मन अँगना में चँउक पुरागे ।
तोरन झालर रुनझुन झागे ।।
तैं आये तौ मन हरियागे ।
तैं आये तौ मन हरियागे ।
सब सुखसुम्मत संगे आगे।।
फुरफुन्दी कस बादर कोती, मन उड़ात हे धरके पाँखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
आस हेराये मन ला मोहत ।
बोधावत हे सजवन सोहत।।
मैं पपीहा कस तोला जोहत ।
राख तहीं हर अब प्रियतम पत ।
मरत रहेंव सुरता कर करके, आके जिया दियेस गउ साखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
गुनगावैया मैं तोर चारण।
तैं हर मोर जिये के कारण।
तहीं उपास तहीं मोर पारण।
मैं हर नार तहीं रूख धारण ।।
मोला काम तोर ले हावय, आग लगै ये दुनिया बाकी।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०९/२०२५
फुरफुन्दी कस बादर कोती, मन उड़ात हे धरके पाँखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
आस हेराये मन ला मोहत ।
बोधावत हे सजवन सोहत।।
मैं पपीहा कस तोला जोहत ।
राख तहीं हर अब प्रियतम पत ।
मरत रहेंव सुरता कर करके, आके जिया दियेस गउ साखी।।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
गुनगावैया मैं तोर चारण।
तैं हर मोर जिये के कारण।
तहीं उपास तहीं मोर पारण।
मैं हर नार तहीं रूख धारण ।।
मोला काम तोर ले हावय, आग लगै ये दुनिया बाकी।
तोला देख जिउ धक ले होगे, बिजली असन चमकगे आँखी।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०९/२०२५
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