दे दे अपन भगति सरकार ।
नवा नवा लिख भजन सुनावौं, अपन मति अनुसार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
नवा नवा धुन मंगल गावौं, तोर नवो अवतार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
भोगराग बर नवा नवा नित, राँधौं प्रभु जेवनार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
नवा-नवा लीला सुन-सुन प्रभु, कुलकौं चित्त उतार ।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
गीता शास्त्र उपनिषद गुनदल, गावत बारम्बार ।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तहीं वेदमणि जगत शिरोमणि, सचराचर भर्तार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
फूल चढ़ावौं मयाभाव के, आप करौ स्वीकार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तोर छोड़ अउ कोनो नइ हे, जग में कहूँ हमार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
सब अपराध क्षमा करथस प्रभु, तैं हस अबड़ उदार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तेकर सेती तोर सरन में, बइठे हौं रतमार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तोर जीव अऔं तोर सरन हौं, सब अपराध बिसार ।
शोभामोहन निचट अधम हे, कर दे भवदह पार ।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
मनहरण घनाक्षरी छन्द
झूलत झुलनिया में झबला पहिरे हरि,
देख देख लीला देव फूल बरसात हें।
आनंद बाढ़त हे दरस कर लाल जू के,
मयाबूड़े नैन अउ आँसू चुचवात हें।
मंगलगीत गावत सरस्वती पार्वती,
बदल के भेस हरि दरसन पात हें ।
दरसन पाये बर महल दुवरिया में,
भोलेनाथ उसर पुसर मेंडरात हें ।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Saturday, 23 August 2025
Monday, 18 August 2025
दो छत्तीसगढ़ी नवा लोकगीत
लोकगीत
दुलहा बने राजा बेटा कृपा जगदीश हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा दूल्हादेव असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा दाई दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा ददा दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा काकी दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा कका दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा बड़ी दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा बड़ा दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
बिहाव पाछू नदिया पूजा मंगलगीत
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
दुलरू जोरके ठाढ़े हे दसो अँगुरिया।
दुलही हाथजोरे हे अँचरा सँघरिया।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
दुलरू दसाये कद पीतमरी पटुका ।
दुलही दसाये गंगा मैया मोरे लटुका ।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
अटलसोहाग सुख माँगत दुल्हनिया।
अन-धन मंगल बर देदौ महारनिया।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
दुलहा बने राजा बेटा कृपा जगदीश हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा दूल्हादेव असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा दाई दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा ददा दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा काकी दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा कका दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा बड़ी दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
दुलहा बने राजा बेटा बड़ा दै असीस हो।
जुग जुग जियै जोड़ी सहस बरीस हो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
बिहाव पाछू नदिया पूजा मंगलगीत
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
दुलरू जोरके ठाढ़े हे दसो अँगुरिया।
दुलही हाथजोरे हे अँचरा सँघरिया।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
दुलरू दसाये कद पीतमरी पटुका ।
दुलही दसाये गंगा मैया मोरे लटुका ।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
अटलसोहाग सुख माँगत दुल्हनिया।
