शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Saturday, 23 May 2026
वेद सुमरनी जोहार १
जोहार वंदना
वेद के उतरनी
बाप कस परमेश, जगसुख उपदेश, वेद हितसाधे सिरजैया ला जोहार हे A
वेद सर्वशक्तिमान, बिधाता बचन जान,वेद पढ़ गुन के पढ़ैया ला जोहार हे A
मंतर ला अरथाय, ठउकहा समझाय, तर्क कारन प्रान जनैया ला जोहार हे A
दइ सुमिरन कर] परहित ब्रत धर,सबके अंतस अँजोरैया ला जोहार हे A
टीका-जनमदेवैया ददा के जइसे परम पिता परमात्मा सब बर वेद में जगत सुख के संदेशदेवैया हे, वो सबके हित रखवार सिरजैया परमात्मा ला जोहार हे, परमात्मा जेन संसार के सर्वशक्तिमान बिधाता हे, वोकर परतछ बचन हे, वेद के पठन-पाठन कर वेद ज्ञान देवैया गुरुजन मन] उपदेश देवैया ला जोहार हे]वेद मंतर मन के व्याख्याकार मन अउ वेद ज्ञान के जस के तस माने वेद में जइसे बताय गये हे, वइसने जस-के-तस अर्थाय समझैया तर्क-कारन अउ प्राण के जनैया विद्वान मन ला जोहार हे] सबदिन परमात्मा के सुमिरनकरैया परोपकार ब्रतधरे अउ सर्वात्मा ला आत्मज्ञान के प्रकाश ले प्रकाशित करैया सबो प्रकाश खम्भा गुरु-संत]ऋषि मुनि अउ महात्मा मन ला जोहार हे A
बियैया ला जे बियाय, अँजोर ला उजराय, कण-कण भीतर छ्वैया ला जोहार हे /
जेन जन जोग घोखे,अंतस के बन रोखे, पबरित होये उरथैया ला जोहार हे /
गुन ज्ञान दल जोर, करके बिद्या अँजोर, दूसर के गति सुधरैया ला जोहार हे /
धारन के धरतार, करता के करतार, दानी मन ला दान देवैया ला जोहार हे /
टीका-जेन परमात्मा जनम देवैया के भी जनम देवैया हे जेन ब्रह्मा ले लेके चराचर जगत ला उत्पन्न करथे, जेन अनंत दैदीप्यमान सुरुज ला अपन बल ले प्रकाशित करथे, अइसन कन-कन व्यापी असीम शक्तिगोसइया ईश्वर ला जोहार हे] जेन योगाभ्यास द्वारा मन के भीतर उपजने वाले बिचार रूपी बन-बदउर या खरपतवार मन ला छोलथे aउखानथे, अउ अंतस ला पबरित करे के उरथी करथे,वोला जोहार हे] ज्ञान गुन समूह कमा के अपन कमाय ज्ञान प्रकाश ला प्रकाशित कर जेन सवाँगे के संगे संग दूसर मन के भी गति सुधारथे, वोला जोहार हे] जेन धारणकरैया माने अंतरिक्ष अउ सबो पिंड ला धारण करथे, जइसे भुइया चराचर-जीव-जगत ला धारण करथे, वायु सबो भूतात्मा अउ गंध अउ सूक्ष्म पदार्थ मन ला धारण करथे, अइसन सब धारणकरैया धरैया ला धारणकरैया परम-अधार धारन करैया परमात्मा हे, जेन सबो प्रकृति ब्रह्म ले लेके चराचर जगत के सबो कारज करैया मन के भी कारज करैया हे, अउ सबो राजा उवा-उवा धनस्वामी मन ला घलोक धनश्री देवैया परमात्मा ला जोहार हे A
बड़हर ले बड़ेर, प्रकृति नयन प्रेर, सब लोक रचके मड़ैया ला जोहार हे /
चराचर के गोसान, चारो खूंट परमान, कारन के कारन जनैया ला जोहार हे /
भरता के भरतार, पोसक पालनहार, जग रच सवांगे लुकैया ला जोहार हे /
अजगुत ले अजब, जेकर हे गुन सब, धंवरा ले धवल गोसैया ला जोहार हे /
टीका-जेन परमात्मा संसार के सबो बलवान मन ले भी अधिक बलवान हे, जेन प्रकृति ला अपन आँखी के इशारा ले संचालित कर सबो लोकरचना करे हे, वो असीम शक्ति-भण्डार परमात्मा ला जोहार हे] एकमात्र उही परमात्मा सबो चराचर जगतगोसैया हे, वोकर गोसानी के तीर-तखार वातावरण में चारोखूंट प्रमाण हे, जेन कारन के कारन जनाथे अइसन परमात्मा ला जोहार हे]परमात्मा के शक्ति-स्वरूप विष्णु घलोक परमात्मा ले पोषित होथे, सबो चराचर-जगत-पालक-पोषक अउ सर्व पालनहार बनथे, सबो संसार रचना करे के पाछू सवांगे जेन लुका के रहिथे, अइसन महामहिमय परमात्मा ला जोहार हे]जेन परमात्मा के सब गुन बिचित्र मन ले भी अति-बिचित्र हे] जेन संसार में स्थित उज्जर ले घलोक आगर उज्जर हे, अइसन अनुभव में अवैया परमात्मा ला जोहार हे A
