शोभामोहन कृष्ण भजन संग्रह के अंश
१
हम तो नइ जावन सहरिया डहरिया,
गँवई मन भाथे हो।
गँवई मन भाथे हो।
करथन गँवइहा मन खेती अउ पाती।
सोना सुररथन धरतीमाई छाती। ।
भुँइया गद हरियर लुगरिया अँचरिया,
गँवई मन भाथे हो।
गँवई मन भाथे हो।।
माटी के घर कुरिया, तुलसी के चौंरा।।
अक्ती हरेली तीजा अउ पोरा।।
भाँठा भुर्री प्रिया तरिया लहरिया,
गँवई मन भाथे हो।।
गँवई मन भाथे हो।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
२
नर तन राम नाम कर खेती।
नर तन राम नाम कर खेती।।
राग बने अउ पाग बने हे।
देख बने तोर भाग बने हे।।
झन कर येती तेती।
नर तन राम नाम कर खेती।
बैगुन लोपा थरहा रोपा।
ये रोपा होथे घर
तोपा। ।
सोन सिल्हो जग रेती।
नर तन राम नाम कर खेती।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
३
रतनपुर हाट के टिकुलिया, लगाय चमकुलिया, चलत भरे पनिया हो।
इचनी बिचनी माला मुँदरिया, पहिर के सुंदरिया, चलत भरे पनिया हो।।
छन छन बजात पैजनिया, साँवर रंग रनिया, चलत भरे पनिया।।
पहिरे करधन पटा पुतरिया, लिखे महुरिया,
चलत भरे पनिया हो।।
पहिरे हे लुगरा लहरिया, सजा सिंगरिया, चलत पनिया हो।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
४
हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।
मइके के हलीभली खबर सुनाबे सुवा।
ददा भाई मेर मोर अरजी लगाबे सुवा।।
आई जावै देखे बर, बूताकाम छोड़ रे।।
हरियर सुगना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।
मोरे बूता करिबे सोन दाना चराहूँ सुवा।
जुग जुग जीबे खाबे, तोर गुन गाहूँ सुवा।
कभू नइ भूलाहूँ मैं तो गुनजस तोर रे।
हरियर सुवना रकत रंग ठोर रे।
लेग दे संदेसिया ला मइके में मोर रे।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
५
वृंदावन के कुंज गलिन भटकौ।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।
लटलट डूमर लटालट मकोइया।
धेनुचरैया किशन कन्हैया ।।
मैं बिरिजबन के गैया चरत टोटकौं।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।
वृंदावन के एक गोसाइन।
श्री राधारानी रउताइन।।
मोर मू़ड़ी ला वोकर चरन पटकौं।
नइ मिलबे कन्हैया फाँसी में लटकौं।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
६
राम लक्ष्मण भरत शत्रुहन, अउ कौशिल्या माई के।
सुमरन करौ बड़ाई के।
दशरथ राउर प्रभु बिन बाउर,
अउ कैकेयी माई के।
सुमरन करौ बड़ाई के।
अवधनगर जन पुरजन परिजन,
अउ सुमित्रा दाई के।
सुमिरन करौं बड़ाई के।।
सुख सुनत गुनत, रिधि-सिधि सुमरत,
आनंदकंद सुखदाई के।
सुमिरन करौं बड़ाई के।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
७
पिया बिना जग सुन्ना।
पिया बिना।।
सुतत नयन देख सपना सजन के।
चरचर ले फुलगे डुहड़ू हर मन के।
जागत बढ़िस दुख
कई गुन्ना।।
पिया बिना जग सुन्ना,
पिया बिना।।
झनकत बैरी धुन कान में मुरलिया।
घाव लगा छाती हाय! चलदिस छलिया।।
दुख धरा सहे बर नावा जुन्ना।
पिया बिना जग सुन्ना,
पिया बिना।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
८
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
राम बिसार झन भाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
झन बिसार सीतामाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर सुखदाई,
सुंदर तन तैं पाके।।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
सबके मना जुईआई,
सुंदर तन तैं पाके।
छोड़ दे अपन पराई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
काट ले भव रोगराई,
सुंदर तन तैं पाके।
छोड़ दे मान बड़ाई,
सुंदर तन तैं पाके।
सुमिरन कर रघुराई, सुंदर तन तैं पाके।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
९
मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।
रिंगीचिंगी मुनगा हे लहसे चुचुटिया।
मोहना के नैना शिकरिया हे राम।
मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।
रुनझुन फरे फूले हे धाने के बाली।
लइकुसही उम्मर मन मतवाली।।
अतलंगहा सजन सँवरिया हे राम।
मिरचा के पाना झरिया हे रामा।
मिरचा के पाना झरिया हे राम।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१०