अन-धन मंगल बर देदौ महारनिया।।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।
भर दौ असीद ले ओली जुगल माई मोर ।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
Monday, 11 August 2025
जय जय भारत रक्षक जवान
जय जय भारत रक्षक जवान।
जय जय सेना के शक्तिमान।।
जब तोप ड्रोन हे तुँम्हर हाथ।
आकाश मिसाईल सँग साथ।।
जाके नभ छाती चीर फाड़।
धुर्रा उड़ाव बैरी पछाड़ ।।
दुष्ट न के हरथौ तुरत प्रान।
जय जय भारत रक्षक जवान।
जय जय सेना के शक्तिमान।।
हे अंगद जइसे तुँहर पाँव ।
हे राम लक्षमन तुँहर नाव।।
रखवारा भारत शहर गाँव।।
दुश्मन थर्रावैं तुँहर दाँव ।।
जय जय सेना के शक्तिमान।।
जब तोप ड्रोन हे तुँम्हर हाथ।
आकाश मिसाईल सँग साथ।।
जाके नभ छाती चीर फाड़।
धुर्रा उड़ाव बैरी पछाड़ ।।
दुष्ट न के हरथौ तुरत प्रान।
जय जय भारत रक्षक जवान।
जय जय सेना के शक्तिमान।।
हे अंगद जइसे तुँहर पाँव ।
हे राम लक्षमन तुँहर नाव।।
रखवारा भारत शहर गाँव।।
दुश्मन थर्रावैं तुँहर दाँव ।।
Thursday, 7 August 2025
भारतमाता जय जय जोहार ।
आकाशवाणी ले प्रसारित रचना
भारतमाता जय जय जोहार ।
हे दिब्य भब्य तोर अंग अंग ।
अँचरा में शोभत सातो रंग ।।
लहरावत लहरा संग संग ।।
रहिवासी जीवदल तोर भार।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
हरियर पिंयर तोर खेत खार।
सरभर लामे अउ नार ब्यार ।।
तहीं पोसत हस सबला संभार।
तोर पँइया लागौं बार बार।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
जगमंगल बर सब तोर काम।।
जनमाय तहीं हर कृष्ण राम।
पबरित करे बर धराधाम।।
गंगा जमुना बोहवाय धार।
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार।।
तोर बटलोही में भरे अन्न।
करथे सबला संतुस प्रसन्न।।
तोर कोरा कंकर अउ रतन्न।।
लइका पिचका गुनधर गँवार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
भारतमाता जय जय जोहार।।
लछमीदाई कस तोर पाँव।
अउ सरसतिया कस गुन सुभाव।।
चन्दा कस जूड़ जूड़ मयाछाँव ।
काबा कसके रखथस पोटार ।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
भारतमाता जय जय जोहार।।
नदिया सरगी करधन सिंगार ।
डोंगर झरना जंगल अधार ।।
मैं गोहनावत हौं हाँक पार।।
कोरा रखथस अपगुन बिसार ।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
कोनो नइ पावै तोर पार ।
नइ करजा ला पावै उतार ।।
तैं हस पबित्र तैं हस उदार ।
हावय तोर महिमा गुन अपार।
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
07/08/2025
तोर फुलवारी सबरंग फूल ।
चंदन के जइसे तोर धूल ।।
जम्मो सुख के अस तहीं मूल।। जम्मो जीव रखथस फूलभार।
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
धोवत हे समुन्दर तोर पाँव।
जगमग जगमग तोर शहर गाँव।।
गँजमिंज गँजमिंज तोर ठाँव-ठाँव ।
रखथस पिलवा दुख बिपत टार ।
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
बिख पीके तैं अमरित चिखाय ।
तैं वेद उपनिषद ला लिखाय ।।
जगसुःख मड़ौना ला मड़ाय ।।
देये निर्मल पबरित बिचार
तैं वेद उपनिषद ला लिखाय ।।
जगसुःख मड़ौना ला मड़ाय ।।
देये निर्मल पबरित बिचार
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
गिरिराजा हे तोर रखवार।
भारतमाता जय जय जोहार।।
भारतमाता जय जय जोहार ।।
उबार
मार
सार
सिंगार
परिवार।
Tuesday, 5 August 2025
तन्वी छन्द (गोड़तरी में, अब अधरिज ला, राख दया कर प्रभु गिरधारी)
तन्वी छन्द (वर्णिक 24 वर्ण) पिंगल सूत्र : भ त न स भ भ न य
लालल लाला, लललल ललला, लालल लालल लललल लाला
लालल लाला, लललल ललला, लालल लालल लललल लाला
गोड़तरी में, अब अधरिज ला, राख दया कर प्रभु गिरधारी ।।
हाथ बढ़ा तैं, अउ पत रख ले, जीव लगै जग गरगस भारी।
देखत रद्दा, मन गदकत हे, जोहत-जोहत खसलत बेरा ।
देखन तोला, मन तलफत हे, छूटत-टूटत अउ जग घेरा।। दोस भरे हौं, निचट अधम हौं, नाथ अपावन भटकत नारी।
तोर कती मैं, कब पग धरहूँ, पार लगे यह भव दह भारी।।
गोड़तरी में, अब अधरिज ला, राख दया कर प्रभु गिरधारी ।।
फूल दसे हे, मन-पुर कुरिया, साँसत में जिउ अधर बिचारी।।
देत हवै ये, मन परकम्मा, नैन डरे पथ अनचिन्हारी।।
