Monday, 1 September 2025

तोला देख जीव धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

मन अँगना में चँउक पुरागे । 
तोरन झालर रुनझुन झागे ।।
तैं आये तौ मन हरियागे ।
सब सुखसुम्मत संगे आगे।। 
फुरफुन्दी कस बादर कोती, मन उड़ात हे धरके पाँखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

आस हेराये मन ला मोहत ।
बोधावत हे सजवन सोहत।।
मैं पपीहा कस तोला जोहत ।
राख तहीं हर अब प्रियतम पत ।
मरत रहेंव सुरता कर करके, आके जिया दियेस गउ साखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।

गुनगावैया मैं तोर चारण।
तैं हर मोर जिये के कारण।
तहीं उपास तहीं मोर पारण।
मैं हर नार तहीं रूख धारण ।।
मोला काम तोर ले हावय, आग लगै ये दुनिया बाकी।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।


शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०९/२०२५

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...