंदीघर से।।
अंबर से फूल बरसे।।

ऐसी प्रभु की माया।
शेषनाग की छाया।।
रिमझिम जलधर बरसे।।
अंबर से फूल बरसे।।

चरण चूमने यमुना।
बढ़ गई कई गुना।।
पाँव बढ़ा तब हरि परसे।।
अंबर से फूल बरसे।।

विपदा में मित्र आये।
देख गले से लगाये।।
नंदरायजी अति हरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

जन्मे हैं नंदलाला,
यदुकुल उजाला।।
जिसके लिए मन तरसे।
अंबर से फूल बरसे।।

दर्शन को देव आये,
मंगल तिय गाये।।
धन्य हुऐ दर्शन भर से।
अंबर से फूल बरसे।।

यशुमति अति मुदित माई,
जब बजत बधाई।।
नैन बहा के निर्झर से।
अंबर से फूल बरसे।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०९/२०२२
शुभस्थान-वृंदावन




५/
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के

भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

ये जगत में लाग नत्ता कोन हे।
बड़ अकेल्ला ये परेवना सोन हे।।
चाकरी अब छोड़ धन अउ धाम के।।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

डार रटहा बने कुँदरा तोर हे।
साँवरे के हाथ जिनगी डोर हे।।
झन बहाना कर तैं बूता काम के।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।। 

शोभामोहन 


६/
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे

हरि के बनाय देह,
हरि के जगत गेह।
हरि के पदारथ ला हरि ला चढ़ाय रे।
हरि जगसुख सोती,
हरिच के जीव जोती।
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे।
हरि ले मिलन बर,
भज सुमिरन कर।
हरिच के अंश जीव हरि में समाय रे।
एको छिन गॅँवा झन,
मया गढ़ा मने मन।
जग जनमे मनुख चोला जब पाय रे। 

शोभामोहन


७/
हरि नाम हस बिसराये रे 


तोर हाड़ा हपट के जोरे सब चीज बस,
नाशवान तभो ले हवस बइहाय रे।
गजब डउल कर फुनगी मा पहुँचेस,
खसले के डर फेर जीव में समाय रे।
रचेस सजन संग मिलन जुलन खेल,
मिलन के संग फेर बिरहा लिखाय रे।
चटक-मटक चरदिनिया जिनिस बर,
ओंड़ा दिये हरि नाम हस बिसराये रे। 

शोभामोहन

८/

छुतहा चेत रामधन पाय रे

दशरथ कस नहीं कभू प्रभु प्रीत करे,
कौशिल्या असन नहीं संजम जगाय रे।।
कैकई कस कलंक लिये ना अपन मूड़,
सीता कस नहीं पति धरम निभाय रे।
बंधवा भरत कस राजा नहीं बन सके,
लखन असन नहीं सेवा मन लाय रे।
भजन करे ना कभू सजन मनाये बर,
कइसे छुतहा चेत रामधन पाय रे।।

शोभामोहन

९/

मोहना तोर मुरली जादू भरे 

मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।
मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।। 

धुन सुन मुरली बछरु गैया चरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।। 

सुन रुखराई मगन फहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

मुरली के धुन बिन कल नइ परे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

सुन जमुनाजल लहर लहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

ग्वालिन के मुरली करेजा कतरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।। 

शोभामोहन

१०/

बिरिज अंजोर बिन

सुन्ना गली अउ गाँव, सुन्ना हे कदम छाँव,
सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन।
सुन्ना जमुना के घाट, सुन्ना हे बजार हाट,
सुन्ना-सुन्ना नैन रैन नंद के किशोर बिन।
सुन्ना अमरइया हे, सुन्ना सेज शय्या हे।
सुन्ना हे बिरिज बन नंदलाला सोर बिन।
सुन्ना कोठा चुप धेनु, ब्रज बिन ध्वनि बेनु,
सुन्ना संझा मँझनिया सुन्ना अउ भोर हे।। 

शोभामोहन

११/
हरि बोल रसना

माया के नगरिया फोकट झन फँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

मोह ममता के गरी नरी झन कस ना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

अँगरी उँचा कहूँ न कहूँ झन हँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

मन मा सुरुज उवा घरिया के दसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

जतका दिन लिखाये इहाँ तोर बसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

शोभामोहन भेड़ी धसान झन धसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।

शोभामोहन


१२/
राग हिंडोल वसंत

उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।
नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंगत नंगत सब गोरी।।

बचत बचत दँउड़त हे गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।
गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।

बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग रंजक बोरी।
बुढ़ुवा बाल जवान जमोझन, लानत हे रंग घोरी।।

धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।
शोभामोहन के गोसैया, करत जबर बरजोरी।।

शोभामोहन
१५/०२/२०२२

१३/

*सिंगार फगुनवा हे*

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*

मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,
कदकाछनी रंगचटक फगुनवा,
बैन-नैन के मटक फगुनवा,
मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

माथा खउरा चंदन फगुनवा,
पागा पागी बदन फगुनवा,
नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,
मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।
गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।
झुमका झूल मलंग फगुनवा।।
रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।
भुँइया देत अलाप फगुनवा।।
पिया पिया के जाप फगुनवा।।
रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।
शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।