गोड़तरी में, अब अधरिज ला, राख दया कर प्रभु गिरधारी ।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन ननद
माधवी सवैया (पहावत बेर बिना हरिनाम
माधवी सवैया (वर्णिक 24 वर्ण)
लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगागा
पहावत बेर बिना हरिनाम, बता कइसे तरबे भव चोला ।
धरे बिन राम बनै नइ काम, सकै नइ तार कहूँ अउ तोला।।
सबोसुख रास, बने बिन दास, दरिद्र रही यह मानुस चोला।।
नहीं बिसराम मिले बिन राम,नहीं अटका चटका मन मोला।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगागा
पहावत बेर बिना हरिनाम, बता कइसे तरबे भव चोला ।
धरे बिन राम बनै नइ काम, सकै नइ तार कहूँ अउ तोला।।
सबोसुख रास, बने बिन दास, दरिद्र रही यह मानुस चोला।।
नहीं बिसराम मिले बिन राम,नहीं अटका चटका मन मोला।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
सर्वगामी सवैयागौरी न गौरा न बाँटी न भौंरा, तरी
सर्वगामी सवैया
गौरी न गौरा न बाँटी न भौंरा, तरी छाँव औंरा खवाई न जाने।
देवीचढ़ौना मनौतीमड़ौना अढ़ोनाबढ़ोना चढ़ाई न जानै।
धौंरा न सौंरा अमेरालमेरा पठेराफुला पाट पाई न जानै।
खोली धँधाये छँदाये तिमाला नहीं गाँव कोती जवाई न जानै।
खोंखी थकासी रोवासी छकासी बिटासी बियासी कराई न जाने।
भारा तियारा अजारा पसेरी परोसा हजाई पजाई न जानै।
सवारी मुवारी दुवारी छेवारी उन्हारी सियारी
मड़ाई न जानै।
खोली धँधाये छँदाये तिमाला नहीं गाँव कोती जवाई न जानै।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०८/०९/२०२३
गौरी न गौरा न बाँटी न भौंरा, तरी छाँव औंरा खवाई न जाने।
देवीचढ़ौना मनौतीमड़ौना अढ़ोनाबढ़ोना चढ़ाई न जानै।
धौंरा न सौंरा अमेरालमेरा पठेराफुला पाट पाई न जानै।
खोली धँधाये छँदाये तिमाला नहीं गाँव कोती जवाई न जानै।
खोंखी थकासी रोवासी छकासी बिटासी बियासी कराई न जाने।
भारा तियारा अजारा पसेरी परोसा हजाई पजाई न जानै।
सवारी मुवारी दुवारी छेवारी उन्हारी सियारी
मड़ाई न जानै।
खोली धँधाये छँदाये तिमाला नहीं गाँव कोती जवाई न जानै।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०८/०९/२०२३
मंगलमय शुभ बार, जोहारौं आवौ पहुना।
पहुना सत्कार गीत
जोहारौं आवौ पहुना
मंगलमय शुभ बार, जोहारौं आवौ पहुना।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
मंगलकरसा द्वार मढ़ावौं, मंगलटीका माथ लगावौं।।
पहिरावौं फूलहार, जोहारौं आवौ पहुना।।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
आरुग जल ले पाँव पखारौं, आरती कर करके सत्कारौं।।
ऊँच आसन बइठार, जोहारौं आवौ पहुना।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
फूलकसिया लोटा अउ थारी,
देवँव कलेवा कर सत्कारी।
बारम्बार जोहार, जोहारौं आवौ पहुना।।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२६/०६/२०१९
जोहारौं आवौ पहुना
मंगलमय शुभ बार, जोहारौं आवौ पहुना।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
मंगलकरसा द्वार मढ़ावौं, मंगलटीका माथ लगावौं।।
पहिरावौं फूलहार, जोहारौं आवौ पहुना।।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
आरुग जल ले पाँव पखारौं, आरती कर करके सत्कारौं।।
ऊँच आसन बइठार, जोहारौं आवौ पहुना।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
फूलकसिया लोटा अउ थारी,
देवँव कलेवा कर सत्कारी।
बारम्बार जोहार, जोहारौं आवौ पहुना।।
धन धन भाग हमार, पधारौ आवौ पहुना।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२६/०६/२०१९
सोहर गीत धुन नरेंद्र मोदी जसगीत३/चंदा सुरुज फबे जस अगासे।
नरेंद्र मोदी जसगीत
३/
चंदा सुरुज फबे जस अगासे।
घर फबे कुल उजासे हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो ।।
मंदिर में फबे जस मुरतिया, दीया संग फबे बतिया हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
जइसे हरियर रंग फबे धरती।
अगास रंग नीलहा हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
फबे रूनझुन फरे फूले खेती, सजन घर बेटी हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
शोभामोहन ये असीदे देवै।
