Thursday, 4 January 2024

दुलम बड़ मनुख जनम हर फेर।

दुलम बड़ मनुख जनम हर फेर।


दुलम बड़ मनुख जनम हर फेर।
थकही पौंरी खावत भौंरी, ये दुखगाँव बसेर।
रोबे धोबे खाबे सोबे, हो जाही बड़ बेर।
नत्ता सैना ऐना बैना, उटकट जगत गरेर।
तातारोसी अउ परदोसी, धंधा बड़ अंधेर।
दाई भाई बाप गोसाई, हाँकत जीव सरेर।
डोली ब्यारा टहल तियारा, कर तैं अब मन हेर।।
शोभामोहन हरि गुन गा ले, जाना हे हरि मेर।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

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