Saturday, 23 August 2025

दे दे अपन भगति सरकार ।

दे दे अपन भगति सरकार ।

नवा नवा लिख भजन सुनावौं, अपन मति अनुसार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
नवा नवा धुन मंगल गावौं, तोर नवो अवतार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
भोगराग बर नवा नवा नित, राँधौं प्रभु जेवनार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
नवा-नवा लीला सुन-सुन प्रभु, कुलकौं चित्त उतार ।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
गीता शास्त्र उपनिषद गुनदल, गावत बारम्बार ।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तहीं वेदमणि जगत शिरोमणि, सचराचर भर्तार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
फूल चढ़ावौं मयाभाव के, आप करौ स्वीकार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तोर छोड़ अउ कोनो नइ हे, जग में कहूँ हमार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
सब अपराध क्षमा करथस प्रभु, तैं हस अबड़ उदार।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तेकर सेती तोर सरन में, बइठे हौं रतमार।।
दे दे अपन भगति सरकार ।
तोर जीव अऔं तोर सरन हौं, सब अपराध बिसार ।
शोभामोहन निचट अधम हे, कर दे भवदह पार ।।
दे दे अपन भगति सरकार ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन

मनहरण घनाक्षरी छन्द

झूलत झुलनिया में झबला पहिरे हरि,
देख देख लीला देव फूल बरसात हें।
आनंद बाढ़त हे दरस कर लाल जू के,
मयाबूड़े नैन अउ आँसू चुचवात हें।
मंगलगीत गावत सरस्वती पार्वती,
बदल के भेस हरि दरसन पात हें ।
दरसन पाये बर महल दुवरिया में,
भोलेनाथ उसर पुसर मेंडरात हें ।


No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...