कुलदेवता देबी सदा सेवै हो।।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो
जगसेवा में जिनगी पहावैं।
सबो जगत उँकर गुन गावै हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
३/
चंदा सुरुज फबे जस अगासे।
घर फबे कुल उजासे हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो ।।
मंदिर में फबे जस मुरतिया, दीया संग फबे बतिया हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
जइसे हरियर रंग फबे धरती।
अगास रंग नीलहा हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
फबे रूनझुन फरे फूले खेती, सजन घर बेटी हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया बेटवा हो।
शोभामोहन ये असीदे देवै।
कुलदेवता देबी सदा सेवै हो।।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो
जगसेवा में जिनगी पहावैं।
सबो जगत उँकर गुन गावै हो।
राजगद्दी फबे मोदी महराज, भारत भुँइया के बेटवा हो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
बिदा गीत
बेटी जनमाये दाई दुख पीरा सहिके अउ,
परघर दियेस हँकार ओ।
बेटी जनमाये दाई दुख पीरा सहिके अउ,
परघर दियेस हँकार ओ।
बेटवा ला गैया बछरु घर दुवार दिये,
बाग बगइचा खेतखार ओ।।
बेटवा ला गैया बछरु घर दुवार दिये,
बाग बगइचा खेतखार ओ।।
मइके के डेहरी ला पाँव परे बर आथौं,
पूछे जब तीजा के तिहार ओ ।
मइके के डेहरी ला पाँव परे बर आथौं,
पूछे जब तीजा के तिहार ओ ।
करूभात खाके मीठ सुरता धरके जाथौं।
चउथ के करके फरहार ओ ।
बेरा बेरा में कभू ददा भाई ला भेज देबे,
मन ला बोधाये बर हमार ओ।
सुरता में ढूलत नयनजल झड़ी दाई,
परघर दियेस हँकार ओ।
बेटी जनमाये दाई दुख पीरा सहिके अउ,
परघर दियेस हँकार ओ।
बेटवा ला गैया बछरु घर दुवार दिये,
बाग बगइचा खेतखार ओ।।
बेटवा ला गैया बछरु घर दुवार दिये,
बाग बगइचा खेतखार ओ।।
मइके के डेहरी ला पाँव परे बर आथौं,
पूछे जब तीजा के तिहार ओ ।
मइके के डेहरी ला पाँव परे बर आथौं,
पूछे जब तीजा के तिहार ओ ।
करूभात खाके मीठ सुरता धरके जाथौं।
चउथ के करके फरहार ओ ।
बेरा बेरा में कभू ददा भाई ला भेज देबे,
मन ला बोधाये बर हमार ओ।
सुरता में ढूलत नयनजल झड़ी दाई,
दोहा :- मन के नार बिंयार।।
दोहा
अद्धर बिगन अधार के, कोन करै किरवार।
छछले बर रुख खोजथे, मन के नार बिंयार।।
जरै नौकरी चाकरी, जरै कुटुम परिवार।
अउ ये जम्मो जग जरै, जब जीव जरत हमार।।
ओलीभर पइसा धरे, मन नइ साध जगान।
धनधोगानी जोर के, झन रच खरही मान।
तोर नाम के काम हे, तोर धाम ले काम।
तोर बिगन बिरथा हवै, प्रान चेतना चाम।।
तोर बिगन का जीत अउ, तोर बिगन का हार।
तोर बिगन का सुखसजन, तोर बिगन संसार।।
गाँव गाँव नदिया फिरत, खोजत सागर बाट।
ठाँव ठाँव अंतस फिरत, उतरे बर हरिघाट।।
टेड़ेंगबेड़ेंग नदिया फिरत, एकदिन समुन्दर समाय।
त इसे कतको जीव फिरै, जा प्रभु सर्न थिराय।।
टिप-टिप ले भर तेल ला, कइना दीप जलाय।
पाके प्रियतम ला अपन, लहरलहर लहराया।।
तेलभरे दियना जला, जब करथे रतजाग।
तप कइना करथे कठिन,तब लहराथे भाग।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०७/०९/२०२३
अद्धर बिगन अधार के, कोन करै किरवार।
छछले बर रुख खोजथे, मन के नार बिंयार।।
जरै नौकरी चाकरी, जरै कुटुम परिवार।
अउ ये जम्मो जग जरै, जब जीव जरत हमार।।
ओलीभर पइसा धरे, मन नइ साध जगान।
धनधोगानी जोर के, झन रच खरही मान।
तोर नाम के काम हे, तोर धाम ले काम।
तोर बिगन बिरथा हवै, प्रान चेतना चाम।।
तोर बिगन का जीत अउ, तोर बिगन का हार।
तोर बिगन का सुखसजन, तोर बिगन संसार।।
गाँव गाँव नदिया फिरत, खोजत सागर बाट।
ठाँव ठाँव अंतस फिरत, उतरे बर हरिघाट।।
टेड़ेंगबेड़ेंग नदिया फिरत, एकदिन समुन्दर समाय।
त इसे कतको जीव फिरै, जा प्रभु सर्न थिराय।।
टिप-टिप ले भर तेल ला, कइना दीप जलाय।
पाके प्रियतम ला अपन, लहरलहर लहराया।।
तेलभरे दियना जला, जब करथे रतजाग।
तप कइना करथे कठिन,तब लहराथे भाग।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०७/०९/२०२३
सुंदरी हा सेंदुर सोहाग हो।
का माँगे सारीसखि का माँगे सरहज,
का माँगे सुंदरी सिंगार हो।
का माँगे बहिनीमाई डहरछेकौनी,
का माँगे माँ ओली पसार हो।