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।
सावन आवन लागे घाट पाट टोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।
निर्मल जर धार बहै घटा रटाटोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।
गंगा डुबकी लेवै उहि पुनफल जोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।।
पाप ताप संताप के गठरी छोरे।
लहरा हिलोरे, लहरा गंगा हिलोरे।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
११
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
मुड़ीच मुड़ी के माला घेंच ओरमाई हो।।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
देव देबि रूप रंग देख गें पराई।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
रक्सा के रकत में आये हे नहाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
शंकर भुँइया घोंडे छेंके महामाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
शोभामोहन बिनती करै मन लाई हो।
डोला चढ़िस आये देबि कालिकामाई हो।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१२
कोन गाँव रहे बसे रतिहा तैं सुवना रे।
कोन गाँव करेस बसेरा रे।
समुन्दर जिहाज बइठे बिगन अधार सुवा।
उड़िया के जाबे कोन देश रे।
काय चारा चरथस, कती कती बिचरथस।
बोल तो का हे तोर नाव रे।।
कोन पठोये तोला, सुघर दे रंग चोला।
अजगुत तोर सुभाव रे।।
चटक मटक तोरे आँखी पाँखी सुवना रे।।
लाली गुलाली तोरे ओंठ रे।
कोने नाव जपथस, अउ जग खपथस।
अगन मगन लहलोट रे।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१३
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।
रोग जिहाये रोगहा जागत गड़ी।
भोग जिहाये भोगहा जागत गड़ी।।
आखिर दोनों के कुछु आवत नइ हाथ हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।
चोरी नेतत चोरहा जागत गड़ी।
जोग जगाये जोगहा जागत गड़ी।।
नेतघात देखत हे, अटकर लगात हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।
पहट चराय पहटिया जागत गड़ी।
बिरहा बियाकुल तिरिया जागत गड़ी।
जागत उही जेला तो गरज हर जगात हे।
फसर फसर सुतत जग, रतिहा पहात हे।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१४
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहात दे गगरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।
बोहा दे गगरिया, बोहा दे सँवरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।
बना दे गुड़िया, मड़ा दे अधरिया ।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।
गोकुल नगरिया के छैला सँवरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।
मरुवा कोंवर मोरे पतली कमरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।।
भींजै झन झिलमिल अँचरा लहरिया।
कन्हैया मोरे मूड़ में बोहा दे गगरिया।
१५
छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन।
घंटी घँघरा बाजत, दुरिहा ले ठनठन।।
हरियर हरियर चारा चरत हे।
भाँड़ी हुदेनत भसकाये परत हे।।
पुछी टाँग दँउड़त हे रनबन रनबन।
छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन। ।
धरे धरावत ना बाँधे बँधात हे।
भुँकरत हे हुमरत हे, सत्ती कस जात हे।।
गारीगल्ला खावत गली गली जन जन।
छाँद छोरे बछवा बिहरत वृंदावन। ।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१६
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।
सँभर पकर चले दहिया बेचने बर,
गिंजरत गोकुल गाँव हो।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।
ककनी के खनखन, साँटी के छनछन।
जिउरा धँसावत हे बान हो।।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।
झलमल चुँदरिया, पँहुची मुँदरिया।।
साँसा रटत घनश्याम हो।।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।
कनिहा में करधन, अउ सोंटा बेनी घन।
फुँदरी गँथाये फीता डार हो।
बृषभानु के धिया, रटत हे पिया पिया।।
राधारानी वोकर नाव हो।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१७
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।
