Sunday, 3 August 2025

मधुमती वर्णिक छन्द (सखियन सँभरे।निधिबन हबरे।।

मधुमती छंद“ (वर्णिक छन्द)
लललल ललला।

सखियन सँभरे।
निधिबन हबरे।।
गम-गम गमके।
सजवन झमके।।
सुध बुध तन के।
अउ नइ मन के।।
हरि बिन दरसे ।
मन बड़ तरसे।।
सुमिरन धरके ।
घर बन डरके।।
मधुवन धमके।
निधिबन धमके।।
मधुरस बरसे ।
तब हिय हरसे।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

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