सोन माँगे सारीसखी चाँदी माँगे सरहज,
सुंदरी हा सेंदुर सोहाग हो।
नेग माँगे बहिनी माई डहरछेंकौनी,
मया माँगे माँ ओली पसार हो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०७ /०९ /२०२३
का माँगे सुंदरी सिंगार हो।
का माँगे बहिनीमाई डहरछेकौनी,
का माँगे माँ ओली पसार हो।
सोन माँगे सारीसखी चाँदी माँगे सरहज,
सुंदरी हा सेंदुर सोहाग हो।
नेग माँगे बहिनी माई डहरछेंकौनी,
मया माँगे माँ ओली पसार हो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०७ /०९ /२०२३
गुनधर संगति गुनधर करथे, हिनहर संगति हिनहा।
गुनधर संगति गुनधर करथे, हिनहर संगति हिनहा।
ठग्गू संगति ठग्गू करथे, गिनहा संगति गिनहा।।
नेता संगति पिछलग्गू कर, रहि बन जाथें तिनहा।
घिनहा संगति घिनहा करके, कारज करथें घिनहा।।
चोर चोरहा संगति करके, करथे चोरी हारी।
बैपारी बैपारी संग कर, करथे धन बढ़वारी।।
नारी संगत नर हर करथे, अउ नर संगत नारी।।
गुनललचहा गुनिक संगत कर, करथे ज्ञान सिंगारी।।
शोभामोहन
राजा बइठे राजसिंहासन, बाँभन बइठै पिढ़वा।
राजा बइठे राजसिंहासन, बाँभन बइठै पिढ़वा।
सेजरी सजन सजनिया बइठै, भुँइया बइठै डिंड़वा।।
बावा बइठै आसन चौंकी, संत सुजानिक गदिया।
पुछी झार भूमि कुकुर बइठै, चिखला बइठै बधिया।।
शोभामोहन
कलजुग खरावत हे लहन बतात
कलजुग खरावत हे लहन बतात
हरहा संग कपिला के होवत बिनास।
देखत बिधाता कलेचुप अउ हाँस।
कतको रपोटत तउनो दुच्छा जात ।
कलजुग खरावत हे लहन बतात
दुख ओंड़ा दे हे बिहिनिया साँझ।
सुख सोहर के कोरा परगे हे बाँझ।।
बंबरी बोंवैया मन आमा सोरियात।
छलत मनखे मगज सपना के जात।।
कलजुग खरावत हे लहन बतात
हरहा संग कपिला के होवत बिनास।
देखत बिधाता कलेचुप अउ हाँस।
कतको रपोटत तउनो दुच्छा जात ।
कलजुग खरावत हे लहन बतात
दुख ओंड़ा दे हे बिहिनिया साँझ।
सुख सोहर के कोरा परगे हे बाँझ।।
बंबरी बोंवैया मन आमा सोरियात।
छलत मनखे मगज सपना के जात।।
कलजुग खरावत हे लहन बतात
काल बता के तो नइ आवै
काल बता के तो नइ आवै
सबो मरे बर जनमे हावै।
काल बताके तो नइ आवै।।
आँखी बाँधे टोपा प्रानी ।
हे फँदाय चौरासी घानी।।
गिंजरत अँखमुन्दा मनमानी।।
जबर बात नइ होत गलानी।।
ठलहा बइठे आल्हा गावै।
काल बताके तो .....1/
जीव जगत के नता रुँधाये।
बिन डोरी-डाँवा छंदाये।।
बंधन बारिक अगम जनावै।
बिरला कोनो जाने पावै।।
बाँचे भेंड सरीख झपावैं।
काल बता के तो.....2/
शोभामोहन श्रीवास्तव
सबो मरे बर जनमे हावै।
काल बताके तो नइ आवै।।
आँखी बाँधे टोपा प्रानी ।
हे फँदाय चौरासी घानी।।
गिंजरत अँखमुन्दा मनमानी।।
जबर बात नइ होत गलानी।।
ठलहा बइठे आल्हा गावै।
काल बताके तो .....1/
जीव जगत के नता रुँधाये।
बिन डोरी-डाँवा छंदाये।।
बंधन बारिक अगम जनावै।
बिरला कोनो जाने पावै।।
बाँचे भेंड सरीख झपावैं।
काल बता के तो.....2/
शोभामोहन श्रीवास्तव
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
सेना में भेजेंव तोला ।
भरोसा हावय मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
तैं हर धरती महतारी।
के करबे सेवादारी ।।
दाई के देबे करजा उतार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
रखवार तैं जंगल झाड़ी ।
समुन्दर ऊँच पहाड़ी।।
चटकन के झन राखबे उधार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
धरके ध्वजा तिरंगा ।
लहराबे संगी संगा।।
करबे भुँइया के जय जयकार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
सेना में भेजेंव तोला ।
भरोसा हावय मोला ।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
तैं हर धरती महतारी।
के करबे सेवादारी ।।
दाई के देबे करजा उतार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
रखवार तैं जंगल झाड़ी ।
समुन्दर ऊँच पहाड़ी।।
चटकन के झन राखबे उधार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
धरके ध्वजा तिरंगा ।
लहराबे संगी संगा।।
करबे भुँइया के जय जयकार।।
आबे रे बेटा बैरी ला मार।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
घनाक्षरी छन्द (गबरू जवान चल) संशोधित
घनाक्षरी छन्द (गबरू जवान चल) संशोधित
१.
गबरू जवान चल, अस्त्र-शस्त्र तान चल ,
देश के मितान चल, भारत के शान चल।
बघवा समान चल, राखे देश आन चल ।
बीर के घरान चल, नापे आसमान चल,
फोरे मूड़ कान चल, बैरी ला सुतान चल,
चामुंडा जगान चल, तांडव दिखान चल,
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
झगरा मतान चल, करे घमासान चल।
जंगल वीरान चल, डोंगर उचान चल ।
चल बने ठान चल, गोड़ ला जमान चल
लहू ला बोहान चल, देश ला बढ़ान चल,
छाती जुड़वान चल, सुख दिन लान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
बनके तूफान चल, संग हे सियान चल ।
बीर शौर्यवान चल, पौरुष दिखान चल ।
आयुध ला तान चल, ध्वज फहरान चल ।
आयुध भँवान चल, मारे ला मसान चल।
टोरे अभिमान चल, पीसे ला पिसान चल।।
पानी ला पियान चल, करके गुनान चल।
रिन ला चुकान चल, करे प्रान दान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
गात राष्ट्रगान चल, चल बलवान चल।
बैरी चितियान चल, देत परमान चल ।
धरके धियान चल, करत हैरान चल।
देशराग गान चल, सुन आह्वान चल ।
उड़त उड़ान चल, छोड़त निशान चल ।
धरा सँभरान चल, नभ चन्द्र भान चल।
राम के समान चल, कृष्ण के समान चल।
भारत महान थल, बेटी बेटा बाँह बल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
१.
गबरू जवान चल, अस्त्र-शस्त्र तान चल ,
देश के मितान चल, भारत के शान चल।
बघवा समान चल, राखे देश आन चल ।
बीर के घरान चल, नापे आसमान चल,
फोरे मूड़ कान चल, बैरी ला सुतान चल,
चामुंडा जगान चल, तांडव दिखान चल,
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
झगरा मतान चल, करे घमासान चल।
जंगल वीरान चल, डोंगर उचान चल ।
चल बने ठान चल, गोड़ ला जमान चल
लहू ला बोहान चल, देश ला बढ़ान चल,
छाती जुड़वान चल, सुख दिन लान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
बनके तूफान चल, संग हे सियान चल ।
बीर शौर्यवान चल, पौरुष दिखान चल ।
आयुध ला तान चल, ध्वज फहरान चल ।
आयुध भँवान चल, मारे ला मसान चल।
टोरे अभिमान चल, पीसे ला पिसान चल।।
पानी ला पियान चल, करके गुनान चल।
रिन ला चुकान चल, करे प्रान दान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
गात राष्ट्रगान चल, चल बलवान चल।
बैरी चितियान चल, देत परमान चल ।
धरके धियान चल, करत हैरान चल।
देशराग गान चल, सुन आह्वान चल ।
उड़त उड़ान चल, छोड़त निशान चल ।
धरा सँभरान चल, नभ चन्द्र भान चल।
राम के समान चल, कृष्ण के समान चल।
भारत महान थल, बेटी बेटा बाँह बल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
आल्हा छन्द(भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात।
आल्हा छन्द
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात।
अंतरिक्ष ले उपग्रह मन हर, करत हवै रखवारी देश।
भारत के बैरी नइ बोचकै, सेना देवत हे संदेश।।
तीनों सेना के जवान मन, अस्त्र-शस्त्र में हे निष्णात।
भारतीय सिद्धान्त नवा अब, नहीं करन अब कोनो बात।।
भुँइया ले भुँइया में करथे, अग्नि मिसाइल अइसे वार।
जइसे भीतर रनचंडी हर, छाहित बइठे हवै सवार।।
अइसे जँउहर बजनी बाजै, हमर देश के बीर जवान।
ड्रोन मिसाइल फेंकै तुक के, वार रूम ले कर संधान ।।
बैरी के संभले के पहिली, अँउहा-झँउहा करै प्रहार।।
जेला रोज उसरथे झगरा, उँकर करथे भादाउज्जार।।
जेहर आँखी लाल देखावै, वोकर कुकुरगति हो जाय ।
पानी बूड़े अब नइ बाँचै, कोनो बिल में खुसर लुकाय।।
चाहे लंपट चीनदेश हो, चाहे लंगटा पाकिस्तान।
