Thursday, 11 May 2023

(बिहावगीत) बर रूप बखान

(बिहावगीत) बर रूप बखान

बर मूड़ी सतरंग पागा लहरिया,
माथ मउरिया खपाय, हाँ हाँ जूँ।
कद पिंउरी सुघर चटक मटक जरी,
धरहा कटारी ओरमाय, हाँ हाँ जू।
काजर अँजाये दूनो नैना बरत कस,
सरभर अतर छिचाय, हाँ हाँ जू।
मउर के कलगी पवन संग फहरत,
टकत मोती मन भाय, हाँ हाँ जू।
दाँत पाँत दरमीदाना असन दमकत,
मुचुर मुचुर मुस्काय, हाँ हाँ जू।
मउर ले झाँकत दीपदीपात मुँहरन,
दुलही बिहाये बर आय, हाँ हाँ जू।

शोभामोहन
११/०५ /२०२३

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