घनाक्षरी छन्द (गबरू जवान चल) संशोधित
१.
गबरू जवान चल, अस्त्र-शस्त्र तान चल ,
देश के मितान चल, भारत के शान चल।
बघवा समान चल, राखे देश आन चल ।
बीर के घरान चल, नापे आसमान चल,
फोरे मूड़ कान चल, बैरी ला सुतान चल,
चामुंडा जगान चल, तांडव दिखान चल,
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
झगरा मतान चल, करे घमासान चल।
जंगल वीरान चल, डोंगर उचान चल ।
चल बने ठान चल, गोड़ ला जमान चल
लहू ला बोहान चल, देश ला बढ़ान चल,
छाती जुड़वान चल, सुख दिन लान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
बनके तूफान चल, संग हे सियान चल ।
बीर शौर्यवान चल, पौरुष दिखान चल ।
आयुध ला तान चल, ध्वज फहरान चल ।
आयुध भँवान चल, मारे ला मसान चल।
टोरे अभिमान चल, पीसे ला पिसान चल।।
पानी ला पियान चल, करके गुनान चल।
रिन ला चुकान चल, करे प्रान दान चल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
गात राष्ट्रगान चल, चल बलवान चल।
बैरी चितियान चल, देत परमान चल ।
धरके धियान चल, करत हैरान चल।
देशराग गान चल, सुन आह्वान चल ।
उड़त उड़ान चल, छोड़त निशान चल ।
धरा सँभरान चल, नभ चन्द्र भान चल।
राम के समान चल, कृष्ण के समान चल।
भारत महान थल, बेटी बेटा बाँह बल।
गबरू जवान चल!!!!गबरू जवान चल!!!
गबरू जवान चल!!! गबरू जवान चल!!!!
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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