सब झन बर पूरै अउ बाँचै, जब्बर बलकर हिन्दूस्थान ।।
अग्नि अउ आकाश मिसाइल, दनदनात घर भीतर जाय।
छर्री दर्री पोंटा करके, दुश्मन के खटिया
रेंगाय।।
पृथ्वी, नाग, त्रिशूल, मिसाइल, बंगबंगबंगबंग बंबर बार।
पल भर में स्वाहा कर देथे, आतंकी अड्डा घर द्वार।।
घनघनात बादर उड़ियावत, जेट सुखोई अउ राफेल।
बैरी ला मुसुवा कस भुँजथे, कोनो मार सकै नइ झेल।।
रूद्रम जब विध्वंस मचाथे, फंकट झरकट दुबक लुकाय ।
जल थल नभ के किल्ला जब्बर, जेती जावै उती पिटाय।।
कुसुमकली रनचंडी माई, जब होही भरपूर जवान।
आतंकी कुंदरा उझारही, लाही सुघ्घर नवा बिहान।।
आवत हे अउ धुनियाये बर, काली मिसाइल रामा ड्रोन।
नाम सुनत बैरी थर्रावत, होत सुकुड़दुम झगरै कोन।।
आईएन एस विक्रमादित्य हर, पानी में बूड़े जलरंग।
भारत के करथे रखवारी, बीर बली सेना के संग।।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, भारत के रक्षक ब्रह्मोस।
पाक दुर्गति देख चीन के, अधरे अधर उड़ावत होश।।
भारत के लइका पिचका मन, ड्रोन मिसाइल नंगत बनात ।
राष्ट्रधर्म के यज्ञ वेदी में, हिलमिल सबझन हाथ बढ़ात।।
युद्धकला हाईटेक बिकट हे, जेन झगरही खाही मात।
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात ।।
आँखी उठै तौ आँखी कोचकै, हाथ उठै तौ भुजा उखान ।
गोड़ उठै तौ गोड़े टोरै, भारत के झगरन्त महान। ।
अस्त्र शस्त्र के शक्ति देख के, बैरी बहिरी बाँध भगात।।
नभ जल थल घर घर में तिरंगा, लहर लहर देखौ लहरात।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात।
अंतरिक्ष ले उपग्रह मन हर, करत हवै रखवारी देश।
भारत के बैरी नइ बोचकै, सेना देवत हे संदेश।।
तीनों सेना के जवान मन, अस्त्र-शस्त्र में हे निष्णात।
भारतीय सिद्धान्त नवा अब, नहीं करन अब कोनो बात।।
भुँइया ले भुँइया में करथे, अग्नि मिसाइल अइसे वार।
जइसे भीतर रनचंडी हर, छाहित बइठे हवै सवार।।
अइसे जँउहर बजनी बाजै, हमर देश के बीर जवान।
ड्रोन मिसाइल फेंकै तुक के, वार रूम ले कर संधान ।।
बैरी के संभले के पहिली, अँउहा-झँउहा करै प्रहार।।
जेला रोज उसरथे झगरा, उँकर करथे भादाउज्जार।।
जेहर आँखी लाल देखावै, वोकर कुकुरगति हो जाय ।
पानी बूड़े अब नइ बाँचै, कोनो बिल में खुसर लुकाय।।
चाहे लंपट चीनदेश हो, चाहे लंगटा पाकिस्तान।
सब झन बर पूरै अउ बाँचै, जब्बर बलकर हिन्दूस्थान ।।
अग्नि अउ आकाश मिसाइल, दनदनात घर भीतर जाय।
छर्री दर्री पोंटा करके, दुश्मन के खटिया
रेंगाय।।
पृथ्वी, नाग, त्रिशूल, मिसाइल, बंगबंगबंगबंग बंबर बार।
पल भर में स्वाहा कर देथे, आतंकी अड्डा घर द्वार।।
घनघनात बादर उड़ियावत, जेट सुखोई अउ राफेल।
बैरी ला मुसुवा कस भुँजथे, कोनो मार सकै नइ झेल।।
रूद्रम जब विध्वंस मचाथे, फंकट झरकट दुबक लुकाय ।
जल थल नभ के किल्ला जब्बर, जेती जावै उती पिटाय।।
कुसुमकली रनचंडी माई, जब होही भरपूर जवान।
आतंकी कुंदरा उझारही, लाही सुघ्घर नवा बिहान।।
आवत हे अउ धुनियाये बर, काली मिसाइल रामा ड्रोन।
नाम सुनत बैरी थर्रावत, होत सुकुड़दुम झगरै कोन।।
आईएन एस विक्रमादित्य हर, पानी में बूड़े जलरंग।
भारत के करथे रखवारी, बीर बली सेना के संग।।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, भारत के रक्षक ब्रह्मोस।
पाक दुर्गति देख चीन के, अधरे अधर उड़ावत होश।।
भारत के लइका पिचका मन, ड्रोन मिसाइल नंगत बनात ।
राष्ट्रधर्म के यज्ञ वेदी में, हिलमिल सबझन हाथ बढ़ात।।
