Tuesday, 5 August 2025

घनाक्षरी छन्द (गबरू जवान चल) संशोधित

घनाक्षरी छन्द (गबरू जवान चल) संशोधित 
१.

गबरू जवान चल, अस्त्र-शस्त्र तान चल ,
देश के मितान चल, भारत के शान चल।
बघवा समान चल, राखे देश आन चल ।
बीर के घरान चल, नापे आसमान चल,
फोरे मूड़ कान चल, बैरी ला सुतान चल,
चामुंडा जगान चल, तांडव दिखान चल,
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!

झगरा मतान चल, करे घमासान चल।
जंगल वीरान चल, डोंगर उचान चल ।
चल बने ठान चल, गोड़ ला जमान चल
लहू ला बोहान चल, देश ला बढ़ान चल,
छाती जुड़वान चल, सुख दिन लान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!

बनके तूफान चल, संग हे सियान चल ।
बीर शौर्यवान चल, पौरुष दिखान चल ।
आयुध ला तान चल, ध्वज फहरान चल ।
आयुध भँवान चल, मारे ला मसान चल।
टोरे अभिमान चल, पीसे ला पिसान चल।।
पानी ला पियान चल, करके गुनान चल।
रिन ला चुकान चल, करे प्रान दान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!



गात राष्ट्रगान चल, चल बलवान चल।
बैरी चितियान चल, देत परमान चल ।
धरके धियान चल, करत हैरान चल।
देशराग गान चल, सुन आह्वान चल ।
उड़त उड़ान चल, छोड़त निशान चल ।
धरा सँभरान चल, नभ चन्द्र भान चल।
राम के समान चल, कृष्ण के समान चल।
भारत महान थल, बेटी बेटा बाँह बल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!

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