जमुना के लहरा ठोठके खड़े हे।
ठोठके खड़े हे श्याम, ठोठके खड़े हे।
बंशी में का तोर जादू भरे हे।।
जादू भरे हे श्याम जादू भरे हे।।
मोरपंखी सजाना गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।।
रुखराई मन के डोलत नइ पाना।
बछरू गइया टेंड़े कान कान्हा।।
माथ मकुट खपाना, गजब भइगे।
गजब भइगे हो गजब भइगे।
श्याम बंशी बजाना गजब भइगे।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१८
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।
माथ मटुकिया लटक झुमरिया।
गोड़ भँदइया, मूड़ कुमरिया।।
तोर कान कुंडल बरत हे लकालक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।।
सोनहा करधन कद कोसाही।
पँहुची सजवन साजू बाँही।।
दाँत पाँत आँखी नौरंगी चकाचक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।
अंग अंग सजवन, गरभर माला।
दमकत मुँहरन करत उजाला।
परत नजरिया जीव करथे धकाधक।
श्याम तोर पागा पीतमरी झकाझक।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
१९
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।
अलहन टारे बर।
अमरित झारे बर।।
सत्संग में मन लगाये कर गुँइया।
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।
करम सुधारे बर।
भाग सिंगार बर।।
हरिनाम जिभिया सजाये कर गुँइया
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।
पिरित गढ़ाये बर।
अलख जगाये बर।।
भवाटवी जग ला बिसार कर गुँइया।
हरि चरनन गुन गाये कर गुँइया।
तन ला भुलाये बर।
अंतस ला पाये बर।।
थोर थोर उदिम लगाये कर गुँइया।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
२०
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
नइ मोरे मइके, नइ मोरे ससुरे।
नइ मोरे परिवार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
नइ मोर बाप बबा अउ भइया।
नइ मोरे गोतियार ।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
नइ मोरे संगी नइ मनरंगी।
निचट हवौं निरधार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
नइ मोरे आगू नइ मोरे पाछू।
नइ मोरे रखवार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
नइ मोरे काया नइ मोरे माया।
नइ मोरे संसार।
भवजल नाव परे मझधार।
हरि मोरे जीव रहत तोर भार।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
२१
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
तहीं मोर मइके, तहीं मोर ससुरे।
तहीं मोर परिवार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
तहीं मोर बाप बबा अउ भइया।
तहीं मोर गोतियार ।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
तहीं मोर संगी तहीं मनरंगी।
तहीं मोर भरतार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
तहीं मोर आगू तहीं मोर पाछू।
तहीं मोर रखवार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
तहीं मोरे काया तहीं मोर माया।
तहीं मोर संसार।
हरि मोला करि दे भव ले पार।
हरि मोरे एक तहीच अधार।।
शोभामोहन
फागुन तिहार
फागुन अंधियारी एक्कम
कलाधर छंद
लोभ हे मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाये रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
तामझाम
धाम
घाम
विराम
अकाम
अनाम
अराम
ताम
झीमझाम हे।
गुलाम हे।
घनाक्षरी
१
मोर नाम जपबे अधीन तोर हो जहूँ मैं।
जग दुख दगली ले दिहँव निकाल मैं।
मोला जिनगी बनाबे तार देहूँ चोला तोर,
मोरे नाम साधन हे जगत भुवाल मैं।।
मोर नाम लेवत अपावन पावन होबे,
भागलेख लिखे ला मिटाहूँ तोर भाल मैं।
मही तोर हिरदे बसथौं धुकधुकी बन,
पल-पल छिन-छिन राखथौं खियाल मैं।।
२
चारो कोती छा के
देखौं तोरे मति गति सब,
कीर्तन कर तोर करहूँ उद्धार मैं।
देह के मंगल बर साँस में बसा ले मोला,
नरकबासा ले झट दिहँव उबार मैं।
जेन जेन नता गोता के नार लमाये हस,
सबो में महीच मही हवौं एकसार मैं।
जतका भजबे मोला महूँ तोला भेजहूँ रे,
भजबे तौ बचन ला सकौं नहीं टार मैं।।
शोभामोहन
०८/०५/२०२३
दिन रविवार
रात्रि १२:२४
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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