युद्धकला हाईटेक बिकट हे, जेन झगरही खाही मात।
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात ।।
आँखी उठै तौ आँखी कोचकै, हाथ उठै तौ भुजा उखान ।
गोड़ उठै तौ गोड़े टोरै, भारत के झगरन्त महान। ।
अस्त्र शस्त्र के शक्ति देख के, बैरी बहिरी बाँध भगात।।
नभ जल थल घर घर में तिरंगा, लहर लहर देखौ लहरात।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
Sunday, 3 August 2025
मकरंद वर्णिक छन्द (निधिबन जाबो,मधुबन जाबो,दरस परस हरि कर सुख पाबो।)
मकरन्द छंद-नगण यगण नगण यगण नगण नगण नगण नगण गुरु गुरु
(111 122, 111 122, 111 111 11,1 111 22) 26 वर्ण, 4 चरण, यति 6,6,8,6 वर्णों पर। दो-दो या चारों चरण समतुकांत
लललल लाला लललल लाला,
(111 122, 111 122, 111 111 11,1 111 22) 26 वर्ण, 4 चरण, यति 6,6,8,6 वर्णों पर। दो-दो या चारों चरण समतुकांत
लललल लाला लललल लाला,
ललल ललल लल लललल लाला।
निधिबन जाबो,मधुबन जाबो,
दरसन परस हरि कर सुख पाबो।
हिलमिल गाबो,गुदुम बजाबो,
झुमर घुमर सखि हरि नचवाबो ।।
सब जुरियाबो,अउ गुन गाबो,
चुरगुन बन सखि गगन उड़ाबो ।
सुगुन जगाबो,सुलभ अमाबो,
अउ तरसत जिउ-नयन जुड़ाबो।।
किसन-कन्हैया,जग-सिरजैया,
सिर-सुखमंदिर-चरन मड़ाबो।।
जग-तिरियाबो,हरि-सँटियाबो,
हँसत-बदन पद नव मड़ियाबो।।
ललित त्रिभंगी,सब मनरंगी,
दरसन भवदह झट तर जाबो।
मन फरियाही,हरि पधराही,
जनम-मरन-भवदुख दुरिहाबो।।
चहकत जाबो,गमकत आबो,
मन गुरतुर-रस सखि भर आबो।
नशशिख शोभे,छबि मन लोभे,
चल सखि जनम ल सुफल बनाबो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
निधिबन जाबो,मधुबन जाबो,
दरसन परस हरि कर सुख पाबो।
हिलमिल गाबो,गुदुम बजाबो,
झुमर घुमर सखि हरि नचवाबो ।।
सब जुरियाबो,अउ गुन गाबो,
चुरगुन बन सखि गगन उड़ाबो ।
सुगुन जगाबो,सुलभ अमाबो,
अउ तरसत जिउ-नयन जुड़ाबो।।
किसन-कन्हैया,जग-सिरजैया,
सिर-सुखमंदिर-चरन मड़ाबो।।
जग-तिरियाबो,हरि-सँटियाबो,
हँसत-बदन पद नव मड़ियाबो।।
ललित त्रिभंगी,सब मनरंगी,
दरसन भवदह झट तर जाबो।
मन फरियाही,हरि पधराही,
जनम-मरन-भवदुख दुरिहाबो।।
चहकत जाबो,गमकत आबो,
मन गुरतुर-रस सखि भर आबो।
नशशिख शोभे,छबि मन लोभे,
चल सखि जनम ल सुफल बनाबो।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
मधुमती वर्णिक छन्द (सखियन सँभरे।निधिबन हबरे।।
मधुमती छंद“ (वर्णिक छन्द)
लललल ललला।
सखियन सँभरे।
निधिबन हबरे।।
गम-गम गमके।
सजवन झमके।।
सुध बुध तन के।
अउ नइ मन के।।
हरि बिन दरसे ।
मन बड़ तरसे।।
सुमिरन धरके ।
घर बन डरके।।
मधुवन धमके।
निधिबन धमके।।
मधुरस बरसे ।
तब हिय हरसे।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
लललल ललला।
सखियन सँभरे।
निधिबन हबरे।।
गम-गम गमके।
सजवन झमके।।
सुध बुध तन के।
अउ नइ मन के।।
हरि बिन दरसे ।
मन बड़ तरसे।।
सुमिरन धरके ।
घर बन डरके।।
मधुवन धमके।
निधिबन धमके।।
मधुरस बरसे ।
तब हिय हरसे।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
Saturday, 2 August 2025
मैं जनपद की स्वरलहरी हूँ ।
मैं जनपद की स्वरलहरी हूँ ।
जो भी हूँ छिछली गहरी हूँ।।
कालताल गतिमान संगिनी,
कभी नहीं मैं भी ठहरी है।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
जो भी हूँ छिछली गहरी हूँ।।
कालताल गतिमान संगिनी,
कभी नहीं मैं भी ठहरी है।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
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