Thursday, 30 November 2023

दूरदर्शन से प्रसारित रचनाएँ दीपावली ( माहिया छन्द)

दूरदर्शन से प्रसारित रचनाएँ ( माहिया छन्द) 

यह भारत मेरा है,

जिसमें त्यौहारों का
पग पग पर डेरा है।।

वनवासी घर आये,
जगमग दीप चले,
आनंद उत्सव छाये।।

सिय राम लखन भ्राता,
अवधपुरी आये,
हर्षित तीनों माता।।

घर घर रंगोली है,
अनगिन व्यंजन हैं,
और हँसी ठिठोली है।।

राउत नाचा नाचें,
सजधज सड़कों में,
झूमें दोहा बाँचें।।

शुभ दीप जलाते हैं,
हम सब मिलजुलकर,
त्यौहार मनाते हैं।।

सब सजधजकर आये,
फोड फटाकों को,
बच्चे बड़े इतराये।।

छूटी फूलझड़ियाँ हैं,
खुशी मनाने की,
आई शुभ घड़ियाँ हैं।।

त्यौहार निराला है,
लिपे पुते घर हैं,
सर्वत्र उजाला है।।

जय जय लक्ष्मी माता,
तुम ही सुख समृद्धि,
धन वैभव की दाता।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

दीप अनगिन जल रहे हैं।
और तम को छल रहे हैं।।
महल झोपड़ी आज जगमग,
दुख निराशा गल रहे है।।


आया दीपोत्सव त्यौहार
दीपो से जगमग संसार।

धरती झिलमिल प्रकाश।
रंगों से रंगा आकाश।।
खुशियों में डूबा परिवार।।
आया दीपोत्सव त्यौहार।

बच्चे आनंद में डूब।
चलायें फटाके खूब।।
खुशियों की लगी है कतार।
आया दीपोत्सव त्यौहार।।

सजी दीपों की कतार।
लगे द्वारे बंदनवार।।
लक्ष्मीपूजन शुभदिन वार।
आया दीपोत्सव त्यौहार।।


शोभामोहन श्रीवास्तव

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