"अँखमुन्दा सबझन दँउरत हें"
जगदहरा में सब तँउरत हें।
अलकरहा दँउरी भँउरत हें।
सब्बो रुखवा एक अकेलियन,
तब्भो फरत फुलत मउरत हें।
सब्बो झन बउरात रगड़ के,
सब्बो झन सब ला बउरत हें।
मिरगाजल में प्यास बुताये,
अँखमुन्दा सबझन दँउरत हें।
शोभामोहन चेत चढ़िस तब,
मायागढ़ में हरि सँउरत हें।
शोभामोहन
No comments:
Post a Comment