Thursday, 30 November 2023

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट( आल्हा छन्द)

मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट 



नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।

मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।। 

चुन्दी में छटके जलबुँदियन,मोती चटके असन जनात।

पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।

नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय। 

मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।

गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात। 

चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।

पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल। 

बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,लाली पिंउरी लटकन झूल।। 

मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात। 

काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।

लुगरा-पटुका लटकत फुँदना, रगरग ले मन चैन चुरात।

हवय तिहार मनावत आँखी, दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।

फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात। 

रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन, भुनन भुनन भौंरा मन गात।।

डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।

कन्हिया लटकत करधनिया में, जड़े जवाहर हीरा लाल।।

नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।

ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।

खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।

मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।। 

झनक झनक झन पैजन बाजत, खनन खनन चूरी खनकात। 

धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया, फरर फरर अँचरा फहरात।।

मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।

चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।। 

रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात। 

फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।। 

आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।

पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।। 

रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट। 

रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।। 

शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार। 

मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।। 


शोभामोहन 

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