आल्हा छन्द
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात।
अंतरिक्ष ले उपग्रह मन हर, करत हवै रखवारी देश।
भारत के बैरी नइ बोचकै, सेना देवत हे संदेश।।
तीनों सेना के जवान मन, अस्त्र-शस्त्र में हे निष्णात।
भारतीय सिद्धान्त नवा अब, नहीं करन अब कोनो बात।।
भुँइया ले भुँइया में करथे, अग्नि मिसाइल अइसे वार।
जइसे भीतर रनचंडी हर, छाहित बइठे हवै सवार।।
अइसे जँउहर बजनी बाजै, हमर देश के बीर जवान।
ड्रोन मिसाइल फेंकै तुक के, वार रूम ले कर संधान ।।
बैरी के संभले के पहिली, अँउहा-झँउहा करै प्रहार।।
जेला रोज उसरथे झगरा, उँकर करथे भादाउज्जार।।
जेहर आँखी लाल देखावै, वोकर कुकुरगति हो जाय ।
पानी बूड़े अब नइ बाँचै, कोनो बिल में खुसर लुकाय।।
चाहे लंपट चीनदेश हो, चाहे लंगटा पाकिस्तान।
सब झन बर पूरै अउ बाँचै, जब्बर बलकर हिन्दूस्थान ।।
अग्नि अउ आकाश मिसाइल, दनदनात घर भीतर जाय।
छर्री दर्री पोंटा करके, दुश्मन के खटिया
रेंगाय।।
पृथ्वी, नाग, त्रिशूल, मिसाइल, बंगबंगबंगबंग बंबर बार।
पल भर में स्वाहा कर देथे, आतंकी अड्डा घर द्वार।।
घनघनात बादर उड़ियावत, जेट सुखोई अउ राफेल।
बैरी ला मुसुवा कस भुँजथे, कोनो मार सकै नइ झेल।।
रूद्रम जब विध्वंस मचाथे, फंकट झरकट दुबक लुकाय ।
जल थल नभ के किल्ला जब्बर, जेती जावै उती पिटाय।।
कुसुमकली रनचंडी माई, जब होही भरपूर जवान।
आतंकी कुंदरा उझारही, लाही सुघ्घर नवा बिहान।।
आवत हे अउ धुनियाये बर, काली मिसाइल रामा ड्रोन।
नाम सुनत बैरी थर्रावत, होत सुकुड़दुम झगरै कोन।।
आईएन एस विक्रमादित्य हर, पानी में बूड़े जलरंग।
भारत के करथे रखवारी, बीर बली सेना के संग।।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, भारत के रक्षक ब्रह्मोस।
पाक दुर्गति देख चीन के, अधरे अधर उड़ावत होश।।
भारत के लइका पिचका मन, ड्रोन मिसाइल नंगत बनात ।
राष्ट्रधर्म के यज्ञ वेदी में, हिलमिल सबझन हाथ बढ़ात।।
युद्धकला हाईटेक बिकट हे, जेन झगरही खाही मात।
भारत के संग जेन ओरझही, वोहर खाही अब्बड़ लात ।।
आँखी उठै तौ आँखी कोचकै, हाथ उठै तौ भुजा उखान ।
गोड़ उठै तौ गोड़े टोरै, भारत के झगरन्त महान। ।
अस्त्र शस्त्र के शक्ति देख के, बैरी बहिरी बाँध भगात।।
नभ जल थल घर घर में तिरंगा, लहर लहर देखौ लहरात।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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