शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Tuesday, 5 August 2025
गुनधर संगति गुनधर करथे, हिनहर संगति हिनहा।
गुनधर संगति गुनधर करथे, हिनहर संगति हिनहा।
ठग्गू संगति ठग्गू करथे, गिनहा संगति गिनहा।।
नेता संगति पिछलग्गू कर, रहि बन जाथें तिनहा।
घिनहा संगति घिनहा करके, कारज करथें घिनहा।।
चोर चोरहा संगति करके, करथे चोरी हारी।
बैपारी बैपारी संग कर, करथे धन बढ़वारी।।
नारी संगत नर हर करथे, अउ नर संगत नारी।।
गुनललचहा गुनिक संगत कर, करथे ज्ञान सिंगारी।।
शोभामोहन
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