Tuesday, 6 May 2025

हर मुहरन में तहीं लुकाये ।

सबो दिरिस तोरे जस गाये

हर मुहरन में तहीं लुकाये । 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

भिनसरहा रक्तालाली मा ।

मंँझन छन बुलकत जाली मा।।

झूलफुलहा के खुशियाली मा।

आज परनदिन अउ काली मा।।

तोर होय के ढंग जनाये ।

हर मुहरन में तहीं लुकाये। 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

चंदा तारा जुड़वासा मा ।

चित अउ पट दूनो पासा मा।।

सुनता बिमता के बासा मा ।

अनचिन्हार रहिके साँसा मा।। 

निचट कलेचुप तँही समाये ।। 

हर मुहरन मा तहीं लुकाये।। 

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

गमकत भुँइया फूलवारी मा ।

बेरा के पहरादारी मा ।।

अटलसोहागी सिंगारी मा।

रेफ सोनहा उजियारी मा।।

सरभर सुघरइ तहीं बसाये। 

हर मुहरन मा तँही लुकाये ।।

सबो दिरिस तोरे जस गाये ।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव

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