Tuesday, 5 August 2025

कलजुग खरावत हे लहन बतात

कलजुग खरावत हे लहन बतात

हरहा संग कपिला के होवत बिनास। 
देखत बिधाता कलेचुप अउ हाँस।
कतको रपोटत तउनो दुच्छा जात ।
कलजुग खरावत हे लहन बतात
दुख ओंड़ा दे हे बिहिनिया साँझ।
सुख सोहर के कोरा परगे हे बाँझ।। 
बंबरी बोंवैया मन आमा सोरियात।
छलत मनखे मगज सपना के जात।। 
कलजुग खरावत हे लहन बतात

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...