Tuesday, 5 August 2025

माधवी सवैया (पहावत बेर बिना हरिनाम

माधवी सवैया (वर्णिक 24 वर्ण) 

लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगाल लगागा 

पहावत बेर बिना हरिनाम, बता कइसे तरबे भव चोला ।
धरे बिन राम बनै नइ काम, सकै नइ तार कहूँ अउ तोला।।
सबोसुख रास, बने बिन दास, दरिद्र रही यह मानुस चोला।। 
नहीं बिसराम मिले बिन राम,नहीं अटका चटका मन मोला।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

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