छत्तीसगढ़ी लोकगीत अभ्यास
दमउ मांदर बाजे,
नाचे जाहूँ कहे आवै लाजे।
चलौ धनी गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर बाजे........
रिगबिग रिगबिग पहिर के नथुनिया,
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
छुनछुन छुनछुन करत के
पैजनिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
खनर खनर चूरी करत सजन सँवरिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
धड़धड़ धड़धड़ करत हे मोरे
छतिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
खेले कूदे नाचे के हे सजन
उमरिया
गुड़ी जाबो करमा नाचे,
दमउ माँदर.................
करमा
टूरी टूरा हाथ कनिहा नाये,
रुखवा करम तरी आये।
मीठ बोली सजन भाये।
नाचे गाये भौं चमकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
गिजिर गिजिर मुचके रिझाये।
मीठ बोली सजन भाये।
आँखीच आँखी में गोठियाये।
मीठ बोली सजन भाये।
संगेसंग कनिहा मटकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
बतरस मया बरसाये।
मीठ बोली सजन भाये।
छनछन चूरी छनकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
झनझन पैजन झनकाये।
मीठ बोली सजन भाये।
नयना मिलै झुझक लजाये।
मीठ बोली सजन भाये।
सुध बुध तन के भुलाये।
मीठ बोली सजन भाये।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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