Thursday, 30 November 2023

रूप बचै न बचै सुघराई मत्तगयंद सवैया

देह खिरै जग घूमत-घामत, रूप बचै न बचै सुघराई।
मान बचै न गुमान बचै सुन,  ज्ञान बचै न बचै चतुराई।
बाप बचै न धिया सुत साजन, मातु बचै न बचै सग भाई।
तेन घड़ी बस एक सहायक, छाहित रूप बचै रघुराई।

शोभामोहन

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