शोभामोहन


१४/
सेम्हर दसना दसे तेमा सुते ललना

सोनहा महलिया के सोनहा अटरिया मा,
सोनहा मियार मा बँधाये हावै पलना।
सोनहा थाम्हन खंभा सोनहा जबर दासा,
सोनहा ड़ाँड़ी पटनी पाटे सोन बल ना।
सोनहा सँकरी कड़ी दिये हे झुलाये बर,
सोनहा बेलबूटा किनारी छेंका छलना।
सोनजड़ी फुँदना के दसे छतरँगिया हे,
सेम्हर दसना दसे तेमा सुते ललना।
सोनहा बेरा घड़ी हे सोनहा हे अवसर,
सोनहा चँवर दाई झालत हे झलना।
सोनहा सुअवसर पाये तै शोभामोहन,
नाम गुन ध्यान धरे मन झन हल ना।।

शोभामोहन


१५/

फूल झेला नंदलाल,
ब्रज नैन उजियाल,
फूल के हिंडोलना दाई सुतात ललना ।
दुलरुवा गोप ग्वाल,
देख होत हें निहाल,
खेलत पटक गोड़ झुलना उझलना।
फूल के चँवर झाल,
जसुदा छूवत भाल,
गम नइ पात सुख दिन रात ढ़लना।
लीला करे बर बाल,
दुष्टन के बन काल,
शोभामोहन के स्वामी आये हे भूतल ना ।

शोभामोहन

१६/

अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी, मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना, निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती, तोर जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

आनी बानी, बाट बेंझानी,
गोड़ अड़ानी, झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

साध जगा मन, शोभामोहन, अधम उधारन,अरज लगाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।

शोभामोहन


१७/जनमे बनवारी
प्रभावती चर्चरीछंद
मणि जड़ाय सोन थार,दियना रिगबिग मँझार।
मंगल करसा सँवार, धर धर नर नारी।
मन हुलास बहत धार, बोलत जय बार बार,
रंग रंग के कर सिंगार, खड़े हें दुवारी।।
घंटा घन घनन घोर, झालर झन झन झकोर,
सुन भीजत पोर पोर, गदगद हिय भारी।।
दमउ दफड़ा दमोर, छन्न छन्न छन्न शोर,
भँवरत माते विभोर, कुलक जात वारी।।
चूमत निच्चट निहार, गिंधिया गिंधिया दुलार,
शोभामोहन अधार, जनमे बनवारी।

शोभामोहन श्रीवास्तव
२७/०६/२०२१

१८/
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला

अठतल्लागढ़ महल अटारी,
ईश चलात अटाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

पहिलीतल्ला रूप विषय के,
मोती अउ मणिमाला।
दूसर तल्ला धन दौलत के,
छाये मेकरजाला।।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

तीसरतल्ला पद गरिमा दे,
गोभत गरब के भाला।।
चौथातल्ला सुखप्रद अन्नो,
सुख बगराने वाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

पंचमतल्ला निर्मल हिरदे,
हे बरसात सुधा ला।
छट्टमतल्ला राखे रिधिसिधि,
जोग भठाये चाला।
बइठे ऊपर तल्ला माया रचत निराला ।

सप्तमतल्ला दिव्यज्योति के,
चारोखुँट उजियाला।
शोभामोहन आठवाँतल्ला,
जाये कर जोरा ला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।

शोभामोहन

१९/
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ

गर बनमाल सजैया खोजौं ।
चंदन तिलक लगैया खोजौं।।

दसमत फूल खोचैया खोजौं ।
महर महर ममहैया खोजौं ।

बन बन धेनु चरैया खोजौं।
मधुबन रास रचैया खोजौं ।।

गगरी फोर लुकैया खोजौं ।
गोपी नाच नचैया खोजौं ।।

ग्वालिन चीर चुरैया खोजौं ।
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ।।

बंशी मधुर बजैया खोजौं ।
पाँख मँजूर लगैया खोजौं।

२०/
करत हवय चुलकाय असन

हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन ।

तोर बिगन ए कंचन काया
रहय पिया अइलाय असन ।

सब पीरा के मान होत हे ,
लागत नही पिराय असन ।

हाथ धरे हस जब्बर तँय हा ,
दुनिया करय गिराय असन ।।

हाँसे थूँके चाल चलन ला
होवत जमो थिराय असन ।

मन के भाव मा पाला परगे ।
होगे चेत हराय असन ।

कोंवर भाव मा करा गिरत हे,
छाती लगत चिराय असन ।

चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुँचत बताय असन।

सेंदुर लगे बिहिनिया सँझा,
करत हवँय चुलकाय असन।

नरी रुँधागे अब का बोलँव,
सुध करत हुरियाय असन।

मन में संसो सँचरत सरभर
जिनगी सासँ हराय असन ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

२१
तोर बिन करिया।
(जयकारी छंद)


अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया।

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे।
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।।
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया।

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया।

शोभामोहन

२२/
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।।
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

रहि रहि बादर बिजली चमके।
मन डर्राये बिगन सजन के।।
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

मन चुलहा मा धधकत आगी ।
आके जीव कर दे बड़भागी।।
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

शोभामोहन
२२/०२/१७
झीट पाटन
२३/
कइसे तोर बिन रहौं बतादे रसिया

कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पिया सुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।।
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।।
काला करलई कहौं मनबसिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना।
उड़त अगास देख पंछी परेवना।।
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

शोभामोहन

२४/


होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।।
जानथस का बता मोर तो बाली उमर,
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे।

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं।
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया।
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।

कइसे काला कहौं रात के बात ला,
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन,
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै,
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन,
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर,
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले,
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।

शोभामोहन

२५/
आँखी खोजत माखनचोर (जयकारी छंद)

गुड़ी करत हे चारी मोर।
पूछत हे महतारी मोर।।
घेरीबेरी ओखी जोर,
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।।
दिखत नइ हे ओकर छाँव।
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।।
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन


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