लइका बाला ला दे बल, चले सक जीवदल, अंग भार बिन जीव पोसैया ला जोहार हे /
पार के घलोक पार, नदिया के उही धार, सरवर समुंद भरैया ला जोहार हे /
खंभा के हे उही खंभा, जगत के अवलंबा, अधार के अधार थमैया ला जोहार हे /
आरूग ले हे आरूग, सब दिन जुग-जुग, गियान पियास के बुतैया ला जोहार हे /
टीका-संसार में जतका भी पदारथ बलवंता दृष्टिगोचर होथे, वोकर बलदेवैया परमात्मा ही हे, परमात्मा के बल ले ही कोनो बली जनाथे] जेन परमात्मा सबो जीव-समूह ला चले फिरे केशक्तिदेवैया हे, अउ बिगन अंगभार सवाँगे उपजाय लइका-बाला जइसे भाव ले पोषण करैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे]जेन परमात्मा सबो सीमा मन ला सीमित करैया सीमा हे, अउ प्रवाह ला प्रवाहित करैया हे, अउ नदी] समुन्दर ला चराचरजगत जीव सुख बर भरैया परमात्मा ला जोहार हे]जेन संसार के अदृश्य अधार खंभा मन के घलोक खंभा माने अधार हे] जेन अधार में सबो संसार टेके हे, अइसन अधार के घलोक अधार परमात्मा ला जोहार हे] जेन परमात्मा आदि काल ले संसार में दृश्यमान परम पबरित मन ले घलोक आगर पबरित हे, अउ सबो ज्ञान पियासे मन ला बिद्या दान देके ज्ञान पियास बुतैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे
तन के घलोक तन, मन के घलोक मन, परान के परान अथैया ला जोहार हे /
आत्मा के आत्मा हे, उही परमात्मा हे, भिन्ना जगबंधन कटैया ला जोहार हे /
घट-घट उही बसे, कन-कन उही रसे,रोम-रोम रमनकरैया ला जोहार हे /
राउर के उही राव, साव के उहीच साव, गोसैया के घलोक गोसैया ला जोहार हे A
टीका-जेन परमात्मा सबो काया के काया हे, सबो चित्तवृत्ति के संचालन करैया मन हे] अउ जेन काया ला जीयत-जागत रखैया प्राण के घलोक परान हे, वो परमतत्व ला जोहार हे, सबो आत्मा मन के आत्मा स्वरूप परमात्मा जेन सबो भौतिक जगतबंधन के कटैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन हर एक कायाघट में रहिथे बसथे, अउ हर एक कन-कन में करथे, अउ हर एक जीव के हर एकक रूँआ-कुँवा में रमथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन परमात्मा राजा मन के राजा अ उ समरात मन के सम्राट हे, सब साहूकार मन के घलोक साहूकार हे, अउ सबो दृश्यमान संसार के गोसैया के घलोक गोसैया हे, वो परमात्मा ला जोहार हे A
उमंग ला उमंगाय, लहरा ला लहराय, दहरा के पियास बुतैया ला जोहार हे /
अगन पवन रच, नभ मग घन खच, भुइयाँ में जल बरसैया ला जोहार हे /
देव के उहीच देव, लुकाय रहिथे छेंव, नवा ले नित नवा रहैया ला जोहार हे /
आँखी के उहीच आँखी, सबके उहीच साखी, जीव ला जगत के देखैया ला जोहार हे A
टीका-जेन परमात्मा उमंग मन ला घलोक उमंग ले भरथे, जेन समुन्दर नदिया मन अउ जम्मो जल ठाँव के तरंगमाला ला तरंगित करथे, अउ भिन्नाजगत या भौतिक जगत के सबो जलठाँव के प्यासबुतैया तृप्ति के परम अधार हे, जेन समुन्दर के प्यास बताथे, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन परम ब्रह्म हर परम परम करैया अग्नि अउ वायु के रचना करे हे, अउ अंतरिक्ष मार्ग में बादर के बरसा निश्चित-ओरीओर सुनिश्चित करके भुइयाँ में रिमझिम बरसा कराथे, वोला जोहार हे]जेन देवता-धामी के भी देवता हे, अउ जेन सर्वशक्तिसंपन्न होके घलोक सवाँगे ह्रदय के अंतराल में अदृश्य रहिथे, अउ सबदिन नवा ले घलोक आगर नवा-नेवदहा ही रहिथे, जेन कभू जुन्ना नइ होय, वो परमात्मा ला जोहार हे] जेन आँखी के भी आँखी हे, माने आँखी जेन दृश्यमान-जगत देखथे, वो दर्शनशक्ति देवैया परमात्मा हे, अउ जेन देखैया मन के घलोक देखैया हे, वो परब्रह्म ला जोहार हे, जेन सबो जीव मन केअंतराल में साक्षीभाव ले सबदिन विद्यमान रहिथे, अउ जीव ला जगत दृश्यावली देखाथे, वो परमशक्ति ला जोहार हे A
गंध ला दे उही गंध, मधुरस मकरंद, नाक ला गमक के चिन्हैया ला जोहार हे A
उही दे बोलन सक, उही दे दोलन सक, पग-पग अंगरी धरैया ला जोहार हे A
परस ला परसाय]दिरिस ला दिखलाय,हरस ला घलो हरसैया ला जोहार हे A
रगं ला दे उही रंग, फिक्का अउ चटक बंग,जग फूलवारी के गोसैया ला जोहार हे A
टीका-जेन परमशक्ति हर एक भौतिक पदारथ के गंध गमक ला विशेष गंध गमक देथे, अउ जेन वो गंध मन के परम अधार हे, जेकर ले पदारथ विशेष एक विशिष्ट गंध गमक ला पाथे, अउ जेन सबो प्रकार के फूल मन के लगे मकरंद अउ पराग हे, वो पराग अउ मकरंद के देवैया अउ नाना प्रकार गंध मन ला नाक के माध्यम ले आ जा के वोकर विशेषता के संग चिन्हे के शक्ति प्रदान करैया परमशक्ति ला जोहार हे ] वोहर परमात्मा जेन सबो जीव मन ला बोले अउ हाले-डोले के शक्ति देथे, अउ जीव करम अउ चित्तवृत्ति के अनुसार अंगरी धर के चलाथे, वो परमतत्व ला जोहार हे]जीव समुदाय द्वारा अनुभूत करे जाने वाले सबो स्पर्श मन ला जेन छुवाथे, अउ जीव समुदाय ला भिन्नाजगत या भौतिक जगत के दर्शन करे जाने वाले सबो दर्शन मन ला जेन देखथे, अउ आनंद हर्ष ला भी आनंदित अउ हरसैया परमतत्व हे वोला जोहार हे] भिन्नाजगत या भौतिक जगत में दृश्यमान सबो रंग मन ला रंगैया रंगरेज हे, जेमन अपन कला -कोशल ले ये संसार ला अतका रंग-बिरंगी अउ सुंदर मन मोहक रंग दिन हे, कोनो ला कुछ हल्काफिक्का तौ कोनो ला चटख रंग दिन हे, अइसन संसार रूपी बगीचा के सनातन गोसैया परमदेव ला जोहार हे A
ईश गुन जीव मान, कारन अगन प्रान, चोला देव अगन जियैया ला जोहार हे /
जगतिक तक आगी ताप, सोधे जेन जन आप, अमर पदवी के पवैया ला जोहार हे /
परमेश सबो कोती, छाये हे निर्दोष ज्योती, बिद्यादान सुबस्तु देवैया ला जोहार हे /
सब सुख अउ संपत , गउ गज बाज रथ,नाना जग सुख सिरजैया ला जोहार हे /
टीका-परमात्मा अउ जीव के गुन में अग्नि ही परान हे माने परमात्मा प्रकाश आगी रूप में सबो ठाँव विद्यमान रहिथे, अउ जीव भी मानस अग्नि प्रकाश रूप में सदा सबदिन विद्यमान रहिथे] सबो जीव मन के परम अँजोरकरैया परब्रह्म ये आगीरूप में चराचर जगत में सबो ठाँव बिराजमान हे, परम न्यायकरैया परमात्मा सबो जीवधर मन में मानस अग्नि ला जीवंत करैया हे, अइसन परम न्यायकरैया परमात्मा ला जोहार हे, जेन बिद्वान जन भौतिक अगन अउ वोकर ले उत्पन्न ताप ऊर्जा के शोध करथे, वो आविष्कारक वैज्ञानिक मन ला जेन अपन लोक हितकर कारज मन के कारन ये भौतिक जगत में अपन नाम यश रूपी काया ला अमरता देथे, वोला जोहार हे]जेन परमात्मा के निर्दोष ज्योति चारो खूंट बगरे हे, उही बिद्या अउ सबो भौतिक पदारथ मन के देवैया हे वो परम दयालु देवैया परमात्मा ला जोहार हे, सब संपदा ] गउ]बाज] जल थल अउ नभ में चलने वाले रथ] बिमान]यान उवा-उवा आनीबानी के सुख सिरजन करैया गुणीजन ला जोहार हे /
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